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Joshna Chinappa, who equalled the 16 titles of Bhuvaneswari Kumari, receives the trophy from N. Ramachandran

When she reached the semifinals of the women’s event at 12, Joshna Chinappa’s target was to win her first national title before she was 16.

Today, the 32-year-old has already 16 national titles from 18 finals. If you thought that she achieved her target as planned, it would be wrong, as she won her maiden title when she was 14.

Over the years, Joshna has improved to world standards to reach a career-best rank of 10 in 2016, as against her current rank of 14.

“I feel on top of my game,” said Joshna, as she savoured yet another title, on Sunday, when she regrouped her game quickly to suffocate Urwashi Joshi after losing the first game in the final.

Having grown up competing in the domestic circuit and dominating the national championship for nearly 20 years — missing only one edition — Joshna feels at home competing in the premier championship.

“It is my personality. I grew up playing the championship, the CCI and other events. That is why I keep coming back. I want to be the highest,” said Joshna, assuring that she would continue to come back for the national championship in her pursuit to be the sole holder of the national record for the number of titles.

Japan to buy more stealth jets, radar to counter China, Russia

 Japan will accelerate spending on advanced stealth fighters, long-range missiles and other equipment over the next five years to support U.S. forces facing China's military in the Western Pacific, two new government defence papers said.


The plans are the clearest indication yet of Japan's ambition to become a regional power as a military build-up by China and a resurgent Russia puts pressure on its U.S. ally.

“The United States remains the world's most powerful nation, but national rivalries are surfacing and we recognise the importance of the strategic competition with both China and Russia as they challenge the regional order,” said a 10-year defence programme outline approved by Prime Minister Shinzo Abe's government on Tuesday.

The United States, followed by China, North Korea and Russia, are the countries that most influenced Japan's latest military thinking, the paper said.

China, the world's second biggest economy, is deploying more ships and aircraft to patrol waters near Japan, while North Korea has yet to fulfil a pledge to dismantle its nuclear and missile programmes.

Russia, which continues to probe Japanese air defences, said on Monday it had built new barracks for troops on a northern island it captured from Japan at the end of World War Two.

1984 anti Sikh riots : पढ़िए- दिल्ली HC ने क्यों किया द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र

 सिख विरोधी दंगा मामले में हाई कोर्ट ने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जांच एजेंसी पर गंभीर सवाल खड़े किए। अदालत ने दंगे को नरसंहार और मानवता के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसके दोषियों के सामने कानून लाचार बना रहा। मामले में एफआइआर दर्ज करने से लेकर जांच में पुलिस पूरी तरह से विफल रही। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ ने तमाम सबूत और गवाह पेश किए, जिसमें वारदात में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार समेत अन्य दोषियों के शामिल होने की न सिर्फ दलील दी गई, बल्कि अभियोजन पक्ष ने उसे साबित भी किया। अापराधिक साजिश रचने में सज्जन की भूमिका से लेकर जांच में पुलिस की नाकामी पर अदालत ने टिप्पणी की।


अदालत ने कहा कि यह एक अप्रत्याशित मामला है, जिसमें भारी दबाव के चलते कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ रिपोर्ट और बयान दर्ज करना नामुमकिन हो गया था। जिस मामले में रिपोर्ट दर्ज भी हुई, उसकी जांच या तो सही ढंग से नहीं की गई या फिर आरोप पत्र में तार्किक नतीजे में नहीं लाया गया।

अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस दंगा शाखा ने मामले से जुड़े गवाहों के न तो बयान दर्ज किए और न ही सही जांच की। दंगाइयों ने दो तरह काम किया। एक ने पुरुष सिखों पर हमला किया और दूसरे ग्रुप ने उनके घरों को जलाया। राज नगर गुरुद्वारे पर किया गया हमला इसी का एक अंग था। पुलिस और दिल्ली पुलिस दंगा शाखा ने घटना में अपने पति व सास-ससुर को खोने वाली गवाह का कभी बयान ही दर्ज नहीं किया।

आपराधिक साजिश रचने में भी सज्जन की भूमिका
अदालत ने कहा कि एक नवंबर, 1984 की घटना आपराधिक साजिश का हिस्सा थी। 31 अक्टूबर को सिखों पर बंदूक, केरोसिन और अन्य हथियारों से हमला हुआ और यह बिना पूर्व योजना के संभव नहीं था। अदालत ने राजनगर निवासी गवाह का हवाला देते हुए कहा कि दंगाई बेखौफ सिखों को निशाना बना रहे थे और जान बचाने के लिए कई सिखों ने केश काट लिए थे। सुनवाई के दौरान सीबीआइ के वकील आरएस चीमा ने कहा था कि रिपोर्ट के अनुसार पुलिस लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रही थी, लेकिन किसी ने थाने जाकर दंगा होने जैसी बात रिपोर्ट नहीं की। सिर्फ इतना जिक्र था कि कोई घटना हुई थी और पुलिस गुरुद्वारे पर गई थी। पीठ ने फैसले में माना कि दंगे की साजिश रची गई थी और यह साबित हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए नरसंहार का दिया हवाला
सिख विरोधी दंगे को लेकर हाई कोर्ट ने कहा कि यह एक अलग तरीके का अप्रत्याशित मामला है और अदालतों को ऐसे मामलों को अलग दृष्टि से देखने की जरूरत है। पीठ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए नरसंहार के मामलों का भी हवाला दिया। अदालत ने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेना प्राधिकरण ने इस तरह के मामलों को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था। रोम इंटरनेशनल क्रिमनल कोर्ट ने भी हत्या एवं दुष्कर्म जैसे मामलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।

देशभर में कई जगहों पर हुआ था नरसंहार
अदालत ने फैसले में दिल्ली व पंजाब में हुए सिख विरोधी दंगों के साथ अन्य नरसंहार का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि इसी तरह का नरसंहार 1993 में मुंबई में, 2002 में गुजरात, 2008 में ओडिशा और 2013 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भी हुआ था, जो अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हुआ संगीन अपराध है। इस तरह के मामलों में राजनीतिक कलाकारों को कानून के रखवालों का ही संरक्षण रहता है। मानवता के खिलाफ अपराध या नरसंहार घरेलू अपराध का हिस्सा है। इसे तुरंत दुरुस्त करने की जरूरत है। हाई कोर्ट ने कहा, सज्जन के खिलाफ या तो रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई और यदि कहीं हुई तो अंजाम तक नहीं पहुंची

भारतीय का दुबई में धमाल, 9 साल की उम्र में बनाया एप; 13 में बना सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक

 बच्चों को अगर सही माहौल और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं। ये बात दुबई में रहने वाले केरल 13 वर्षीय आदित्यन पर सटीक बैठती है। उम्र के उस पड़ाव पर जब, बच्चे खिलौनों से खेलते हैं आदित्यन बिजनेस कर रहे हैं। आदित्यन आज महज 13 साल की उम्र में सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट कंपनी का मालिक है। कंप्यूटर से आदित्यन का लगाव 5 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था।


आदित्यन ने चार साल पहले महज 9 साल की उम्र में अपना पहला मोबाइल ऐप्लिकेशन बना कर सबको चौंका दिया था। वह 13 साल की उम्र तक आते-आते सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट कंपनी का मालिक बन चुका है। हम बात कर रहे हैं दुबई में रहने वाले केरल के छात्र आदित्यन राजेश की जिनकी कंपनी अब लोगों के लिए वेबसाइट बनाती है। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आदित्यन ने महज 5 साल की उम्र में कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू किया था। तकनीक के इस जादूगर ने 13 साल की उम्र में अपनी कंपनी 'ट्रिनेट सॉल्यूशंस' की शुरुआत की है। ट्रिनेट के कुल तीन कर्मचारी हैं जो आदित्यन के स्कूल के दोस्त और खुद स्कूल स्टूडेंट हैं।

आदित्यन बताते हैं, 'मुझे एक स्थापित कंपनी बनाने का मालिक बनने के लिए 18 की उम्र को पार करना होगा। हालांकि हम अभी से एक कंपनी के तौर पर काम करने लगे हैं। हमने अब तक 12 से ज्यादा क्लाइंट्स के साथ काम किया है और उन्हें अपनी डिजाइन और कोडिंग सर्विस पूरी तरह मुफ्त में दी हैं।'

आदित्यन ने दुबई के अंग्रेजी दैनिक को बताया कि उसका जन्म केरल के थिरूविला में हुआ था और जब 5 साल का था तो परिवार यहां आ गया था। पिता ने उन्होंने सबसे पहले जिस वेबसाइट से रूबरू कराया, वो बीबीसी टाइपिंग थी। यह वेबसाइट बच्चों के लिए ही बनाई गई। इसी पर आदित्यन ने टाइपिंग करना सीखा था। उन्होंने बताया, 'मैं जब छह साल का था, तब काफी समय यूट्यूब पर कार्टून और स्पेलिंग गेम्स देखने में बिताता था। तभी से मेरा कंप्यूटर और तकनीक के प्रति झुकाव शुरू हो गया था।'

गूगल को टक्कर देने के लिए बनाया 'आशीर्वाद'
आदित्यन ने बताया कि जब वह सिर्फ 9 साल के थे, तब उन्होंने एक आशीर्वाद नाम का ब्राउजर बनाया था। ये वेब ब्राउजर गूगल क्रॉम की तरह ही काम करता था, जब इसमें फीचर्स काफी कम थे। लेकिन यह एप कभी लाइव नहीं हो सका। इसके पीछे का कारण बताते हुए आदित्यन कहते हैं कि गूगल प्ले स्टोर पर कोई एप अपलोड करने के लिए 25 डॉलर फीस लगती थी, इसलिए हम इसे अपलोड नहीं कर पाए। लेकिन इसके बाद आदित्यन ने खूब मेहनत की और आज एक अलग मुकाम हासिल कर लिया है।

सीएम बनते ही बोले कमलनाथ, यूपी-बिहार नहीं मध्यप्रदेश के युवाओं का नौकरी पर पहला हक

 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक काम पहले दिन से ही विवादों की भेट चढ़ता नजर आ रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने पहले दिन उद्योगों के लिए नई छूट नीति का ऐलान किया है। इस नीति के तहत प्रदेश के उद्योगों में 70 फ़ीसद रोजगार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिए जाएंगे। यानि मध्यप्रदेश में अब ऐसे ही उद्योगों को छूट मिलेगी जो कि 70 फीसद रोजगार स्थानीय लोगों को देंगे।


कमलनाथ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, 'हमारी छूट देने वाली नीति उन उद्योगों के लिए होगी, जहां 70 फ़ीसदी रोज़गार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से लोग मध्य प्रदेश आते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं मिल पाती है। मैंने इसी से संबंधित फाइल को मंज़ूरी दे दी है।'

कमलनाथ ने कहा कि यह कदम उठाने के पीछे वजह है स्थानीय लोगों के लिए नौकरी के मौके को ध्यान में रखना। गौरतलब है कि कमलनाथ का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था।

कर्जमाफी का वादा पूरा, चार गारमेंट पार्क बनाने को मंजूरी
सीएम की कुर्सी संभालने के कुछ ही समय बाद ही कमलनाथ ने किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। चुनाव के दौरान सभा में राहुल गांधी ने यह वादा किया था कि मप्र में कांग्रेस का सीएम बनते ही 10 दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाएगा।

नासा के हब्बल टेलीस्कोप से हुई तेजी से नष्ट हो रहे ग्रह की पहचान

 आकाश में ऐसे अनगिनत तारे और ग्रह मौजूद हैं, जो अपने रहस्यों की वजह से वैज्ञानिकों के कौतूहल का कारण बने हुए हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक एक-एक कर इनके रहस्यों पर से पर्दा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इससे उन्हें धरती व अन्य ग्रहों की उत्पत्ति के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकेगी। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने अंतरिक्ष में एक ऐसे ग्रह की खोज की है, जिसका वायुमंडल तेजी से वाष्पित होकर नष्ट हो रहा है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि वाष्पीकरण से ग्रहों का द्रव्यमान कम हो जाता है। ऐसे में यदि उस ग्रह का वायुमंडल इसी गति से वाष्पित होता रहा तो वह आने वाले कुछ अरब सालों में पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। नेप्च्यून (वरुण) के आकार वाला जीजे 347-बी नामक यह ग्रह पृथ्वी से 96 प्रकाशवर्ष दूर है और कर्क तारा समूह में मौजूद लाल तारे का चक्कर लगा रहा है।

डिजिटल क्रांति ने मीडिया और अखबारों को और विस्तार दिया है : पीएम मोदी

 पीएम मोदी ने कहा कि हमें खुद से सवाल पूछना चाहिए कि आखिर पिछले 67 साल से पिछड़े क्यों थे और 4 साल में ही अभूतपूर्व प्रगति कैसे हो गई। उन्होंने कहा कि आज आंकड़े भी प्रगति की गवाही दे रहे हैं। पीएम ने कहा कि हम आज न्यू इंडिया के संकल्प से सिद्धि की ओर अग्रसर हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने हीरक जयंती पर जागरण परिवार को बधाई दी और कहा कि नए भारत के, नए सपनों को साकार करने में दैनिक जागरण की, पूरे मीडिया जगत की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

बैडमिंटन / दुनिया के शीर्ष आठ खिलाड़ियों का बैडमिंटन टूर्नामेंट कल से चीन में

 दुनिया के शीर्ष आठ बैडमिंटन खिलाड़ियों का टूर्नामेंट वर्ल्ड टूर फाइनल्स बुधवार से होना है। यह बैडमिंटन में सत्र का आखिरी बड़ा टूर्नामेंट है। इसमें भारत की ओर से पीवी सिंधु और समीर वर्मा ने क्वालिफाई किया है। सिंधु दुबई में हुए पिछले सीजन में रनरअप रहीं थीं, जबकि समीर ने पहली बार क्वालिफाई किया है। सिंधु को छठी और समीर को सातवीं वरीयता मिली है। टूर्नामेंट की प्राइज मनी 15 लाख डॉलर (10.87 करोड़ रुपए) है।


सिंधु लगातार तीसरे साल टूर्नामेंट में उतरेंगी
ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट सिंधु को महिला सिंगल्स में कठिन ड्रॉ मिला है। उनके ग्रुप ए में वर्ल्ड नंबर 1 ताइवान की ताई जू यिंग, डिफेंडिंग चैम्पियन जापान की अकाने यामागुची और अमेरिका की झेंग बेईवेन हैं। सिंधु ने लगातार तीसरे साल टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई किया है।

सिंधु का यामागुची के खिलाफ करियर रिकॉर्ड 9-4 है। हालांकि, यामागुची ने इस सीजन में 5 में से 4 बार सिंधु को हराया है। वहीं, ताई जू यिंग ने 23 साल की सिंधु को पिछले लगातार छह मैचों में हराया है, जबकि सिंधु और झेंग का करियर रिकॉर्ड 3-3 है।

सैयद मोदी टूर्नामेंट जीतकर क्वालिफाई करने वाले समीर के ग्रुप में वर्ल्ड नंबर 1 जापान के केंटो मोमोटा, इंडोनेशिया के टॉमी सुगियार्तो और थाईलैंड के केंटापोन वेंगचारोन हैं। हर ग्रुप से टॉप-2 खिलाड़ी सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगे |

अफगान शांति प्रक्रिया में भारत की अहम भूमिका: पाकिस्तान

  संभवत: पहली बार पाकिस्तान ने माना है कि अफगानिस्तान में भारत के भी हित हैं और जंग से जर्जर इस मुल्क में शांति प्रक्रिया में भारत की अहम भूमिका है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को नेशनल असेंबली में कहा, 'पाकिस्तान अकेले अफगानिस्तान में अमन नहीं ला सकता। यह क्षेत्र के देशों की साझा जिम्मेदारी है।'


पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में कुरैशी के हवाले से कहा गया है, 'प्रधानमंत्री इमरान खान कह चुके हैं कि अफगानिस्तान में सेना के जरिये शांति स्थापित नहीं की जा सकती। अमेरिका, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ तालिबान भी वार्ता से इस मसले का हल चाहता है। अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों और भागीदारों से बातचीत जारी है। अफगानिस्तान में भारत के भी अपने हित हैं। इसलिए शांति के लिए भारत का सहयोग भी जरूरी है।'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में अफगान शांति वार्ता में मदद के लिए पाकिस्तान को पत्र लिखा था। अमेरिका का मानना है कि पाकिस्तान तालिबान को बातचीत की टेबल पर लाकर 17 वर्षो से युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने में मदद कर सकता है।

जयंती विशेष: अतीत की दास्तां समेटे खड़ी यह कुटिया, यहां के कण-कण में देशरत्‍न की यादें

 देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म भले ही सिवान के जीरादेई में हुआ, मगर पटना से भी उनका गहरा लगाव रहा। राष्ट्रपति बनने से पहले और बाद में, दोनों ही कालखंड में उनके जीवन का लंबा समय कुर्जी के नजदीक स्थित बिहार विद्यापीठ में गुजरा। इसी में 28 फरवरी 1963 की रात उनका निधन हो गया। अतीत की दास्तां को समेटे खड़ी है इस कुटिया के कण-कण में उनकी स्मृतियां जीवंत हैं।


बिहार विद्यापीठ में राजेंद्र स्मृति संग्रहालय में आज भी उनकी यादें संजो कर रखी हुई हैं। यहां राजेंद्र बाबू का चरखा है, कपड़े हैं, छड़ी हैं, चश्मे हैं और सबसे खास उन्हें मिला 'भारत रत्न' है।

बिहार विद्यापीठ परिसर के एक खपरैल मकान में था आवास
पटना में हाईकोर्ट की स्थापना के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1916 के मार्च में पटना आए। बाद में महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलनों में शिरकत की। वे वर्ष 1921 से 1946 तक बिहार विद्यापीठ परिसर में एक खपरैल मकान में रहा करते थे। यह जमीन मौलाना मजहरूल हक की थी, जिसे उन्होंने स्वाधीनता संग्राम के दौरान कांग्रेस को दे दी थी।

राष्ट्रपति का दूसरा कार्यकाल खत्म होने के बाद जब वे 14 मई 1962 को दिल्ली से पटना आए तो अपने पुराने खपरैल मकान में ही ठहरे, जहां आजादी के पहले रहा करते थे। इस भवन में 28 फरवरी 1963 की रात बाबू राजेंद्र प्रसाद का निधन हो गया।

World Disability Day: शरीर में एक अयोग्यता के साथ अनेक विशेष योग्यताओं का समावेश

  दिव्यांग यानी विभिन्न दिव्यताओं को दर्शाता एक स्वरूप, शरीर में एक अयोग्यता के साथ अनेक विशेष योग्यताओं का समावेश जिनमें अद्भुत क्षमताएं होती हैं जिनके सैकड़ों उदाहरण सहज उल्लेखित हैं। समाज के अन्य वर्गों की तुलना में सरकार और राजनीति से कहीं अधिक अपेक्षाकृत बहुसंख्यक पीड़ित दिव्यांग वर्ग सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी की बाट सदियों से जोह रहा है। आजादी के बाद देश में संविधान सभा द्वारा भारतीय कानून को अधिसूचित करने के बाद जहां सरकार ने अपना कार्य करना प्रारंभ कर दिया वहीं दूसरी ओर देश की एक बड़ी आबादी वाला ‘नि:शक्त जन’ तब भी संसदीय दृष्टि से वंचित रह गया और वही स्थिति कमोबेश आज भी बनी हुई है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब हमें एक नए सम्मानजनक शब्द ‘दिव्यांग’ के संबोधन से अलंकृत कर हमारी मौजूदगी का आभास करा सकते हैं तो हमें कानूनी अधिकारों से भी अभिसिंचित कर हमारे सर्व धर्म एवं जातीय युक्त दिव्यांग वर्ग के प्रति अपना सकारात्मक संदेश देते हुए राजनीतिक भागीदारी क्यों नही दे सकते हैं? जब यह सरकार बहुप्रतिक्षित दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम-2016 को भारतीय सदन से पास करा सकती है तो संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दिव्यांग जनों को राजनीतिक भागीदारी के अंतर्गत सभी सदनों में अन्य आरक्षण प्राप्त करने वाले वर्गों की भांति ‘राजनीतिक भागीदारी’ क्यों नहीं तय करतीं?

समूह-20 बैठक में पीएम मोदी की कूटनीतिक सक्रियता ने लगाए शिखर सम्मेलन में चार चांद

 विदेश दौरे पर समय का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को पहले से ही काफी जाना जाता है, लेकिन समूह-20 (जी-ट्वेंटी) देशों की बैठक के दौरान उन्होंने अर्जेटीना में जो सक्रियता दिखाई है वह एक रिकार्ड से कम नहीं है।


राजधानी ब्यूनस आयर्स पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद एक अंतरराष्ट्रीय योग कार्यक्रम में हिस्सा ले कर मोदी ने जो कूटनीतिक सिलसिला शुरु किया वह उनकी वहां से रवानगी के कुछ मिनट पहले तक चला है। इस दौरान मोदी ने जी-ट्वेंटी देशों की कई बैठकों में हिस्सा लेने के अलावा 11 देशों के राष्ट्राध्यक्षों से आधिकारिक मुलाकातों के अलावा ब्रिक्स देशों, जापान-भारत-अमेरिका (जय) देशों के संगठन और रूस-भारत-चीन (आरआइसी) जैसे संगठनों की शिखर वार्ता में हिस्सा लिया।

दक्षिण अमेरिका से लेकर जापान, यूरोप से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक में भारतीय कूटनीति की समीक्षा
पीएम मोदी ने अपनी यात्रा के अंतिम दिन आठ देशों के सरकारों के प्रमुखों से द्विपक्षीय वार्ता की है। इन सभी देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता का चुनाव विदेश मंत्रालय ने भारत की कूटनीतिक नफा-नुकसान को देखते हुए किया था। हर मुलाकात का अलग से एजेंडा तैयार था जिसमें द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा के साथ ही भविष्य के लक्ष्यों का साफ तौर पर उल्लेख था। पीएम मोदी ने इन मुलाकातों के जरिए दक्षिण अमेरिका से लेकर जापान तक और यूरोप से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक में भारत की कूटनीतिक हितों की एक तरह से समीक्षा की है।

अब सेंसर, रडार और इंफ्रारेड कैमरे की पकड़ में नहीं आएंगे हमारे सैनिक

 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के विशेषज्ञों ने हीट रेडिएशन को रोकन में सक्षम मेटामैटीरियल्स से खास तरह के कपड़े और ऐसी वस्तुएं तैयार की हैं, जिन्हें पहनने के बाद रात में सैनिकों की मौजूदगी किसी भी उपकरण की पकड़ में नहीं आएगी। 1987 में आई सुपरहिट फिल्म 'मिस्टर इंडिया' सभी को याद होगी, जिसमें हीरो के पास घड़ीनुमा एक गैजेट था। इसे पहनकर वह अदृश्य हो देश के दुश्मनों को सबक सिखाता था। इस तकनीक की सिर्फ एक काट थी, इंफ्रारेड कैमरे और लाल रंग की रोशनी। इनके जरिए ही उसे देखा जा सकता था।


आईआईटी द्वारा विकसित विशेष कपड़ों और गैजेट्स की मदद से हमारे सैनिक आरएफ सेंसर, ग्राउंड रडार, एडवांस बैटल फील्ड रडार और इंफ्रारेड कैमरों को चकमा दे सकेंगे। दरअसल अभी अंधेरे में व्यक्ति या वस्तुएं हीट रेडिएशन (वस्तु या शरीर के तापमान) के सहारे पकड़ में आती हैं। इससे एडवांस इंफ्रारेड कैमरे घने अंधेरे में भी किसी व्यक्ति को खोज निकालते हैं।

यह तकनीक सभी देश अपनी-अपनी सीमाओं पर इस्तेमाल करते हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) आईआईटी द्वारा सेना के लिए तैयार कई वस्तुओं की टेस्टिंग कर रहा है। कपड़ों पर लगाए जाने वाली पैचनुमा डिवाइस, जिसे मेटामैटीरियल्स से बनाया गया है, परीक्षण में खरी उतरी है। इसे हरी झंडी दे दी गई है, जिसके बाद संस्थान ने इसे पेटेंट कराने के लिए आवेदन कर दिया है।

फिजिक्स विभाग के प्रो.अनंत रामाकृष्णा और उनकी टीम ने दो साल की मेहनत के बाद यह तकनीक ईजाद की है। एडवांस तकनीक विकसित करने के लिए भी प्रोजेक्ट चल रहा है। मेटामैटेरियल्स से खास तरह का स्टिकर बनाया जा रहा है। इसे सेना के टैंक, लड़ाकू विमान और ड्रोन आदि पर लगाया जा सकेगा। जिसके बाद वे दुश्मन को चकमा दे सकेंगे। इन पर पानी, हवा या गर्मी का असर नहीं होगा और अल्ट्रावॉयलेट और इंफ्रारेड किरणों का असर काफी कम रहेगा।

अंतरिक्ष / दुनियाभर के लोगों को मिल सके फ्री वाई-फाई, इसके लिए चीनी कंपनी अगले साल लॉन्च करेगी सैटेलाइट

 चीनी कंपनी लिंकश्योर ने दुनिया की पहली ऐसी सैटेलाइट पेश की है, जिसकी मदद से दुनियाभर के लोगों को फ्री वाई-फाई की सुविधा मिल सकेगी। कंपनी ने बताया कि इस सैटेलाइट को अगले साल चीन के जिऊक्वॉन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया जाएगा और 2020 तक अंतरिक्ष में इस तरह की 10 सैटेलाइट पहुंचाई जाएंगी। वहीं कंपनी का लक्ष्य 2026 तक ऐसी 272 सैटेलाइट लॉन्च करने का है।


लिंकश्योर की सीईओ वांग जिंग्याइंग ने बताया कि उनकी कंपनी इस प्रोजेक्ट पर 3 बिलियन युआन (करीब 30 अरब रुपए) का इन्वेस्ट करने की तैयारी कर रही है।

जहां नेटवर्क नहीं, वहां भी मिलेगा फ्री वाई-फाई : कंपनी के मुताबिक, कई जगहों पर टेलीकॉम नेटवर्क लगाना नामुमकीन है, जिस वजह से ऐसी जगहों पर लोग इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। लेकिन इस सैटेलाइट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद लोग अपने मोबाइल फोन की मदद से फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल उस जगह भी कर सकते हैं, जहां टेलीकॉम नेटवर्क की पहुंच नहीं है।

फ्री इंटरनेट पर कई कंपनियां कर रहीं तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैटेलाइट की मदद से फ्री इंटरनेट एक्सेस देने के लिए गूगल, स्पेस एक्स, वन वेब और टेलीसैट जैसी कई कंपनियां तैयारी कर रहीं हैं।
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अनुमान लगाया है कि 2045 तक दुनिया की स्पेस इंडस्ट्री का मार्केट 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

वर्ल्ड चेस चैम्पियनशिप / तीन हफ्ते के खेल के बाद भी चैम्पियन नहीं मिला, पहली बार लगातार 12 मैच ड्रॉ रहे

 वर्ल्ड चेस चैम्पियनशिप तीन बार के डिफेंडिंग चैम्पियन नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन और अमेरिका के फैबियानो कारुआना के बीच खेली जा रही है। 12 मैच की चैम्पियनशिप के सभी मैच ड्रॉ रहे। टूर्नामेंट में ऐसा पहली बार हुआ, जब लगातार 12 मैच ड्रॉ रहे। तीन हफ्ते में 50 से ज्यादा घंटे तक खेलने के बाद भी चैम्पियन नहीं मिला। अब रिजल्ट के लिए टाईब्रेकर खेला जाएगा।


टाईब्रेकर मैच कांच के साउंडप्रूफ स्टेज पर होंगे। इसमें रैपिड गेम्स होंगे। अगर इससे भी विजेता नहीं मिला, तो सडन-डेथ से फैसला होगा। विनर को 4.38 करोड़ रुपए और रनरअप को 3.58 करोड़ रुपए की प्राइज मनी मिलेगी।

कारुआना के जीतने पर अमेरिका को 26 साल बाद मिलेगा चैम्पियन
26 साल के कारुआना अगर जीते तो वे बॉबी फिशर के बाद चैम्पियन बनने वाले पहले अमेरिकी बन जाएंगे। फिशर 1972 में चैम्पियन बने थे। वहीं, 27 साल के कार्लसन 19 साल की उम्र से दुनिया के टॉप खिलाड़ियों में शामिल हैं। वे चेस के छोटे फॉर्मेट में ज्यादा आक्रामक होते हैं। हालांकि, कार्लसन ने 12वीं बाजी में कारुआना के सामने ड्रॉ का प्रस्ताव रखकर कई कमेंटेटरों को चौंका दिया था, क्योंकि एक्सपर्ट्स और कंप्यूटर प्रोग्राम का मानना था कि वे कारुआना से बेहतर स्थिति में थे।

ड्रॉ रहने पर काले मोहरों वाला खिलाड़ी चैम्पियन माना जाएगा
अब दोनों खिलाड़ियों के बीच चार रैपिड मुकाबले खेले जाएंगे। यह 25-25 मिनट के होंगे और हर चाल में 10 सेकंड बढ़ेंगे। अगर चारों रैपिड मुकाबलों के बाद भी नतीजा नहीं आया, तो फिर 5-5 मिनट के दो ब्लिट्ज मुकाबले खेले जाएंगे। अगर, फिर भी नतीजा नहीं निकला तो आखिरी मुकाबला होगा, जिसमें काले मोहरों से खेल रहे खिलाड़ी को चार मिनट जबकि सफेद मोहरों से खेल रहे खिलाड़ी को पांच मिनट दिए जाएंगे। ड्रॉ होने की स्थिति में काले मोहरों से खेल रहे खिलाड़ी को विजेता घोषित कर दिया जाएगा। रैपिड और ब्लिट्ज में कार्लसन दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी हैं। जबकि कारुआना रैपिड में वर्ल्ड नंबर 8 और ब्लिट्ज में वर्ल्ड नंबर 13 हैं।

शतरंज / मैग्नस कार्लसन लगातार चौथी बार शतरंज के वर्ल्ड चैम्पियन बने

 नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन लगातार चौथी बार शतरंज के वर्ल्ड चैम्पियन बन गए हैं। 27 साल के कार्लसन ने 26 साल के अमेरिकी चैलेंजर फाबियो कारुआना को टाइब्रेकर में 3-0 से हराया। दोनों खिलाड़ियों के बीच क्लासिकल फॉर्मेट के सभी 12 मुकाबले ड्रॉ रहे थे। इसके बाद टाइब्रेकर खेला गया। इसमें कार्लसन ने लगातार तीन मुकाबले अपने नाम कर वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीत ली।


कार्लसन इससे पहले 2013, 2014 और 2016 में भी चैम्पियन बने थे। दो बार उन्होंने चैम्पियनशिप मैच में भारत के विश्वनाथन आनंद को हराया था। कारुआना 1972 के बाद पहले अमेरिकन वर्ल्ड चैम्पियन बनने की कोशिश में थे। 1972 में अमेरिका के बॉबी फिशर ने सोवियत संघ के बोरिस स्पास्की को हराकर खिताब जीता था। मैच के बार कारुआना ने कहा, ‘यह मेरे लिए बुरा दिन था। मैं चुनौती भी नहीं दे पाया।’

फुटबॉल / मेसी चैंपियंस लीग में एक क्लब से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी

 बार्सिलोना के लियोनेल मेसी चैम्पियंस लीग फुटबॉल में एक क्लब की ओर से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने बुधवार रात पीएसवी इंडोवेन के खिलाफ एक गोल कर यह रिकॉर्ड बनाया। अब उनके चैम्पियंस लीग में 128 मैचों में 106 गोल हो गए हैं। उन्होंने क्रिस्टियानो रोनाल्डो का 105 गोल का रिकॉर्ड तोड़ा। रोनाल्डो ने रियल मैड्रिड की ओर से इतने गोल किए थे।


चैम्पियंस लीग में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड रोनाल्डो के नाम है। उन्होंने 155 मैचों में 121 गोल किए हैं। मेसी के गोल की मदद से बार्सिलोना ने ग्रुप मैच में नीदरलैंड के क्लब पीएसवी इंडोवेन को 2-1 से हराया। मेसी ने 61वें और गेरार्डपिक ने 70वें मिनट में गोल किए, जबकि इंडोवेन की ओर से एकमात्र गोल डी जोंग ने 82वें मिनट में गोल किया।

गुडन्यूज / दुरुस्त हो रही है ओजोन परत, अंटार्कटिका पर आईआईटी खड़गपुर की रिसर्च ने भी की पुष्टि

 सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (परबैंगनी) रेडिएशन से बचाने वाली ओजोन की परत में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। यह धीरे-धीरे खुद को रिपेयर कर रही है। दुनिया के आधे उत्तरी हिस्से में ओजोन की पर्त 2030 तक खुद को रिपेयर कर लेगी। यह रिपोर्ट अमेरिका ने जारी की है। खास बात है कि अंटार्कटिका पर ओजोन परत सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति में थी यहां पर भी सुधार देखा जा रहा है। आईआईटी खड़गपुर ने भी अपनी हालिया रिसर्च में इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने 1979 से लेकर 2017 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें सामने आया कि अंटार्कटिका पर मौजूद ओजोन परत में 1987 में सबसे ज्यादा नुकसान देखा गया था। 2001 से 2017 तक परत में नुकसान का स्तर कम हुआ है। रिसर्च के मुताबिक परिणामों में अलग-अलग मौसम का डाटा शामिल किया गया है।


नासा वैज्ञानिक पॉल न्यूमैन के मुताबिक, अगर ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व बढ़ते रहे तो इसके खतरनाक नतीजे होंगे। नासा की मुताबिक, धरती से 7-25 मील ऊपर ओजोन परत है। यह पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की नुकसान पहुंचाने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकने का काम करती है। जो स्किन कैंसर, मोतियाबिंद का कारण बनने के साथ शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता और पौधों को नुकसान पहुंचाती हैं। वायुमंडल की ऊपरी सतह कुदरती तौर पर बनी ओजोन की परत को अच्छा माना जाता है।

सफल रहा 196 देशों का मॉन्ट्रियल प्रोटोकाल
वैज्ञानिकों ने 1970 में पहली बार ओजाेन की पतली होती परत की पहचान की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि इसका कारण रेफ्रिजरेटर और स्प्रे में मौजूद क्लोरोफ्लोरो कार्बन है। ओजोन लेयर में लगातार क्षति देखते हुए 1980 में 196 देशों ने मिलकर एक मसौदा तैयार किया। इसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकाल कहा गया। जिसका मकसद दुनियाभर में क्लोरोफ्लोरो कार्बन का स्तर कम करना था। कई कंपनियों ने क्लोरोफ्लोरो कार्बन फ्री प्रोडक्ट बनाए और यह प्रयोग काफी कामयाब रहा।

यूनाइटेड नेशन एन्वायरमेंट प्रोग्राम के प्रमुख एरिक सोल्हिम के अनुसार, करीब 30 साल इस प्रोटोकॉल के कारण ओजोन परत से जुड़े सकारात्मक परिणाम सामने आए। पर्यावरण का तापमान बढ़ाने वाली गैसें जिसे हाइड्रोफ्लोरोकार्बन के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें भी कम करने की पहल की गई थी। ये गैसें रेफ्रिजरेटर, एयरकंडीशनर और कारों में पाई जाती हैं।

जी-20 / योग दुनिया को स्वास्थ्य और शांति के लिए भारत का एक तोहफा: मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को 13वें जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स पहुंचे। यहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सऊदी किंग मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। मोदी ने 'योगा फॉर पीस' कार्यक्रम में कहा कि जब इंसान के दिमाग में शांति होगी तभी परिवार, समाज, देश और दुनिया में शांति होगी। उन्होंने कहा कि योग दुनिया को स्वास्थ्य और शांति के लिए भारत का दिया एक तोहफा है।

मोदी ने कहा कि आज के कार्यक्रम को योग फॉर पीस नाम दिया गया। कार्यक्रम का इससे बेहतर नाम खोजना मुश्किल है। योग बेहतर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद करता है। मोदी ने बताया कि जी-20 सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक भगोड़े जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

ट्रम्प और आबे से भी मुलाकात करेंगे
शुक्रवार को मोदी और सऊदी के किंग मोहम्मद बिन सलमान के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। इस दौरान सऊदी अरब ने भरोसा दिलाया है कि वह भारत की आधारभूत संरचना में निवेश करेगा। मोदी आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से भी मुलाकात करेंगे। सम्मेलन के अलावा मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ त्रिपक्षीय बैठक करेंगे।
ओपनिंग सेरेमनी में हिस्सा नहीं ले पाईं मर्केल
जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल विमान में तकनीकी खराबी के चलते जी-20 शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं ले सकीं। काफी देर तक तक हवा में रहने के बाद उनके विमान की जर्मनी के कोलोन शहर में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।

मैजिशियन और एक्टर रिकी जे का 72 की उम्र में निधन

 अपनी जादुई ट्रिक्स के लिए मशहूर रिकी जे का शनिवार को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। रिकी ने कई फिल्मों और टीवी शो में भी काम किया था। जे के मैनेजर विन्सटन सिमोन ने बताया कि जे की मौत नैचुरल कारणों से हुई है। सिमोन ने जे को याद करते हुए कहा, "वो अपने आप में एक अलग शख्सियत के मालिक थे। हम उनके जैसा व्यक्तित्व अब कभी नहीं देख सकेंगे।"


जे का पूरा नाम रिचर्ड जे पोटाश था। जादू की दुनिया से उनका परिचय कराने का श्रेय उनके दादा को जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जे ने अपना पहला शो 4 साल की उम्र में किया था। मैजिक सीखने के बाद वे न्यूयॉर्क में रॉक बैंड्स की ओपनिंग में परफार्म करने लगे। 'द ऐस्केप आर्टिस्ट' फिल्म से जे ने फिल्मों में काम शुरु किया था।

इसके बाद जे हॉउस ऑफ गेम्स, द स्पेनिश प्रिजनर, थिंग्स चेंज, रेडबेल्ट और स्टेट एंड मैन जैसी कई फिल्मों में नज़र आए थे। 1997 में बनी जेम्स बॉन्ड फिल्म 'टुमॉरो नेवर डाइस' में जे ने सायबर टेरेरिस्ट का किरदार निभाया था। द प्रेस्टीज फिल्म में उन्होंने मिल्टन द मैजिशियन के रूप में नज़र आए थे। इस फिल्म के लिए जे ने ही लीड कैरेक्टर निभा रहे ह्यूग जैकमैन और क्रिश्चियन बेल को मैजिक ट्रिक्स सिखाई थी। पॉल थॉमस एंडरसन की फिल्म 'मैग्नोलिया' में उन्होंने नैरेशन भी दिया था।

जे ने मैजिक सबजेक्ट पर 'कार्ड्स एज वेपन' और 'डाइस: डिसेप्शन, फेट एंड रोटन लक' जैसी लगभग 10 किताबें लिखी है। जे की जिंदगी पर एक डॉक्युमेंट्री भी बन चुकी है। 2012 में रिलीज हुई इस डॉक्युमेंट्री का नाम था "डिसेप्टिव प्रैक्टिस : द मिस्ट्रीज एंड मेंटर्स ऑफ रिकी जे।"

डिसेप्टिव प्रैक्टिसेज कंपनी में जे के पार्टनर माइकल वीबर ने जे के निधन पर अपनी भावनाएं एक ट्वीट के जरिए व्यक्त की। माइकल ने लिखा, "मुझे यह बताते हुए बेहद दुख हो रहा है कि मेरे अद्भुत मित्र, गुरु और सहयोगी हमारे बीच से जा चुके हैं।"

इनोवेशन / एमआईटी ने बिना ईंधन के उड़ने वाला दुनिया का पहला विमान बनाया, इससे न प्रदूषण होगा और न शोर

 अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( एमआईटी) के इंजीनियरों ने पहली बार ऐसा विमान बनाया है जो बिना ईंधन और बैटरी के इस्तेमाल के उडे़गा। इसे उड़ाने के लिए प्रोपेलर, टर्बाइन ब्लेड या पंखों की बजाय आयन (आवेशित कणों) प्रवाह का इस्तेमाल हुआ है। सिर्फ सवा दो किलो वजन का यह विमान सबसे हल्का बताया जा रहा है। इसे बनाने वाली टीम का कहना है कि, ' इस तरह की इनोवेटिव आइडिया से आयनों से हवा को धकेलने वाले सिस्टम (आयन विंड प्रपल्शन)' का इस्तेमाल कर बिना शोर वाले ड्रोन उड़ाने में भी मदद मिलेगी। यह रिसर्च नेचर हॉबी क्राफ्ट जर्नल में प्रकाशित की गई।


तकनीकी रूप से है काफी साधारण
एमआईटी के एसोसिएट प्रो. स्टीवन बैरेट के मुताबिक, यह ऐसा पहला विमान है जिसके प्रपल्शन सिस्टम में किसी भी तरह के घूमने वाले पुर्जे इस्तेमाल नहीं किए गए है। यह सफलता हवाई विमानों के लिए नई संभावनाआें को जन्म देगी। यह तकनीकी रूप से काफी साधारण है और इसमें ईधन का इस्तेमाल न होने के कारण प्रदूषण भी नहीं फैलता। इसके विंड प्रपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके हायब्रिड पैसेंजर प्लेन और बड़े विमानों को तैयार किया जा सकेगा।

सवा दो किलो है वजन
बैरेट ने करीब नौ साल पहले बिना मूविंग पार्ट वाले प्रपल्शन सिस्टम पर काम करना शुरू किया। सालों की मेहनत के बाद इसे तैयार किया जा सका। इसका वजन करीब सवा दो किलो और पंखों की लम्बाई 5 मीटर है। इसमें काफी बारीक और मोटे दोनों तरह के तारों का इस्तेमाल किया गया है। बारीक तार पॉजीटिव और मोटे तार निगेटिव इलेक्ट्रोड की तरह काम करते हैं। लिथियम-पॉलिमर बैट्री लगाई गई है। इसे खासतौर पर ऐसी पावर सप्लाई के लिए तैयार किया गया है जो कन्वर्टर की मदद से 40 हजार वोल्ट पावर सप्लाई कर सके।

टेलीविजन सीरीज ‘स्टार ट्रैक’ से मिला आइडिया
प्रो. स्टीवन के मुताबिक, आयन प्लेन का आइडिया एक फिल्म और मशहूर टीवी सीरीज 'स्टार ट्रैक' से आया जिसे मैं बचपन में बहुत देखता था। इसमें लोग बिना किसी मेहनत के आराम से छोटे प्लेन उड़ाते थे और उसमें किसी तरह के मूविंग पार्ट नहीं थे। इसके कारण प्लेन बिना शोर के उड़ता था। इसकी कहानी ने मुझे प्लेन तैयार करने के लिए प्रेरित किया। फिल्म देखकर ये समझ आया कि भविष्य में ऐसा प्लेन बने जिसमें प्रोपेलर और टरबाइन न हों। बिल्कुल स्टार ट्रेक के शटल की तरह जिसमें एक नीली बत्ती हो और बिना शोर उड़ सके।

बैडमिंटन / समीर लगातार 2 साल सैयद मोदी टूर्नामेंट जीतने वाले पहले खिलाड़ी

 

भारत के समीर वर्मा ने सैयद मोदी बैडमिंटन टूर्नामेंट में पुरुष सिंगल्स का खिताब जीत लिया। वे लगातार दो साल इस टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। वैसे, पिछले चार साल से पुरुष सिंगल्स का खिताब किसी भारतीय खिलाड़ी के नाम ही रहा है। समीर के पहले 2016 में किदांबी श्रीकांत और 2015 में पी कश्यप चैम्पियन बने थे।

तीसरी सीड समीर ने फाइनल में चीन के लू ग्वांगजू को 16-21, 21-19, 21-14 से हराया। यह उनका साल का तीसरा खिताब है। इससे पहले, उन्होंने हैदराबाद ओपन और स्विस ओपन भी जीते थे। समीर ने एक घंटे 10 मिनट में जीत दर्ज की। इस बीच, महिला सिंगल्स में दूसरी सीड साइना नेहवाल को हार का सामना करना पड़ा।

साइना नेहवाल चीनी खिलाड़ी से हारीं
दो बार की पूर्व चैम्पियन साइना को फाइनल में चौथी सीड चीन की हान युई ने 21-18, 21-8 से हराया। पुरुष डबल्स में सात्विकसाईराज रंकीरेड्‌डी-चिराग शेट्‌टी और महिला डबल्स में अश्विनी पोनप्पा-एन सिक्की रेड्‌डी की भारतीय जोड़ियां फाइनल में हार गईं।

भविष्‍य के विमानों में नहीं होंगे इंजन और प्रोपेलर, बदल जाएगी पूरी थ्‍योरी

 

हममें से कई लोगों ने विमान में सफर जरूर किया होगा। लिहाजा विमान के अंदर होने वाले इंजन और उसके प्रोपेलर के शोर से भी वह अंजान नहीं होंगे। कई बार यह आवाज काफी परेशान भी करती है। लेकिन भविष्‍य में इस तरह की आवाजें बीते कल की बात हो सकती हैं। दरअसल, मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीज के विशेषज्ञों की एक टीम ने ऐसी तकनीक का इजाद किया है जिससे आज की कल्पना को साकार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की टीम ने इस तरह के एक विमान का ट्रायल भी किया है। हालांकि यह एक बड़े विमान का एक प्रोटोटाइप था। इस मॉडल को 4.8 सेकंड में 55 मीटर तक उड़ा गया। इससे पहले कभी भी इस तकनीक के जरिए विमान को उड़ाने की कोशिश नहीं की गई।

कल्‍पना की इस उड़ान को साकार बनाने का जिम्‍मा स्‍टीवन बैरेट ने लिया है। इस विमान का डिजाइन भी इन्‍होंने ही बनाया है। उनका कहना है कि भविष्य के विमान में प्रोपेलर और टरबाइन जैसी चीजें नहीं होगी। यह विमान हॉलीवुड की सीरीज स्‍टारट्रेक के विमानों की तरह होंगे, जो आसानी से हवा में उड़ान भर सकेंगे। यही वजह है कि यह विमान आज उड़ान भरने वाले विमानों से बिल्‍कुल अलग होंगे। इतना ही नहीं यह अपनी उड़ान लायक एनर्जी को खुद प्रोड्यूस करेंगे और इसका ही उपयोग अन्‍य चीजों में करेंगे। प्रोटोटाइप की टेस्टिंग में विशेषज्ञों को इसमें काफी हद तक सफलता भी हासिल हो गई है। इतना ही नहीं इस प्रोटोटाइप विमान में कोई भी प्रोपेलर या सोलर पैनल नहीं लगाया गया। इसके अलावा विमान में कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो हिलती है।

इस विमान में इंजन की जगह दो मुख्य भाग हैं। विमान के आगे कई इलेक्‍ट्रॉड लगे हैं जोकि काफी हल्के तारों से बने हैं। यह इलेक्‍ट्रॉड काफी करंट पैदा करते हैं। इसकी मदद से नाइट्रोजन के कण पैदा होते हैं जिन्हें आयन कहते हैं। वहीं विमान के पीछे भी 20 हजार वोल्ट का करंट पैदा करते हैं और दोनों से निकलने वाले करंट की वजह से आयोनिक विंड विमान को उपर उठाने में सफल हो जाती है। 1990 में इस तकनीक का पहली बार इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसे परिणाम तक नहीं पहुंचाया जा सका था।

यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि विमानन तकनीक को लेकर वर्तमान में काफी बदलाव हो रहे हैं। इसका एक जीता जागता उदाहरण सौर-ऊर्जा इंजन से युक्त सोलर इम्पल्स है। इस विमान ने अब तक का सबसे लंबा सफर तय किया है। यह इस विमान के लिये बड़ी उपलब्धि है।

जीएम सरसों एक बार फिर से चर्चा में, जानें क्यों हो रहा है इसका विरोध

 

पंजाब में जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) सरसों एक बार फिर चर्चा में है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में गुपचुप तरीके से जीएम सरसों का परीक्षण किए जाने को लेकर काफी चर्चाएं हैं। हालांकि अभी इसके परीक्षण की पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन सरसों सत्याग्रह समिति के साथ ही जीएम फसलों का विरोध करने वाली संस्था खेती विरासत मिशन ने इस मामले में मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। मिशन के कार्यकारी निदेशक उमेंद्र दत्त ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर इसके परीक्षण की मंजूरी न देने की मांग की है। दूसरी तरफ सरसों सत्याग्रह समिति की ओर से चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में जीएम सरसों पर पीपल डायलॉग करवाने का फैसला किया गया है।

उमेंद्र दत्त का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सुनने को मिल रहा है कि केंद्र की जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (जीईएसी) के प्रस्ताव पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की ओर से जीएम सरसों का परीक्षण किया जा सकता है। वे ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि जीएम बीज गैर कुदरती है और यह सेहत के साथ-साथ धरती और वातावरण का भी बड़ा नुकसान करते हैैं। भारत में जीएम सरसों को लाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि पहले से ही देश में सरसों की बेहतरीन वैरायटी है। जीएम सरसों हमारी परंपरागत सरसों की वैरायटी को खत्म कर देगी। इससे हर्बीसाइड (खर-पतवार नष्ट करने वाली दवा) का प्रयोग बढ़ेगा। अगर सरकार तर्क दे रही है कि देश में खाद्य तेलों की कमी है तो यह सरकार की नीतियों की वजह से है। सरकार किसानों को बढ़ावा दे तो देश में खाद्य तेलों की कमी दूर हो जाएगी।

अब रोबोट को होगा छूने का अहसास

 

दुनिया भर के वैज्ञानिक रोबोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से विकास करने में निरंतर प्रयासरत हैं। वे ऐसे रोबोट तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जो हमारे रोजमर्रा के कई कार्यों में सहयोगी बन सकें, जिससे हमारा जीवन आसान हो सके। इसी के तहत वैज्ञानिक लगातार रोबोट को नई खूबियों से लैस करते जा रहे हैं। हाल ही में ऐसी तकनीक को विकसित करने का दावा किया गया है, जिससे भावी रोबोट्स में सूंघने की शक्ति कुत्तों से भी तेज होगी। अब एक कदम आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिकों ने रोबोट्स में छूने का एहसास विकसित करने का मार्ग भी तलाश लिया है।

दरअसल, स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे इलेक्ट्रॉनिक दस्ताने तैयार कर लिए हैं, जिनमें सेंसर लगे हुए हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि इन दस्तानों की मदद से भविष्य में तैयार होने वाले रोबोट के हाथ तैयार किए जा सकेंगे, जिससे वे इंसानों की तरह छूने का अहसास कर सकेंगे।

साइंस रोबोटिक्स नामक जर्नल में इस शोध को प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि जांच के दौरान सेंसर वाले इन दस्तानों ने प्रयोगशाला में शानदार परिणाम दिए। इसने नाजुक बेरी और पिंगपांग बॉल को अच्छे से संभाला और वो भी बिना कस के दबाए।

अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनान बाओ के मुताबिक, इस तकनीक ने हमें रोशनी की एक किरण दिखाई है। इसकी मदद से एक दिन हम ऐसा रोबोट विकसित कर सकेंगे, जिसमें किसी चीज को छूने, अहसास करने और संभालने की क्षमता इंसानों की तरह होगी।

बनाया जाएगा मानव त्वचा के जैसा
वैज्ञानिक इस दिशा में काम कर रहे हैं कि इस दस्ताने को हूबहू मानव त्वचा की तरह तैयार किया जा सके। इसके लिए वह इसमें चीजों को छूने का अहसास कराने में सक्षम बना रहे हैं। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही वे अपना शोध पूरा कर लेंगे और भविष्य में ऐसे रोबोट तैयार किए जा सकेंगे, जिनके हाथों में इंसानी हाथों की खूबियां होंगी।

भारत के पास है विश्व का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन, PM मोदी भी रह चुके हैं सदस्य

 दुनिया के कई देशों में सभी महिलाओं और पुरुष नागरिकों के लिए कुछ समय की सैन्य सेवा अनिवार्य है। इसमें यूक्रेन, लिथुआनिया, फिनलैंड, नॉर्वे, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इस्राइल, उत्तर कोरिया, ताइवान, ईरान, अल्जीरिया, तुर्की, रूस व चीन आदि शामिल हैं। भारत में भी अनिवार्य सैन्य सेवाओं को लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन है। इन्हें न केवल सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि इसके बदले इन युवाओं को कई तरह के लाभ भी दिए जाते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस वर्दीधारी युवा संगठन के सदस्य रह चुके हैं।


यहां हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की। इसकी स्थापना 16 अप्रैल 1948 को हुई थी। प्रत्येक वर्ष नवंबर माह के चौथे रविवार को एनसीसी का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्यालय दिल्ली में है। एनसीसी एक भारतीय सैन्य कैडेट कोर है, जिसमें स्वैच्छिक आधार पर स्कूल व कॉलेज के छात्रों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है।

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2018 में NCC को और अधिक सशक्त बनाने की बात कही थी। साफ है कि सरकार युवाओं में एनसीसी को और लोकप्रिय बनाना चाहती है। कर्नल गोपाल गुरुनाथ बेवूर को 31 मार्च 1948 को राष्ट्रीय कैडेट कोर का पहला निदेशक बनाया गया। इसके वर्तमान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल बीएस सहरावत हैं। ‘एकता और अनुशासन’ एनसीसी का आदर्श वाक्य है। देश के युवाओं को संवारने में लगे हुए सेना, नौसेना और वायु सेना का एक त्रिकोणीय सेवा संगठन है। इसीलिए NCC के झंडे में तीन रंग होते हैं जो तीनों सेनाओं को प्रदर्शित करते हैं। लाल आर्मी के लिए, गहरा नीला नेवी के लिए और हल्का नीला वायुसेना के लिए। झंडे की तरह ही एनसीसी की वर्दी भी तीन रंग की होती है। खाकी वर्दी थलसेना का प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स पहनते हैं। हल्की नीली वर्दी वायुसेना का प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स पहनते हैं। सफेद वर्दी नौसेना का प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स पहनते हैं।

जानें- देश में डाक टिकट का इतिहास

 देश्ा में डाक टिकट का इतिहास उतना ही पुराना है, जितनी कि देश की आजादी। डाक टिकटों की विकास यात्रा भी बेहद दिलचस्प है। आज हम आपको बताएंगे कि देश का पहला डाक टिकट कब जारी हुआ। इसके साथ डाक टिकट से जुड़े कुछ अनछुए पहलूओं पर भी प्रकाश डालेंगे।


भारतीय ध्वज का चित्र और जय हिंद
भारत का पहला डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी हुआ। इसका उपयोग केवल देश के अंदर डाक भेजने के लिए किया गया। इस पर भारतीय ध्वज का चित्र और जय हिंद लिखा हुआ है। आजाद भारत का पहला डाक टिकट साढ़े तीन आना राशि यानी 14 पैसा था। हालांकि, 15 अगस्त, 1947 को नेहरू जी ने आजादी के बाद लाल किले से अपने पहले भाषण का समापन जय हिंद से किया। उस वक्त डाकघरों को एक सुचना भेजी गई कि नए डाक टिकट आने तक, डाक टिकट चाहे अंग्रेजी सम्राट जॉर्ज की ही मुखाकृति की उपयोग में आए, लेकिन उस पर मुहर 'जय हिन्द' की लगाई जाए।

टिकट का दाम 'आना' से 'रुपये' तक
आजाद भारत का पहले डाक टिकट का उपयोग केवल देश के अंदर डाक भेजने के लिए किया गया। इस पर भारतीय ध्वज का चित्र लगा हुआ था। डाक टिकट की यह राशि 1947 तक 'आना' में ही रही, जबकि रुपए की कीमत 'आना' की जगह बदल कर '100 नए पैसे' में कर दी गई। वैसे 1964 में पैसे के साथ जुड़ा 'नया' शब्द भी हटा दिया गया। 1947 में एक रुपया '100 पैसे' का नहीं बल्कि '64 पैसे' यानि 16 आने का होता था और इकन्नी, चवन्नी और अठन्नी का ही प्रचलन था। देश मे भेजे जाने वाली डाक के लिए पहले डाक टिकट पर अशोक के राष्ट्रीय चिन्ह का चित्र मुद्रित किया गया। इसकी कीमत डेढ़ आना थी। इसी तरह विदेश में भेजे जाने वाले पत्रो के लिए पहले डाक टिकट पर डीसी चार विमान का चित्र बना हुआ था, उसकी राशि बारह आना यानि 48 पैसे की थी।

डाक टिकटों में महात्मा गांधी सबसे आगे
में महात्मा गांधी ऐसे पहले भारतीय थे, जिन पर डाक टिकट जारी किया गया था। देश में अब तक जितनी भी हस्तियों पर डाक टिकट जारी किए गए हैं, उनमें से सबसे ज्यादा टिकट महात्मा गांधी के नाम पर ही जारी हुए थे। भारत में अब तक कई लोगों के नाम पर डाक टिकट जारी हो चुके हैं। इसमें से कुछ डाक टिकट प्रचलन में नहीं आए। उन्हें केवल सम्मान स्वरूप प्रकाशित किया गया है।

तेंदुलकर पहले जीवित जिन पर डाक टिकट जारी
पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट में योगदान को देखते हुए उन पर एक टिकट जारी किया गया। वह देश के पहले ऐसे जीवित व्यक्ति है, जिन पर 14 नवंबर, 2013 को डाक टिकट जारी हुआ। 1947 में महात्मा गांधी के जीवित रहते उन पर डाक टिकट जारी की तैयारी थी, लेकिन किसी ने कहा टिकट आजादी के जश्न पर 15 अगस्त 1948 को जारी हो। गांधी की 30 जनवरी 1948 को मृत्यु हो गई।

थुंबा से हुई थी भारत के अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत, बैलगाड़ी से पहुंचे रॉकेट के कलपुर्जे

 भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।


विक्रम साराभाई ने चुना था थुंबा
विक्रम साराभाई ने जब थुंबा को भारत के पहले राकेट प्रक्षेपण के लिए चुना तो इस चर्च के बिशप ने वहां के ईसाई मछुआरों को साराभाई की मदद के लिए तैयार किया। यही नहीं इस चर्च में राकेट प्रक्षेपण के शुरूआती काम हुए। वहां बैठकें हुआ करती थीं। आज इस चर्च को स्पेस म्यूजियक में बदल दिया गया है। शायद दुनिया का यह अकेला चर्च है जो इस तरह के शैक्षणिक कार्य के लिए समर्पित हो गया है। जब थुम्बा में पहला राकेट लांच किया गया तब उस समय केरल विधानसभा का सत्र चल रहा था। थोड़ी देर के लिए सत्र रोक दिया गया और सबकी नज़र लांच पर टिक गई। उसमें भारत के ग्यारवहें राष्ट्रपति डाक्टर ए पी जे कलाम भी युवा वैज्ञानिक के रूप में शामिल थे।

टॉयलेट को बनाया डाटा रिसीविंग सेंटर
इसके करीब 12 वर्ष बाद भारत ने अपने पहले प्रायोगिक उपग्रह आर्यभट्ट के साथ अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया जिसे 1975 में रूसी रॉकेट पर रवाना किया गया। उस वक्त भी इस तरह के प्रक्षेपण के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी थी और उस वक्त बैंगलोर के एक शौचालय को डाटा प्राप्त करने के केंद्र में तब्दील कर दिया गया था। थुंबा से सफर शुरू करने के बाद भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब काफी आगे निकल चुकी है। भारत ने चंद्रमा संबंधी रिसर्च शुरू करने, उपग्रह बनाने, अन्य देशों के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने और मंगल तक पहुंचने में सफलता अर्जित कर दुनियाभर में अपनी पहचान बना ली है।

पहली भारतीय महिला जिसने 124 साल पहले चुना डॉक्टरी पेशा, आज हुआ था जन्म

 भारत की पहली महिला चिकित्सक रुक्मा बाई राऊत का जन्म 1864 में आज ही के दिन मुंबई में हुआ था। ब्रिटिश उपनिवेश के दौरान भारत में जब महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर भी जागरूक नहीं थीं तब उन्होंने डॉक्टरी के पेशे में प्रवेश कर एक मिसाल कायम की।


1894 में वह भारत की पहली महिला डॉक्टर बनीं। वह एक ऐतिहासिक कानूनी मसले के केंद्र में भी रहीं जिसके परिणामस्वरूप आज ऐज ऑफ कॉन्सेंट एक्ट 1891 कानून यानी दो वयस्कों के बीच शादी करने की वैधानिक उम्र तय की गई।

पिता से मिली प्रेरणा
रुक्मा बाई की मां का नाम जयंती बाई था। 15 साल की उम्र में रुक्मा बाई का जन्म हुआ। 17 साल की उम्र में जयंती बाई विधवा हो गईं, जिसके बाद उन्होंने सखाराम अर्जुन से दूसरी शादी की जो मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर और समाज सुधारक थे। रुक्मा बाई की शिक्षा में उनके पिता का काफी योगदान रहा।

महिलाओं के हक में बना कानून
इसके बाद 19 मार्च 1891 में ब्रिटिश भारत में ऐज ऑफ कॉन्सेंट एक्ट 1891 कानून बनाया गया, जिसमें शारीरिक संबंधों के लिए शादीशुदा और गैर शादीशुदा महिलाओं की सहमति की उम्र 10 से बढ़ाकर 12 साल कर दी गई थी।

बाल विवाह को दी चुनौती
निजी और पेशेवर जीवन में हर चुनौती को स्वीकार करने वाली रुक्मा बाई का विवाह 11 साल की उम्र में ही आठ साल बड़े भीकाजी से हो गया था। शादी के बाद वह अपने माता-पिता के साथ रहती थीं। 1884 में भीकाजी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में पति का पत्नी के ऊपर वैवाहिक अधिकार का हवाला देते हुए याचिका दायर की जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें पति के साथ रहने या जेल जाने का आदेश दिया। रुक्मा बाई ने तर्क दिया कि उन्हें उस विवाह में रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो तब हुआ जब वह इसके लिए सहमति देने में असमर्थ थीं। इस तर्क ने बाल विवाह और महिलाओं के अधिकारों पर लोगों का ध्यान खींचा।

Musical fest off to cheery start in Chennai

 

The 14th edition of The Hindu November Fest launched on Wednesday at the Taj Coromandel hotel in Chennai with a concert by Chandana Bala Kalyan.

This year, the festival will take place in three cities – Chennai, Bengaluru and Hyderabad.

Welcoming the audience, Mukund Padmanabhan, Editor, The Hindu, said that from its birth in 2005, the festival has attempted to introduce new forms of music to people.

“Over the last 14 years, we have privileged the unusual over the familiar, experimentation over repetition and novelty over iron-cast genre,” he said.

In her concert, Chandana Bala Kalyan melded genres such as Carnatic, Sufi, Qawwali and jazz with an ease that reflected her musical versatility. She was accompanied by Naveneet Sundar on the keys and M.T. Aditya Srinivasan on the tabla.

In Chennai, the November Fest will kick off with a concert featuring sitar exponent Ustad Shujaat Khan on Thursday. Three acts will also travel to Bengaluru and Hyderabad. They are a collaborative performance by Bombay Jayashri Ramnath and Abhishek Raghuram, an evening featuring Chennai-based Staccato and IndoSoul, and music from Bollywood by Rekha Bhardwaj from Mumbai.

भारतीय वैज्ञानिक अब रोबोट्स को सिखा रहे हैं काम करना, दल में विदेशी भी हैं शामिल

रोबोटिक्स के क्षेत्र में दुनिया भर के वैज्ञानिक नए प्रयोगों में लगे हुए हैं। वे ऐसे रोबोट विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनसे हमारे कई काम आसान हो सकें। इसके लिए सबसे जरूरी है रोबोट में जल्द सीखने की क्षमता विकसित करना। इस दिशा में वैज्ञानिकों ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है।

दरअसल, वैज्ञानिक वर्तमान में दो ऐसे फ्रेमवक्र्स पर काम कर रहे हैं, जिनसे रोबोट किसी टास्क को इंसानों से जल्द सीख सकेंगे। उदाहरण के तौर पर हम जिस तरह से किसी सामान को अपने हाथों से उठाते हैं, अब रोबोट हमारे जरिये इस टास्क को तेज गति और आसानी से सीख सकेंगे। अहम बात यह है कि इस पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के दल में एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी के छात्र अजय मंडलेकर कहते हैं, हमने एक रोबोटर्क नाम का फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसकी मदद से लोग स्मार्टफोन और ब्राउजर का प्रयोग कर रोबोट को रीयल टाइम में किसी टास्क के बारे में निर्देश दे सकेंगे। वहीं, इसके अलावा एक और फ्रेमवर्क तैयार किया गाय है, जिसका नाम सुररीयल है। इसे तैयार करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि यह फ्रेमवर्क रोबोट के सीखने की गति को बढ़ाने में सक्षम है। इतना ही नहीं इस फ्रेमवर्क की मदद से रोबोट को एक बार में कई कार्य बताए जा सकते हैं, जिसे वह आसानी से सीख सकता है।

कलम के इस बाल सिपाही ने 11 साल की उम्र में लिख डाली 60 किताबें

 किताबों से दोस्ती का सबक सीखने की उम्र में 11 वर्षीय मृगेंद्र 60 किताबें लिख चुके हैं। सभी किताबें प्रकाशित भी हुईं। कलम के इस बाल सिपाही ने हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं पर अपनी समृद्ध लेखनी से साहित्य सर्जना की है। चार अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ ही सैकड़ों सम्मान मिल चुके हैं। मौजूदा समय में चार विदेशी विभूतियों की आत्मकथा लिखने में मशगूल हैं। फैजाबाद, उप्र निवासी मृगेंद्र राज का ये सृजनात्मक सफर जिज्ञासा से भरा है।


कक्षा छह के विद्यार्थी मृगेंद्र की मां डॉ. शक्ति पांडेय असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। पिता राजेश पांडेय केन डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। शक्ति ने बताया कि बचपन से ही मृगेंद्र का साहित्य में रुझान रहा। तीन साल की उम्र में स्वरचित कविताएं सुनाना शुरू किया। लिखने का शौक समय के साथ बढ़ता गया। 2014 में पहला काव्य संग्रह ‘उद्भव’ आया। फिर अयोध्या-फैजाबाद में दंगा भड़का। मन की व्यथा को शब्दों में उतार ‘उगती खुशियां’ उपन्यास लिखा। उसके बाद प्रकृति की मर्म गाथा के साथ ही बायोग्राफी लिखने का भी सिलसिला शुरू हो गया, जो अब भी जारी है।

रोड टू ओलिंपिक / गीतिका और अनिता का वापसी का ऐलान, दंगल क्वीन ने अपने नाम किया गोल्ड मेडल

 रोड टू ओलिंपिक के लिए पहली सीढ़ी के रूप में हुई राज्य स्तरीय सीनियर कुश्ती चैंपियनशिप के पहले दिन गीतिका जाखड़ व अनिता ने वापसी का ऐलान किया तो दूसरा दिन दंगल क्वीन गीता फोगाट के नाम रहा। गीता ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। फोगाट ने घोषणा की वह ओलंपिक मेडल जीतने के बाद ही कुश्ती छोड़ेंगी।


देश को कुश्ती में पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाली साक्षी मलिक ने कहा कि बेशक यह साल अभी तक कैसा भी गया हो, लेकिन इसका समापन वह गोल्ड के साथ करना चाहेंगी। पहलवान सरिता मोर ने भी अपना वजन कंफर्म करते हुए बताया कि वह 59 किलाे में चुनाैती पेश करेंगी। वहीं पुरुष वर्ग में बात करें तो विश्व के नंबर एक पहलवान बने बजरंग पुनिया ने सीनियर नेशनल में नहीं खेलने का फैसला किया है। दूसरी तरफ एशियाड में करारी हार से बेरंग हुए लगातार दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार के भविष्य पर अभी भी सवाल बरकरार है।

गीता ने कहा-62 किलो में चुनौती दूंगी: बकौल गीता फोगाट मैं कुश्ती से ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकती। ओलंपिक खेल चुकी हूं, लेकिन मेडल न मिलना एक अधूरापन सा है उसी अधूरेपन को मेडल जीतकर पूरा करने के लिए अपने घुटने एवं कलाई में चोट से फिट होने के बाद उसी राज्य स्तर से वापसी कि जहां से चैंपियन बनकर राष्ट्रमंडल खेलों का गोल्ड मेडल जीने का सफर तय किया था। अब फिट हूं और लय में भी हूं। 62 किलोग्राम वजन वर्ग में ही चुनौती दूंगी, सामने फिर चाहे कोई पहलवान हो।

विश्व महिला मुक्केबाजी / दिल्ली की जहरीली हवा के कारण खिलाड़ियों को सांस लेने में परेशानी हो रही

 राजधानी दिल्ली में 15 दिसंबर से एआईबीए वर्ल्ड चैम्पियनशिप होनी है। इसमें भाग लेने के लिए दुनिया भर की महिला मुक्केबाज यहां आई हुईं हैं। इनमें से कुछ पर यहां की जहरीली हवा का बुरा असर पड़ा है। उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही है। हालांकि, अपने आतिथ्य के लिए मशहूर भारतीयों की मेजबानी से विदेशी खिलाड़ी काफी खुश नजर आ रहे हैं।


मुक्केबाजों ने कहा- ऐसी हवा में अभ्यास करना भी मुश्किल
2014 में 57 किग्रा भार वर्ग में वर्ल्ड चैम्पियन रहीं बुल्गारिया की स्टैनिमिरा पेट्रोवा ने बताया, 'हम अच्छा नहीं महसूस कर रहे हैं। यहां की हवा दूसरी कहीं भी जगह से खराब है। हमे सांस लेने में थोड़ी परेशानी हो रही है। इस तरह की हवा में अभ्यास करना बहुत मुश्किल है।'

यूरोपियन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकीं अल्बानिया की ऐजी निमानी भी पेट्रोवा से सहमत दिखीं। उन्होंने कहा, 'मैं पहली बार भारत आई हूं। ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि यह शहर थोड़ा और साफ किया जा सकता है, लेकिन यहां के लोग बहुत अच्छे हैं।'

ऐजी निमानी ने 2016 रियो ओलिंपिक में 51 किग्रा भार वर्ग के क्वालिफायर में पांच बार की वर्ल्ड चैम्पियन भारत की मैरीकॉम को हरा दिया था। निमानी स्वीकारती हैं कि उन्हें सांस लेने में कठिनाई एक मुद्दा है, लेकिन चैम्पियनशिप के लिए पहले से ही यहां पहुंचने के कारण वे इससे तालमेल बैठा लेंगी।

उन्होंने कहा, 'सांस लेने में थोड़ी परेशानी है। ईमानदारी से कहूं तो इसलिए मैं यहां एक सप्ताह पहले आ गई थी, ताकि अपनी बाउट के लिए यहां के वातावरण से तालमेल बैठा सकूं।'

2016 वर्ल्ड चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वालीं स्टोयका पेट्रोवा ने बताया कि हवा की क्वालिटी का बाउट पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह सभी मुक्केबाज इसी हवा में सांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता इससे (हवा की गुणवत्ता) कोई समस्या होगी।'

बता दें कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाए जाने से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की हवा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली के दिन लोगों के पटाखे चलाने से मना किया था, ताकि स्थिति और बदतर न हो जाए।

INS Virat to be converted into museum, tourism hub

 Decommissioned aircraft carrier INS Virat will be converted into a museum along with allied tourism activities, including a luxury hotel, cafeteria, scuba diving and other adventure sports.

The proposal was passed in the state cabinet on Thursday. INS Virat was decommissioned on March 6, 2017 and the Western Naval Command had asked several coastal states whether they were interested in turning her into a monument.

An officer from the state said, “The activities to be integrated with the ship have not been finalised and the design of the project could change. We have plans to have a luxury hotel and residential accommodation, but this will be done by bidders But the activities on the ship will be allowed with pre-conditioning of maintaining its dignity,” said an official from the ports department.
The state-appointed under chief secretary will fine tune the proposal by deliberating issues with the Naval officials. The preliminary proposal expects the viability gap funding of Rs 250 crore and also an advance to be paid to the bidder in form of debt with a low interest rate.
The state had also planned to convert INS Vikrant into a war museum. After many promises, the state backed out and the Navy scrapped her.

पेरिस मास्टर्स / खाचनोव ने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की, फाइनल में जोकोविच को हराया

 रूस के कारेन खाचनोव ने पेरिस मास्टर्स टेनिस टूर्नामेंट का खिताब जीता। गैरवरीय खाचनोव ने फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त सर्बिया के नोवाक जोकोविच को 7-5, 6-4 से हराया। खाचानोव की यह करियर की सबसे बड़ी जीत है। उन्होंने एक घंटे 37 मिनट में फाइनल मुकाबला जीता। जोकोविच सबसे ज्यादा चार बार यह टूर्नामेंट जीतने वाले खिलाड़ी थे।


खाचनोव ने पहली बार मास्टर्स खिताब जीता
खाचनोव इस साल पहली बार मास्टर्स खिताब जीतने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। इस साल अमेरिका के जॉन इस्नर ने मियामी ओपन और अर्जेंटीना के जुआन मार्टिन डेल पोत्रो ने इंडियन वेल्स के रूप में अपना-अपना पहला मास्टर्स खिताब जीता था।

हालांकि, इस हार के बाद भी जोकोविच स्पेन के राफेल नडाल को पीछे छोड़कर सोमवार को जारी वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप पर पहुंच जाएंगे। वहीं, खाचनोव करियर की बेस्ट 12वीं रैंकिंग पर पहुंच जाएंगे।

इस टूर्नामेंट से पहले खाचनोव ने टॉप-10 खिलाड़ियों के खिलाफ खेले 19 मुकाबलों में से केवल तीन जीते थे। दुनिया के 18वें नंबर के पुरुष टेनिस खिलाड़ी खाचनोव ने पिछले महीने मॉस्को में क्रेमलिन कप भी जीता था।

उपलब्धि / बाइल्स एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप के सभी 6 इवेंट में पदक जीतने वाली पहली जिम्नास्ट

 अमेरिका की सिमोन बाइल्स ने वर्ल्ड जिम्नास्टिक चैम्पियनशिप में इंडिविजुअल फ्लोर एक्सरसाइज में गोल्ड जीता। यह बाइल्स का 14वां वर्ल्ड टाइटल है। 21 साल की बाइल्स का यह मौजूदा चैम्पियनशिप में चौथा गोल्ड और छठा मेडल है। वे 31 साल बाद पहली जिम्नास्ट हैं, जिन्होंने एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप के सभी छह इवेंट में मेडल जीते हैं।


31 साल बाद किसी जिम्नास्ट ने एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप में छह पदक जीते
उनसे पहले, सोवियत यूनियन की एलेना शुसुनोवा ने 1987 में नीदरलैंड में हुई चैम्पियनशिप में 6 मेडल जीते थे। तब एलेना ने वॉल्ट, फ्लोर एक्सरसाइज में गोल्ड, टीम, ऑल-अराउंड, बैलेंस बीम इवेंट में सिल्वर और अनईवन बार्स में सिल्वर जीता था।

बाइल्स एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप में छह मेडल जीतने वाली पहली अमेरिकी जिम्नास्ट हैं। उन्होंने टीम, ऑल-अराउंड, वॉल्ट, फ्लोर इवेंट में गोल्ड जीता, जबकि अनईवन बार्स में सिल्वर और बैलेंस बीम में ब्रॉन्ज हासिल किया।

20 मेडल जीतकर स्वेतलाना की बराबरी की
बाइल्स के वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कुल 20 मेडल हो गए हैं। उन्होंने रूस की स्वेतलाना खोर्किना के रिकॉर्ड की बराबरी की। बाइल्स और खोर्किना सबसे ज्यादा वर्ल्ड टाइटल जीतने वाली महिला जिम्नास्ट हैं।

बाइल्स के नाम 14 स्वर्ण के अलावा तीन रजत और तीन कांस्य पदक हैं। वहीं, स्वेतलाना ने नौ स्वर्ण, आठ रजत और तीन कांस्य पदक जीते थे। बाइल्स पहले ही सबसे ज्यादा 12 वर्ल्ड टाइटल जीतने का बेलारूस के विताली शेरबो का रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं। वैसे, विताली सबसे ज्यादा 23 वर्ल्ड टाइटल जीतने वाले जिम्नास्ट हैं।

बाइल्स किडनी स्टोन के कारण हॉस्पिटल में एडमिट थीं
बाइल्स को चैम्पियनशिप के एक दिन पहले किडनी स्टोन का पता चला था। वे पहले इवेंट के 24 घंटे पहले अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बावजूद, उन्होंने चैम्पियनशिप में कई रिकॉर्ड तोड़े। 2016 ओलिंपिक के बाद यह उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट था। उन्होंने रियो ओलिंपिक में चार स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीते थे।

14 साल में बना सिग्नेचर ब्रिज, देश-दुनिया में इससे कम समय में हो गए बड़े-बड़े निर्माण

 

1997 में इसकी परिकल्पना की गई थी और सात साल बाद यानी 2004 में इस सिग्नेचर ब्रिज का प्रोजेक्ट का तैयार किया गया था। फिर तीन साल बाद सन् 2007 में इस प्रोजेक्ट को तत्कालीन दिल्ली सरकार ने मंजूरी दी। इस प्रोजक्ट को सन् 2010 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के समय पूरा होना था, लेकिन यह पूरा हुआ 8 साल बाद यानी 2018 में। कुलमिलाकर इस प्रोजेक्ट के निर्माण में 14 साल से ज्यादा का समय लग गया।

इस दौरान लंबा समय बीतने से इस पर खर्च भी बढ़ा। इस परियोजना पर शुरू में 464 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई थी, लेकिन कुछ बदलाव के बाद योजना की लागत 2007 में दिल्ली सरकार ने 1100 करोड़ रुपये कर दी थी। अब इस परियोजना की राशि 1518.37 करोड़ रुपये पहुंच गई। ब्रिज करीब 700 मीटर लंबा है, जिसमें दोनों ओर चार-चार लेन हैं। यह 35.2 मीटर चौड़ा है। कुलमिलाकर डेढ़ दशक के दौरान इसका खर्च तकरीबन चार गुना बढ़ गया।

अमेरिका / ईरान से तेल खरीद बंद करने वाले देशों के लिए पर्याप्त सप्लाई मौजूद: ट्रम्प

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि ईरान से क्रूड की खरीद कम करने वाले देशों के लिए पर्याप्त तेल सप्लाई उपलब्ध है। ट्रम्प का कहना है कि ईरान से जो आपूर्ति कम होगी उसकी भरपाई दूसरे सप्लायर देश कर सकते हैं। इसलिए, ईरान से तेल नहीं खरीद जाए। ईरान पर 5 नवंबर से अमेरिकी प्रतिबंध लागू होंगे। इससे पहले अमेरिका चाहता है कि सभी देश ईरान से तेल की खरीद पूरी तरह बंद कर दें।


ट्रम्प ने मई में ईरान पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी
इस साल मई में अमेरिका ने ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था। इस समझौते के तहत ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करने के एवज में आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी।

ट्रम्प ने मई में समझौते से अलग होने के बाद ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की थी। साथ ही कहा था कि सभी देश 5 नवंबर से पहले ईरान से तेल सप्लाई बंद कर दें नहीं तो उन्हें भी प्रतिबंध झेलने पड़ सकते हैं।

भारत अपनी जरूरतों का 80% क्रूड इंपोर्ट करता है
भारत अपनी जरूरतों को देखते हुए ईरान से तेल सप्लाई बंद करने की अमेरिका की मांग के खिलाफ है। लेकिन, उसने ईरान से सप्लाई कम की है। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल आयातक देश है।

ईरान भारत का तीसरा बड़ा क्रूड सप्लायर है। भारत अपनी जरूरत का 10% तेल ईरान से खरीदता है। पहला और दूसरा नंबर ईराक और सऊदी अरब का है।

ईरान से तेल खरीद के मुद्दे पर अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में भारत से बातचीत की थी। हालांकि, बैठक के नतीजे सामने नहीं आ सके।

क्रिकेट / द्रविड़ आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पांचवें भारतीय, गावस्कर ने किया सम्मानित

 पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। वे इस फेहरिस्त में शामिल होने वाले दुनिया के 87वें और भारत के पांचवें क्रिकेटर हैं। इसी साल जुलाई में आईसीसी ने द्रविड़ के हॉल ऑफ फेम शामिल होने की घोषणा की थी। उनसे पहले बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, सुनील गावस्कर और अनिल कुंबले को यह सम्मान दिया जा चुका है।


द्रविड़ ने कहा- इस सूची में शामिल होना बहुत बड़ा सम्मान
भारत-वेस्टइंडीज के बीच तिरुवनंतपुरम में पांचवें वनडे से पहले बीसीसीआई की ओर से सुनील गावस्कर ने द्रविड़ को सम्मानित किया। इस पर उन्होंने कहा, "यह बहुत बड़ा सम्मान है। सर्वकालिक महान क्रिकेटरों की सूची में अपना नाम दर्ज कराना सबका सपना होता है।"

उन्होंने कहा, "मैं अपने परिजनों के साथ-साथ उन खिलाड़ियों का भी आभारी हूं, जिनके साथ मैं खेला। कोच और अधिकारियों ने मुझे समर्थन दिया और एक क्रिकेटर के रूप में विकसित होने में मदद की। मैं केएससीए (कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन) और बीसीसीआई को भी धन्यवाद देना चाहूंगा।"

द्रविड़ ने 164 टेस्ट में 36 शतक की मदद से 13,288 रन बनाए। उन्होंने 2012 में संन्यास लिया था। वे दुनिया में सबसे ज्यादा 210 कैच लेने वाले खिलाड़ी हैं। उन्हें 2004 में आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर और आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया था।

वर्ल्ड चैम्पियनशिप / अमेरिका की बाइल्स ने स्वर्ण जीता, ऑल-अराउंड इवेंट में 4 गोल्ड जीतने वाली पहली जिम्नास्ट

 अमेरिका की सिमोन बाइल्स ने वर्ल्ड आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वे वर्ल्ड चैम्पियनशिप में ऑल-अराउंड इवेंट में चार बार गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली जिम्नास्ट हैं। बाइल्स ने कतर की राजधानी स्थित एस्पायर डोम में ऑल राउंड फाइनल्स में कुल 57.491 अंक बनाए। बाइल्स इससे पहले 2013 (एंटवर्प), 2014 (नाननिंग), और 2015 (ग्लासगो) में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप के ऑल-अराउंड इवेंट में भी गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।


मुराकामी रजत जीतने वालीं जापान की पहली जिम्नास्ट
जापान की मेई मुराकामी ने ऑल-अराउंड फाइनल्स में रजत पदक जीता। वे ऑल राउंड फाइनल्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली जापान की पहली जिम्नास्ट हैं। गत चैम्पियन अमेरिका की 17 साल की हर्ड मोर्गन कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं।

स्वर्ण जीतने के बाद बाइल्स ने कहा, ‘यह शायद मेरी सभी विश्व चैम्पियनशिप और ओलिंपिक में पदक के मुकाबले सबसे कठिन जीत है। अमेरिका के लिए फिर से एक बार स्वर्ण पदक जीतना वाकई बहुत रोमांचक है।’

मोर्गन की ओर इशारा करते हुए बाइल्स ने कहा, ‘एक दूसरे को प्रोत्साहित करना अहम है। हम इस प्रतियोगिता के लिए बहुत दिनों से तैयारी कर रहे थे। उनके (मोर्गन) साथ यहां तक पहुंचना रोमांचक है। हम खुश हैं कि हमारी कड़ी मेहनत रंग लाई।’

2016 रियो ओलिंपिक में भाग लेने के बाद बाइल्स दोहा में पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही थीं। रियो में बाइल्स ने चार स्वर्ण पदक जीते थे। तब पहली बार किसी अमेरिकी जिम्नास्ट ने एक ही ओलिंपिक में चार स्वर्ण पदक जीते थे।

रियो ओलिंपिक के बाद से वे अस्वस्थ थीं। अमेरिकी जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन ने बताया था कि अस्पताल के इमरजेंसी रूम में जब बाइल्स की मेडिकल जांच हो रही थी, तो डॉक्टरों को उनके किडनी में स्टोन मिला था।

रोचक / खेल मंत्री राज्यवर्धन ने मैरीकॉम के साथ बॉक्सिंग की, कहा- महिला खिलाड़ी मिसाल बनीं

 मैरीकॉम ने गुरुवार को केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने दो-दो पंच किए। इस दौरान मैरीकॉम एथेंस ओलिंपिक में रजत पदक जीतने वाले निशानेबाज राज्यवर्धन को बीच-बीच में बॉक्सिंग के टिप्स भी दिए। मौका था 15 नवंबर से राजधानी में होने वाली महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के लोगो और एंथम के लांच होने का। इस मौके पर पांच बार की वर्ल्ड चैम्पियन मैरीकॉम को प्रतियोगिता का ब्रांड एम्बेस्डर भी बनाया गया। भारत दूसरी बार इस चैम्पियनशिप की मेजबानी कर रहा है।


केंद्रीय खेल मंत्री ने एथलीट्स को शुभकामनाएं दीं
बाद में राज्यवर्धन सिंह ने चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, "बॉक्सिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप भारत आ रही है। यह जानकर मुझे अपार हर्ष हो रहा है। हमारे एथलीट, खासतौर पर हमारी महिला एथलीट ने हर मुश्किल और चुनौती का सामना करते हुए खुद को साबित किया है। आज कई महिला मुक्केबाज इसकी मिसाल हैं। इन खिलाड़ियों ने न सिर्फ आने वाले खिलाड़ियों को प्रेरित किया है बल्कि महिलाओं के बीच प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।"

खिलाड़ियों को पहले भी दे चुके हैं फिटनेस चैलेंज
बता दें कि खेल मंत्री फिजिकल एक्टिविटी में अक्सर हिस्सा लेते रहते हैं। इस साल मई में उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो पर पोस्ट कर शटलर साइना नेहवाल, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और अभिनेता ऋतिक रोशन को फिटनेस चैलेंज दिया था।
मैरीकॉम की देशवासियों के सामने फिर से चैम्पियन बनने की इच्छा

मैरीकॉम ने कहा, "घर में दोबारा खेलने को लेकर रोमांचित हूं। विश्व चैम्पियनशिप कई मायनों मे खास है। मैं अपने देशवासियो के सामने सोना जीतने के लिए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी। मैं देशवासियों के सामने चैम्पियन बनना चाहती हूं।" महिला विश्व चैम्पियनशिप की शुरुआत 2001 में हुई थी। भारत ने 2006 में इसकी मेजबानी की थी। इस चैम्पियनशिप में भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2006 में रहा था। तब भारतीय मुक्केबाजों ने चार स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य सहित कुल आठ पदक जीते थे।

चैम्पियनशिप के लिए भारतीय टीम
मैरीकॉम (48 किग्रा), पिंकी जांगड़ा (51 किग्रा), मनीषा माउन (54 किग्रा), सोनिया (57 किग्रा), एल. सरिता देवी (60 किग्रा), सिमरनजीत कौर (64 किग्रा), लवलिना बोगोहेन (69 किग्रा), सावेटी बूरा (75 किग्रा), भाग्यवति काचारी (81 किग्रा) और सीमा पूनिया (81प्लस किग्रा)। कोच : रफाएल बेर्गामास्को (विदेशी कोच), शिव सिंह (मुख्य कोच), संध्या गुरुंग, मोहम्मद अली कमर, छोटे लाल यादव, सतवीर कौर।

टेनिस / स्वितोलिना अक्टूबर में सबसे ज्यादा प्राइज मनी जीतने वाली खिलाड़ी

 

यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना अक्टूबर में सबसे ज्यादा प्राइज मनी जीतने वाली खिलाड़ी हैं। उन्हें इस महीने साढ़े 17 करोड़ रुपए प्राइज मनी के रूप में मिले। स्वितोलिना ने रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच को पीछे छोड़ा। दुनिया की चौथे नंबर की महिला टेनिस खिलाड़ी स्वितोलिना ने डब्ल्यूटीए फाइनल्स का खिताब जीता था। यह उनके करियर का सबसे बड़ा खिताब था। इस जीत से उन्हें 17 करोड़ रुपए की प्राइज मनी मिली थी।

हॉन्गकॉन्ग ओपन में क्वार्टर फाइनल खेलने पर भी मिली थी राशि
स्वितोलिना को अक्टूबर में साढ़े 17 करोड़ रुपए प्राइज मनी के रूप में मिले। यह अक्टूबर महीने में किसी खिलाड़ी को मिलने वाली सबसे ज्यादा प्राइज मनी है। उन्होंने हॉन्गकॉन्ग ओपन का क्वार्टर फाइनल खेला, जबकि चाइना ओपन में पहले राउंड में हार गईं। इन दोनों टूर्नामेंट से भी उनको राशि मिली।

अक्टूबर में सबसे ज्यादा प्राइज मनी जीतने वाले टॉप-5 खिलाड़ियों में तीन महिलाएं हैं। डेनमार्क की कैरोलिन वोजनियाकी 13 करोड़ रुपए के साथ दूसरे नंबर पर हैं। वोजनियाकी ने अक्टूबर में बीजिंग ओपन का खिताब जीता था।

शंघाई ओपन जीतने वाले नोवाक जोकोविच 9.95 करोड़ रुपए की प्राइज मनी के साथ तीसरे नंबर पर हैं। यह सर्बिया के जोकोविच का सीजन का चौथा खिताब था। डब्ल्यूटीए फाइनल्स की रनरअप स्लोन स्टीफंस चौथे और बासेल ओपन चैम्पियन फेडरर पांचवें नंबर पर हैं।

सितंबर की मनी लिस्ट में जापान की नाओमी ओसाका टॉप पर थीं। तब उन्होंने यूएस ओपन के रूप में अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम जीता था, जबकि टोक्यो ओपन के फाइनल में पहुंची थीं। उन्हें 28 करोड़ प्राइज मनी के रूप में मिले थे। लेकिन अक्टूबर में ओसाका सिर्फ बीजिंग ओपन के सेमीफाइनल में पहुंची थीं।

भारतीय वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा

 होमी जहांगीर भाभा की आज जयंती है। वह भारत के प्रमुख वैज्ञानिक और स्वप्नदृष्टा थे, जिन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने काम और अपने स्वभाव को लेकर खासा मशहूर थे। 24 नवंबर 1966 को फ्रांस के माउंट ब्लैंक के आसमान में एक विमान क्रैश हुआ और इसमें मौजूद सभी यात्री मारे गए। इसमें से एक थे डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा।


भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना
भाभा ने ही भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। उन्होने मुट्ठी भर वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में न्यूक्लियर एनर्जी पर रिसर्च प्रोग्राम शुरू किया था। उन्होंने न्यूक्लियर साइंस पर तब काम करना शुरू किया था दुनिया को इसकी चैन रिएक्शन के बारे में काफी कम जानकारी थी। इतना ही नहीं उस वक्त नाभिकीय उर्जा से विद्युत उत्पादन की कल्पना को कोई मानने को तैयार नहीं था। उन्हें 'आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम' भी कहा जाता है।

दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान का मलबा
वर्ष 1966 में फ्रांस के ऐल्प्स पहाडि़यों में दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान का मलबा और कुछ मानवीय अवशेषों के मिलने के बाद एक बार फिर से इस हादसे की चर्चा हो रही थी। यहां पर मिले मानवीय अवशेषों की जांच अब बेहद जरूरी हो गई है। इस इलाके में दो विमान हादसे हुए थे। इनमें से पहला हादसा 1950 और दूसरा 1966 को हुआ था। भारत के लिए यह विमान हादसा इसलिए बेहद खास था क्योंकि जो विमान यहां पर 24 जनवरी 1966 को दुर्घटनाग्रस्त हुआ था उसमें भारत के महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा सवार थे। वह इस विमान में वियना एक कांफ्रेंस में हिस्सा लेने जा रहे थे। इस विमान में उस वक्त 117 यात्री सवार थे। भारत को इस विमान दुर्घटना से गहरा धक्का लगा था।

डब्ल्यूटीओ में क्या हैं एम्बर बॉक्स व ग्रीन बॉक्स?

 विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की शब्दावली में सब्सिडी को रोड ट्रैफिक लाइट के रंगों की तर्ज पर तीन बॉक्स - ग्रीन, एम्बर और रेड के रूप में पहचाना गया है। लाइट जब ग्रीन होती है तो आपको ट्रैफिक सिग्नल पार करने की अनुमति होती है। ठीक इसी तरह डब्ल्यूटीओ में भी सब्सिडी का एक ‘ग्रीन बॉक्स’ है। इसका मतलब यह हुआ ‘ग्रीन बॉक्स’ में शामिल सब्सिडी को जारी रखा जा सकता है। डब्ल्यूटीओ का मानना है कि ऐसी सब्सिडी जारी रहने से व्यापार में बाधा उत्पन्न नहीं होगी, इसलिए इसे जारी रखा जा सकता है। घरेलू खाद्य मदद, शोध, अनुसंधान व प्रशिक्षण के लिए अनुदान और पर्यावरण संरक्षण के लिए सहायता इसी श्रेणी में आते हैं। सरकारों पर ऐसी सब्सिडी देने पर कोई रोक नहीं है।


ट्रैफिक की दूसरी लाइट एम्बर कलर (पीलेपन के साथ नारंगी रंग) की होती है। एम्बर लाइट का मतलब होता है गति धीमी करना। इसी तर्ज पर डब्ल्यूटीओ में सब्सिडी का एम्बर बॉक्स रखा गया है जिसका मतलब है कि इस बॉक्स में आने वाली सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करना है। मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी) और उत्पादन की मात्र बढ़ाने से संबंधित सब्सिडी एम्बर बॉक्स में आती हैं। एम्बर बॉक्स में शामिल मदों में सब्सिडी के लिए एक सीमा तय की गयी है जिसे ‘डी मिनिमिस’ कहते हैं। इसका मतलब यह है कि ‘डी मिनिमिस’ से ऊपर की सब्सिडी को घटाना है। विकसित देशों को एम्बर बॉक्स के तहत आने वाले मदों की सब्सिडी घटाकर वर्ष 1986-88 के दौरान उनके कृषि उत्पादन स्तर के पांच प्रतिशत तथा विकासशील देशों में 10 प्रतिशत तक लानी हैं। अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया और ब्राजील सहित डब्ल्यूटीओ के 32 सदस्य देश हैं, जिन्हें एम्बर बॉक्स की सब्सिडी कम करनी है।

ट्रैफिक की तीसरी लाइट रेड होती है। जहां रेड सिग्नल होता है वहां से आगे जाने की इजाजत नहीं होती। ठीक इसी तरह डब्ल्यूटीओ के ‘रेड बॉक्स’ में शामिल सब्सिडी को जारी रखने की अनुमति नहीं होती। हालांकि कृषि पर डब्ल्यूटीओ का जो समझौता है उसमें ‘रेड बॉक्स’ का प्रावधान नहीं है।

डब्ल्यूटीओ में सब्सिडी की एक और श्रेणी है जिसे ब्लू बॉक्स कहते हैं। ये ऐसी सब्सिडी हैं जो उत्पादन से संबंधित होती हैं। एम्बर बॉक्स की तरह । फर्क बस इतना है कि इसके तहत कुछ शर्ते लगा दी जाती हैं ताकि व्यापार में बाधा को कम किया जा सके। उदाहरण के लिए सब्सिडी पाने वाले किसानों को यदि उत्पादन सीमित करना है तो उसके तहत आने वाली सब्सिडी ब्लू बॉक्स में आएगी।

विश्व रिकॉर्ड बनाएगा शिव विहार-त्रिलोकपुरी मेट्रो का कॉरिडोर, कई मामलों में है अनोखा

 पिंक लाइन के शिव विहार-त्रिलोकपुरी कॉरिडोर पर 31 अक्टूबर से मेट्रो का परिचालन शुरू हो जाएगा। इसी के साथ 314 किलोमीटर के नेटवर्क के साथ दिल्ली मेट्रो दुनिया के 10 बड़े मेट्रो नेटवर्क में शामिल हो जाएगी। यही नहीं मेट्रो का यह सबसे ज्यादा घुमावदार कॉरिडोर भी है।


मेट्रो के 17.86 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 10 तीक्ष्ण मोड़ हैं। खास बात यह कि इस कॉरिडोर पर तीन लूप में मेट्रो का परिचालन किया जाएगा। जाहिर है कि शिव विहार से त्रिलोकपुरी के लिए सीधी मेट्रो नहीं मिलेगी, मौजपुर में मेट्रो बदलनी पड़ेगी।

दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) का दावा है कि 35-38 मिनट में यह सफर पूरा हो सकेगा। इस कॉरिडोर पर 15 स्टेशन हैं। इस पर कुल 13 ट्रेनों का परिचालन होगा। पहला लूप शिव विहार-मौजपुर शिव विहार से त्रिलोकपुरी के बीच आवागमन के लिए यात्रियों को मौजपुर में मेट्रो बदलनी पड़ेगी। शिव विहार से मौजपुर के बीच चार स्टेशन हैं।

इस सेक्शन पर तीन मेट्रो ट्रेनें 5:12 मिनट के अंतर से चलेंगी। शिव विहार से चलने वाली मेट्रो मौजपुर से वापस हो जाएगी। यहां से आइपी एक्सटेंशन व त्रिलोकपुरी के लिए सीधी मेट्रो मिलेगी। दूसरा लूप- मौजपुर से आइपी एक्सटेंशन मौजपुर से आइपी एक्सटेंशन के बीच 10 ट्रेने चलेंगी। यहां भी 5:12 मिनट के अंतराल पर म्रेटो का परिचालन किया जाएगा।

जापान में मोदी के हर कदम पर क्‍यों है ड्रैगन की नजर, जानें- क्‍या है चीन की चिंताएं

 जापान और भारत की निकटता ने एशिया प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण एशियाई राजनीति को काफी प्रभावित किया है। इस क्षेत्र में चीन की लगातार बढ़ती दिलचस्पी और दखलअंदाजी के चलते जापान और भारत की दोस्ती एक नया समीकरण पैदा कर सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया के लिए भारत निश्चित रूप से जापान की ओर देखता रहा है। आइए जानते हैं कि भारत-जापान की निकटता से आखिर क्यों चिंतित हो रहा है ड्रैगन। इसके साथ यह देखेंगे कि चीन और जापान की मीडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को किस रूप में देखती हैं।


अौर करीब आ रहे जापान और भारत
एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व और उसकी उत्तर कोरिया से निकटता ने जापान की चिंता बढ़ाई है। उधर, दक्षिण एशिया क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और पाकिस्तान के साथ चीनी प्रेम ने भारत को भी चिंतित किया है। पाकिस्तान के जरिए दक्षिण एशिया में चीनी पहुंच ने इस क्षेत्र के परंपरागत शक्ति संतुलन को ध्वस्त किया है। इससे भारत की सामरिक चिंता बढ़ी है। यह भारत के लिए खतरे की घंटी है। इसके अलावा चीन की नजर नेपाल और भुटान पर भी है। जिस तरह से चीन दक्षिण एशिया के इन मुल्कों पर डोरे डाल रहा है, उससे दक्षिण एशिया का परंपरागत शक्ति संतुलन खतरे में पड़ गया है।

जापान दौरा / मैं पीएम बना तब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की रैंकिंग 140 थी, आज 100 पर: मोदी

 नरेंद्र मोदी भारत-जापान के बीच होने वाली 13वीं वार्षिक बैठक में शामिल हुए

दौरे के पहले दिन रविवार को शिंजो आबे के साथ ट्रेन में सफर किया, अाबे ने हॉलिडे होम में डिनर दिया
मुलाकात के दौरान आबे ने मोदी को अपना सबसे भरोसेमंद दोस्त बताया

टोक्यो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान दौरे के दूसरे दिन सोमवार को राजधानी टोक्यो में 'मेक इन इंडिया, अफ्रीका में भारत-जापान साझेदारी और डिजिटल साझेदारी' सेमिनार में शामिल हुए। मोदी ने कहा, जब मैंने 2014 में भारत की जिम्मेदारी संभाली थी, उस वक्त वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार करने में सुलभता) में भारत की रैंकिंग 140 थी। लेकिन अब यह 100 पर पहुंच गई। हम इसे और बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

इससे पहले मोदी भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दिवाली में दीपक जहां रहता है, वहां उजाला फैलता है उसी तरह आप भी जापान और दुनिया के हर कोने में अपना और देश का नाम रोशन करें। गुजरात में सरदार पटेल की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इस साल पटेल की जयंती की चर्चा दुनियाभर में होगी। सरदार साहब की प्रतिभा जितनी ऊंची थी, प्रतिमा भी उतनी ही ऊंची बनेगी। मोदी 31 अक्टूबर को इस प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''आज भारत बदलाव के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। मानवता के लिए काम करने पर भारत की कोशिशों को दुनिया ने सराहा है। देश में जनकल्याण की योजनाएं बनाई जा रही हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में प्रगति हुई है। आज ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी गांवों तक पहुंच चुकी है। भारत में 100 करोड़ मोबाइल एक्टिव हैं। एक जीबी डेटा कोल्ड ड्रिंक की छोटी बोतल से भी सस्ता है। इस डेटा से लोगों को सेवाओं का लाभ मिल रहा है।''

फुटबॉल / थाईलैंड को हराने के बावजूद एएफसी अंडर-19 महिला चैम्पियनशिप के दूसरे दौर में नहीं पहुंच पाया भारत

 थाईलैंड और नेपाल दूसरे दौर में जगह बनाने में कामयाब रहे

भारत के लिए इकलौता गोल लालरेम्परी ने 36वें मिनट में किया

चोनबुरी (थाईलैंड). भारत ने थाईलैंड को एएफसी अंडर-19 महिला फुटबॉल चैम्पियनशिप क्वालिफायर्स में 1-0 से हरा दिया। हालांकि इस जीत के बावजूद भारतीय टीम अगले राउंड में नहीं पहुंच सकी। भारत की जीत में एकमात्र मैच विजयी गोल ग्रेस लालरेम्परी ने 36वें मिनट में किया। इस जीत के बाद भारत थाईलैंड और नेपाल के अंकों की बराबरी पर पहुंच गया। लेकिन नेपाल के खिलाफ नतीजे के कारण भारतीय टीम क्वालिफायर्स के दूसरे राउंड में पहुंचने में असफल रही।

नेपाल से हारने के कारण अगले दौर में नहीं पहुंच पाया भारत
भारत, थाईलैंड और नेपाल के 3-3 अंक रहे। हालांकि गोल औसत में थाईलैंड की टीम टॉप पर रही। भारत और नेपाल का गोल औसत बराबर था, लेकिन भारत को नेपाल के खिलाफ हार झेलनी पड़ी थी। इस कारण वह अंकतालिका में पिछड़ गया।

इस मुकाबले में भारत-थाईलैंड के बीच कड़ी टक्कर हुई। दोनों को शुरुआती 20 मिनट में गोल करने के कई मौके मिले, लेकिन कोई भी बढ़त बनाने में कामयाब नहीं हो पाया।

36वें मिनट में भारत ने शानदार मूव बनाया और ग्रेस लालरेम्परी ने गोल करके 1-0 से बढ़त दिलाई। मेजबान टीम ने दूसरे हॉफ में वापसी की कोशिश की। हालांकि, वह बराबरी का गोल करने में कामयाब नहीं हो पाई।

टेनिस / स्वितोलिना ने जीता डब्ल्यूटीए फाइनल्स का खिताब, यूक्रेन की पहली खिलाड़ी बनीं

 मार्टिना नवरातिलोवा सबसे ज्यादा आठ बार इस टूर्नामेंट की चैम्पियन बनीं

उन्होंने 3 बार चेकोस्लोवाकिया और 5 बार अमेरिका की ओर से खेलते हुए खिताब जीता

सिंगापुर. एलिना स्वितोलिना डब्ल्यूटीए फाइनल्स का खिताब जीतने वाली यूक्रेन की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने फाइनल में अमेरिकी की स्लोन स्टीफंस को तीन सेट में 3-6, 6-2, 6-2 से हराया। 48 डबल्यूटीए फाइनल्स में से सबसे ज्यादा 17 खिताब अमेरिका के खिलाड़ियों ने जीते हैं। हालांकि पिछले चार साल से कोई भी अमेरिकी खिलाड़ी यह खिताब नहीं जीत पाई है। स्वितोलिना की वर्ल्ड वुमंस टेनिस में मौजूदा रैंकिंग चार, जबकि स्टीफंस की छह है।

पहला सेट जीतने के बाद हारीं स्लोन स्टीफंस
इस मुकाबले की शुरुआत में स्टीफंस ने अच्छा खेल दिखाया। पहले सेट में उन्होंने स्वितोलिना की सर्विस ब्रेक की और सेट 6-3 से जीत लिया। दूसरे सेट में स्वितोलिना ने स्टीफंस पर दबाव बनाए रखा। दो बार सर्विस ब्रेक की और सेट 6-2 से जीतकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।

एलिना स्वितोलिना।
टूर्नामेंट में महिला डबल्स का खिताब फ्रांस की क्रिस्टीना म्लाडेनोविक और हंगरी की टिमिया बबोस ने जीता। उन्होंने फाइनल में चेक गणराज्य की बारबोरा क्रेजीकोवा और कैटरीना सिनिकोवा को 6-4, 7-5 से हराया।

किसी एक खिलाड़ी के सबसे ज्यादा खिताब जीतने की बात करें तो मार्टिना नवरातिलोवा शीर्ष पर हैं। उन्होंने आठ बार यह खिताब अपने नाम किया। वे 1978, 1979 और 1981 में चेकस्लोवाकिया और 1983, 1984, 1985, मार्च 1986 और नवंबर 1986 में अमेरिका की ओर से खेलते हुए चैम्पियन बनीं।

जलमार्ग पर आजाद भारत की पहली कंटेनर ढुलाई की शुरुआत करेगी पेप्सिको

  देश में अंतर्देशीय जलमार्गो पर मंगलवार से शुरू हो रही आजाद भारत की पहली कंटेनर ढुलाई पेप्सिको की खेप के साथ होगी। इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आइडब्ल्यूएआइ) के अधिकारियों ने कहा कि पेप्सिको कोलकाता से वारणसी तक एनडब्ल्यू-1 जहाज पर 16 कंटेनर भेजेगी। इनमें 16 ट्रक लोड के बराबर फूड और स्नैक्स होंगे। इसे लेकर एमवी आरएन टैगोर जहाज करीब 9-10 दिनों में वाराणसी पहुंचेगी।


मौके पर जहाजरानी मंत्रालय और आइडब्ल्यूएआइ के वरिष्ठ अधिकारियों के मौजूद रहने की उम्मीद है। जहाज इफको के उर्वरक के साथ वापस लौटेगी, जिसकी खरीदारी प्रयागराज के निकट उसके फूलपुर संयंत्र से होगी।

सरकार जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के तहत हल्दिया से वाराणसी तक राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) का विकास कर रही है। यह मार्ग 1390 किलोमीटर का होगा। इस पर 5,369 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। विश्व बैंक इस परियोजना के लिए तकनीकी तथा वित्तीय सहयोग कर रहा है।

कारोबारी विकास के लिए पेप्सिको अपना रही डिजिटाइजेशन
मुंबई। पेप्सिको डिजिटाइजेशन को विकास के लिए एक बड़ा अवसर मान रही है और वह तकनीक का उपयोग बैकवार्ड व फॉरवार्ड दोनों तरह के कारोबारी एकीकरण के लिए करना चाहती है। लेज, कुरकुरे और पेप्सी बनाने वाली कंपनी ऐसी कंपनियों के साथ बैठकें कर रही है, जो एक करोड़ रिटेलरों और 60 करोड़ उपभोक्ताओं को आपूर्तिकर्ताओं के साथ जोड़ने के लिए काम कर रही हैं।

समय आ गया है भारत अपनी इन-हाउस आयुध निर्माण क्षमताओं को बढ़ाए: बिपिन रावत

  थलसेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि भारत हथियारों और उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक रहा है। लेकिन अब समय आ गया है कि हमें देश की आयुध निर्माण क्षमताओं को बढ़ाया चाहिए। हमें डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा करने पर गर्व है जो जल्द ही आकार लेना शुरू कर देगा। मौजूद समय में हम पश्चिमी छोर पर वियतनाम और पश्चिमी छोर पर ब्राजील और चिली जैसे देशों के साथ व्यापक सहयोग में लगे हुए हैं। इन देशों ने हमारे साथ प्रौद्योगिकी साझा करने में रुचि दिखाई है।


इधर हाल ही में अमेरिका की ओर से बयान आया कि वे एफ-16 या किसी अन्य रक्षा प्रणाली को खरीदने के लिए भारत पर कोई दबाव नहीं डाल रहा है। इस बारे में चल रही अटकलें सही नहीं हैं। यह बात मुंबई स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूत एडगार्ड कागन ने कही। हालांकि उन्होंने रूस से रक्षा सौदे पर अमेरिकी कार्रवाई के अंदेशे पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

बता दें कि हाल ही में भारत ने रूस से पांच बिलियन डालर (करीब 36 हजार करोड़ रुपये) में एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने को मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि अमेरिका 'काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थू्र सेंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए)' के तहत प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि, अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति को इस संबंध में छूट दे रखी है।

PM Modi leaves for Japan for annual summit

Prime Minister Narendra Modi on Saturday left for Japan to attend the annual summit with his counterpart Shinzo Abe.

The summit will be held on October 28 and 29.

In a statement on Friday Mr. Modi described India and Japan as a “winning combination” and said the island nation was New Delhi’s most trusted partner in its economic and technological modernisation.

He said India’s partnership with Japan was of great substance and purpose. “We have a special strategic and global partnership. Our ties with Japan, both economic and strategic, stand completely transformed in recent years. It is today a partnership of great substance and purpose. It rests on the strong pillars of India’s Act East Policy, and our shared vision and commitment to a free, open and inclusive Indo-Pacific,” he said.

12th meeting with Shinzo Abe
Mr. Modi said it will be his 12th meeting with Mr. Abe since he first visited Japan as prime minister in September 2014.

Watch: New leaf-warbler bird species discovered in Indonesia

 Rote, a tiny, dry Indonesian island, has given a new songbird species to science. Measuring just about 10 cm in length and weighing about 8 grams, the yellow-orange colored bird was sighted by a joint research team from the National University of Singapore and the Indonesian Institute of Science.


Using DNA studies and morphological analysis, they confirmed it was a new species and named it Phylloscopus rotiensis after the Rote island, the only locality where it can be found.

The bird is unique among the Asian warblers because it has an unusually long bill. “We think it is an adaptation to the relatively arid conditions on Rote island. Most other Southeast Asian leaf-warblers live in more humid cloud forests….[but] this bird would have to have additional adaptations that equip it to search for food in, perhaps, the tree bark or other places where typical leaf-warbler bills don’t reach,” explains Dr Frank Rheindt of the Department of Biological Sciences at National University of Singapore, in an email to The Hindu. He is the corresponding author of the paper published in Scientific Reports.

Sanjay Kumar Mishra appointed interim director of Enforcement Directorate

 The Central Government has appointed Indian Revenue Service (IRS) officer Sanjay Kumar Mishra as interim director of the Enforcement Directorate (ED) for three months.


The Appointments Committee of the Cabinet (ACC), headed by Prime Minister Narendra Modi, cleared his name as interim chief of the agency on the last day of Karnal Singh’s tenure.

A 1986 batch IRS Officer of the Income Tax cadre, Mr. Mishra has been appointed as Principal Chief Director of ED and given charge of the Director of ED for three months.

Mr. Mishra has handled many high-profile cases including the case related to National Herald and also the disproportionate assets of BSP chief Mayawati

स्वास्थ्य पर प्रदूषण के दुष्प्रभाव का अध्ययन करा रहा केंद्र, इन 20 शहरों में होगा सर्वे

 वायु प्रदूषण के कारणों और समाधान को लेकर तमाम अध्ययन किए गए, लेकिन अब तक सब विफल रहे। लिहाजा केंद्र सरकार अब इसका स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का अध्ययन करा रही है। इसे लेकर पूरी शोध रिपोर्ट तैयार की जा रही है।


इस रिपोर्ट में विस्तृत रूप से बताया जाएगा कि कौन से प्रदूषक तत्व शरीर के किन-किन हिस्सों को किस तरह से प्रभावित कर रहे हैं। साथ ही यह तथ्य भी स्पष्ट किया जाएगा कि यह प्रदूषण किस हद तक जानलेवा है। दरअसल, प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर अब तक जितनी भी रिपोर्ट बनी हैं, सभी विदेशों में तैयार हुई हैं।

यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा भारत में प्रदूषण से होने वाली मौतों का जारी आंकड़ा भी इन्हीं रिपोर्ट पर आधारित होता है। इसीलिए इनकी प्रामाणिकता पर भी सवालिया निशान लगते रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय अब इस दिशा में अपने स्तर पर विस्तृत शोध रिपोर्ट तैयार कराने जा रहा है। इसके लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, लखनऊ, हैदराबाद एवं आगरा सहित देश के 20 प्रमुख शहरों का चयन किया गया है। हर शहर में एक-एक प्रधान निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे। उनके नेतृत्व में अन्य सहायकों की पूरी टीम होगी।

केंद्रीय प्रदूषण मंत्रालय के सलाहकार डॉ टीके जोशी के अनुसार 20 शहरों में स्वास्थ्य पर प्रदूषण के दुष्प्रभाव की रिपोर्ट तैयार करने को लेकर सारी रूपरेखा तैयार हो चुकी है। 31 अक्टूबर को फाइनल दौर की बैठक होने वाली है। इसके बाद बहुत ही जल्द इस पर काम शुरू हो जाएगा।

इस तरह से होगा अध्ययन
20 शहरों में बनाई गई टीम उस शहर के तमाम बड़े अस्पतालों सहित तमाम प्रमुख स्रोतों से यह आंकडे़ जुटाएगी कि पिछले कुछ सालों में वहां किस तरह की बीमारियां और मरीज बढ़े हैं। कौन से प्रदूषक तत्व मानव स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। किस स्थिति में प्रदूषण असमय मौत की वजह बन रहा है। इन आंकड़ों और जानकारी के आधार पर ही विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण किया जाएगा कि विदेशी एजेंसियों सहित डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट और आंकड़े कितने सही अथवा गलत हैं।

अपने वजन से 40 गुना अधिक भार उठाकर उड़ सकेगा रोबोट

 इस सूक्ष्म हवाई वाहन को वैज्ञानिकों ने फ्लाईक्रोटग्स नाम दिया है। वैज्ञानिकों ने छिपकली और अन्य कीड़ों से प्रेरित होकर इस रोबोट को डिजाइन किया है। इसके जरिये यह न केवल कई तरह की सतहों पर चल सकते हैं, बल्कि दीवार पर चिपकने में भी सक्षम हैं। वैज्ञानिकों द्वारा इसमें प्रयोग किए गए इस मेकैनिजम की वजह से यह रोबोट अपनी वजह से 40 गुना अधिक वजन उठा सकता है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रोबोट दरवाजों का हैंडल खोलने, कैमरा और पानी की बोतले उठाने में सक्षम है। इसकी इन खूबियों के कारण किसी आपदा की स्थिति में इसका प्रयोग बचाव कार्यों में किया जा सकता है।

वर्तमान में मौजूद रोबोट से बेहतर
शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तक इस तरह के जो रोबोट विकसित किए गए हैं, वे केवल अपने वजन से दो गुना भार ही उठा सकते हैं। अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के छात्र मैथ्यु एसट्रा कहते हैं, हमने हवाई वाहन में एयरोडायनमिक बलों को जोड़ कर परिणाम देखा तो सामने आया कि छोटा आकार और कम वजन होने के बावजूद इससे बहुत अधिक वजन उठाया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रोबोट को छोटा बनाने का उद्देश्य ही यह है कि यह किसी ऐसी जगह पर पहुंचकर लोगों को राहत सामग्री दे सके, जहां इंसानों का आसानी से पहुंचाना संभव न हो।

तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था में शामिल हो रहा बांग्‍लादेश

 भौगोलिक सरहदें संस्कृति-सभ्यता को नष्ट नहीं कर सकतीं। जो राष्ट्र अपनी जड़ों को भूलने का प्रयास करते हैं वे पाकिस्तान जैसे नाकाम देशों में शामिल हो जाते हैं और जो अपने अतीत को सहेजते हैं वे भारत और बांग्लादेश जैसे सफल बनने की राह पर होते हैं। बांग्लादेश दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। बीते दशक में बांग्लादेश ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर आर्थिक प्रगति की है, वहीं धार्मिक नीति को समावेशी विकास व सामाजिक न्याय से संबद्ध कर अल्पसंख्यकों को आगे बढ़ने के व्यापक अवसर दिए हैं। दरअसल इस साल दुर्गा पूजा के अवसर पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ढाका में स्थित प्रसिद्ध ढाकेश्वरी मंदिर को करीब 50 करोड़ टका की कीमत की जमीन देने की घोषणा कर यह संदेश दिया कि तरक्की और स्थायित्व के लिए सभी का सर्वागीण विकास होना चाहिए। प्रधानमंत्री शेख हसीना के अनुसार समानता, सौहार्दता और परस्पर धार्मिक सद्भाव से ही देश मजबूत हो रहा है और सफलता की ओर बढ़ रहा है।


भरोसा जीतने का प्रयास
इस्लामिक राष्ट्र होने के बावजूद बांग्लादेश में हिंदुओं का भरोसा जीतने का सरकार का प्रयास जारी है और मौजूदा सरकार ने इस बार देशभर में 30 हजार से ज्यादा दुर्गा पूजा पंडालों में पूजा उत्सव के शांति प्रिय आयोजन सुनिश्चित कर यह संदेश देने की कोशिश भी की है कि धर्म किसी का भी व्यक्तिगत अधिकार है, लेकिन त्योहार का संबंध सबसे होता है। भारतीय उपमहाद्वीप में बहुसंस्कृतिवाद आचरण और व्यवहार में रहा है और बांग्लादेश ने इसे अपनी नीतियों में लागू करने का प्रयास किया है। बांग्लादेश की मौजूदा अवामी लीग सरकार धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बढ़ावा देती रही है और उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कुछ सालों पहले तक दुनिया के पिछड़े देशों की सूची में शामिल बांग्लादेश की जीडीपी इस समय बढ़कर 7.86 प्रतिशत तक पहुंच गई है। आने वाले साल में यह आठ प्रतिशत तक होने की उम्मीद है।

समाज की बंदिशों को तोड़कर जिसने ठुमरी को दिया नया मुकाम वह थीं गिरिजा देवी

 ठुमरी की रानी के नाम से मशहूर गिरिजा देवी संगीत की दुनिया का जाना-माना चेहरा थीं। बीते वर्ष आज ही के दिन वह हम सभी को अलविदा कह गई थीं। 1929 में बनारस में जन्म लेने वाली गिरिजा ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। वह ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां पर गाना और बजाना सही नहीं माना जाता था। इसके बाद भी उन्होंने समाज की इन दायरों को लांघकर अपने लिए अलग मुकाम तैयार किया। गिरिजा को उनके चाहने वाले प्यार से अप्पा जी कहकर बुलाते थे गिरिजा देवी बनारस घराने से गाती थीं और पूरबी आंग ठुमरी शैली परंपरा का प्रदर्शन करती थीं। गिरिजा ने अर्द्ध शास्त्रीय शैलियों जैसे कजरी, होली, चैती को अलग मुकाम दिया। वह ख्याल, भारतीय लोक संगीत और टप्पा भी बहुत ही शानदार तरीके से गाती थीं।


एक परिचय
प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मविभूषण गिरिजा देवी का जन्म आठ मई, 1929 को कला और संस्कृति की प्राचीन नगरी वाराणसी (तत्कालीन बनारस) में हुआ था। उनके पिता रामदेव राय जमींदार थे। उन्होंने पांच वर्ष की आयु में ही गिरिजा देवी के लिए संगीत की शिक्षा की व्यवस्था कर दी थी। गिरिजा देवी के प्रारंभिक संगीत गुरु पंडित सरयू प्रसाद मिश्र थे। नौ वर्ष की आयु में पंडित श्रीचंद्र मिश्र से उन्होंने संगीत की विभिन्न शैलियों की शिक्षा प्राप्त की। इस अल्प आयु में ही एक हिंदू फिल्म 'याद रहे' में उन्होंने अभिनय भी किया था।

इमरान खान की सऊदी यात्रा पर आखिर क्‍यों है भारत की पैनी नजर, जानें पूरा मामला

 

पाकिस्‍तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान की सऊदी अरब की यात्रा पर भारत की पैनी नजर है। इमरान की ये यात्रा ऐसे वक्‍त पर हो रही है, जब सऊदी के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्‍या को लेकर पूरी दुनिया में सऊदी अरब की किरकिरी हो रही है। एेसे में एक सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर ऐसे माहौल में इमरान सऊदी की यात्रा पर क्‍यों गए। आखिर, इमरान की रियाद यात्रा को लेकर क्‍या है राजनयिक निहितार्थ। इमरान की सऊदी यात्रा से भारत का क्‍या है लिंक। इसके अलावा यह भी जानने कि कोशिश करेंगे कि आखिर पाकिस्‍तान किस आधार पर सऊदी से बेहतर संबंध होने का दावा करता रहा है। किन मौके पर पाक ने सऊदी का साथ दिया। आदि-आदि।

सऊदी-भारत की निकटता से आकुल हुआ पाक 
शीतयुद्ध के बाद भारत और सऊदी अरब के साथ संबंध गहरे हुए हैं। दोनों देश एक दूसरे के निकट आए है। सऊदी के साथ भारत की निकटता पाकिस्‍तान के लिए चिंता का विषय है। दरअसल, शीतयुद्ध के दौरान भारत-पाकिस्‍तान के बीच उत्‍पन्‍न हुए विवादों में सऊदी अरब ने हमेशा पाक का ही साथ दिया। इस दौरान उसके पाकिस्‍तान के साथ दोस्‍ताना संबंध रहे हैं। लेकिन शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भारत-सऊदी अरब के रिश्‍तों में सुधार आया।

राजधानी, शताब्‍दी को भी मात देगी भारत की हाईस्‍पीड ट्रेन-18

 भारत की पहली पूर्ण स्वदेशी और स्वचालित ट्रेन अगले हफ्ते से ट्रैक पर दौड़ने के लिए तैयार है। ट्रेन-18 नामक यह ट्रेन बिना इंजन (लोकोमोटिव) के चलेगी। इसका ट्रायल अगले हफ्ते शुरू होने की संभावना है। बुलेट ट्रेन की तरह दिखने वाली यह ट्रेन राजधानी और शताब्दी से तेज रफ्तार में चलेगी और यात्रा में 10 से 15 फीसद समय कम लगेगा। इसके हर कोच में एयर कंडीशनर और कैमरे लगे होंगे। डिजाइन से लेकर ब्रेक सिस्टम तक इसके निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। 100 करोड़ रुपये की लागत वाली ट्रेन-18 दुनियाभर की आधुनिक और लक्जरी ट्रेनों को मात देगी।


1.70 अरब रुपये की बचत

ट्रेन-18 का निर्माण मेक इन इंडिया मुहिम का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था। विदेशी तकनीक का सहारा लिए बिना भारत में निर्माण की वजह से तकरीबन 1.70 अरब रुपये की बचत हुई है। ट्रेन के लिए सिर्फ ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रांसफॉर्मर्स और सीटें विदेश से आयात की गईं।

घटेगी लागत
इंडियन रेलवे के लिए ट्रेन-18 का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने किया है। इसके जनरल मैनेजर सुधांशु मणि के मुताबिक अगली आधुनिक ट्रेन मार्च, 2019 तक तैयार होगी। इस तरह की कई ट्रेनों का निर्माण होने पर लागत घट जाएगी।

शताब्दी रूट पर चलेगी
इस ट्रेन का परीक्षण 160 किमी प्रति घंटा रफ्तार पर मुरादाबाद-बरेली और कोटा- सवाई माधोपुर में अगले महीने किया जाएगा। फिलहाल ये शताब्दी व राजधानी रूट के लिए तैयार की गई है और दिल्ली-भोपाल, चेन्नई-बेंगलुरु व मुंबई-अहमदाबाद रूट पर चलेगी। जनवरी, 2019 तक इसके लांच होने की उम्मीद है।

दोगुनी क्षमता
तेज रफ्तार होने की वजह से ट्रेन-18 में शताब्दी और राजधानी की तुलना में समान रूट की यात्रा में भी 10 से 15 फीसद कम समय लगेगा। सामान्य ट्रेन के मुकाबले इसकी एक्सेलेरेशन (गति वृद्धि) क्षमता 50 फीसद अधिक होगी। रफ्तार पर नियंत्रण के लिए स्मार्ट ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है।

जानें, देश की शक्तिशाली सेना के लिए कितना अहम है इजराइल, मजबूत हुई दोस्‍ती

 शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भारत और इजरायल एक दूसरे के निकट आए हैं। खासकर 1990 के मध्य से दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध मजबूत हुए हैं। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण से लेकर सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में इजराइल की विशेष योगदान रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत सालाना करीब सौ अरब रुपये के सैन्य साजो-सामान इजराइल से आयात करता है। ऐसे में यह कहना लाजमी है कि भारत और इसराइल के बीच सैन्य कारोबार का भविष्य काफी सुनहरा है। आइए जानते हैं भारत-इजराइल संबंधों का क्या रहा है इतिहास। इसके साथ यह भी जानेंगे कि इजराइल की मदद से कैसे मजबूत हुई हमारी सेना।


मजबूत हुई देश की सेना
1999 में कारगिल युद्ध के दौरान दोनों देशों और निकट आए। इस संकट की घड़ी में उसने भारत की मांग पर भरोसेमंद हथियारों की आपूर्ति की थी। युद्ध के दौरान इजराइल ने भारत को लेजर गाइडेड बम और मानव रहित वाहन दिए थे। इससे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ा है। भारत अभी सरहदों पर निगरानी के लिए इजराइल निर्मित 176 ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें 108 इजराइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री (आईएआई) सर्चर हैं, जबकि 68 बिना शस्त्र वाले हेरान एक एयरक्राफ़्ट हैं। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पास आईएआई निर्मित हार्पी ड्रोन्स भी हैं।

दुर्लभ पक्षी

 उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शोर-शराबे से बिल्कुल दूर रहने वाले दुलर्भ पक्षी अपने छह माह के प्रवास के लिए मध्य हिमालय की गोद में पहुंचने लगे हैं। इन पक्षियों के सबसे पसंदीदा स्थल खलिया टॉप का कलरव पर्यटकों को मुग्ध करने लगा है। इस क्षेत्र में मोनाल के बाद अब ट्रैगोपान बर्ड वॉचिंग के लिए सबसे आकर्षण का केन्द्र बना है। हिमरेखा के पास रहने वाले ये पक्षी शीतऋतु में शिखर से उतर कर इतने करीब आ जाते हैं लोग सहजता से इनका दीदार कर सकें।


मुनस्यारी में यहां बना ट्रैगोपान का बसेरा
ट्रैगोपान मुनस्यारी के कालामुनि, बिटलीधार, पातलथौड़ को अपना बसेरा बनाने लगे हैं। उच्च हिमालय में हिमरेखा के निकट रहने वाले और शीतकाल में अधिकतम 22 सौ मीटर की ऊंचाई तक बसेरा बनाने वाले इन पक्षियों के चलते मध्य हिमालय की इस उंचाई पर पक्षियों का संसार बदल जाता है।

वोटिंग के संदेश को लेकर यहां 30 हजार लोगों ने लगाई दौड़

  28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जहां पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हैं। वहीं निर्वाचन आयोग भी अपनी तैयारी कर रहा है। कोशिश लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में लोगों की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इसी के तहत आज शहर में इंदौर वोट मैराथन का आयोजन किया गया। मैराथन के जरिए लोगों को मतदान के प्रति जागरुक करने की कोशिश की गई। सुबह 6 बजे से ही लोग नेहरु स्टेडियम में मैराथन के लिए जुटने लगे थे।


पलासिया से शुरू हुई ये दौड़ नेहरू स्टेडियम पर आकर खत्म हुई। इस मैराथन में तीस हजार से ज्यादा नागरिकों ने उत्साह और उमंग के साथ दौड़ लगाई। मेरा वोट, मेरी आवाज के साथ मतदान का संदेश दिया गया। वहीं लोगों ने भी अपने वोट का अधिकार इस्तेमाल करने की शपथ ली। मैराथन के मार्ग में गीत-संगीत के जरिए प्रतिभागियों में जोश जगाने के लिए एफ.एम. रेडियों के स्टॉल भी लगाए गए थे। वहीं नेहरू स्टेडियम में जुंबा के साथ ही प्रतिभागियों ने जुंबा भी किया।

इस मैराथन दौड़ में सबसे आगे दिव्यांग थे। उनके लिए अलग से छोटा रूट बनाया गया था। दिव्यांगों के लिए दौड़ आरंभ होने के पश्चात 5 किलोमीटर तक दौड़ने वाले समूह को फ्लैग ऑफ दिखाया गया। यह दौड़ 500 -500 के जत्थों में शुरू हुई। इसके बाद 12000 प्रतिभागियों ने दो किमी की दौड़ लगाई।

असीमित संभावनाओं का पिटारा है क्वांटम कंप्यूटिंग, बदल कर रख देगा दुनिया

 टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से विस्तार हो रहा है। कुछ समय पहले तक असंभव लगने वाली चीजें आज प्रौद्योगिकी की मदद से सरलता से हो सकती हैं। एक समय कंप्यूटर के विकास ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया था। अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने चिकित्सा से लेकर हथियार तक हर क्षेत्र में कंप्यूटर और रोबोट के इस्तेमाल को नया आयाम दिया है।


पारंपरिक कंप्यूटर की दुनिया में इस प्रगति के समानांतर एक और शोध चल रहा है, जिसका नाम है क्वांटम कंप्यूटिंग। भौतिकी के क्वांटम सिद्धांत पर काम करने वाली इस कंप्यूटिंग में अपार संभावनाएं देखी जा रही हैं। शोध के लिहाज से किसी के भी लिए यह शानदार विकल्प हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक पूर्ण विकसित क्वांटम कंप्यूटर की क्षमता सुपर कंप्यूटर से भी ज्यादा होगी।

क्या है क्वांटम कंप्यूटिंग?
क्वांटम कंप्यूटिंग को कंप्यूटर का भविष्य माना जा रहा है। पारंपरिक कंप्यूटर 'बिट' पर काम करते हैं, वहीं क्वांटम कंप्यूटर में प्राथमिक इकाई 'क्यूबिट' होती है। पारंपरिक कंप्यूटर में हर बिट की वैल्यू 0 (जीरो) या 1 (वन) होती है। कंप्यूटर इस जीरो और वन की भाषा में ही हर कमांड को समझता है और उसके अनुरूप कार्य करता है।

क्या है इसकी खासियत
वहीं क्यूबिट यानी क्वांटम बिट एक साथ जीरो और वन दोनों को स्टोर कर सकता है। इसका मतलब यह है कि दो क्यूबिट में एक साथ चार वैल्यू रह सकती है। यही खूबी इसे खास बनाती है। एक साथ चार वैल्यू रखने के कारण इसकी क्षमता और स्पीड पारंपरिक कंप्यूटर से ज्यादा होगी। क्वांटम कंप्यूटर अभी अवधारणा के स्तर पर ही है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह पारंपरिक कंप्यूटिंग से बने उन सभी एनक्रिप्शन को तोड़ने में सक्षम होगा, जिनमें डाटा सुरक्षित रखे जाते हैं।

चंद्रयान-2 में ऑरबाइटर और लैंडर के अलावा एक रोवर भी होगा

 चंद्रयान-2 के लिए अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) ने तीन पेलोड विकसित किए हैं। चंद्रयान-1 के विपरीत इसमें एक ऑरबाइटर, एक लैंडर और एक रोवर होगा। बता दें कि भारत का चांद के लिए पहला अभियान अक्टूबर 2008 में गया था। चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण अगले साल जनवरी और मार्च में होने की उम्मीद है।


पीआरएल के निदेशक डॉ. अनिल भारद्वाज ने बताया, ‘पीआरएल ने चंद्रयान-2 के लिए तीन पेलोड विकसित किए हैं। ऑरबाइटर में पीआरएल द्वारा विकसित एक सोलर एक्स-रे मानीर्टंरग लगा हुआ है। यह सूर्य से आने वाली एक्स-रे और चंद्रमा की सतह पर पैदा होने वाली एक्सरे की निगरानी करेगा। वह पीआरएल के मुख्य कैंपस में इक्वेटोरियल एरोनोमी पर आयोजित 15वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी से इतर मीडिया से बात कर रहे थे। पीआरएल अंतरिक्ष विभाग की ही एक इकाई है, जिसकी स्थापना 1947 में की गई थी।

उन्होंने बताया, ‘लैंडर पर ‘चंद्राज सरफेस थरमोफिजिकल एक्सपेरिमेंट’ (चैस्ट) होगा। यह ऐसा उपकरण है जो चांद की सतह के नीचे जाकर तापमान मापेगा। यह चांद पर लैंडर के उतरने के बाद काम करेगा।’ चंद्रयान-2 अभियान के दौरान चांद की सतह पर किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों में से एक चैस्ट है।

इस तरह करेगा काम
भारद्वाज ने बताया कि चांद की सतह पर लैंडर के उतरने के बाद रोवर उससे निकलेगा और यह सतह पर इधर-उधर घूमेगा। पीआरएल ने उसके लिए एक विशेष उपकरण विकसित किया है जिसका नाम ‘अल्फा पार्टिकल एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर’ है। इसका डिजाइन चांद की सतह पर मौजूद विभिन्न तत्वों और रासायनिक यौगिकों की पहचान के लिए किया गया है।

जानिए कौन हैं सीबीआइ के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव, 10 खास बातें

 सीबीआइ के चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मचे घमासान के बीच ज्वाइंट डायरेक्टर एम नागेश्वर राव को सीबीआइ का अंतरिम निदेशक बनाया गया है। अग्रिम आदेशों तक अब सीबीआइ का कामकाज नागेश्वर राव ही देखेंगे। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि दोनों अफसरों के बीच अभी खींचतान लंबी चलेगी।



1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी नागेश्वर राव की पहचान एक तेज-तर्रार अफसर की है। वह तेलंगाना के वारंगल जिले के रहने वाले हैं। आइए आपको बताते हैं नागेश्वर राव से जुड़ी 10 बड़ी बातें...!

1. नागेश्वर राव ओडिशा कैडर से 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं।

2. नागेश्वर राव की पहली पोस्टिंग 1989-90 में ओडिशा के तलचर में उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में हुई थी, जहां उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर बेहतरीन प्रदर्शन किया। ओडिशा में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान ही उन्होंने अवैध खनन के लिए बदनाम तलचर में अपराध पर लगाम लगाकर पहचान बनाई।

3. ओडिशा के चार जिलों- मयूरभंज, नबरंगपुर, बरगढ़ और जगत्सिंहपुर में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में सेवा करने के अलावा, रेलवे राउरकेला तथा कटक में एसपी और क्राइम ब्रांच में एसपी के पद भी तैनात रहे।

4. कहा जाता है कि नरेश्वर राव ने मयूरभंज जिले में 'अपराध-पुलिस-अदालत-जेल-अपराध' के दुष्चक्र से लोढा (एक अधिसूचित आपराधिक जनजाति) को आजादी दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

5. वह 1996 में जगत्सिंहपुर जिले में दुष्कर्म के मामले की जांच करते समय डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग करनेवाले ओडिशा के पहले अधिकारी थे।

6. नागेश्वर राव तब क्राइम ब्रांच में एसपी थे, जब 1991 की हूच त्रासदी में बेलु दास ने कटक में 200 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी।

7. नागेश्वर राव ने ओडिशा अग्नि सेवा के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया। राव को चक्रवात फैलिन (2013) और हुदहुद (2014) के दौरान बेहतरीन काम के लिए मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

8. पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चिटफंड घोटाले की जांच करने वाले नागेश्वर राव को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। राव को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक, असाधारण सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और ओडिशा के गवर्नर पदक दिया जा चुका है।

9. नागेश्वर राव तेलंगाना के वारंगल जिले के मंगपेट गांव से हैं। वह उस्मानिया विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में परास्नातक हैं। 1986 में आइपीएस में शामिल होने से पहले उन्होंने आईआईटी-मद्रास में अनुसंधान कार्य किया। IIT से शोध करने के दौरान वह सिविल की तैयारी भी कर रहे थे।

10. नागेश्वर राव को मणिपुर में विद्रोही गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भी जाना जाता है। यहां सीआरपीएफ के डीआइजी (ऑपरेशंस) के रूप में उन्होंने विद्रोहियों की कमर तोड़ दी।

यूथ ओलिंपिक / किसान के बेटे आकाश ने रजत जीता, ओलिंपिक खेलों में पहली बार भारत को चांदी दिलाई

 आकाश मलिक ने यूथ ओलिंपिक गेम्स की तीरंदाजी स्पर्धा में रजत पदक जीता। ओलिंपिक खेलों में भारत ने पहली बार तीरंदाजी में रजत पदक जीता है। इससे पहले सीनियर या जूनियर किसी भी ओलिंपिक में भारत ने तीरंदाजी में रजत पदक नहीं जीता था। ओलिंपिक में तीरंदाजी में भारत का यह दूसरा पदक है। 2014 नानजिंग यूथ ओलिंपिक में अतुल वर्मा ने तीरंदाजी में कांस्य पदक जीता था। किसान के बेटे आकाश फाइनल में अमेरिका के ट्रेनटॉन कोल्स से 6-0 से हार गए। भारत के अब इस टूर्नामेंट में तीन स्वर्ण, नौ रजत और एक कांस्य पदक हो गए हैं।


क्वालिफिकेशन में पांचवें स्थान पर रहे थे आकाश
15 साल के आकाश क्वालिफिकेशन में पांचवें, जबकि कोल्स 15वें स्थान पर रहे थे। हालांकि, हरियाणा के रहने वाले आकाश फाइनल में अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। तीनों सेट में उनका स्कोर कोल्स से कम रहा।

आकाश ने पहले सेट में 26, दूसरे में 27 और तीसरे में 26 अंक बनाए। वहीं, कोल्स ने पहले सेट में 28, दूसरे में 29 और 28 अंक बनाए। इससे पहले सेमीफाइनल में आकाश ने बेल्जियम के सेना रोस को 6-0 से हराया था।

आकाश इससे पहले तुर्की की सेलिन साटिर की जोड़ी मिक्स्ड इंटरनेशनल टीम इवेंट में आठवें स्थान पर रहे थे। भारत और तुर्की खिलाड़ियों की जोड़ी क्वार्टर फाइनल में थाईलैंड के एथ्थीवट सोइथोंग और अर्जेंटीना की अगस्टानिया सोफिया गियाननासियो की जोड़ी से हार गए।

मुकाबले के बाद आकाश ने कहा, 'मैंने तेज हवा के लिए तैयारी की थी, लेकिन यहां वह उससे भी तेज थी।' उन्होंने कहा, 'रजत पदक जीतकर मुझे अच्छा लग रहा है, लेकिन सच यह है कि मैं स्वर्ण पदक जीतने से चूक गया।'

छह साल पहले तीरंदाजी सीखना शुरू किया था
आकाश ने छह साल पहले ही तीरंदाजी सीखनी शुरू की थी। मंजीत मलिक ने एक ट्रायल के दौरान उनका चयन किया था। फिजिकल ट्रेनर से कोच बने मंजीत ने उसके बाद आकाश की प्रतिभा निखारना शुरू की।

मंजीत ने बताया, 'वह बहुत शांत और स्थिर है। मैं सोचता हूं कि वह बहुत तेजी से तीर शूट कर सकता है। वह बहुत आत्मविश्वास के साथ तीर चलाता है। जब फाइनल शुरू हुआ तब बारिश हो रही थी।'

आकाश 2014 में विजयवाड़ा में हुई नेशनल अंडर-14 आर्चरी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली ब्वायज टीम का हिस्सा थे। उन्होंने 2017 में यूथ ओलिंपिक क्वालिफाइंग में स्वर्ण पदक जीता था।

ब्रह्मोस के मुकाबले चीन ने सुपरसोनिक मिसाइल का किया सफल परीक्षण

 एक तरफ भारत में परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम राफेल विमान पर विवाद जारी है, वहीं पड़ोसी देश चीन की एक खनन कंपनी ने एक सुपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण करने का दावा किया है। बताया जाता है कि भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम से बनी ब्रह्मोस मिसाइल के मुकाबले में इसे तैयार किया गया है। चीनी मीडिया का दावा है कि पाकिस्तान अब यही एचडी-1 सुपरसोनिक मिसाइल चीन से खरीदने जा रहा है।


चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार विगत सोमवार को उत्तरी चीन के एक गुप्त स्थान पर इस मिसाइल का शक्ति परीक्षण किया गया। दक्षिण चीन स्थित ग्वांगदोंग होंडा ब्लास्टिंग कंपनी के जारी बयान के अनुसार परीक्षण के दौरान सभी पैमानों पर एचडी-1 सुपरसोनिक मिसाइल खरी उतरी है। बीजिंग के सैन्य विशेषज्ञ वी डोंजू ने बताया कि खनन कंपनी ने स्वतंत्र रूप से एचडी-1 मिसाइल में निवेश कर उसे विकसित किया है। इस मिसाइल को युद्धक विमानों और युद्धपोतों में तैनात किया जा सकता है। इस मिसाइल में चीनी कंपनी ने 18.8 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।

गोल्बल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तान अब चीन की इस नई मिसाइल को खरीद सकता है, जिसे भारत के ब्रह्मोस से बेहतर बताया जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञ वी ने बताया कि सुपरसोनिक गति से एंटी मिसाइल प्रणाली को तोड़ने में सक्षम इस मिसाइल में पाकिस्तान और मध्यपूर्व के देश रुचि दिखा सकते हैं। इस मिसाइल में लांच, कमांड, कंट्रोल, लक्ष्य को भेदने के संकेत और समग्र सपोर्ट सिस्टम भी है।

वी ने बताया कि मिसाइल के सालिड फ्यूल रेमजेट की अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले कम खपत होगी। यह हल्की मिसाइल अधिक तेजी से अधिक दूर तक जा सकती है। चीन सरकार की मंजूरी के बाद यह खनन कंपनी एचडी-1 मिसाइलों का बड़े पैमाने पर निर्यात करने के लिए समझौते पर दस्तखत करेगी। वी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में सुपरसोनिक मिसाइलों के अधिक विकल्प मौजूद नहीं हैं।

पीएचडी के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों को मिलाकर बनेगी पात्रता सूची

 पीएचडी और एमफिल में प्रवेश से जुड़े नियमों में सरकार अब एक और बदलाव की तैयारी में है। इसके तहत इनमें प्रवेश के लिए अकेले इंटरव्यू ही चयन का आधार नहीं बनेगा, बल्कि इसके साथ लिखित परीक्षा के भी अंकों को जोड़कर योग्यता सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार होगी। जिसके आधार पर प्रवेश देने की योजना है।


खासबात यह है कि अभी भी इसमें प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा व इंटरव्यू दोनों ही आयोजित की जाती है, लेकिन लिखित परीक्षा को पास करने के बाद सिर्फ इंटरव्यू तक ही पहुंच सकते है, जबकि प्रवेश के लिए इंटरव्यू में अच्छे नंबर पाना जरूरी है। इस व्यवस्था को लेकर छात्रों के एक बड़े वर्ग में असंतोष है। जिसकी शिकायत भी उन्होंने दर्ज कराई थी। इसके बाद ही सरकार की ओर से इसे लेकर मंथन शुरु किया गया।

छात्रों की शिकायत थी, कि मौजूदा व्यवस्था में लिखित परीक्षा में अच्छे अंक मिलने के बाद भी उन्हें प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। छात्रों ने इंटरव्यू टीम पर भी भेदभाव करने के आरोप लगाए थे।

सूत्रों की मानें तो सरकार ने छात्रों की इन्हीं शिकायतों को देखते हुए इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया है। इसके तहत लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों को जोड़कर मेरिट लिस्ट के आधार पर प्रवेश देने की योजना बनाई है।

नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा के लिए 70 फीसद अंक नियत रहेंगे, जबकि इंटरव्यू के लिए 30 फीसद अंक रहेंगे। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस पूरी योजना को लेकर मंत्रालय और यूजीसी के बीच चर्चा हो चुकी है। दोनों ने ही इस बदलाव को लेकर अपनी सहमति दे दी है। ऐसे में इसे लेकर जल्द ही नया नोटीफिकेशन जारी होने की उम्मीद है।

कैंसर जैसी बीमारियों का छोटे शहरों में सस्ता इलाज, नीति आयोग ने जारी किया दिशानिर्देश

 नीति आयोग ने जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में कैंसर जैसी 'नॉन कम्युनिकेबल' बीमारियों का इलाज उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। आयोग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिशा-निर्देश और मॉडल कंसेसन एग्रीमेंट (एमसीए) जारी किए हैं। राज्यों ने अगर इन पर अमल किया तो कैंसर, डाइबिटीज, स्ट्रॉक और दिल की बीमारी जैसी कर्ज मजरें का इलाज छोटे कस्बों के जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में हो सकेगा।


नीति आयोग में स्वास्थ्य संबंधी मामलों के प्रभारी सदस्य डा. वी के पॉल ने ये दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि पीपीपी मॉडल में इलाज की लागत आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाली लागत के बराबर ही होगी।

आयोग ने 'नॉन कम्युनिकेबल डिजीज' के इलाज में पीपीपी संबंधी जो दिशानिर्देश जारी किए हैं उसमें चार पीपीपी मॉडल सुझाए गए हैं। पहला मॉडल 'मैनेजमेंट कान्ट्रैक्ट' का है जिसके तहत जिला स्तरीय सरकारी अस्पताल के बने हुए भवन निजी पार्टी को दिया जा सकेगा और निजी साझीदार वहां उपकरण और डाक्टरों की तैनाती कर देगा। यह 10 से 15 वर्ष की अवधि के लिए होगा और इसके तहत जो भी लाभार्थी इलाज कराएंगे उस पर आने वाले खर्च का एक निश्चित हिस्सा सरकार निजी कंपनी को भुगतान करेगी।

दूसरा मॉडल 'परचेजिंग ऑफ सर्विसेज' का है जो एक से तीन वर्ष की अवधि के लिए होगा और यह स्वास्थ्य बीमा की तर्ज पर काम करेगा। इसका मतलब यह है कि लोग नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज का इलाज प्राइवेट से करा सकेंगे और इसके ऐवज में सरकार उन्हें निश्चित भुगतान करेगी।

तीसरा मॉडल 'बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर' यानी बीओटी मॉडल है जिसके तहत सरकार प्राइवेट पार्टी को जमीन देगी। निजी कंपनी इस पर अस्पताल बनाएगी और सरकार इसे व्यवसायिक रूप से लाभप्रद बनाने के लिए वाइविलिटी गैप फंडिंग देगी। इसके तहत समझौता 30 साल के लिए होगा

प्रगाढ़ होते जा रहे हैं रूस-पाक सैन्य संबंध, 21 अक्बूटर से 4 नवंबर तक करेंगे सैन्य अभ्यास

 अमेरिका के साथ बेहद करीबी रणनीतिक रिश्ते बनाने की तरफ तेजी से बढ़ रहा भारत शायद यह स्वीकार कर चुका है कि उसके सबसे पुराने मित्र देश रूस को भी अपने नए दोस्त बनाने का उतना ही अधिकार है। यही वजह है कि पिछले दिनों जब पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच बीच सालाना बैठक हुई तो उसमें रूस व पाकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग पर खास चर्चा नहीं हुई। इस बैठक के तकरीबन एक पखवाड़े के बाद यानी 21 अक्टूबर 2018 से रूस और पाकिस्तान के बीच अभी तक का सबसे आधुनिक सैन्य अभ्यास होने जा रहा है। दोनो देशों के बीच वर्ष 2016 के बाद से लगातार हर वर्ष सैन्य अभ्यास हो रहा है और इस साल के अभ्यास को अभी तक का सबसे आधुनिक माना जा रहा है।


रूस व पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों पर भारत आधिकारिक तौर पर यह कहता रहा है कि दोनों संप्रभू देश है और इन्हें किसके साथ दोस्ती रखनी है इसमें भारत कुछ नहीं बोलेगा। लेकिन रूस भारत की संवेदनाओं का ख्याल रखेगा। इस मुद्दे को पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में सेंट पीट्सबर्ग में हुई शिखर बैठक में उठाया था। इस बारे मे सोची (रूस) में मोदी-पुतिन शिखर वार्ता में भी बात हुई थी। सूत्रों के मुताबिक तब राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को आश्वस्त किया था कि पाकिस्तान के साथ उसके सैन्य रिश्ते बेहद शुरुआती दौर में है। भारत को इसको लेकर परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है। इसके बावजूद रूस की तरफ से बार बार यह संकेत दिया जाता है कि वह पाकिस्तान के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत बनाने को लेकर तैयार है। अगस्त में दोनो देशों के बीच नौ सेना के बीच सहयोग स्थापित करने को लेकर समझौता हुआ है।

भारत में बनेगी विश्व की सबसे ऊंची रेल लाइन, दिल्ली से लेह का सफर सिर्फ 20 घंटे में

 आने वाले वर्षों में दिल्ली से लेह (जम्मू-कश्मीर) का सफर ट्रेन से संभव हो सकेगा। इसके लिए उत्तर रेलवे ने काम भी शुरू कर दिया है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से लेह तक रेल लाइन बिछाने का सर्वे किया जा रहा है। तीन चरणों में होने वाले सर्वे का पहला चरण पूरा हो चुका है। सर्वे के बाद रेल लाइन बिछाने का काम शुरू होगा।


करीब 465 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चल सकेगी। इसके बाद दिल्ली से महज 20 घंटे में लेह का सफर संभव हो सकेगा। अभी सड़क मार्ग से जाने में कम से कम 40 घंटे लग जाते हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 83 हजार 360 करोड़ रुपये है। इस रेल लाइन पर यात्री 244 किलोमीटर का सफर सुरंग के अंदर करेंगे। इस पर 74 सुरंग बनेंगी, जिसमें सबसे लंबी 27 किलोमीटर की होगी।

दिल्‍ली में बैले फॉर्म की संपूर्ण रामलीला, देश-विदेश से देखने आते हैं लोग

 रामचरित मानस की चौपाइयों का भावपूर्ण गायन, पृष्ठभूमि में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन, अंग्रेजी में चल रहे उपशीर्षक, अद्भुत लाइटिंग, बैकग्राउंड म्यूजिक, रामकथा के घटनाक्रमों को साक्षात करते परिधान और आभूषण। डांस-ड्रामा के साथ होने वाली दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र की संपूर्ण रामलीला में शास्त्रीय व लोकनृत्यों की भाव- भंगिमाओं से श्रीराम की यात्रा परवान चढ़ती है। बता दें कि देश-विदेश से लोग बैले फॉर्म की इस संपूर्ण रामलीला को देखने आते हैं। यूं लगता है जैसे कुछ ही घंटों में देख लिया हो इस महाकाव्य के किरदारों का विराट स्वरूप...


अहिल्या की पत्थर बन गई भावनाओं को जिंदा करते हैं श्रीराम। सीता की अग्निपरीक्षा बताती है कि किसी भी स्त्री को अपने जीवन में अग्निपरीक्षा देनी ही होती है चाहे वह सीता ही क्यों न हो। हनुमान का उड़कर सागर पार करना द्योतक है इस बात का कि जिस काम की मन में ठान लें, वह काम होकर रहेगा। आज के संदर्भ में पाठ पढ़ाती रामलीला का क्रेज दशहरा आते ही बढ़ जाता है। श्रीराम भारतीय कला केंद्र की संपूर्ण रामलीला ‘राम’ कई मामलों में अनूठी है और सालों से दर्शकों पर अपना प्रभाव भी छोड़ रही है। विदेश में भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं। करीब 30 दिन 45 नर्तक स्टेज पर श्रीराम की लीला को प्रस्तुत करते हैं। मंचन के करीब 4 माह पहले रिहर्सल शुरू हो जाती हैं। इस साल की रामलीला पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित है।

34 साल से सर्वत्र, सर्वोत्तम सुरक्षा में तैनात NSG कमांडो, देश को है नाज

 देश की नौ स्पेशल फोर्सेज में से एक नेशनल सिक्योरिटी गार्डस का आज स्थापना दिवस है। एनएसजी आज अपना 34वां स्थापना दिवस मना रहा है। एनएसजी भारत की स्पेशल फोर्स में से एक है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है, जिसका मुख्य कार्य आतंकी गतिविधियों से देश के आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखना होता है। विश्व की टॉप पांच स्पेशल फोर्स में एनएसजी का नाम आता है।


क्यों और कब बनाने की ज़रूरत पड़ी
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानि एनएसजी, की स्थापना वर्ष 1984 में हुयी थी।यह वो वक्त था जब भारत के पंजाब राज्य में अलग खालिस्तान राज्य की मांग को लेकर एक आंदोलन चलाया जा रहा था। जिसकी वजह से समूचे पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो गया था। पंजाब में कानून व्यवस्था और आतंकी वारदातों को रोकने के लिए स्पेशल फोर्स की जरुरत महसूस हुई, जिसके बाद एनएसजी की स्थापना की गयी।

एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग
एनएसजी कमांडो काले रंग की ड्रेस पहनते हैं, जिसकी वजह से इन्हें ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है। एनएसजी कमांडो की शुरुआती 90 दिनों की ट्रेनिंग हरियाणा के मानेसर में होती है। इस ट्रेनिंग को पूरी करने वाले सैनिकों को नौ महीने की और ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके तहत उन्हे 26 पैमानों पर खरा उतरना होता है। इस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें ऊंचाई से छलांग लगाने के साथ तनाव के दौरान कार्य करने, निशाना लगाना की ट्रेनिंग दी जाती है। एनएसजी कमांडो को पार्कर और पेक्की-तिरसिया काली की तर्ज पर प्रशिक्षित किया हैं, जो कि फिलीपींस के मार्शल आर्ट का एक रूप है। नौ माह की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन्हें अगले दौर की ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग इनती कठिन होती है कि इसमें करीब 50 से 70 फीसद सैनिक बाहर निकल जाते हैं। एनएजी कमांडो को सीधे सिर पर गोली मारने की ट्रेनिंग दी जाती है।

देश की क्यूएस रैंकिंग से बाहर हुई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

 पहली बार देश के उच्च शिक्षा संस्थानों की जारी की गई क्यूएस रैंकिंग में एएमयू (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) अपना स्थान बनाने में नाकाम रही। इस रैंकिंग में देश के 15 शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है। एएमयू के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। क्योंकि इससे पहले विभिन्न एजेंसियों की रैंकिंग में एएमयू देश की टॉप-5 से टॉप-10 में शामिल रही है।


नाकामयाब रहे इंतजामिया के प्रयास
इंतजामिया का पूरा जोर यूनिवर्सिटी को देश की नंबर एक यूनिवर्सिटी बनाने पर है। पूर्व कुलपति जमीरउद्दीन शाह 2017 तक एएमयू को देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी बनाना चाहते थे लेकिन वह भी नाकाम रहे।

आईआईटी का रहा दबदबा
इस रैकिंग से पता चलता है कि कहां रिसर्च की बेहतर सुविधा और माहौल है? योग्यता वाले शिक्षक कहां हैं? रैंकिंग में आइआइटीज का दबदबा दिख रहा है। लिस्ट में आइआइटी मुंबई लिस्ट में टॉप पर है, तो दूसरे नंबर पर आइआइएस बेंगलुरु है। यूनिवर्सिटी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी सातवें पर, दिल्ली यूनिवर्सिटी आठवें नंबर पर, कोलकाता यूनिवर्सिटी 12 वें, जादवपुर यूनिवर्सिटी में 13 वें, मुंबई यूनिवर्सिटी 14वें और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी 15वें नंबर पर है।

30 की उम्र में हिमालय पर रचा इतिहास, 65 की आयु में लहरों पर रच रहीं दूसरा कीर्तिमान

 22 मई 1984 को एवरेस्ट फतह करने वाली भारत की पहली महिला पर्वतारोही बछेंद्री पाल इन दिनों ‘मिशन गंगे’ पर हैं। 40 सदस्यीय नाविक दल के साथ गंगा यात्रा पर निकलीं 65 वर्षीय बछेंद्री गंगा किनारे बसे गांवों-शहरों के लोगों से गंगा को निर्मल बनाने की अपील कर रही हैं। पांच अक्टूबर को उत्तराखंड के हरिद्वार से शुरू हुआ उनका अभियान कई शहरों व राज्यों से होते हुए 31 अक्टूबर को पटना में खत्म होगा।


यह पहली बार नहीं है कि टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (टीएसएएफ) की प्रमुख बछेंद्री पाल पर्यावरण बचाने के लिए किसी अभियान का नेतृत्व कर रही हैं। बछेंद्री ने 1994 में भी गंगा यात्रा अभियान चलाकर गंगा की स्वच्छता का संदेश दिया था। तब उन्होंने हरिद्वार से कोलकाता तक 2100 किलोमीटर की दूरी तय की थी। इस दौरान नदी में कई शव तैरते मिले, जिसे अभियान दल ने जमीन में दफनाया था। इसके पूर्व वह एवरेस्ट को ‘वेस्ट फ्री जोन’ (कचरामुक्त) बनाने के लिए भी लंबा अभियान चला चुकी हैं। परिणामस्वरूप आज एवरेस्ट अभियान पर जानेवाले हर पर्वतारोही को वापसी के समय रास्ते में पड़े कचरे को इकट्ठा कर लाना अनिवार्य कर दिया गया है।

यूथ ओलिंपिक / सूरज पवार ने रजत जीता, 5000 मीटर वॉक में पहली बार भारत को दिलाया पदक

 भारत 12वें स्थान पर, अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

रूस 47 मेडल्स के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर

ब्यूनस आयर्स. एथलीट सूरज पवार ने यहां यूथ ओलिपिंक गेम्स में 5000 मीटर वॉक (पैदल चाल) में भारत को रजत पदक दिलाया। वे इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीट हैं। भारत के इस टूर्नामेंट में अब 11 पदक हो गए हैं। इसमें तीन स्वर्ण, आठ रजत पदक शामिल हैं। वह पदक तालिका में 12वें स्थान पर है। यह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सूरज की इस जीत पर उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने ट्वीट कर

नवंबर में फिर होगी मोदी-जिनपिंग मुलाकात

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले चार वर्षों में दोनों देशों के बीच घटते-बढ़ते तनाव के बावजूद शीर्ष स्तर पर संवाद का सिलसिला थमने नहीं दिया है। असलियत में तनाव बढ़ने पर बातचीत के सिलसिले ने ज्यादा रफ्तार पकड़ी है।


इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए दोनों नेता अगले महीने अर्जेंटीना में जी-20 बैठक के इतर एक बार फिर द्विपक्षीय वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे। अप्रैल, 2018 में वुहान (चीन) में दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक वार्ता के बाद नवंबर में होने वाली मुलाकात तीसरी मुलाकात होगी। इसमें वुहान बैठक के दौरान किए गए फैसलों की समीक्षा की जाएगी।चीन के भारत में राजदूत लुओ झावहुई ने यहां एक कार्यक्रम में मोदी और जिनपिंग की भावी मुलाकात के बारे में बताया।

झावहुई ने भारत और चीन की मदद से अफगानिस्तान के राजनयिकों को विशेष प्रशिक्षण दिए जाने के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। इस कार्यशाला के बारे में भी वुहान बैठक के दौरान ही सहमति बनी थी कि दोनों देश अफगानिस्तान में संयुक्त तौर पर विकास और शांति को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएंगे।

माना जाता है कि भारत और चीन संयुक्त तौर पर अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए भविष्य में और भी बहुत कुछ करने के बारे में बातचीत कर रहे हैं। इसकी शुरुआत वहां के राजनयिकों को प्रशिक्षण देने के साथ की गई है। आगे संयुक्त तौर पर विकास परियोजनाओं को भी शामिल किया जा सकता है।

अफगानिस्तान राजनायिकों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाएंगे भारत-चीन

 भारत और चीन सोमवार को अफगानिस्तान के राजनायिकों के लिए संयुक्त ट्रेनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया। चीन के राजदूत ने कहा कि अफगानिस्तान युद्ध के बाद से अशांत क्षेत्र बना हुआ है। वहां अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा सकता है।


एशिया के दो बड़े देशों भारत और चीन के बीच पहली बार इस तरह की पहल की गई है। अभी तक दोनों देश नेपाल, श्रीलंका और मालदीव में अपना प्रभाव बढ़ाने को लेकर आमने सामने आते रहे हैं।

इससे पहले भी अफगानिस्तान के मामले में भारत और चीन अलग-अलग रुख अपनाते रहे हैं। चीन अपने मित्र पाकिस्तान का साथ देता रहा है। चीन तालिबानी विद्रोह को खत्म कर अफगानिस्तान को स्थिर करना चाहता है।

वहीं, भारत की ओर से अरबों डॉलर का निवेश अफगानिस्तान में किया गया है। इसके अलावा भारत अफगान सेना को ट्रेनिंग भी देती है ताकि अफगानिस्तान सरकार, तालिबान के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ सके।

मध्‍यप्रदेश के मांडू में मिली 18वीं शताब्दी की कृष्ण की मूर्ति

 मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक नगरी मांडू में दरिया खां महल स्मारक में खोदाई के दौरान भगवान कृृष्ण की 18वीं शताब्दी की मूर्तिं मिली है।


काले पत्थर से निर्मिंत मूर्तिं का धड़ और गर्दन खंडित हैं। हाथ भी खंडित हैं। करीब दो फीट लंबाई की इस मूर्तिं का ऐतिहासिक महत्व पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) परीक्षण कर रहा है। खंडित मूर्तिं में कृृष्ण मुरली वादन कर रहे हैं।

एएसआई के स्थानीय अधिकारी प्रशांत पाटणकर ने बताया कि विशेषज्ञ मूर्ति को लेकर अध्ययन कर रहे हैं। इसके बाद मूर्ति के काल का सही निर्धारण किया जा सकेगा। उधर, राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारी डॉ. आरसी यादव ने बताया कि कृृष्ण की मूर्तिं 18वीं शताब्दी की है।

पाषाण की मूर्तिं ग्रेनाइट या बेसाल्ट की हो सकती है। 18वीं शताब्दी में इस तरह की मूर्तिं का विशेष रूप से चलन रहा है। दरिया महल का निर्माण 15वीं शताब्दी में हुआ था। दो दिन पहले ही इसके पुनर्निर्माण को लेकर यहां खोदाई की गई थी।

सवा सौ साल पुरानी अमेरिकी रिटेल कंपनी सियर्स दिवालिया

 अमेरिका में कई पीढ़ियों को रिटेल शॉपिंग का अनुभव देने वाली प्रमुख कंपनी सियर्स ने दिवालिया प्रक्रिया में जाने का फैसला किया है।


1886 में शुरू हुई यह कंपनी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों के दौर में अस्तित्व बचाने का प्रयास कर रही है। कंपनी ने अपने करीब 150 डिपार्टमेंटल स्टोर बंद करने की घोषणा की है।

शुरुआत में मेल ऑर्डर कैटलॉग कंपनी के रूप में काम करने वाली सियर्स का साम्राज्य 20वीं सदी के मध्य में पूरे उत्तरी अमेरिका में फैल गया था।

लेकिन अमेजन और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के आने के बाद पिछले कई वर्षों से उसकी बिक्री प्रभावित हो रही है। उसने तमाम स्टोर पहले ही बंद कर दिए हैं।

सियर्स होल्डिंग्स कॉरपोरेशन ने एक बयान में कहा कि कंपनी और उसकी कुछ सब्सिडियरी कंपनियों ने बैंक्रप्सी कोड के चैप्टर 11 के तहत राहत के लिए स्वैच्छिक याचिका अमेरिकी बैंक्रप्सी कोर्ट में दायर की है। यह याचिका न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में दायर की गई।

जानिये, क्या है रेमिटेंस? अर्थव्यवस्था के लिए इसका क्या महत्व है?

 सरकार ने चालू खाते के घाटे को नियंत्रित रखने के लिए हाल में कई क़दम उठाए हैं। ग़ैर-ज़रूरी आयात को कम करने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया गया है। वहीं कुछ अन्य चीज़ों पर भी कस्टम ड्यूटी बढ़ायी गई है, लेकिन इन सब उपायों के बीच एक वर्ग ऐसा है जो देश से बाहर रह कर इस समस्या के समाधान में मदद कर रहा है। यह वर्ग है विदेशों में बसे क़रीब 2 करोड़ प्रवासी भारतीय जो हर साल अरबों डालर रेमिटेंस के रूप में स्वदेश भेज रहे हैं। रेमिटेंस क्या हैं? अर्थव्यवस्था के लिए इसका क्या महत्व है? जागरण पाठशाला के इस अंक में हम यही समझने का प्रयास करेंगे।


जब एक प्रवासी अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफि़स या ऑनलाइन ट्रांसफर से धनराशि भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। उदाहरण के लिए खाड़ी के देशों में काम कर रहे भारतीय कामगार या अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में डॉक्टर और इंजीनियर की नौकरी कर रहे प्रवासी भारतीय जब भारत में अपने माता पिता या परिवार को धनराशि भेजते हैं तो उसे रेमिटेंस कहते हैं।

जो देश रेमिटेंस प्राप्त करता है उसके लिए यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का ज़रिया होता है और वहाँ की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। ख़ासकर छोटे और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने में रेमिटेंस ने अहम भूमिका निभाई है।

कई देश ऐसे हैं जिनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रेमिटेंस से प्राप्त राशि का योगदान अन्य क्षेत्रों के मुक़ाबले काफ़ी अधिक है। मसलन, नेपाल, हैती, ताजिकिस्तान और टोंगा जैसे देश अपने जीडीपी के एक चौथाई के बराबर राशि रेमिटेंस के रूप में प्राप्त करते हैं।

दुनिया में सर्वाधिक रेमिटेंस प्राप्त करता है भारत
वैसे राशि के हिसाब से देखें तो दुनिया भर में सर्वाधिक रेमिटेंस भारत प्राप्त करता है। विश्र्व बैंक के अनुसार 2017 में विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों ने 69 अरब डॉलर रेमिटेंस के रूप में स्वदेश भेजे। यह राशि भारत के जीडीपी की 2.7 प्रतिशत है और पिछले साल देश में आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई ) से काफ़ी अधिक है। रेमिटेंस प्राप्त करने के मामले में भारत ने पड़ोसी देश चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

यात्रीगण कृपया ध्यान दें! अब चलती ट्रेन में एप से दर्ज करा सकेंगे एफआइआर

 अब ट्रेन से यात्रा के दौरान आपके साथ कोई दुर्घटना होती है तो रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अगले स्टेशन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रेलवे ने यात्रियों के लिए एक मोबाइल एप योजना शुरू की है। इसके तहत यात्री ट्रेन में छेड़छाड़, चोरी और मारपीट की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत के बाद इसे 'जीरो एफआइआर' में तब्दील कर आरपीएफ तुरंत मामले की जांच शुरू कर देगी।


शिकायत को जीरो एफआइआर में तब्दील कर आरपीएफ तुरंत करेगी जांच
बता दें कि 'जीरो एफआइआर' के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन पर दर्ज करा सकता है। बाद में यह एफआइआर उस पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर दी जाती है जहां पर यह दुर्घटना हुई है।

रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मोबाइल एप से शिकायत दर्ज कराने का पायलट प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश में पहले से चल रहा है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे खास बात यह है कि इस एप से सिर्फ आरपीएफ को ही नहीं जीआरपी, टीटीई और ट्रेन कंडक्टर को भी जोड़ा गया है।

बता दें कि फिलहाल अगर आपके साथ ट्रेन में कोई वारदात हो जाती है तो टीटीई आपको एक शिकायत फार्म देता है। इसे भरकर अगले स्टेशन पर आरपीएफ अथवा जीआरपी को देना होता है। बाद में यह शिकायत स्वत: एफआइआर में बदल जाती है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में जहां मामले की जांच में विलंब होता है वहीं यात्री को तुरंत राहत नहीं मिलती है। इस एप के माध्यम से ऑफलाइन भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं

जयंती विशेष: तेज दिमाग लेकिन भावुक थे भारत के मिसाइल मैन कलाम

 भारत के मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज जयंती है। कलाम को जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था, क्योंकि जनता के लिए उनके दरवाजे हर वक्त खुले रहते थे। उन्हें बच्चों से बेहद लगाव था, वो उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते और देश के लिए सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करते। अब्दुल कलाम कुरान और भगवद् गीता दोनों का अध्ययन करते थे। उन्हें बैलिस्टिक मिसाइल और लांच व्हीकल टेक्नोलॉजी के विकास के लिए भारत के मिसाइल मैन के रूप में जाना जाता है। उनकी सोच और संपूर्ण जीवन देश के लिए प्रेरणास्रोत है।


जानिए कौन थे अब्दुल कलाम
अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था। उनका जन्म 15 अक्टूबर, 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में देश में जाने जाते हैं। बच्चों से बेहद प्यार करने वाले ए पी जे अब्दुल कलाम ने बहुत सारी किताबें भी लिखी थीं। भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे।

तेज दिमाग लेकिन भावुक थे कलाम
तेज दिमाग वाले कलाम स्वभाव से बहुत भावुक थे। इसके अलावा कलाम की लेखनी भी कमाल की थी। उन्होंने अपने शोध को चार उत्कृष्ट पुस्तकों में समाहित किया, इन पुस्तकों के नाम है 'विंग्स ऑफ़ फायर', 'इण्डिया 2020- ए विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम', 'माई जर्नी' तथा 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया'। इन पुस्तकों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। कलाम भारत के ऐसे विशिष्ट वैज्ञानिक थे, जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिल चुकी थी।

1962 में इसरो के हिस्सा बने
कलाम 1962 में 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' का हिस्सा बने थे। डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एसएलवी तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ। 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था, जिसके बाद ही भारत भी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स) को भी डिजाइन किया।

पेट्रालियम पदार्थों के बदलते हालात पर ग्लोबल कंपनियों संग पीएम आज करेंगे बैठक

 महंगे कच्चे तेल और पेट्रोलियम क्षेत्र के मौजूदा हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बैठक करेंगे। तेल एवं गैस क्षेत्र की वैश्विक व भारतीय कंपनियों के प्रमुखों संग बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों व कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से खुदरा कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक तीसरी वार्षिक बैठक में तेल एवं गैस खोज व उत्पादन के क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने पर भी चर्चा होगी। मोदी ने इस तरह की पहली बैठक पांच जनवरी, 2016 को की थी, जिसमें प्राकृतिक गैस कीमतों में सुधार के सुझाव दिए गए थे।

दूसरी वार्षिक बैठक अक्टूबर, 2017 में हुई, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के उत्पादक तेल एवं गैस क्षेत्रों में विदेशी और निजी कंपनियों को हिस्सेदारी देने का सुझाव दिया गया था। हालांकि ओएनजीसी के तीखे विरोध के बाद इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

सूत्रों ने बताया कि सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद ए अल फलीह, ब्रिटिश पेट्रोलियम फर्म बीपी के सीईओ बॉब डुडले, फ्रांसीसी फर्म टोटल के प्रमुख पैट्रिक फॉयेन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल बैठक में उपस्थित रह सकते हैं।

एशियन एससीओ बैठकः सुषमा बोलीं- आतंकवाद विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा

 आतंकवाद को विकास और समृद्धि की राह का सबसे बड़ा खतरा बताते हुए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से वैश्विक समस्याओं पर एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन से निपटने के साथ ही क्षेत्रीय शांति के लिए आपसी सहयोग की अपील की।


ताजिकिस्तान की राजधानी में हो रही एससीओ की काउंसिल ऑफ हेड ऑफ गर्वनमेंट (सीएचजी) बैठक में सुषमा ने देशों को उनकी जिम्मेदारी समझने और एक-दूसरे का सहयोग करने को भी कहा। इस दो दिवसीय बैठक में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी भाग ले रहे हैं।

बैठक में चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का मुद्दा उठाते हुए सुषमा ने कहा, 'देशों को जोड़ने का प्रयास करते हुए सभी की संप्रभुता का आदर करना जरूरी है।' यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरना है। इस वजह से भारत चीन की इस परियोजना का विरोध कर रहा है।

अफगानिस्तान के मसले पर सुषमा ने कहा, 'भारत, अफगानिस्तान के नेतृत्व और उसके संरक्षण में होने वाले शांति प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध है। इससे अफगानिस्तान सुरक्षित और स्थिर देश की तरह उभरेगा।' सुषमा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी साथ काम करने की बात की। भारत दूसरी बार इस बैठक में हिस्सा ले रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का दबदबा बढ़ा, मानव अधिकार परिषद में भारी बहुमत से सीट जीती

 भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद का चुनाव जीत लिया है। एशिया-प्रशांत श्रेणी में भारत को 188 देशों का समर्थन मिला। भारत जनवरी, 2019 से तीन साल के लिए इस परिषद का सदस्य रहेगा।193 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र असेंबली में मानवाधिकार परिषद के 18 नए सदस्यों के लिए मतदान हुआ।


इस 47 सदस्यीय परिषद में गुप्त मतदान के जरिये पूर्ण बहुमत से चयन होता है। परिषद का सदस्य बनने के लिए किसी देश को कम से कम 97 देशों का समर्थन हासिल करना होता है। भारत ने एशिया-प्रशांत श्रेणी से सदस्यता के लिए दावा किया था।

इस श्रेणी में भारत के साथ बहरीन, बांग्लादेश, फिजी और फिलीपींस ने भी चुनाव जीता है। इस श्रेणी से पांच देशों का चुनाव होना था और पांच देशों ने ही दावा भी किया था। इसलिए भारत का चुनाव पहले से ही तय माना जा रहा था। भारत इस परिषद का पहले भी सदस्य रह चुका है। वह साल 2011 से 2014 और फिर 2014 से 2017 तक सदस्य रहा। भारत का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर, 2017 को खत्म हुआ था।

बुलेट ट्रेन से तिगुनी रफ्तार पर दौड़ेगी चीन की ये ट्रेन, ये है खासियत

 नई तकनीक और अविष्कारों से पूरी दुनिया को हैरान करने वाला चीन अब बुलेट ट्रेन से तीन गुना तेज गति से चलने वाली ट्रेन पर काम कर रहा है। नई बुलेट ट्रेन का मॉडल सिचुआन प्रांत के चेंगडू में 2018 नेशनल मास इनोवेशन एंड आंत्रप्रन्योरशिप वीक के दौरान पेश किया गया। चीन का दावा है कि अगली पीढ़ी की मैग्नेटिक लेविटेशन बुलेट ट्रेन एक हजार किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज गति से चलने वाली बुलेट ट्रेन चीन के पास है जिसकी स्पीड 350 किमी प्रति घंटा है।


दौड़ में अमेरिका भी शामिल
हाईपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीज और हाईपरलूप वन जैसी कुछ अमेरिकी कंपनियां एक घंटे में एक हजार किमी से भी अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों पर काम कर रही हैं।

ट्रेन की खासियत
- एयरोस्पेस तकनीक की तरह नई बुलेट ट्रेन में भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रपल्शन का इस्तेमाल किया गया है।
- 29.2 मीटर लंबे और तीन मीटर चौड़े और हीट-लाइट प्रूफ केबिन
- क्लोज-टू-वैक्यूम रेलवे एंवायरमेंट और मैग्नेटिक लेविटेशन तकनीक के जरिए ये ट्रेन जमीन से 100 मिमी ऊपर चलेगी।
- 1000 किमी की दूरी एक घंटे में तय होगी।

पहली बार जीन एडिटिंग की मदद से पैदा हुई दो चुहिया की एक संतान

 चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार जीन एडिटिंग और एंब्रायोनिक स्टेम कोशिकाओं की मदद से दो चुहिया की स्वस्थ संतान पैदा करने में सफलता पाने का दावा किया है। सेल स्टेम सेल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, इस तकनीक के जरिये 210 भ्रूण से 29 संतानों को जन्म दिया गया। यह सभी पूरी तरह स्वस्थ थे, अपनी पूरी आयु तक जीवित रहे और इनकी संतानें भी पैदा हुईं। चाइनीज अकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने बताया कि दो चूहों से एक संतान पैदा करने का प्रयोग भी पहले किया जा चुका है। हालांकि वह संतान कुछ दिन ही जीवित रह सकी थी।


चुनौतियों का पता लगाने के लिए किया अध्ययन
शोध में इस पर अध्ययन किया गया कि एक ही लिंग के जीवों से संतान की उत्पत्ति में क्या चुनौतियां हैं। साथ ही स्टेम कोशिकाओं और जीन एडिटिंग की मदद से इन चुनौतियों से कैसे पार पाया जा सकता है। चाइनीज अकेडमी ऑफ साइंसेज के क्वी झोऊ ने कहा, ‘हम इस सवाल पर उत्सुक थे कि स्तनपायी जीवों में यौन संबंधों से ही संतान की उत्पत्ति क्यों होती है। विभिन्न अध्ययनों के जरिये हमने यह जानने का प्रयास किया कि जीन एडिटिंग की मदद से दो नर या दो मादा चूहों के संतान की उत्पत्ति संभव है या नहीं।’

पहले थीं कुछ खामियां
जीन डिलीट करने की कुछ तकनीकों की मदद से पहले भी दो चळ्हिया की एक संतान पैदा की जा चुकी है, लेकिन उसमें भी कुछ खामियां थीं। अब वैज्ञानिकों ने हैप्लॉयड एंब्रायोनिक स्टेम कोशिकाओं की मदद से इस काम को अंजाम दिया है। हालांकि सभी जीवों की अलग-अलग खूबियों को देखते हुए अब भी वैज्ञानिक इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि यह तकनीक का चूहे के अतिरिक्त अन्य स्तनपायी जीवों पर कितनी कारगर रह सकती है।

पहले किए जा चुके हैं ये प्रयोग
कुछ सरीसृप व उभयचर जीवों और मछलियों में केवल माता या केवल पिता से संतान पैदा करने के प्रयोग किए जा चुके हैं। स्तनपायी जीवों में यह मुश्किल होता है। स्तनपायी जीवों में संतान को माता और पिता दोनों से जीन के जरिये कुछ गुण मिलते हैं। किसी एक की अनुपस्थिति से पैदा होने वाली संतान स्वस्थ नहीं होती है।

Youth Olympics: Saurabh hits the bullseye

 Saurabh Chaudhary claimed the gold medal in the 10m air pistol event here on Wednesday, to continue the Indian shooting team’s best-ever outing in the mega event.


The 16-year-old Chaudhary shot 244.2 to finish ahead of South Korea’s Sung Yunho (236.7) and Switzerland’s Solari Jason (215.6).

The Indian, who had 18 scores of 10 and above in the eight-man finals, was just short of his own World junior record score of 245.5.

Chaudhary, an Asian Games and Junior ISSF World Championship gold medallist, had topped the qualifying rounds with 580 along with Iran’s Erfan Salavati.

Despite four scores of under 10 to start with, Chaudhary managed to stay ahead and then extended his domination with scores of 10.7 10.4 10.4 and 10.0. He continued to lead the pack as the finals entered the elimination stage.

lunar meteorite up for auction

 Anyone who can’t make it to the moon to gather a few lunar rocks now has the opportunity to buy one right here on Earth.

A 12-pound (5.5 kilogram) lunar meteorite discovered in Northwest Africa last year is up for auction by Boston-based RR Auction and could sell for $500,000 or more during online bidding that runs from Thursday until Oct. 18. It is “one of the most important meteorites available for acquisition anywhere in the world today,” and one of the biggest pieces of the moon ever put up for sale, RR said.
The rock classified as NWA 11789, also known as “Buagaba,” was found last year in a remote area of Mauritania but probably plunged to Earth thousands of years ago. The meteorite is actually composed of six fragments that fit together like a puzzle. The largest of those pieces weighs about 6 pounds.

Bali IMF meeting

 International Monetary Fund Managing Director Christine Lagarde says the U.S. and China should de-escalate their trade dispute and work to fix trade rules instead of breaking them.


Ms. Lagarde said on Thursday at the annual meeting of the IMF and World Bank in Bali, Indonesia, that so far there had been no “contagion” of major damage from penalty tariffs imposed by the two countries on each other's exports, but that they do risk hurting “innocent bystanders”.

Ms. Lagarde said her advice was in three parts: “De-escalate. Fix the system. Don't break it.”

She said the rules-making World Trade Organisation had ways of addressing U.S. complaints that China's policies unfairly extract advanced technologies and put foreign companies at a disadvantage.

Nirmala Sitharaman begins France visit today

 Defence Minister Nirmala Sitharaman begins a three-day visit to France on Thursday during which both sides are expected to deliberate on further boosting their already close defence and security ties.


Ms. Sitharaman’s visit comes in the backdrop of a huge controversy over the procurement of 36 Rafale jets from French aerospace major Dassault Aviation.

Officials sources said Ms. Sitharaman will hold wide-ranging talks with her French counterpart Florence Parly on ways to deepen strategic cooperation between the two countries and also deliberate on major regional and global issues of mutual interests. MS. Sitharaman will also take stock of progress in the supply of 36 Rafale jets by Dassault to the Indian Air Force under a ₹58,000 crore deal. There was indication that she may even visit the facility where the jets are being manufactured, the sources said

नॉर्वे /समुद्र के अंदर दुनिया का सबसे बड़ा रेस्तरां बनेगा, एकसाथ 100 लोग बैठ सकेंगे

 रेस्तरां की दीवारें तूफानी लहरों का सामना करने में सक्षम होंगी

रेस्तरां बनाने वाली कंपनी ले रही लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी

ओस्लो. नॉर्वे के लिंडेसनेस इलाके में उत्तर सागर के तट पर दुनिया का सबसे बड़ा अंडरवॉटर रेस्तरां बनाया जा रहा है। 110 फीट लंबा यह रेस्तरां समुद्र से निकल रहे बड़े दूरबीन की तरह दिखाई देता है। इसमें 100 लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। रेस्तरां के 2019 तक शुरू होने की संभावना है। रेस्तरां को अंडर नाम दिया गया है। इसे नॉर्वे की कंपनी स्नोहेता ने बनाया है।

5 हजार वर्गफीट में फैला रेस्तरां
रेस्तरां 500 वर्गमीटर (5300 वर्गफीट) क्षेत्र में फैला है। इसमें तीन मंजिलें हैं। समुद्री पर्यावरण दिखाने के लिए 36 फीट लंबा शीशा लगाया गया है। रेस्तरां समुद्र के अंदर पांच मीटर गहराई में है।

स्नोहेता की सीनियर आर्किटेक्ट रून ग्रासडेल के मुताबिक- रेस्तरां को काफी सोच-समझकर तैयार किया गया है। इसका आधे से ज्यादा स्ट्रक्चर पानी में डूबा है। लोगों को अंदर जाने के लिए एक कांच के ग्लासवे (ब्रिज) से गुजरना होगा।

ग्रासडेल कहती हैं- क्लाइंट्स जब हमारे पास रेस्तरां बनाने का प्रस्ताव लेकर आए तो वे कुछ स्केच लेकर आए थे। वे इसे तट के नजदीक बनाना चाहते थे, लेकिन हमने कुछ दूर बनाने का सुझाव दिया क्योंकि वहां से असली समुद्र दिखाई देता है।

यह रेस्तरां नॉर्वे के लिंडेसनेस इलाके में बनाया जा रहा है। यहां काफी पर्यटक आते हैं। हालांकि, यहां पहुंचना आसान नहीं है। रेस्तरां आने के लिए लोगों को राजधानी ओस्लो से प्लेन से क्रिस्टियनसेंड आना होना। यहां से सड़क से एक घंटे का रास्ता है। बोट सर्विस भी शुरू की जा रही है।

वर्ल्ड बैंक / भ्रष्टाचार के आरोप में भारत की ओलिव हेल्थकेयर पर बैन, दुनियाभर की 78 कंपनियों पर कार्रवाई

 ओलिव हेल्थकेयर के जय मोदी पर 7 साल 6 महीने का प्रतिबंध

ओलिव हेल्थकेयर और जय मोदी बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे
भारत की एंजलिक इंटरनेशनल पर 4 साल 6 महीने का बैन
वर्ल्ड बैंक ने भ्रष्टाचार के आरोप में इस साल दुनियाभर की 78 कंपनियों को बैन कर दिया। इनमें ओलिव हेल्थ केयर समेत कई भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। कई इंडिविजुअल पर भी प्रतिबंध लगा है। इनमें ओलिव हेल्थकेयर के जय मोदी का नाम भी है। वर्ल्ड बैंक ने दुनिया भर की अपनी परियोजनाओं से इन्हें प्रतिबंधित कर दिया है। वर्ल्ड बैंक की सालाना ग्रुप सैंक्शंस सिस्टम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

ओलिव हेल्थकेयर पर 10 साल 6 महीने का बैन
ओलिव हेल्थकेयर और जय मोदी बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। ओलिव हेल्थ केयर को 10 साल 6 महीने के लिए और जय मोदी को 7 साल 6 महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

भारत की एंजलिक इंटरनेशनल पर 4 साल 6 महीने का प्रतिबंध लगा है। यह कंपनी इथियोपिया और नेपाल में वर्ल्ड बैंक की परियोजना पर काम कर रही थी।

मधुकॉन प्रोजेक्ट्स पर दो साल और आरकेडी कंस्ट्रक्शंस पर डेढ़ साल का बैन लगा। दोनों कंपनियां देश में ही वर्ल्ड बैंक की परियोजना पर काम कर रही थीं।

अर्जेंटीना और बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक की परियोजना पर काम कर रही फैमिली केयर को चार साल के लिए प्रतिबंधित किया गया। ग्लोबल एनवायरमेंट, एसएमईसी (इंडिया) और मैकलॉड्स फार्मास्यूटिकल्स को एक साल से कम समय के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
इस तरह की अपनी पहली रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, धोखाधड़ी रोकने और दानदाता संस्थाओं की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।

आरबीआई रेपो रेट 6.50% पर स्थिर, त्योहारी सीजन में लोन महंगा नहीं होगा

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) शुक्रवार को ब्याज दरों का ऐलान किया। रेपो रेट 6.50% पर स्थिर रखा। ऐसे में त्योहारी सीजन में लोन महंगा नहीं होगा। रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है। इसमें इजाफा होने पर बैंक सभी तरह के लोन पर ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। आरबीआई ने पिछली दो समीक्षा बैठकों के दौरान जून और अगस्त में रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की थी।


महंगाई दर फिलहाल आरबीआई के लक्ष्य से भी कम
आरबीआई ने पॉलिसी आउटलुक न्यूट्रल की बजाय कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। यानी अगली बार ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।

आरबीआई के ऐलान से पहले विश्लेषकों ने रेपो रेट में 0.25% बढ़ोतरी का अनुमान जताया था। क्रूड महंगा होने और रुपए में गिरावट को देखते हुए ब्याज दरों में इजाफे के आसार थे।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष (2018-19) के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 7.4% पर बरकरार रखा है। रिजर्व बैंक ने कहा कि 10 महीने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा मौजूद है।

ईरान से आयात जारी रखेगा भारत, नवंबर के लिए 12.5 लाख टन का कॉन्ट्रैक्ट

 अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी भारत ईरान के साथ कारोबार जारी रखना चाहता है। पहली बार इसके स्पष्ट संकेत शुक्रवार को मिले। सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने ईरान से 12.5 लाख टन कच्चा तेल खरीदने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया है। इतना ही नहीं, भारत डॉलर की जगह रुपए में भुगतान करने की तैयारी कर रहा है।


भारत इस साल ईरान से 10.62% ज्यादा क्रूड खरीदेगा
भारत ने इस साल ईरान से 250 लाख टन तेल आयात करने की योजना बनाई थी। यह पिछले साल के 226 लाख टन से 10.62% ज्यादा है। आयात इससे कम भी हो सकता है क्योंकि, रिलायंस जैसी कंपनियों ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने नवंबर में ईरान से 12.5 लाख टन तेल आयात करने का कॉन्ट्रैक्ट किया है।

ईरान के तेल सेक्टर के खिलाफ 4 नवंबर से अमेरिकी प्रतिबंध लागू होंगे। ऐसे में रूस से एस-400 मिसाइल डील के बाद यह भारत द्वारा अमेरिका को दिया गया दूसरा झटका होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मई में ईरान के परमाणु समझौते से बाहर निकलने और ईरान पर फिर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। पिछले माह अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि वॉशिंगटन प्रतिबंध पर छूट को लेकर विचार करेगा।

व्यापारियों को साधने मंडी टैक्स घटाकर डेढ़ फीसदी किया जाएगा

 पुजारियों का मानदेय तीन गुना करने के बाद सरकार ने व्यापारियों काे भी साधने का प्रयास किया है। इसके तहत मंडी टैक्स 2.2 प्रतिशत से घटाकर डेढ़ प्रतिशत किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने व्यापारी सम्मेलन में यह घोषणा की। चौहान ने प्रदेश में व्यापार सम्मान निधि बनाने की बात भी कही।


उन्होंने कहा कि व्यापारी देशभक्त और समाजसेवी हैं। उन्होंने कहा प्रत्येक जिले में 500 युवा कर विशेषज्ञों को जीएसटी मित्र बनाया जाएगा, जो व्यापारियों को जीएसटी रिटर्न भरने में सहयोग करेंगे। चौहान ने कहा कि विश्व व्यापार में मध्यप्रदेश के व्यापारियों का हिस्सा बढ़ाने के लिए बोर्ड बनाया जाएगा।

प्रत्येक जिले में जिला व्यापार और व्यापारी कल्याण समितियां बनाई जाएंगी। ई-ट्रेडिंग के लिए पोर्टल और एप बनेगा। प्रदेश के व्यापारियों के लिए व्यापार सुरक्षा योजना भी बनाई जाएगी।

Chinese bunkers at Lhasa airport, just 1,350 km from Delhi

 China’s construction of underground bomb-proof shelters to house fighters at Lhasa’s Gonggar airport in the Tibet Autonomous Region (TAR) has New Delhi concerned, said three officials familiar with the development who asked not to be identified.


Gonggar airport is just 1,350 km away from New Delhi. The three officials, all in the security establishment, claimed the airfield earlier meant to boost “regional connectivity” is being turned into a military airbase.

One of the officials said a “taxi track” from the airstrip leads to blast- or bomb-proof hangers dug deep inside the mountains nearby. The facility, according to the three officials, can hold around three squadrons of fighters or about 36 aircraft.

Relations between India and China have warmed in recent months. PM Narendra Modi visited Wuhan for an informal summit with Chinese president Xi Jinping where the two leaders committed to bettering ties.

The rapprochement came after the Doklam crisis last year, where troops of both countries were engaged in an extended stand-off. Despite this, though, the security establishments have kept a close eye o n each other’s capabilities.

उन्‍नत भारत अभियान से जुड़े 840 नए संस्‍थान, अब छात्र करेंगे किसानों की समस्‍या का समाधान

 गांवों की समस्याओं को जानने और उन्हें सुलझाने के लिए देश भर के 840 नए विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान आगे आए हैं। इन संस्थानों ने यह रुचि सरकार की ओर से चलाए जा रहे उन्नत भारत अभियान के दूसरे चरण से जुड़कर दिखाई है। इसके तहत प्रत्येक संस्थान को अपने आसपास के गांवों को गोद लेना है और समस्याओं से निपटने में उनकी मदद करना है।


देश भर के 688 संस्थान जुड़े
इन संस्थानों में 521 तकनीकी और 319 गैर-तकनीकी संस्थान हैं। गांवों की समस्याओं को जानने और उन्हें सुलझाने के लिए सरकार के इस उन्नत भारत अभियान से जुड़कर अभी देश के करीब 688 संस्थान काम कर रहे हैं।

इस योजना की शुरुआत सरकार ने 2014 में की थी, लेकिन इसे शुरू होते-होते काफी समय लग गया। बाद में 2016 में इसके पहले चरण को शुरू किया जा सका। इसके तहत प्रत्येक संस्थान को अपने आस-पास के कम से कम पांच गांवों को गोद लेना है। संस्थान अपनी क्षमता के मुताबिक गांवों की संख्या बढ़ा भी सकते हैं।

अब हर वैक्सीन में होगी सभी तरह के वायरस की जांच

 पोलियो वैक्सीन में पी-2 वायरस पाये जाने के बाद सरकार ने वैक्सीन जांच के नियम कड़े कर दिये हैं। पहले जिस वायरस की वैक्सीन होती थी, केवल उस वायरस की मौजूदगी की जांच की जाती थी। लेकिन अब सरकार ने वैक्सीन में संबंधित वायरस के अलावा भी सभी वायरस की जांच को अनिवार्य कर दिया है।


स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वैक्सीन में दूसरे सभी वायरस की जांच होती तो, पोलियो के वैक्सीन में पी-दो की उपस्थिति की जानकारी मिल जाती है और उसे बच्चों को देने के रोका जा सकता था।

दरअसल पोलियो वैक्सीन में पी-2 वायरस का इस्तेमाल अप्रैल 2016 में ही बंद कर दिया गया था। अब केवल उसमें पी-1 और पी-3 वायरस का ही इस्तेमाल किया जाता है। वैक्सीन बनने के बाद कड़ाई से उसके सैंपल की जांच की जाती है, तभी उसे बच्चों तक देने के लिए भेजा जाता था। अभी तक नियम के मुताबिक पोलियो वैक्सीन के सैंपल में सिर्फ पी-1 और पी-3 वायरस की उपस्थिति की जांच की जाती थी और मिलने पर उसे हरी झंडी दे जाती थी। चूंकि पी-2 वायरस की जांच की नहीं गई थी, इसीलिए वह वैक्सीन में जांच के बाद भी चला गया।

चीन ने किया तीन हाइपरसोनिक मिसाइल का एक साथ परीक्षण

 चीन ने तीन तरह की हाइपरसोनिक एयरक्राफ्ट मिसाइलों का एक साथ परीक्षण कर नई कामयाबी हासिल की है। यह परीक्षण गत 21 सितंबर को उत्तर पश्चिमी चीन के जिकुआन सेटेलाइट लांच सेंटर से किया गया था।

इन मिसाइलों में ध्वनि की गति से पांच गुना तेज चलने वाली मिसाइल भी शामिल थी। तीनों मिसाइलों के आकार और डिजाइन अलग हैं। इनके कोड नेम डी18-1एस, डी18-2एस और डी18-3एस हैं।

चीन ने पहली बार इस तरह के परीक्षण को अंजाम दिया है। चीनी वैज्ञानिकों का मकसद अब इनकी मारक क्षमता को अचूक बनाना है। इस पर उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। पिछले महीने चीन ने एक हाइपरसोनिक ग्लाइडर स्टारी स्काई-2 का पहली बार परीक्षण किया था।

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति बोले, भारत दुनिया में कर रहा अपनी साख मजबूत

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव से हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। इससे पहले राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी उनके साथ मौजूद थे। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव पत्‌नी जिरोत मिर्जियोयेव और परिवार सहित 100 सदस्यीय दल के साथ भारत की दो दिन की यात्रा पर आए हैं।


सोमवार को सुबह राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव की राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां उनका स्वागत किया। इस मौके पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने कहा कि उज्बेकिस्तान के लोगों के दिलों में भारत की विशेष जगह है। भारत तेजी से विकास कर रहा है और आत्मविश्वास के साथ दुनिया में अपनी साख मजबूत कर रहा है

Govt. unveils centre for data analytics

 It will also enable self-service analytics

With a view to fast-tracking the adoption of data analytics in the government to improve delivery of services to citizens, Electronics and IT Minister Ravi Shankar Prasad on Friday unveiled a Centre of Excellence for Data Analytics (CEDA).

The centre would help build analytic solutions that are specific to a particular problem which may relate to a single or a combination of departments, an official statement said.

It added that the centre would also provide data profiling tools and techniques along with necessary expertise to analyse the data for quality issues.

Improve data collection
“While data cleaning shall be done for making the data ready for analytical use, recommendations shall also be given in order to help the department take necessary actions to further improve their data collection process,” it said.

Besides creating the analytics solutions for the government departments, CEDA would also focus on training and enabling the departments to do self-service analytics

Rajasthan Human Rights Commission poses questions on drug rehabilitation centres

 The Rajasthan State Human Rights Commission has posed some serious questions to the State government about the authority and permission to run drug rehabilitation centres after the death of a young man during treatment for de-addiction at a centre in Jodhpur. The Commission has specifically asked about qualifications of persons running such centres.


The Commission's enquiry came on a complaint filed at its camp hearing in Jodhpur earlier this week. Complainant Imran Khan stated that his brother Sajid had died during treatment at a rehabilitation centre in the city and the police had launched investigation after registering a case under Section 304-A (causing death by negligence) of Indian Penal Code.

Mr. Khan sought the directions for probe into his brother's death as a murder case, while alleging that the rehabilitation centres, which charged thousands of rupees for treatment, did not even have the basic facilities. No qualified persons were available there for consultation and treatment and the Centre's guidelines were being “violated with impunity”, he said.

“When a person addicted to alcohol or drugs dies at such centres, his family members often try to hide it for protecting his honour. This tendency also enables the centres to conceal the real cause of the victim's death, which is nothing short of murder,” the complaint said

खेलो इंडिया के तहत 55 हजार गांवों में बनेंगे नए खेल मैदान, सरकार ने शुरू किया काम

 केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना का लाभ गांवों तक पहुंचाने में प्रदेश सरकार ने धरातल पर काम शुरू कर दिया है। योजना के तहत प्रदेश के करीब 55 हजार गांवों में ब्लाक स्तर पर खेल के मैदान तैयार किए जाएंगे।


इस योजना से युवा कल्याण विभाग में फिर से जान फूंकी गई है। इन्हें ब्लॉक स्तर पर खेल मैदान व मंगल दल गठित करने की अहम जिम्मेदारी दी गई है। इन मैदानों में कबड्डी, रेसलिंग, वेट लिफ्टिंग समेत अन्य खेलों के मैदान शामिल हैं। इससे खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने में मदद मिलेगी। ये बातें बृहस्पतिवार को खेल एवं युवा कल्याण मंत्री चेतन चौहान ने ग्रेटर नोएडा के क्राउन प्लाजा होटल में कहीं।

चेतन चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण स्तर पर खेल सुविधा मुहैया कराने का प्रयास कर रही है। इसमें केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना की विशेष मदद ली जा रही है। इस योजना के मदद से 55 हजार गांवों को चिह्नित कर ब्लाक स्तर पर खेल के मैदान विकसित किए जाएंगे। इससे खिलाड़ियों की भावी पीढ़ी सुदृढ़ व सुशिक्षित होगी। खिलाड़ी पदक जीतने की दक्षता से लबरेज होंगे।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्टः जापान ने मंजूर किया 5500 करोड़ कर्ज

 रेल मंत्रालय ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जापान के साथ साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये के कर्ज की किश्त के बारे में समझौता कर आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं। शुक्रवार को कोलकाता मेट्रो के लिए 1600 करोड़ रुपये के कर्ज के एक अन्य समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए।


दोनो समझौते जापान की इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी जिका के साथ किए गए। अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन के कार्यान्वयन के लिए कर्ज की एक किस्त के तौर पर जापान 89547 मिलियन जापानी जापानी येन (लगभग 5500 करोड़ रुपये) देगा। जबकि कोलकाता मेट्रो के लिए 25,903 मिलियन जापानी येन (लगभग 1600 करोड़ रुपये) के लिए समझौता हुआ है। इसके तहत कोलकाता में हावड़ा मैदान से साल्ट लेक के बीच मेट्रो रेल प्रणाली बिछाई जाएगी। इसमें नदी के भीतर का हिस्सा शामिल है। यह कोलकाता ईस्ट-वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

पिछले दिनो इस प्रकार की चर्चाएं छिड़ी थीं कि जापान ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के जिए कर्ज रोक दिया है। रेल मंत्रालय ने इसका खंडन किया था।

उज्‍बेकिस्‍तान हो सकता है भारत का अहम व्यापारिक साझीदार : सुरेश प्रभु

 केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि वैश्विक व्यापार की मौजूदा परिस्थितियों में उज्बेकिस्तान भारत का अहम साझीदार साबित हो सकता है। वाणिज्य मंत्री ने उज्बेकिस्तान के साथ व्यापार, पर्यटन और निवेश के संबंध में बेहतर साझीदारी की संभावना जतायी है।


भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की आगामी भारत यात्रा इस मायने में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। इस यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय शुरु होने की संभावना है। प्रभु ने कहा कि अतीत में उज्बेकिस्तान सिल्क रूट का हिस्सा रहा है। लेकिन अब वह भारत की सिलिकॉन रूट की अवधारणा से जुड़ सकता है।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, अब विधानसभा भंग होते ही लागू होगी आचार संहिता

 चुनाव आयोग ने तय कर दिया है कि विधानसभाएं या लोकसभा भंग होते ही आचार संहिता लागू हो जाए। तेलंगाना विधानसभा भंग किए जाने के बाबत यह अहम फैसला है। चुनाव आयोग ने राज्यों को भी इसकी सूचना दे दी है।


आयोग अपने स्तर पर इसकी चर्चा कर चुका और उसमें इस पर सर्वसम्मति है कि ऐसा किया जाना चाहिए। बताया जाता है कि यह व्यवस्था लागू करने का विचार इसलिए किया गया है कि क्योंकि अक्सर ही सदन भंग किए जाने के बाद भी कार्यवाहक सरकारें बड़े महत्व के फैसले लेती रहती हैं। वह अपने तरीके से सरकारी रीति-नीति की मदद से मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं।

कुछ सप्ताह पहले तेलंगाना में विधानसभा को निर्धारित कार्यकाल (जून 2019) पूरा होने से पहले ही भंग किए जाने के परिप्रेक्ष्य में आयोग का यह निर्णय महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग ने तेंलगाना के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आगाह किया है कि जनता को प्रभावित करने वाले बड़े नीतिगत फैसले ना लिए जाए।

आयोग के अनुसार यह फैसला न्यायालय के 1994 के उस फैसले के अनुरूप है जिसमें कार्यवाहक सरकार को सिर्फ सामान्य कामकाज करने का अधिकार होने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में कार्यवाहक सरकार कोई नीतिगत फैसला नहीं कर सकती है।

शहीद भगत सिंह की 110वीं जयंती आज

 हंसते-हंसते देश पर अपनी जान न्योछावर कर देने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह की आज (28 सितंबर) को जयंती है। भगत सिंह ने अपनी मां की ममता से ज्यादा तवज्जो भारत मां के प्रति अपने प्रेम को दी थी।


भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ दिनों से लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। ये तनाव की स्थिति अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की मीटिंग में भी देखने को मिली

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल के मुद्दे पर जवाबी हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी रा-फेल बनकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्हें ऐसा करना बंद करना चाहिए। राजनाथ ने कांग्रेस के नेताओं से राहुल गांधी को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के खिलाफ उचित सलाह देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लड़ाकू विमानों की खरीद मामले पर उग्र राजनीतिक तूफान के बीच कांग्रेस अध्यक्ष ने कड़ी चोट पहुंचाई है।

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआइसी) की बैठक में कश्मीर का मसला उठाने के पाकिस्तान के कदम को भारत ने पूरी तरह से अनुचित करार दिया है। कहा है कि भारत के अंदरूनी मसले की सामूहिक मंच पर चर्चा करना पूरी तरह गलत है।

एशिया कप के फाइनल मुकाबले में भारत का सामना अब बांग्लादेश से होगा। भारतीय टीम अब तक इस टूर्नामेंट में अजेय रही है। वहीं बांग्लादेश की टीम फाइनल में कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने से कमजोर दिख रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को किया खत्म

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को खत्म कर दिया है। दक्षिण भारत के इस प्रसिद्ध मंदिर में अब पचास वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को प्रवेश मिल सकेगा। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर फैसला सुनाते हुए सीजेआइ दीपक मिश्रा ने कहा कि धर्म एक है, गरिमा और पहचान भी एक हैं। अय्यप्पा कुछ अलग नहीं हैं, जो नियम जैविक और शारीरिक प्रक्रियाओं के आधार पर बने हैं। वे संवैधानिक परीक्षा में पास नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 4-1 के बहुमत से आया है। जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने अलग फैसला दिया है।

सबरीमाला मंदिर की परंपरा असंवैधानिक
शुक्रवार को भारत में महिलाओं के अधिकार के लिए बड़ा दिन बनाते हुए सीजेआइ ने कहा, 'सबरीमाला मंदिर की परंपरा संवैधानिक नहीं है। सबरीमाला की पंरपरा को धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं माना जा सकता।' वहीं फैसला सुनाते हुए जस्टिस रोहिंगटन नरीमन ने कहा कि मंदिर में महिलाओं को भी पूजा का समान अधिकार, यह मौलिक अधिकार है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पूजा से इंकार करना महिलाओं की गरिमा से इंकार करना है। उन्होंने सवाल किया, क्या संविधान महिलाओं के लिए अपमानजनक बात को स्वीकार कर सकता है?

जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने रखी अलग राय
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर फैसले में अपना पक्ष सुनाते हुए जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा कि इस मुद्दे का असर दूर तक जाएगा। धार्मिक परंपराओं में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। अगर किसी को किसी धार्मिक प्रथा में भरोसा है, तो उसका सम्मान होना चाहिए, क्योंकि ये प्रथाएं संविधान से संरक्षित हैं। समानता के अधिकार को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के साथ ही देखना चाहिए और कोर्ट का काम प्रथाओं को रद करना नहीं है।

ट्रावणकोर देवस्वॉम बोर्ड दायर करेगा पुनर्विचार याचिका
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दिए जाने पर ट्रावणकोर देवस्वॉम बोर्ड (TDB) के अध्यक्ष ए. पद्मकुमार ने कहा, "हम अन्य धार्मिक प्रमुखों से समर्थन हासिल करने के बाद पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे।

पाक को धूल चटाकर फाइनल में बांग्लादेश, अब भारत से होगी जंग

 एशिया कप के अंतिम सुपर-4 मुकाबले में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 37 रन हराकर फाइनल में जगह बना ली है। इस मैच में बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 239 रन बनाए, जवाब में पाकिस्तान की टीम 9 विकेट के नुकसान पर केवल 202 रन बना पाई। बांग्लादेश की तरफ से मुस्ताफिजुर रहमान ने 4 विकेट लिए, वहीं पाकिस्तान की तरफ से सबसे ज्यादा रन इमाम उल हक ने बनाए, इस बल्लेबाज ने लगातार गिरते विकेट के बीच 83 रन की पारी खेली। इससे पहले बांग्लादेश की तरफ से मुश्फिकुर रहीम ने 99 और मिथुन ने 60 रन बनाए, वहीं पाकिस्तान की तरफ से जुनैद ने 4 विकेट लिए थे।


ऐसे धराशायी हुई पाकिस्तानी पारी
पाकिस्तान को पहला झटका मेहदी हसन ने दिया, इस ऑफ स्पिनर ने फखर जमां को रूबेल हुसैन के हाथों कैच आउट करवाया। अगले ही ओवर में मुस्ताफिजुर रहमान ने बाबर आजम को LBW आउट कर अपनी टीम को दूसरी सफलता दिलाई। रहमान ने पाक कप्तान सरफराज को विकेटकीपर के हाथों कैच आउट करवा कर अपनी टीम को तीसरी सफलता दिलाई। रूबेल हुसैन ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए शोएब मलिक को आउट किया, रूबेल की गेंद पर मुर्तजा ने शानदार कैच पकड़ा।

वोरोम्बे टाइटन घोषित हुआ दुनिया का विशालतम पक्षी

 दुनिया के विशालतम पक्षी के नाम को लेकर वैज्ञानिकों में दशकों से चला आ रहा मतभेद समाप्त हो गया है। वैज्ञानिकों ने बुधवार को कहा कि वे इस बहस पर विराम लगाते हैं और यह टाइटल वोरोम्बे टाइटन को प्रदान किया जाता है। तीन मीटर लंबा विलुप्त हो चुका यह पक्षी मैडागास्कन प्रजाति का था। इसका वजन 800 किलोग्राम तक होता था।


रॉयल सोसाइटी ओपेन साइंस नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में मैडगास्कन जीवों में अप्रत्याशित विविधता के बारे में बताया गया है। पहले यह माना गया था कि ‘हाथी पक्षियों’ की 15 विभिन्न प्रजातियों की पहचान दो वंशो के तहत की गई थी। वहीं, ब्रिटेन में प्रकाशित जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) द्वारा हालिया शोध में इस तथ्य को मामले में नहीं दर्शाया गया है।

जेडएसएल के इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजी के जेम्स हंसफोर्ड ने बताया, ‘हाथी पक्षी मैडगास्कन के महाप्राणी से बड़े थे और द्वीप के विकासक्रमिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण विवादास्पद में से एक थे। इसकी वजह यह है कि विशाल शरीर वाले जानवर यदि शाकाहारी हों तो पौधों को खाकर पारिस्थितिक तंत्र पर गहरा असर डालते हैं। साथ ही वे मल के माध्यम से बायोमास और बीज फैलाते थे। इन विलुप्त हो चुके पक्षियों के प्रभाव के कारण मेडागास्कर आज भी प्रभावित है।’

खेती में मदद करने वाला रोबोट किया विकसित

 

वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रोबोट विकसित करने में सफलता हासिल की है, जो खेती में किसानों की मदद कर सकता है। दरअसल, यह रोबोट अपने कंप्यूटर विजन के जरिये उगी हुई फसलों का पता लगा सकता है और चंद सेकेंड में उन्हें तोड़कर एकत्र कर सकता है।

फिलहाल इसे शिमला मिर्च की कटाई और उसे एकत्र करने के लिए विकसित किया गया है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस आधार पर अन्य उत्पादों के लिए भी रोबोट विकसित किए जा सकते हैं। स्वीपर नामक इस रोबोट को इजरायल के नेगेव में बेन गुरियन यूनिवर्सिटी (बीजीयू) के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। इसे सिंगल स्टेम रो क्रॉपिंग सिस्टम पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

नासा से मंगल ग्रह पर लापता अपॉरच्युनिटी रोवर को खोजा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह पर मौजूद अपने अपॉरच्युनिटी रोवर का पता लगा लिया है। करीब तीन महीने पहले लाल ग्रह पर आई धूल भरी आंधी के कारण सूर्य की रोशनी नहीं मिलने के कारण इस रोवर का नासा से संपर्क टूट गया था। उसके बाद से ही सौर ऊर्जा से चलने वाले इस रोवर का कामकाज ठप है।

नासा ने अपने मंगल अभियान के तहत इसे 2003 में लांच किया था। इस रोवर के शुरुआती अभियान की अवधि 92 दिन तय की गई थी, लेकिन यह पिछले 14 साल से मंगल पर सक्रिय था। नासा के ही मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एमआरओ) के कैमरे ने 20 सितंबर को एक तस्वीर उतारी थी, जिसमें ग्रह की एक घाटी की ढलान पर एक वस्तु दिख रही है।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार / कोहली और वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को खेल रत्न, हिमा दास को अर्जुन पुरस्कार

 महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना को अर्जुन पुरस्कार दिया गया

क्रिकेट कोच तारक सिन्हा को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया
राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का वितरण किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। एथलीट हिमा दास को अर्जुन पुरस्कार दिया गया।

एशियाड के चलते सितंबर में पुरस्कार वितरण
हर साल ये पुरस्कार मेजर ध्यान चंद के जन्मदिन 29 अगस्त को दिए जाते थे। लेकिन, इस बार एशियाड की वजह से इन पुरस्कारों का वितरण सितंबर में किया जा रहा है।

खेल रत्न पाने वाले तीसरे क्रिकेटर बने विराट
सचिन तेंडुलकर को 1997, महेंद्र सिंह धोनी को 2007 में खेल रत्न पुरस्कार दिया गया था। विराट खेल रत्न पाने वाले तीसरे क्रिकेटर हैं। विराट के नाम की 2016 में भी चर्चा हुई थी, लेकिन उन्हें तब चुना नहीं गया था।

अर्जुन पुरस्कार
नीरज चोपड़ा (जैवलिन थ्रोअर), जिन्सन जॉनसन और हिमा दास (एथलेटिक्स), एन सिक्की रेड्डी (बैडमिंटन), सतीश कुमार (मुक्केबाजी), स्मृति मंधाना (क्रिकेट), शुभंकर शर्मा (गोल्फ), मनप्रीत सिंह और सविता (हॉकी), रवि राठौड़ (पोलो), राही सरनोबत, अंकुर मित्तल और श्रेयसी सिंह (निशानेबाजी), मणिका बत्रा और जी साथियान गणशेखरन (टेबल टेनिस), रोहन बोपन्ना (टेनिस), सुमित (कुश्ती), पूजा केडिया (वुशु), अंकुर धामा (पैरा-एथलेटिक्स), मनोज सरकार (पैरा-बैडमिंटन)।

द्रोणाचार्य पुरस्कार
सी ए कुट्टप्पा (मुक्केबाजी), विजय शर्मा (वेटलिफ्टिंग), ए श्रीनिवास राव (टेबल टेनिस), सुखदेव सिंह पन्नू (एथलेटिक्स), क्लेरेंस लोबो (हॉकी, आजीवन), तारक सिन्हा (क्रिकेट, आजीवन), जीवन कुमार शर्मा (जूडो, आजीवन), वी आर बीडु (एथलेटिक्स, आजीवन)।

ध्यानचंद पुरस्कार
सत्यदेव प्रसाद (तीरंदाजी) भरत कुमार क्षेत्री (हॉकी), बॉबी अलॉयसियस (एथलेिटक्स), चौगले दादू दत्तात्रेय (कुश्ती)।

तेनजिंग नॉर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड
अंशुल जम सेनपा (पर्वतारोही), स्वर्गीय रवि कुमार (पर्वतारोही), सागर परिक्रमा करने लेफ्टिनेेंट कमांडर वर्तिका जोशी और उनकी टीम (नौकायन), कैप्टन उदित थापर (स्काई डाइविंग)।

फुटबॉल / मोद्रिच को बेस्ट फुटबॉलर का अवॉर्ड, रोनाल्डो-सालाह को पीछे छोड़ा

 क्रोएशिया के कप्तान लुका मोद्रिच को फीफा बेस्ट फुटबॉल प्लेयर का अवॉर्ड मिला। मोद्रिच की कप्तानी में क्रोएशिया पहली बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा। रियाल मैड्रिड के 33 वर्षीय मिडफील्डर ने इस पुरस्कार के लिए अपने पूर्व साथी खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लिवरपूल के मोहम्मद सालाह को पीछे छोड़ा। पिछले 10 साल में सिर्फ अर्जेंटीना के लियोनल मेसी या रोनाल्डो को ही यह पुरस्कार मिलता रहा है।


फ्रांस के दिदिएर देसचैम्प्स बने सर्वश्रेष्ठ कोच
मोद्रिच ने रियाल मैड्रिड के लिए तीन बार चैम्पियंस लीग खिताब जीता। उन्हें 29.05% वोट मिले। वहीं, रोनाल्डो को 19.08% और सालाह 11.23% वोट मिले। सलाह को बेहतरीन गोल के लिए पुस्कस पुरस्कार दिया गया। उन्होंने इंग्लिश प्रीमियर लीग में एवर्टन के खिलाफ यह गोल किया था।

लंदन में आयोजित इस अवॉर्ड कार्यक्रम में रोनाल्डो और मेसी ने हिस्सा नहीं लिया। दोनों ही काम की व्यस्तता के कारण यहां उपस्थित नहीं हो पाए। दोनों की अनुपस्थिति की काफी आलोचना की गई।

मोद्रिच ने इस पर कहा, 'काफी भावुक हो रहा हूं क्योंकि यह सभी के काम को आभार है। कई लोग आए और मेरा साथ दिया। हर किसी की अपनी वजहें होती हैं। निश्चित रूप से उनका यहां होना मुझे अच्छा लगता, लेकिन वे यहां नहीं हैं

निधन / जसदेव सिंह नहीं रहे, 9 ओलिंपिक, 6 एशियाड में की थी लाइव कमेंट्री

 उन्हें ओलिंपिक के सर्वोच्च पुरस्कार ओलिंपिक ऑर्डर से भी सम्मानित किया गया था

आकाशवाणी में समाचार वाचक के रूप में शुरू किया था करियर, आठ हॉकी विश्व कप की कमेंट्री की
1963 से 48 साल तक गणतंत्र दिवस परेड का आंखों देखा हाल श्रोताओं तक पहुंचाया

. जाने-माने खेल कमेंटेटर जसदेव सिंह का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को यहां निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। जसदेव ने 1968 से 2000 के दौरान आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए नौ ओलिंपिक, आठ हॉकी विश्व कप और छह एशियाई खेलों की कमेंट्री की। उन्होंने कई स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों पर भी कमेंट्री की।

मै जसदेव सिंह बोल रहा हूं... अब खामोश
कुछ साल पहले उन्होंने अपने जीवन की कहानी 'मै जसदेव सिंह बोल रहा हूं…' के रूप में एक किताब की शक्ल दी थी। उन्हें 1985 में पद्मश्री और 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

केंद्रीय खेल राज्य मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने उनके निधन पर दुख जताया। उन्होंने ट्वीट किया,‘गहरे दु:ख के साथ हमारे बेहतरीन कमेंट्रेटरों में से एक श्री जसदेव सिंह के निधन की जानकारी मिली। वह आकाशवाणी और दूरदर्शन के बेहतरीन कमेंटेटर थे।’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘भारतीय कमेंट्री की 'स्वर्णिम आवाजों' में से एक जसदेव सिंह के निधन के बारे में जानकर दु:ख हुआ। उनके परिवार और असंख्य प्रशंसकों के साथ मेरी संवेदना है।’

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया कि उनके निधन से रेडियो कमेंट्री के एक युग का अंत हो गया। एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने लिखा, ‘टेलीविजन से पहले के युग में वे ऐसे हॉकी कमेंटेटर थे जो गेंद के साथ रफ्तार मिला सकते थे।’

जसदेव की आवाज देश के कई ऐतिहासिक पलों को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बनी। फिर चाहे वह 1975 का हॉकी विश्व कप का फाइनल हो या अंतरिक्ष में पहले भारतीय राकेश शर्मा का पहुंचना।

जसदेव ने 1955 में जयपुर में ऑल इंडिया रेडियो में काम करना शुरू किया था। वे आठ साल बाद दिल्ली आ गए। उन्होंने 35 साल तक दूरदर्शन के लिए काम किया। खास यह है कि उन्होंने खुद कभी कोई खेल नहीं खेला।

सुप्रीम कोर्ट / बैंक खाता खोलने, सिम खरीदने और स्कूलों में एडमिशन के लिए आधार जरूरी नहीं

 सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तीन मामलों में फैसले सुनाए

पहला : आधार की संवैधानिक वैधता बरकरार
दूसरा : प्रमोशन में आरक्षण के लिए एससी/एसटी से जुड़ा आंकड़ा जुटाने की जरूरत नहीं
तीसरा : पारदर्शिता के लिए अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग हो

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तीन अहम फैसले दिए। पहला आधार की अनिवार्यता पर था। कोर्ट के कहा कि सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए आधार अनिवार्य रहेगा। हालांकि, अब स्कूल में एडमिशन और बैंक खाता खोलने के लिए इस दस्तावेज का होना जरूरी नहीं है। दूसरा फैसला सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने पर था। इसमें कोर्ट ने अपना 2006 का फैसला बरकरार रखा। तीसरे फैसले में अदालती कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को मंजूरी दे दी गई। कोर्ट का कहना है कि इससे पारदर्शिता आएगी।

आधार कहां जरूरी, कहां नहीं; इस पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
‘‘सरकारी योजनाओं में लाभ लेने के लिए आधार जरूरी है। पैन कार्ड को लिंक करने और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आधार कार्ड जरूरी रहेगा।’’
‘‘शिक्षा ही हमें अंगूठे के निशान से दस्तखत की ओर ले गई है। अब टेक्नोलॉजी हमें दस्तखत से दोबारा अंगूठे के निशान पर ले जा रही है, लेकिन स्कूलों में एडमिशन के लिए आधार को जरूरी नहीं किया जा सकता।’’
‘‘आधार यूजीसी, नीट और सीबीएसई की परीक्षाओं के लिए जरूरी नहीं है। अदालत की इजाजत के बिना किसी भी एजेंसी के साथ बायोमैट्रिक डेटा साझा न किया जाए।’’
‘‘बैंक खाता खोलने के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं है। आधार एक्ट की धारा 57 रद्द की जाती है। निजी कंपनियां आधार कार्ड नहीं मांग सकेंगी।’’
‘‘मोबाइल फोन कनेक्शन या नया सिम कार्ड खरीदने के लिए आधार जरूरी नहीं है।’’
‘‘आधार नंबर नहीं ला पाने के चलते किसी भी बच्चे को किसी योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।’’
डेटा की हिफाजत के लिए कानून बनाए सरकार : जस्टिस सीकरी ने कहा कि बेस्ट होने से बेहतर है कि आप यूनिक रहें। आधार हाशिए पर मौजूद समाज के तबके को सशक्त करने और उन्हें पहचान करने का काम करता है। आधार दूसरे आईडी प्रूफ की तुलना में अलग है, क्योंकि इसका डुप्लीकेट नहीं बनाया जा सकता। किसी व्यक्ति को आवंटित हुआ आधार नंबर किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं जा सकता। केंद्र को डेटा की हिफाजत के लिए जल्द से जल्द कानून बनाने की जरूरत है। सरकार यह सुनिश्चित करे कि देश में किसी भी अवैध प्रवासी को आधार कार्ड आवंटित न हो।

फैसले से अलग जस्टिस चंद्रचूड़ की टिप्पणियां- आधार का डेटा डिलीट करें मोबाइल कंपनियां

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसले से अलग अपनी टिप्पणियों में कहा कि मोबाइल कंपनियों को ग्राहकों से लिया गया आधार का डेटा डिलीट कर देना चाहिए।
‘‘आधार का डेटा संवेदनशील है। किसी थर्ड पार्टी या किसी वेंडर की तरफ से इसका दुरुपयोग होने का खतरा है।’’
‘‘निजी कंपनियों को आप आधार के डेटा का इस्तेमाल करने देंगे तो वे नागरिकों की प्रोफाइल करेंगे और उनके राजनीतिक विचार जानने की कोशिश करेंगे। यह निजता का भी उल्लंघन है।’’
‘‘क्या आप ये मानकर चल रहे हैं कि बैंक खाता खुलवाने वाला हर शख्स संभावित आतंकी या मनी लॉन्डरर है?’’
‘‘आधार अपने मकसद में फेल हो चुका है। आज आधार के बिना भारत में रहना असंभव हो गया है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।’’
‘‘आधार एक्ट को मनी बिल के तौर पर संसद से पारित कराना संविधान के साथ धोखा है।’’
प्रमोशन में आरक्षण पर पुराना फैसला बरकरार
सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर 2006 में दिए अपने फैसले पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया। यह फैसला एम नागराज के मामले में दिया गया था। इसमें कहा गया था कि राज्य सरकारें कुछ शर्तों के साथ प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें संबंधित समुदाय के पिछड़ापन के आंकड़े देने होंगे। केंद्र का कहना था कि इसमें शर्तें बेवजह लगाई गई हैं। ऐसे में इसे बड़ी बेंच के पास दोबारा विचार के लिए भेजा जाना चाहिए।

प्रमोशन में आरक्षण के लिए आंकड़ा जुटाने की जरूरत नहीं : चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने एकमत से यह फैसला सुनाया। बेंच ने यह भी कहा कि एससी-एसटी कर्मचारियों को नौकरियों में तरक्की में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारों को एससी-एसटी के पिछड़ेपन पर उनकी संख्या बताने वाला आंकड़ा इकट्ठा करने की कोई जरूरत नहीं है।

अहम सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को भी मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा कि इसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से ही हो। इसके लिए नियम बनाएं जाएं। अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग से न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही आएगी।

राफेल /फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा- भारत के साथ डील के वक्त मैं सत्ता में नहीं था

 फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद के बयान से शुरू हुआ था विवाद

अोलांद ने कहा था- राफेल सौदे में साझेदार के तौर पर सिर्फ अनिल अंबानी की कंपनी का ही विकल्प दिया गया था
बाद में मैक्रों ने दी थी सफाई, ओलांद भी बयान से पलटे

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र में मंगलवार को राफेल डील को लेकर सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा जब भारत और फ्रांस के बीच 36 विमानों के लिए लाखों डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे, तब वे सत्ता में नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह सौदा दो सरकारों के बीच हुआ समझौता है।

सितंबर 2019 में होगी राफेल की डिलीवरी
मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उनसे पूछा गया कि क्या भारत सरकार ने कभी फ्रांस या दैसो को बताया था कि उन्हें राफेल डील में रिलायंस को भारतीय साझेदार बनाना होगा? इसी पर मैक्रों ने कहा- तब मैं सत्ता में नहीं था।

इमेनुअल मैक्रों ने कहा कि मैं पूरी तरह स्पष्ट करना चाहूंगा कि यह दोनों सरकारों के बीच की बातचीत है। मैं इसके लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात का हवाला दूंगा, जो उन्होंने कुछ दिन पहले कही थी। मैक्रों पिछले साल मई में राष्ट्रपति बने थे।

भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस सरकार से 58 हजार करोड़ रुपए में 36 राफेल फाइटर विमानों की डील की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा 2015 के अपने पेरिस दौरे के करीब डेढ़ साल बाद की थी। उम्मीद है कि सितंबर 2019 इन विमानों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी।

राफेल डील पर भारत में विवाद उस समय बढ़ा, जब पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने फ्रेंच मीडिया को जानकारी दी थी कि राफेल डील में रिलायंस डिफेंस को साझेदार बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार ने दिया था। इसके बाद कांग्रेस राफेल डील पर सवाल उठाते हुए कई दिन से भाजपा को घेर रही है।

ई-ट्रांसपोर्ट / 60 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप, ई-चार्जिंग स्टेशन सिर्फ 350; चुनौती- गाड़ियां कहां चार्ज होंगी?

 एक तरफ पेट्रोल-डीजल की कीमतें हर दिन आसमान छू रही हैं, दूसरी तरफ वाहनों से होने वाले प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। दोनों समस्याओं का समाधान आमतौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों में देखा जा रहा है। पब्लिक और पर्सनल ट्रांसपोर्ट में ई-वाहनों की भागीदारी बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार जितनी तेजी से दावे और योजनाएं बना रही है, उतनी तेजी से जमीन पर बुनियादी ढांचा खड़ा नहीं हो पा रहा। ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन का बड़े नेटवर्क सबसे बुनियादी जरूरत होती है। अभी ये हाल है कि देश में पेट्रोल पंप की संख्या तो 60 हजार के पार है लेकिन ई-चार्जिंग स्टेशन महज 350 ही हैं।


सरकार की योजना अगले तीन से पांच साल में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क तैयार करने की है। इसके तहत 30 हजार स्लो चार्जिंग स्टेशन और 15 हजार फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। शहरों में हर तीन किलोमीटर पर दो हाई चार्जिंग पाइंट और एक फास्ट चार्जिंग पाइंट लगेंगे। हाईवे पर हर 50 किलोमीटर पर एक चार्जिंग पाइंट लगाने की योजना है। ये स्टेशन पब्लिक और प्राइवेट पार्टनरशिप के अलावा कंपनियों द्वारा निजीतौर पर भी लगाए जाएंगे। अकेले दिल्ली जितने बड़े शहर के लिए 3000 चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत होगी।

रूहानी ने कहा, मिसाइल कार्यक्रम नहीं रोकेगा ईरान, प्रतिदिन करेंगे मिसाइलों की क्षमता में इजाफा

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कुछ अन्य पश्चिमी देशों की चिंता के बावजूद ईरान अपना मिसाइल कार्यक्रम नहीं रोकेगा, बल्कि वह अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की क्षमता बढ़ाना जारी रखेगा। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार को यह संकल्प व्यक्त किया।


सेनाओं की वार्षिक परेड के दौरान राष्ट्रपति रूहानी ने कहा, 'हम अपनी रक्षा क्षमताओं में कभी कटौती नहीं करेंगे। दिन प्रति दिन हम उनमें बढ़ोतरी ही करेंगे। तथ्य तो यह है कि मिसाइलों के प्रति आपका गुस्सा यह जाहिर करता है कि वे हमारे सबसे प्रभावशाली हथियार हैं।' ईरान के पास 3,500 किमी तक मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो इजरायल और मध्यपूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। रूहानी ने आगे कहा कि ईरान के साथ संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को असफलता ही हाथ लगेगी और उनका हश्र भी सद्दाम हुसैन जैसा होगा।

खाड़ी में सैन्य कार्रवाई की भी दी है धमकी
बता दें कि मई में ट्रंप के बहुपक्षीय परमाणु समझौते से हटने के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहरा गया है। पिछले महीने अमेरिका ने ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए हैं। वहीं, ईरान ने कुछ सप्ताह पहले धमकी दी कि अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में वह अन्य देशों के तेल निर्यात को बाधित करने के लिए खाड़ी में सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। हालांकि, अमेरिका खाड़ी में अपना नौैसैनिक बेड़ा तैनात रखता है ताकि तेल से लदे जहाजों के समुद्री मार्गो की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मंगल की कक्षा में चार साल पूरे होने पर मावेन ने ली सेल्फी

 अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मावेन अंतरिक्ष यान ने अपने अभियान के चार साल पूरे होने पर सेल्फी ली है। यह यान पिछले चार साल से मंगल का चक्कर लगाते हुए उसके बाहरी वायुमंडल का अध्ययन कर रहा है। नासा ने 18 नवंबर, 2013 को इसे लांच किया था। 21 सितंबर, 2014 को यह मंगल की कक्षा में पहुंचा था।


मावेन ने अपने इमेजिंग अल्ट्रावॉयलेट स्पेक्टोग्राफ (आइयूवीएस) उपकरण से सेल्फी ली। यह उपकरण मंगल के बाहरी वायुमंडल से निकल रही पराबैंगनी किरणों का विश्लेषण करता है। आइयूवीएस यान पर लगे 1.2 मीटर के मैगनेटोमीटर के आखिरी सिरे पर लगा है, जो सेल्फी स्टिक की तरह काम करता है।

नासा के अनुसार, 21 अलग-अलग तस्वीरों को जोड़कर यह सेल्फी बनाई गई है। मावेन नासा के सफलतम अभियानों में है। अपने अभियान के दौरान इसने लाल ग्रह पर हो रहे जलवायु परिवर्तन से जुड़े कई सुबूत जुटाए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभियान आने वाले समय में लाल ग्रह के बाहरी वातावरण से जुड़ी कई रोचक जानकारियां खोजेगा।

कोमा में पहुंचे मरीज के लिए वरदान साबित हुआ है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कंसेप्ट भले ही नया हो लेकिन कम समय में यह जितना कारगर साबित हो रहा है, उतनी पहले शायद ही कोई दूसरी तकनीक हुई हो। रक्षा क्षेत्र में इस तकनीक की चर्चा हर जगह हो रही है और लगभग हर जगह इस शोध भी चल रहा है लेकिन मेडिकल क्षेत्र में इसकी कामयाबी पहली बार सामने आई है। दरअसल, चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये कोमा में पहुंच चुके सात ऐसे मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है जिन्हें डॉक्टर जवाब दे चुके थे। यह तकनीक ऐसे मरीजों के लिए नई और बड़ी उम्मीद बन कर सामने आई है।


चीन ने इस तकनीक का जिन मरीजों पर प्रयोग किया उनमें से एक 19 वर्षीय मरीज भी था। यह मरीज एक एक्सीडेंट के बाद करीब छह माह से निर्जीव अवस्था में था। इस एक्सीडेंट में उसके दिमाग के बाईं और चोट लगी थी, जिसके बाद वह इस अवस्था में पहुंच गया था। चीन के कुछ बेहतरीन न्यूरोलॉजिस्ट ने उसकी जांच की और दो चरण में उसका ट्रीटमेंट किया गया। पहले उसको कोमा से रिकवरी के लिए 23 में से 7 प्वांइट्स ट्रीटमेंट दिया। इस बीच मरीज के परिजनों को यह हक था कि वह कभी भी लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने के लिए कह सकते हैं। ब्रेन स्केन के बाद मरीज को 20 प्वांइट्स और ट्रीटमेंट दिया गया। इसी तरह के दूसरे मामले में डॉक्टरों ने एक ऐसी 41 वर्षीय महिला का इलाज जो तीन माह से कोमा में थी

अमेरिकी प्रतिबंध से बौखलाया चीन, अमेर‍िकी राजदूत को क‍िया तलब

 व्यापार में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने भी अमेरिका के प्रति अपने तेवर सख्त कर लिए हैं। चीन ने अमेरिकी राजदूत टेरी ब्रांस्टैंड और नौसेना प्रमुख को तलब किया है। अमेरिका ने चीन की कई कंपनियों पर रूस से हथियार खरीदने पर प्रतिबंध लगा रखा है इसके विरोध में इन्हें तलब किया गया है।


साउथ चीन मॉर्निग पोस्ट की सूचना से मिली जानकारी के तहत बीजिंग में होने वाली तीन दिवसीय द्विपक्षीय वार्ता भी स्थगित कर दी गई है। अमेरिका चीन पर लगे प्रतिबंध को वापस नहीं लेता है तो चीन ने आगे भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। चीन की सरकार ने अमेरिका को अपनी गलती सही करते हुए उसमें सुधार लाने के साथ ही प्रतिबंध हटाने को कहा है।

बता दें कि चीन ने रूस से एस 400 विमान खरीदने की स्वीकृति दी है, जिसके बाद गुरुवार को अमेरिका ने चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग के उपकरण विकास विभाग और उसके निदेशक ली शांगफू पर अपने सीएएटीएसए एक्ट के उल्लंघन करने के आरोप में आपत्ति जताई है। इसके बाद ही चीन के रक्षा मंत्री ने इस प्रतिबंध पर आपत्ति जताते हुए इस पर सख्त विरोध दर्ज कराया है। चीन के मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीनी सैन्य नेतृत्व ने पहले से अमेरिकी के इस पक्ष का विरोध किया है।

दो हफ्ते में सीरिया को एस-300 मिसाइल प्रणाली देगा रूस

 रूस ने सोमवार को कहा कि इजरायल के एतराज के बावजूद वह अगले दो सप्ताह में सीरिया को जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली एस-300 देगा। पिछले हफ्ते सीरिया की सेना ने गफलत के चलते रूस के एक सैन्य विमान को मार गिराया था। रूस ने इसके लिए इजरायल को दोषी ठहराया था। इस हादसे में 15 रूसी सैनिक मारे गए थे।


रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई सोइगु ने यहां कहा, इस हादसे के बाद रूस सीरिया में लड़ रहे अपने सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मजबूर हुआ है। एस-300 मिसाइल प्रणाली से सीरिया की सेना मजबूत होगी।' यह मिसाइल सैन्य विमानों के साथ ही छोटी और मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को भी नष्ट कर सकती है। इजरायल को डर है कि एस-300 से हवा में उसकी क्षमता कमजोर होगी।

इसी वजह से वह रूस को मनाने की कोशिश कर रहा था ताकि वह सीरिया को मिसाइल प्रणाली ना दे। सीरिया में चल रहे युद्ध में रूस राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार का समर्थन कर रहा है। इजरायल भी सीरिया में कई हवाई हमले कर चुका है। उसका कहना है कि ये हवाई हमले असद सरकार के लिए खतरा नहीं है, इन हमलों से वह लेबनान में ईरान के समर्थन वाले हिजबुल्ला को भेजी जा रही मदद रोक रहा है।

चीन की सीमा से महज 60 किमी दूर है पोक्‍योंग एयरपोर्ट, सामरिक दृष्टि से काफी अहम

 अब सिक्किम को आधिकारिक तौर पर अपना एक एयरपोर्ट मिल गया है। अब तक सिक्किम घूमने वालों की सबसे बड़ी परेशानी यही होती थी कि उन्हें बागडोगरा एयरपोर्ट पर आना होता था। इसके बाद बस या टेक्सी से सफर करना होता था। ट्रेन से सफर करने वाले पहले जलपाइगुड़ी पहुंचते थे फिर वहां से उन्हें टेक्सी करके यहां तक आना होता था। यह काफी लंबा होने के साथ-साथ थका देने वाला भी होता था। इसके अलावा गेंगटोक आने वाले पर्यटक बागडोगरा से हेलीकॉप्टर सेवा का भी इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हवाई सफर करने वाले पर्यटक अब सीधे सिक्किम के पाक्योंग एयरपोर्ट पर उतर सकेंगे और अपने समय का सदुपयोग कर सकेंगे। यह एयरपोर्ट सिक्किम की राजधानी गेंगटोक से काफी नजदीक है। इसके अलावा यह एयरपोर्ट सामरिक दृष्टि से भी काफी अहम है। यह एयरपोर्ट विवादित क्षेत्र डोकलाम से महज 54 किमी की दूरी पर स्थित है।

आेलांद के दावे पर फ्रांस सरकार ने कहा- भारत में सहयोगी चुनने में हमारी भूमिका नहीं

 राफेल बनाने वाली कंपनी दैसो और अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस के बीच करार विवादों में
दैसो और रिलायंस नागपुर में राफेल के पार्ट्स बनाएंगे, इसी पर कांग्रेस को आपत्ति
यूपीए के वक्त एचएएल को यह काम मिलना था, एनडीए के वक्त रिलायंस का नाम जुड़ गया
ताजा विवाद फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के बयान पर, उन्होंने कहा था- भारत ने ही रिलायंस का नाम दिया

पीएम मोदी आज आर्ट इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर की रखेंगे आधारशिला, कई होंगे शामिल

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्‍ली में 25,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की परियोजना का शिलान्‍यास करेंगे। नई दिल्ली में आज इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन और एक्सपो सेंटर (आइआइसीसी) की आधारशिला रखी जाएगी। इस दौरान पीएम मोदी यहां मौजूद लोगों को संबोधित भी करेंगे।
नई दिल्ली के द्वारिका सेक्टर-25 में बनने वाला यह सेंटर विश्व स्तरीय एक्जीबिशन सह कन्वेंशन सेंटर होगा जिसमें वित्तीय, अतिथ्य तथा खुदरा सेवाओं जैसी सुविधाएं होंगी। बताया जा रहा है कि इस परियोजना की अनुमानित लागत 25,700 करोड़ रुपये होगी। यह परियोजना औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) द्वारा स्थापित सरकारी कंपनी इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर एंड एक्जीबिशन सेंटर लिमिटेड (आइआइसीसी लिमिटेड) द्वारा लागू की जा रही है। केंद्र सरकार के कई मंत्रियों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्‍मीद है।

Ind vs Pak: पाकिस्तान की बोलती बंद, 8 विकेट से जीता भारत

 एशिया कप में भारत ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराकर चैंपियंस ट्रॉफी में मिली हार का बदला शानदार तरीके से लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान की टीम केवल 43.1 ओवर में 162 रन पर सिमट गई। जवाब में भारत ने आसानी से 29 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत की तरफ से रोहित शर्मा ने 52 और शिखर धवन ने 46 रन बनाए। वहीं दिनेश कार्तिक और अंबाति रायुडू 31-31 रन बनाकर नाबाद रहे।


कप्तान रोहित ने लगाया अर्धशतक

भारतीय गेंदबाजों ने जब पाकिस्तान को केवल 162 रन पर समेटा तो पाकिस्तानी फैंस को भी उम्मीद थी कि उनके गेंदबाज भी कुछ कमाल करेंगे लेकिन रोहित ने उन्हें कोई मौका ही नहीं दिया। रोहित ने पिछले मैच के मैन ऑफ दा मैच रहे उस्मान खान को खासकर पीटा, उन्होंने उस्मान के ओवर में 2 चौके और 1 छक्का लगा कर 19 रन बटोर लिए। यहीं नहीं उन्होंने पाकिस्तान के मुख्य गेंदबाज हसन अली की भी खूब पिटाई की। इस दौरान रोहित ने अपना अर्धशतक भी पूरा किया। रोहित ने 37 गेंद पर 6 चौको और 3 छक्कों की मदद से अपने 50 रन पूरे किए

सोनिया गांधी आज मॉस्को में यूरेशियन महिला कॉन्फ्रेंस में करेंगी शिरकत

 यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी आज यूरेशियन वीमेन फोरम के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। वह यूरेशिया में हैं। इस कार्यक्रम में विश्व के सौ देशों की महिला सांसद शामिल हो रही हैं। बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी 21 सितंबर को इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगी।

गौरतलब है कि सोनिया गांधी काफी समय बाद किसी विश्व स्तर के कार्यक्रम में शिरकत कर रही हैं। इन दिनों वह राजनीति में भी ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आती हैं। इससे पहले सोनिया गांधी कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की साझा सरकार बनने के बाद मई 2018 में विदेश यात्रा पर गई थीं। वहां उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी गए थे। हालांकि कि सोनिया गांधी राजनीतिक यात्रा पर नहीं गईं थीं।

UP: गाजियाबाद के लाखों लोगों के लिए खुशखबरी, PM नवंबर में देंगे मेट्रो का तोहफा

 दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लाखों लोगों के लिए इस साल का दिवाली तोहफा तैयार है। दिल्ली के दिलशाद गार्डन से नया बस कॉरिडोर पर मेट्रो रेल नवंबर में दौड़ने लगेगी। बुधवार को बैठक में डीएमआरसी के अधिकारियों ने जीडीए वीसी कंचन वर्मा को आश्वस्त किया कि नवंबर मध्य में सेवा जनता के लिए शुरू कर दी जाएगी।


यह भी बताया कि पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड (पीआइबी) ने इस कॉरिडोर की संशोधित डीपीआर को हरी झंडी दे दी है। जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए डीपीआर आगे बढ़ाई जाएगी। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराने पर मंथन चल रहा है।

स्टेशन के आसपास का ट्रैफिक प्लान बनेगा

यह कॉरिडोर 9.41 किलोमीटर लंबा है। इस पर शहीद नगर, राजबाग, राजेंद्र नगर, श्याम पार्क, मोहननगर, अर्थला, हिंडन रिवर और नया बस अड्डा स्टेशन बनाए गए हैं। जीटी रोड के बीचोबीच मेट्रो ट्रैक बनाया गया है। रोड के दोनों तरफ स्टेशन बने हुए हैं। सभी स्टेशनों पर प्रवेश और निकासी का रास्ता रोड पर ही है। इस कॉरिडोर पर मेट्रो रेल का ट्रायल चल रहा है। नवंबर में मेट्रो रेल सेवा जनता के लिए शुरू हो जाएगी।

U.P. govt. to showcase heritage

 Plans ‘Vichar Kumbhs’ to connect with youth, women, Dalits and OBCs in the run-up to the 2019 poll

With an eye on the coming Lok Sabha elections, the BJP government in Uttar Pradesh plans to hold a series of Vichar (thought) Kumbhs as part of its effort to showcase the State as a hub of ancient heritage, while at the same time connecting with youth, women, Dalits and OBCs.

To be held ahead of January’s Allahabad Mahakumbh, the Vichar Kumbhs would be held at five historical towns of the State with five distinct themes: Samajik Samrasta (social complementarity), issues concerning the youth, women’s empowerment, environment and social service, an organiser of one of these conclaves said on Tuesday.

Student conclaves
Five universities in the State would host the conclaves, with up to 5,000 delegates expected to attend each of the meets, Shatrudra Pratap, one of the organisers of the Vichar Kumbhs, told The Hindu.

The Vichar Kumbh on youth affairs, to be held at the Lucknow University on December 22-23, is expected to draw about 5,000 delegates from India and abroad, according to Mr. Pratap. Delegates would include students, teachers and professionals.

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से पकड़ में आएंगे फेक ऑनलाइन रिव्यू

 वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता(एआइ)) प्रणाली विकसित करने में सफलता हासिल की है, जिसके जरिये ऑनलाइन ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर मशीन द्वारा लिखे गए फेक रिव्यू (फर्जी समीक्षा) को पकड़ा जा सकेगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि ट्रिपएडवाइजर, येल्प और अमेजन जैसी वेबसाइट्स का प्रयोग करते समय 10 में से नौ लोग इन रिव्यू को पढ़ते हैं। हालांकि ये सभी सही नहीं होते हैं। इन साइट्स पर इंसानों द्वारा फेक रिव्यू लिखा जाना एक सामान्य बात है, लेकिन अब तेजी से मशीनों द्वारा भी यह काम कराया जा रहा है।


अमेरिका स्थित आल्टो यूनिवर्सिटी में डॉक्टरेट के छात्र मिका जुउति कहते हैं, आजकल एल्गोरिद्मस पर आधारित फेक रिव्यू तैयार करना आसान और सटीक हो गया है। ज्यादातर मामलों में सही और फेक रिव्यू में अंतर करना मुश्किल होता है। मिका के मुताबिक, कई कंपनियां अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए इनके जरिये अपने ब्रांड की अच्छी इमेज बनाती हैं, वहीं कुछ इनकी मदद से अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की साइट्स पर बुरे रिव्यू लिखवाती हैं। बकौल मिका, पूरा खेल पैसों का है। यात्रा स्थलों, होटल, सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ता उत्पादों के लिए ऑनलाइन रिव्यू आज एक बड़ा बिजनेस बन गया है।

ये तकनीक की तैयार
रिव्यू तैयार करने वालों को निशाने पर लाने में मदद करने के लिए मिका और उनकी टीम ने एक तकनीक का प्रयोग किया। इसे न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन नाम दिया। इसके जरिये शोधकर्ताओं ने मॉडल को विषय की समझ दी। इसमें रिव्यू रेटिंग, रेस्तरां का नाम, शहर, राज्य और फूड टैग्स का प्रयोग कर विश्वसनीय परिणाम सामने आए। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके जरिये असली और फर्जी रिव्यू को अलग-अलग किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने बताया था तरीका
वर्ष 2017 में अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के शोधकर्ताओं ने एक मशीन को प्रशिक्षित करने वाले मॉडल के बारे में दिखाया था। इसमें एक डीप न्यूरल नेटवर्क के लिए येल्प पर मौजूद 30 लाख रेस्तरां की रेटिंग के डाटा का प्रयोग किया गया। शोधकर्ताओं ने दिखाया कि कैसे मशीन को प्रशिक्षण देने के बाद अक्षर-दर-अक्षर फेक रिव्यू लिखवाया जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ त्रुटियां थीं, जिसे पढ़ने वाले आसानी से पकड़ सकते थे। जैसे कि यह मशीन जब लास वेगास स्थित किसी जापानी रेस्तरां का रिव्यू लिखती तो उसके लिए बाल्टीमोर के इतालवी रेस्तरां का हवाला लेती। इन्हें आसानी से पकड़ा जा सकता था। इसी से शोधकर्ताओं को इससे निपटने का रास्ता सूझा।

सौर मंडल के बाहर ग्रहों को खोज रहे सेटेलाइट ने पहली बार भेजीं तस्वीरें

 सौर मंडल के बाहर स्थित ग्रहों (एक्सोप्लैनेट) की खोज के लिए भेजे गए नासा के सेटेलाइट ने पहली तस्वीरें पृथ्वी पर भेजी हैं। इन तस्वीरों में दक्षिणी आसमान में मौजूद तारों के झुंड और अन्य खगोलीय पिंड दिख रहे हैं। द ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सेटेलाइट (टीईएसएस) ने गत सात अगस्त को अपने चार कैमरों की मदद से करीब आधे घंटे में ये तस्वीरें उतारी थीं।


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुख्यालय में एस्ट्रोफिजिक्स विभाग के निदेशक पॉल ह‌र्ट्ज ने कहा, 'सितारों की दुनिया में घूमते हुए टीईएसएस आगे के अध्ययन के लिए कई संभावित ग्रहों की खोज करेगा। इन तस्वीरों को देखकर सेटेलाइट के कैमरों की क्षमता का पता लग गया है। आने वाले समय में हमें दूसरी पृथ्वी भी मिल सकती है।' इन तस्वीरों में तारों के कई समूह जैसे कैप्रीकार्नस व पिक्टर के कुछ हिस्से और हमारी आकाशगंगा के नजदीक मौजूद अन्य गैलेक्सी भी दिख रही हैं।

केपलर यान के बाद नासा ने एक्सोप्लैनेट की खोज के लिए टीईएसएस को बीते अप्रैल में लांच किया था। अपने दो साल के अभियान में टीईएसएस का लक्ष्य 30 से 300 प्रकाश वर्ष दूर स्थित चमकीले तारों का अध्ययन करना है।

चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए बांग्लादेश में अगला आम चुनाव ईवीएम से

 बांग्लादेश में दिसंबर में होने वाला आम चुनाव ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से कराने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री शेख हसीना की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति की बैठक में करीब 50 करोड़ डॉलर से डेढ़ लाख ईवीएम खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

योजना मंत्री एएचएम मुस्तफा कमान ने कहा कि इससे चुनाव में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके सहयोगी दल चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध कर रहे हैं।

उनका मानना है कि ईवीएम के जरिये गड़बड़ी की जा सकती है। चुनाव आयोग के सचिव हिलाल उद्दीन अहमद ने अगस्त में कहा था कि आम चुनाव दिसंबर के तीसरे हफ्ते में कराए जा सकते हैं क्योंकि प्रधानमंत्री हसीना का कार्यकाल अगले साल जनवरी में समाप्त हो रहा है।

रबी सम्मेलन में दलहन व तिलहन की पैदावार बढ़ाने पर सरकार का होगा जोर

 मानसून की अच्छी बारिश को देखते हुए आगामी रबी सीजन की फसलों के लिए बहुत अच्छा होगा। मिट्टी में पर्याप्त नमी और अनुकूल जलवायु के बीच रबी सीजन की तैयारी के साथ सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा की रणनीति पर भी चर्चा होगी। 18 और 19 सितंबर को होने वाले रबी सम्मेलन में दलहन व तिलहन की पैदावार बढ़ाने पर सरकार का जोर होगा। इस सम्मेलन में सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों व सचिवों के हिस्सा लेने की संभावना है।


बीते फसल वर्ष में शानदार पैदावार हुई है, जबकि चालू खरीफ सीजन में मानसून की अच्छी बारिश के चलते बुवाई रकबा मे वृद्धि हुई है। बंपर पैदावार की भी उम्मीद बढ़ गई है। आगामी रबी सीजन की तैयारियों में सरकार कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है। संसदीय चुनाव का साल होगा, जिसमें किसानों को भरपूर लाभ देने की कोशिश की जाएगी। देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी रबी सीजन का उत्पादन बहुत अच्छा होना चाहिए।

इन्हीं उम्मीदों के बीच केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों को इसकी तैयारियों को समय से अंजाम देने के लिए आगाह कर दिया है। महीने भर पहले ही सभी राज्यों को अपनी तैयारियों के लिए जरूरी वस्तुओं की आवश्यकता की सूची तैयार करने और उसे पूरा करने का हिदायत दी गई है।

सम्मेलन में सभी राज्यों की ओर से खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य जरूरी सामान का ब्यौरा रखा जाएगा। कृषि मंत्रालय इसके लिए संबंधित एजेंसियों और मंत्रालयों को बुवाई शुरु होने से पहले राज्यों को निश्चित अवधि में आपूर्ति करने का निर्देश देगी।

सम्मेलन के लिए तैयार एजेंडा में दलहन की पैदावार को बढ़ाने की रणनीति पर विचार होगा। इसमें धान की कटाई के बाद लाखों हेक्टेयर जमीन परती छोड़ दी जाती है, जो अगले सीजन तक खाली पड़ी रहती है। जिन राज्यों में इस तरह की परती जमीन छोड़ी जाती है, उन्हें पर्याप्त मदद मुहैया कराई जाएगी, ताकि उन्हें दलहन फसलों की बुवाई हो सके। ऐसी जगहों पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों को पहले से ही सचेत कर दिया गया है, जिससे वहां दलहन की बुवाई का बंदोबस्त करने से किसान न हिचके।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में दलहन को काफी तरजीह देने पर विचार किया जाएगा। फसलों के बीच में तिलहन की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अपनी आधुनिक तकनीक को सम्मेलन में राज्यों के समक्ष रखेगा, ताकि किसान उसका फायदा उठा सकेंगे।

मिट्टी की उर्वरता, खेतों में संतुलित खाद का प्रयोग, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पहले दिन केंद्रीय कृषि आयुक्त अपनी ओर से एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद राज्यों के सचिवों का समूह गठित किया जाएगा, जो विभिन्न फसलों पर चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

यूजीसी ने किया शिक्षा में बदलाव, सिर्फ शपथ पत्र पर मिलेगी ओपेन कोर्स चलाने की अनुमति

  मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के सख्त नियमों में उलझे उच्च शिक्षण संस्थानों को यूजीसी ने बड़ी राहत दी है। ऐसे संस्थानों को नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) रैंकिंग की शुरुआती बाध्यता से मुक्त रखते हुए सिर्फ एक शपथ पत्र पर ही मुक्त और दूरस्थ पाठ्यक्रमों को चलाने की अनुमति देने का फैसला लिया है। हालांकि ऐसे संस्थानों को अनुमति मिलने के दो साल के भीतर नैक की रैकिंग हासिल करना जरूरी होगा अन्यथा इन्हें दी गई अनुमति रद्द कर दी जाएगी। अभी तक उच्च शिक्षण संस्थानों को इन पाठ्यक्रमों को शुरु करने के लिए पहले नैक की रैकिंग हासिल करनी जरूरी थी, जो कि नए संस्थानों के लिए संभव नहीं था।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों की इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के चलाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के लिए तय नियमों में बदलाव किया है। वर्ष 2017 में इनके लिए बनाए गए नियमों के बाद से यह तीसरा बदलाव है।

उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक की शुरुआती बाध्यता से किया मुक्त

यूजीसी ने मुक्त और दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रमों की अनुमति के लिए जो नियम तैयार किए थे, उसके तहत यह अनुमति पांच साल पुराने और नैक की रैकिंग ( औसत रैकिंग 3.26) हासिल करने वाले संस्थानों को ही मिल सकती थी। ऐसे में संस्थानों के लिए सबसे कठिन नैक की रैकिंग हासिल करना होता था, क्योंकि इसके लिए उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर सहित वह जरूरी मापदंड हासिल करना जरूरी होता था, जो वह कोर्स शुरू करने से पहले नहीं जुटा पाते थे।

संस्थानों का तर्क रहता था कि वह किस आधार पर जरूरी मापदंड जुटाए, जब उनके यहां छात्रों का अभी कोई नामांकन ही हुआ है। संस्थानों से इसके तहत चार अक्टूबर तक आवेदन भी करने को कहा है।

यूजीसी ने इसके साथ ही मुक्त और दूरस्थ कोर्सो को चलाने वाले संस्थानों के लिए कुछ नए मापदंड भी तय किए है, इसके तहत संस्थानों को प्रत्येक सौ छात्रों पर उस विषय से संबंधित एक योग्य परामर्शक की नियुक्ति को जरूरी बताया है।

इसके अलावा प्रयोगशाला, पुस्तकालय, ऑन-लाइन संपर्क तथा सूचना एवं संचार प्रोद्यौगिकी सुविधाओं को छात्रों की संख्या के अनुपात में जुटाने को जरूरी बताया है। वहीं नए नियमों के तहत मुक्त विश्वविद्यालयों को इससे अलग रखा गया है।

आंगनबाड़ी और आशा वर्करों को मुफ्त बीमे की सुविधा जल्द

 आंगनबाड़ी और आशा वर्करों को जल्द ही मुफ्त जीवन बीमा और दुर्घटना बीमे की सुविधा मिलेगी। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने सोमवार को यह एलान विश्वकर्मा राष्ट्रीय पुरस्कार और राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार वितरित करने के दौरान की। इस दौरान गंगवार ने वर्ष 2016 के लिए 28 विश्वकर्मा राष्ट्रीय पुरस्कार और 128 राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार बांटे।


आंगनबाड़ी और आशा वर्करों को यह दोनों सुविधाएं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमबीएसवाई) के तहत मिलेंगी। दोनों में दो लाख रुपये के बीमे की सुविधा प्रदान की जाती है। एक आम उपभोक्ता के लिए पीएमजेजेवाई का प्रीमियम जहां एक साल में 330 रुपये हैं वहीं पीएमबीएसवाई का प्रीमियम मात्र 12 रुपये है।

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने देश की 14 लाख आंगनबाड़ी वर्करों का मानदेय 3,000 हजार से 4,500 करने का एलान किया था जबकि उनके सहायकों का मानदेय 1,500 से बढ़ाकर 2,250 रुपये करने की बात कही थी। 10 लाख आशा वर्करों का भी मानदेय बढ़ाया गया था।

पीएम नरेंद्र मोदी आज वाराणसी को देंगे 557 करोड़ रुपये का रिटर्न गिफ्ट

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कल अपना 68वां जन्मदिन मनाया है। अब बारी रिटर्न गिफ्ट देने की है। वाराणसी के बीएचयू में आज प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय क्षेत्र को 557 करोड़ रुपये का रिटर्न गिफ्ट देंगे। इस कार्यक्रम की उलटी गिनती शुरु हो गई है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 68वां जन्मदिन मनाने दो दिवसीय वाराणसी प्रवास पर है। आज उनका कार्यक्रम बीएचयू में है। यहां के एम्फीथियेटर मैदान में वह एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इसके साथ ही 557 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं की सौगात देंगे। पीएम मोदी ने कल रात्रि प्रवास डीरेका गेस्ट हाउस में किया। बीएचयू की सभा के बाद पीएम मोदी वाराणसी से रवाना हो जाएंगे।

करेंगे लोकार्पण
-362 करोड़ : शहरी विद्युत सुधार कार्य, पुरानी काशी (आइपीडीएस)
-84.61 करोड़ : 3722 मजरो में विद्युतीकरण का काम
-9.90 करोड़ : सिंगल फेज के 90 हजार मीटर लगाने का काम
-2.80 करोड़ : 33 केवी विद्युत उपकेंद्र बेटावर का निर्माण
-2.58 करोड़ : 33 केवी विद्युत उपकेंद्र कुरुसातो का निर्माण
-2.74 करोड़ : नागेपुर ग्राम पेयजल योजना
-20 करोड़ : बीएचयू में अटल इन्क्यूबेशन सेंटर।

रखेंगे आधारशिला
-14.10 करोड़ : बीएचयू में वैदिक विज्ञान केंद्र की स्थापना
-34 करोड़ : रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ आफ्थेल्मोलाजी
-23.08 करोड़ : 132 केवी विद्युत उपकेंद्र चोलापुर का निर्माण।
-98 लाख : कुंभकारी उद्योग के तहत 260 विद्युत चालित चाक, आधुनिक भट्ठी
-53.25 लाख : हनी मिशन के तहत 500 मधुमक्खी बॉक्स
- 7.50 लाख : खादी व सोलर वस्त्र के अंतर्गत 3 रेडीबार्प मशीन।

पीएम मोदी तीनों सेनाओं की संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस को आज जोधपुर में संबोधित करेंगे

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 सितम्बर को तीसरी बार तीनों सेनाओं की संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस को जोधपुर में संबोधित करेंगे। कांफ्रेंस में तीनों सेनाओं के प्रमुख सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा और नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा शामिल होंगे।


सूत्रों के मुताबिक, सेनाओं में एकीकरण के मुद्दों पर अध्ययन कराया गया था, लेकिन जैसा सोचा गया इस दिशा में वैसी प्रगति नहीं हो सकी। वही दूसरी ओर भविष्य की जरुरत को समझते हुए स्पेस और गुप्त युद्धों के लिए यूनिफाइड कमांड की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।

यूनिफाइड कमांड के अलावा जम्मू कश्मीर में एलओसी की संवेदनशीलता, नॉर्थ ईस्ट से लेकर जम्मू कश्मीर तक फैली सीमा, आर्मड फोर्स में कम से कम दुर्घटना, सामरिक महत्व के हथियारों की जरूरत और उन्हें लगाने के क्षेत्र, आर्मी कमांडर और कोर कमांडरों की क्षेत्रवार रिपोर्ट, आतंकवादी गतिविधियों पर सेना का रुख, सैनिकों और पूर्व सैनिकों से जुडे़ मामले और सोशल मीडिया से जुड़े मसलों पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

बता दें कि अक्टूबर 2014 में पहली संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सलाह दी थी कि कमांडर कांफ्रेंस दिल्ली के अलावा सरहद पर फॉरवर्ड पोस्ट और समंदर में भी होनी चाहिए। इसी का नतीजा था कि दिसंबर 2015 में कमांडर कांफ्रेंस नौसेना के विमान वाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य में हुई। वही 2017 में इसका आयोजन देहरादून में इंडियन मिलिट्री अकेडमी में किया गया था। इस बार इसका जिम्मा वायुसेना ने उठाया है।

एशिया कप 2018: लगातार दो दिन भारत का मैच समझ से परे

 भारत अपने अभियान की शुरुआत न सिर्फ एशिया कप जीतने के लिए करना चाहेगा बल्कि वह इंग्लैंड दौरे की निराशा को पीछे छोड़ते हुए अपने प्रशंसकों के दिल भी जीतना चाहेगा। इंग्लैंड दौरे से अपेक्षाएं ज्यादा थीं, लेकिन परिणाम इसके अनुरूप नहीं रहा। एशिया कप में एक मजबूत प्रदर्शन से चीजों को फिर से ठीक करने और प्रशंसकों का दिल जीतने में मदद मिलेगी।


पाकिस्तान के खिलाफ मुश्किल जंग से पहले हांगकांग के खिलाफ पहला मैच एक अच्छा वार्म अभ्यास मैच साबित हो सकता है। हालांकि यह समझ से परे है कि आयोजकों ने लगातार दो दिन भारत के मैच का कार्यक्रम तय किया। वह भी दूसरा मैच पाकिस्तान से।

क्वालीफाइंग राउंड में कड़ा मुकाबला करने के बाद हांगकांग यहां तक पहुंचा है। पहले मैच में हालांकि पाकिस्तान ने उन्हें आसानी से हरा दिया और अब भारत के खिलाफ वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहेंगे।भारतीय टीम में युवा और अनुभवी खिलाडि़यों का अच्छा मिश्रण है और उनके कप्तान रोहित शर्मा को 50 ओवरों का प्रारूप काफी पसंद है। उनकी निगाहें अपने रिकॉर्ड में कम से कम दो शतक और जोड़ने पर होगी।

वह भाग्यशाली हैं कि मुश्किल समय में मार्गदर्शन के लिए उनके साथ महेंद्र सिंह धौनी हैं। धौनी का अनुभव सच में बेशकीमती है और जिस ढंग से युवा स्पिनर्स को वह गाइड करते हैं, शानदार है।

भारतीय बल्लेबाजी टीम का प्रमुख आकर्षण है, लेकिन इस बार उनकी गेंदबाजी में भी काफी विविधता है। दो कलाई के स्पिनर युजवेंद्रा सिंह चहल और कुलदीप यादव अपने-अपने स्टाइल से नियमित तौर पर विकेट ले रहे हैं और जिस ढंग से वे एक-दूसरे की सफलता में खुश होते हैं। वह 70 के दशक में भारतीय स्पिनरों की याद दिलाते हैं।

आमतौर पर भारत पहले बल्लेबाजी करना चाहेगा क्योंकि इससे उनके बल्लेबाजों को क्रीज पर समय बिताने का मौका मिल जाएगा मगर उन्हें अगले दिन पाकिस्तान से मैच खेलना है, ऐसे में वे मैच को जल्दी खत्म कर अपनी ऊर्जा बचाना चाहेंगे। ऐसा करने के लिए उन्हें टॉस जीतना होगा। यह देखना रोचक होगा कि टॉस के मामले रोहित विराट कोहली से ज्यादा भाग्यशाली रहते हैं या नहीं।

चीन के साथ नेपाल का दूसरा सैन्य अभ्यास आज से

 नेपाल और चीन के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का दूसरा संस्करण आज से चीन के दक्षिण पश्चिम सिचुआन प्रांत में शुरू होगा। इसमें आतंकवाद से मुकाबला करने के तरीके पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा। नेपाली सेना के प्रवक्ता गोकुल भंडारी ने बताया कि नेपाल के 12 सैन्यकर्मी 12 दिवसीय 'माउंट एवरेस्ट मैत्री अभ्यास' के दूसरे संस्करण में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। इस अभ्यास में मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह दूसरी बार होगा जब नेपाली सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास में भाग लेगी। इस तरह का पहला अभ्यास पिछले साल अप्रैल में आयोजित किया गया था।

नेपाल पिछले 13 वर्षों से भारतीय सेना के साथ 'सूर्य किरण' नामक बटालियन स्तर का अभ्यास कर रहा है। इसमें दोनों पक्षों से लगभग 300 सैन्यकर्मी हिस्सा लेते हैं। नेपाल और चीन के रक्षा बलों ने हाल के वर्षों में अपना सहयोग बढ़ाया है।

जर्मनी, इटली के दौरे पर ममता, राज्य में निवेश आकर्षित करना है लक्ष्य

 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार को 13 दिवसीय जर्मनी और इटली के दौरे पर रवाना हुईं। इस दौरे का उद्देश्य राज्य में निवेश आकर्षित करना है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ वित्त मंत्री अमित मित्रा, वित्त सचिव एचके द्विवेदी और मुख्य सचिव मलय दे सुबह 9.45 बजे जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर के लिए रवाना हुए। वहां पांच दिन व्यतीत करने के बाद सीएम इटली के मिलान शहर जाएंगी। उनके 28 सितंबर को महानगर लौटने की संभावना है।

विदेश दौरे पर रवाना होने से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में सुश्री बनर्जी ने कहा कि मुझे उद्योगपतियों, व्यापारियों और दो यूरोपीय देशों की सरकार द्वारा आमंत्रित किया गया था। इस वर्ष बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट के दौरान वहां के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य का दौरा किया था।

मेरा फ्रैंकफर्ट और मिलान का दौरा राज्य में निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से है। सीएम उक्त दोनों शहरों में विभिन्न उद्यगपतियों से मुखातिब होंगी। उन्होंने कहा कि पोलैंड से भी निमंत्रण मिला था जहां बिजली मंत्री शोभनदेव चटर्जी ने हाल ही में दौरा किया था और आइटी सचिव देवाशिष सेन जल्द ही अमेरिका में सिलिकॉन वैली का दौरा करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इस तरह की यात्राओं से फायदा होता है क्योंकि इससे राज्य में अधिक निवेश आता है। ममता ने कहा कि अपनी अनुपस्थिति में कामकाज देखने के लिए मैंने मंत्रियों व अधिकारियों की दो कमेटियों का गठन किया है

कक्षा में पहुंचे पीएसएलवी-42 से छोड़े गए दोनों ब्रिटिश सेटेलाइट, जानिए- क्या है इसकी खासियत

 

इसरो द्वारा रविवार को छोड़े गए दोनों ब्रिटिश सेटेलाइट ('नोवा एसएआर' और 'एस1-4') कक्षा में पहुंच गए। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से इसरो ने अपने कैरियर पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी-42) से इन्हें अंतरिक्ष में भेजा। इसरो ने 12 अप्रैल को लांच किए गए आइएनआरएसएस-11 के बाद कोई सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा है। अब तक इसरो 29 देशों के 237 सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुका है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता के लिए इसरो को ट्वीट कर बधार्इ दी है।

इसके लिए 33 घंटे के काउंटडाउन की शुरुआत शनिवार दोपहर एक बजकर आठ मिनट से हुई। इस मिशन में दो सेटेलाइट 'नोवा एसएआर' और 'एस1-4' को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाना है। इनका संयुक्त वजन 800 किलोग्राम से अधिक है।

रविवार रात 10.08 बजे चार चरणों वाला यह सेटेलाइट श्रीहरिकोटा से छोड़ा गया। पहला स्टेज दो मिनट बाद अलग हुआ और चौथा चरण उड़ान के 17 मिनट बाद अलग हुआ। इसरो चेयरमैन के शिवन ने बताया किसेटेलाइट उड़ान के17 मिनट 44 सेकेंड बाद अलग हुआ और 583 किलोमीटर दूर कक्षा में स्थापित हो गया। ब्रिटेन के सरे सेटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड के इन दोनों सेटेलाइट का कुल वजन 889 किलोग्राम है। इन्हें इसरो की कामर्शियल विंग एंट्रिक्स कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा भेजा गया है।

445 किलोग्राम वजनी 'नोवा एसएआर' एक एस-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार सेटेलाइट है, जो वनों की मैपिंग, बाढ़ और आपदा की मॉनीट¨रग का काम करेगा। जबकि 444 किलोग्राम वजनी 'एस1-4' एक हाई रेजोल्यूशन ऑप्टिकल अर्थ ऑब्जर्वेशन सेटेलाइट है, जो स्त्रोतों के सर्वे, पर्यावरण मॉनीटरिंग, अर्बन मॉनीटरिंग और आपदा मॉनीटरिंग का काम करेगा।

इलाहाबाद कुंभ : किन्नर संन्यासी बिखेरेंगे वैभव, अखाड़ा पर पेंच

 संगमनगरी इलाहाबाद में जनवरी 2019 में पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना व अदृश्य सरस्वती की मिलन स्थली संगम तट पर त्याग, श्रद्धा व समर्पण का प्रतीक कुंभ मेला लगेगा। इसी के साथ संगम तीरे तंबुओं की नगरी आबाद हो जाएगी। इस बार कुंभ में किन्नर संन्यासी भी वैभव बिखरेंगे।


मोक्ष की आस में संत-महात्माओं के साथ लाखों श्रद्धालु रेती में धूनी रमाकर भजन कीर्तन में लीन रहेंगे। प्रयाग की उसी पवित्र धरा पर पहली बार किन्नर संन्यासी भी आने की तैयारी कर रहे हैं। अन्य संत-महात्माओं से इतर स्वयं की पहचान बनाने के लिए किन्नर संन्यासियों ने स्वयं का 'अखाड़ा' बनाया है। मेला प्रशासन से 13 अखाड़ों की भांति किन्नर अखाड़ा ने जमीन व सुविधा मांगी है, परंतु पेंच अखाड़ा को लेकर फंस गया है। मेला प्रशासन उन्हें किसी संस्था के नाम पर सुविधा मुहैया कराने को तैयार है, परंतु अखाड़ा नाम से न तो भूमि आवंटित करेगा, न ही सुविधा देगा। किन्नर की तरह महिलाओं के परी अखाड़ा को भी तवज्जो नहीं दी जाएगी। ऐसा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के विरोध के चलते हुआ है।

अखाड़ा परिषद धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए सिर्फ 13 अखाड़ों को मान्यता देता है। इसके इतर किसी 14वें समूह को अखाड़ा की मान्यता नहीं मिली है। किन्नरों से पहले यहां महिलाओं का परी अखाड़ा भी बना था, उसे भी अखाड़ा परिषद ने मान्यता नहीं दी। इसके चलते विवाद से बचने के लिए मेला प्रशासन ने माघ मेला 2017 में किन्नरों को अखाड़ा के नाम पर जमीन व सुविधाएं नहीं दी थी।

अब कुंभ में भी किन्नर संन्यासियों को अखाड़ा के नाम पर किसी को जमीन व सुविधा नहीं देने का निर्णय लिया है। कुंभ मेला प्रशासन का कहना है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की जो परंपराएं और मान्यताएं हैं उससे इतर कोई काम नहीं किया जाएगा। अखाड़ा परिषद जिसे कहेगा उसी को उनके अनुरूप जमीन व सुविधाएं दी जाएंगी।

एक रिपोर्ट में हुआ खुलासा- अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार को बिगाड़ सकता है जल सकंट

 विश्व बैंक की जलवायु परिवर्तन, जल एवं अर्थव्यवस्था पर एक रिपोर्ट ‘हाइ एंड ड्राइ क्लाइमेट चेंज, वाटर एंड द इकोनोमी’ में कहा गया है कि जल संकट के कारण अधिकांश देशों के आर्थिक विकास की गति थम सकती है। साथ ही इससे लोगों के विस्थापित होने की दर में वृद्धि हो सकती है। यह समस्या की चपेट में तकरीबन पूरी दळ्निया के आने की आशंका जताई गई है। दरअसल जलवायु परिवर्तन से जल संकट बढ़ रहा है। बढ़ती जनसंख्या, लोगों की बढ़ती आमदनी और शहरों के विस्तार से पानी की मांग में भारी बढ़ोतरी होने वाली है, जबकि जल आपूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था कहीं नहीं है।


भारत में पानी की भयावह किल्लत
भारत के संदर्भ में इस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि यहां भी लोगों को पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ेगा। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि भारत में औसत से कम बारिश होने पर संपत्ति से जुड़े झगडों में हर साल अमूमन चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। कई मामलों में देखा गया है कि बाढ़ आने पर दंगे भी होते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात में जब जमीन के नीचे पानी का स्तर गिरने से सिंचाई की जरूरतों के लिए पानी को हासिल करना महंगा हो जाएगा तो किसान फसल प्रणाली में बदलाव करने के बजाय या फिर पानी के बेहतर उपयोग का रास्ता अपनाने के बजाय शहरों की ओर पलायन कर सकते हैं। विश्व बैंक के इस हालिया आकलन के मुताबिक भूमिगत जल की पंपिंग का भारत के कुल कार्बन उत्सर्जन में चार से छह प्रतिशत तक का योगदान है। विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट में आशंका जताई है कि जल संकट आर्थिक वृद्धि और विश्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है और जलवायु परिवर्तन इस समस्या को और भी ज्यादा बढ़ा रहा है।

World Sepsis Day 2018, here are common symptoms and effects of the disease

 Sepsis is the body’s response to an infection that affects tissues and organs. It can, however, be treated in the early stages. It currently causes approximately six to nine million deaths worldwide every year, most of which are preventable (source: WorldSepsisDay.org). Sepsis also causes maternal and neonatal morbidity and mortality in low- and middle-income countries and affects hospitalised patients in high-income countries.


September 13th marks World Sepsis Day, and events are held to raise awareness of sepsis all over the world. It can range from medical education, to sports activities and fundraising events.

The most common causes for sepsis can include pneumonia, as well as kidney infection and bloodstream infection. The common symptoms of sepsis includes fever above 38ºC or temperature below 36ºC, heart rate higher than 90 beats per minute and a breathing rate higher than 20 breaths per minute. Signs can include patches of discoloured skin, decreased urination, low platelet count, breathing problems, abnormal heart function, extreme weakness and septic shock.

All railway tracks to be electrified

 Over 13,600 route km to benefit

The Cabinet Committee on Economic Affairs on Wednesday approved the proposal for electrification of the remaining 13,675 route km of railway tracks at an estimated cost of over ₹12,134 crore, converting the entire railway network into electric.

The last leg of unelectrified broad-gauge routes comprises 108 sections covering 13,675 route km, or 16,540 track km, an official statement said, adding that the electrification is likely to be completed by 2021-22.

“We have electrified about 46% of routes. The work is on for electrification of about 20,000 km of routes, after which about 78% of Indian Railways will be electrified. Today [Wednesday], the Cabinet has approved 13,675 km of remaining routes at the cost of ₹12,134 crore,” Railway Minister Piyush Goyal said after the meeting, which was chaired by Prime Minister Narendra Modi.

The government expects the approved electrification to generate direct employment of about 20.4 crore man-days during the period of construction.

The major trunk routes on the Indian Railways network have already been electrified and are operational, the government said, adding that the proposed electrification — mainly for missing links and last mile connectivity, will increase the operational efficiency, enhance the line capacity and improve the average speed of trains.

“The approved electrification will reduce the use of imported fossil fuels, thereby improving energy security to the nation. After the planned electrification, there would be reduction in the consumption of high speed diesel oil by about 2.83 billion litres per annum and a reduction in GHG emissions,” it added.

ISSF World Shooting Championships: Two more junior gold medals for India

 Udhayveer Singh, all of 16, shone bright with an individual gold in the junior men’s 25m pistol event after spearheading India to the team gold in the World Shooting Championships in Changwon on Thursday.


Singh shot a score of 587 (291 in precision and 296 in rapid) in the individual competition to grab the gold ahead of American Henry Leverett (584) and Korean Lee Jaekyoon (582).