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Arctic Blast, जिसकी वजह से ठिठुर रहे हैं भारत व अमेरिका समेत कई देश

 भारत, अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों में इस बार कड़ाके की ठंड ने कई साल के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कड़ाके की ये ठंड इस बार न केवल बहुत जल्दी शुरू हुई, बल्कि लंबी चल रही है। आलम ये है कि इस वर्ष भारत के उन पहाड़ी इलाकों में भी भारी बर्फबारी हुई है, जहां 10 साल से ज्यादा समय से बर्फ नहीं गिरी थी। बर्फ गिरने का ये सिलसिला अब भी जारी है। इसकी वजह आर्कटिक ब्लास्ट है। इसी वजह से अमेरिका में खून जमा देेने वाली सर्दी पड़ रही है और लोगों को ठंड से बचने के लिए घर से बाहर निकलने पर गहरी सांस न लेने और कम बात करने की चेतावनी जारी की गई है। वहीं ब्रिटेन में भी हवाई यात्रा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है

छह फरवरी से आम जनता के किए खुलेगा मुगल गार्डन, जानें क्‍या है खासियत

 देश के फूल प्रेमियों को मुगल गार्डन के खुलने का इंतजार रहता है, उनका यह इंतजार इस साल छह फरवरी को खत्म होने वाला है। अपने गुलाबों के लिए प्रसिद्ध मुगल गार्डन इस साल छह फरवरी से 10 मार्च 2019 तक के लिए खुलेगा। इस गार्डन के खुलने का सभी लंबे समय से इंतजार करते हैं। यह बगीचा साल में एक महीने के लिए ही खुलता है।

इस छोटे से गांव में तैयार हो रहे जवान से लेकर एनएसजी कमांडो तक

 

कद पांच फुट चार इंच। शरीर मजबूत। हाथ में छड़ी और हौसला बुलंद। इसके एक इशारे पर सरहद के नजदीक कच्ची सड़क पर सैकड़ों युवा तड़के कड़ाके की ठंड में भी दौड़ लगाते और कड़ा अभ्यास कर पसीना बहाते दिख जाते हैं। अनुशासन ऐसा जैसा सेना के किसी ट्रेनिंग कैंप में हो। यह कोई मेजर, कर्नल या ब्रिगेडियर नहीं, बल्कि सीमांत गांव का एक स्थानीय युवक जितेंद्र सिंह चाढ़क है, जो सरहद के आसपास रहने वाले युवाओं को सेना और अन्य सुरक्षाबलों में भर्ती होने के लिए शारीरिक दमखम बढ़ाने के लिए मुफ्त प्रशिक्षण देता है।

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जम्मू जिले की बिश्नाह तहसील के छोटे से गांव नौग्रां के जितेंद्र से प्रशिक्षण ले चुके युवा भारतीय सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनके कठोर परिश्रम का ही नतीजा है कि उनके द्वारा प्रशिक्षित चार युवक एनएसजी में बतौर कमांडो तैनात हैं। एक छात्र राजेश शर्मा सेना में हवलदार के पद पर रहते हुए अंतरराष्ट्रीय शूटिंग पिस्टल का खिलाड़ी है।

रक्षा बजट के मामले में अब कहां आता है भारत, जानें इस क्षेत्र के टॉप 10 देशों का नाम

 आम चुनाव से पहले पेश 2019 के बजट में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने रक्षा क्षेत्र के लिए खजाना खोल दिया है। वित्त मंत्री ने एलान किया कि इस बार का रक्षा बजट का आवंटन तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। रक्षा बजट में पहली बार इतनी बड़ी धन राशि का आवंटन किया गया है। दरअसल, रक्षा क्षेत्र में बजट की अधिक राशि की काफी समय से मांग थी। इसको देखते हुए ही यह कदम उठाया गया है। इसकी दूसरी वजह ये भी है हमारे पड़ोसी देश खासकर चीन और पाकिस्तान लगातार अपनी रक्षा जरूरत को पूरा कर रहे हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान और चीन ने पिछले बजट में इस क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि की थी। इसको देखते हुए भारत का रक्षा बजट काफी खास है। 2018 में रक्षा बजट पर खर्च के मामले में दुनिया में 6वें स्थान पर आता था।

Pope says ‘happy to write new page in history’ with UAE visit

 Pope Francis said he was looking to write a new page in the history of relations between religions with his visit to the United Arab Emirates from Sunday.


“I am happy ... to write on your dear land a new page in the relations between religions, confirming that we are brothers although different,” he said in a video message to the Emirati people released on Thursday.

In the message, in Italian but also dubbed into Arabic, the pope thanked Abu Dhabi Crown Prince Sheikh Mohammed bin Zayed Al-Nahyan for his invitation to participate in an interfaith meeting on “human fraternity” from February 3 to 5.

He said the visit would give him the opportunity to again see “friend and dear brother” Sheikh Ahmed al-Tayeb, the head of Egypt's top Sunni Muslim authority, whom he met on a visit in 2017.

Pope Francis has made boosting ties between Christianity and Islam a cornerstone of his papacy.

Malaysia crowns Pahang state’s Sultan Abdullah as 16th king

 Sultan Abdullah Sultan Ahmad Shah of central Pahang state was crowned Thursday as Malaysia’s 16th king under a unique rotating monarchy system, nearly a month after the sudden abdication of Sultan Muhammad V.


Garbed in aqua blue regalia, Sultan Abdullah (59), took his oath of office in a nationally televised ceremony at a cavernous hall in the national palace. Dozens of dignitaries, led by Prime Minister Mahathir Mohamad and his Cabinet ministers, attended the event.

Nine ethnic Malay state rulers take turns as the country’s king for five-year terms under the world’s only such system, which has been maintained since Malaysia’s independence from Britain in 1957.

Sultan Muhammad V (49), of northeast Kelantan state, abruptly resigned Jan. 6 as Malaysia’s king after just two years on the throne in the first abdication in the nation’s history. No reason was given, but it came after he reportedly married a 25-year-old former Russian beauty queen in November.

Vice Admiral Ajit Kumar takes charge as Western Naval Command chief

 Vice Admiral Ajit Kumar P, PVSM, AVSM, VSM took over as the Flag Officer Commanding-in-Chief of the Western Naval Command on Thursday.


Vice Admiral Kumar succeeds Vice Admiral Girish Luthra, who retired upon superannuation, after a career spanning nearly four decades in the Indian Navy.

At a ceremonial parade at the Naval Air Station Shikra, the outgoing and incoming Commander-in-Chief's were accorded a guard of honour after which they proceeded to the Headquarters of the Western Naval Command for a formal handing-taking over. On completion, Vice Admiral Luthra was “pulled out” in true Naval tradition.

An alumnus of Sainik School Kazhakootam and the National Defence Academy, Vice Admiral Kumar was commissioned in the Indian Navy on July 1, 1981. As a specialist in Missiles and Gunnery, the Flag Officer has served onboard frontline warships of the Indian Navy and abroad.

लोगों की जरूरतों के लिए भी हो सकेगा DRDO में विकसित तकनीकों का इस्तेमाल

 रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने सोमवार को कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित तकनीकों का इस्तेमाल नागरिक जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आग की घटनाओं से बेहतर तरीके से निपटने के लिए संरक्षा और सुरक्षा को जोड़ने की जरूरत है।


डीआरडीओ मुख्यालय में 'फायर सेफ्टी टेक्नोलॉजीस एंड सर्विसेज वर्कशॉप' को संबोधित करते हुए भामरे ने कहा कि तकनीक को सभी सरकारी विभागों के लिए उपयोगी बनाने की संभावना पर काम किया जा रहा है। साथ ही 'मेक इन इंडिया' के तहत विकसित तकनीक को धीरे-धीरे दूसरे देशों को निर्यात भी किया जा सकता है।

बोरवेल से बचाव की तकनीक विकसित कर रहा डीआरडीओ
डीआरडीओ के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी ने इस मौके पर बताया कि संगठन वर्तमान में सुरक्षा बलों के लिए तकनीकें विकसित कर रहा है, लेकिन अग्निशमन सेवाओं के लिए इनमें बदलाव किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि डीआरडीओ इस समय ऐसी तकनीक भी विकसित कर रहा है जिसकी मदद से बोरवेल से बचाव अभियान चलाने में काफी मदद मिलेगी। हालांकि इस तकनीक के बारे में उन्होंने और ज्यादा जानकारी नहीं दी।

महिलाओं को मिलेगी भूमिगत खदानों में नौकरी की अनुमति

 महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए केंद्र सरकार उन्हें भूमिगत खदानों में नौकरी करने की छूट देने जा रही है। इसके लिए खान नियमों में संशोधन किया जाएगा। अभी भूमिगत खदानों में महिलाओं को रोजगार देने पर कानूनन पाबंदी है।


खान अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के मुताबिक किसी महिला को भूमिगत खदान में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता। इसका उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान है। अधिनियम के छठे अनुच्छेद के नियम 46 के अनुसार किसी भी महिला को भूमिगत खदान में कार्य के लिए नहीं रखा जा सकता। केवल खुली (ओपेनकास्ट) खदानों में महिलाओं को नौकरी पर रखा जा सकता है। लेकिन उसमें भी उनकी ड्यूटी सुबह छह बजे से शाम सात बजे के बीच अर्थात दिन में होनी चाहिए। रात्रिकालीन ड्यूटी वर्जित है।

सरकार का मानना है कि ये कानून और इसके नियम काफी पुराने हैं और अब नई परिस्थितियों के अंतर्गत इनमें संशोधन की आवश्यकता है। वैसे भी मौजूदा कानून के तहत महिलाओं के भूमिगत खदानों में खनन संबंधी अध्ययन और प्रशिक्षण के उद्देश्य से जाने पर कोई रोक नहीं है। खनन क्षेत्र की पढ़ाई और प्रशिक्षण में महिला और पुरुष के बीच कोई भेदभाव नहीं होता है। खनन प्रौद्योगिकी में अंडरग्रेजुएट, पीजी करने वाली अनेक छात्राएं हर साल विभिन्न भूमिगत कोयला खदानों का दौरा करती हैं। लेकिन कोई महिला खान के भीतर मजदूरी या सुपरवाइजरी का कार्य नहीं कर सकती। सरकार का कहना है कि जब महिलाओं के टैक्सी, ट्रेन चलाने और विमान उड़ाने पर कोई पाबंदी नहीं है तो भूमिगत खदान में काम करने पर रोक क्यों।

देशभर के स्कूलों में मार्च के बाद नहीं रहेंगे एक भी अप्रशिक्षित शिक्षक

 

चुनाव में उतरने से पहले सरकार का स्कूलों को अप्रशिक्षित शिक्षकों से मुक्त बनाने का एक बड़ा सपना साकार हो जाएगा। देश भर के स्कूलों में पढ़ा रहे ऐसे करीब 13 लाख शिक्षकों के प्रशिक्षण का काम 15 मार्च को पूरा हो रहा है। जो तय समय से करीब दो हफ्ते पहले पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों के माथे से अप्रशिक्षित शिक्षकों के पढ़ाने का वह दाग भी मिट जाएगा, जिसे खत्म करने के लिए देश में पिछले दस सालों से मशक्कत की जा रही थी।

दरअसल, निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत स्कूलों की गुणवत्ता को मजबूती देने के लिए इनमें पढ़ा रहे सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। यूपीए सरकार ने इसके लिए 2015 तक का समय नियत भी कर रखा था। बावजूद इसके उस समय तक देश में 13 लाख से ज्यादा ऐसे शिक्षक मौजूद थे, जो स्कूलों में बगैर किसी प्रशिक्षण के ही पढ़ा रहे थे।

आखिर में मोदी सरकार ने इस काम को पूरा करने का वीणा उठाया। इसके तहत 31 मार्च 2019 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। जिसे अब यह सरकार तय लक्ष्य से 15 दिन पहले ही पूरा करने जा रही है।

Railway की पहल: 36 ट्रेनों में लगाईं गईं 91 सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन

 चलती ट्रेन में स्वच्छता की पहल के तहत ईस्ट कोस्ट रेलवे ने 36 ट्रेनों में 91 सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाई हैं। एक सेनेटरी नैपकिन की कीमत पांच रुपये रखी गई है। यात्री वेंडिंग मशीन में 5 रुपये का सिक्का डालकर नैपकिन प्राप्त कर सकेंगे। एक वेंडिंग मशीन में लगभग 75 पैड्स आ सकते हैं। जिन ट्रेनों में यह सुविधा लागू की गई है वह सभी महत्वपूर्ण हैं और यह पुरी, भुवनेश्वर और विशाखापत्तनम से चलती हैं।


सोमवार को रेलवे ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। पुरी से चलने वाली 10 ट्रेनों (पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, पुरी-अहमदाबाद एक्सप्रेस, तपस्वनी एक्सप्रेस, पुरी-दुर्ग एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, जगन्नाथ एक्सप्रेस, नीलांचल एक्सप्रेस, पुरी-चेन्नई एक्सप्रेस, पुरी-अजमेर एक्सप्रेस, पुरी-शिरडी एक्सप्रेस) के 35 कोचों में यह वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं।

भुवनेश्वर से चलने वाली 15 ट्रेनों (भुवनेश्वर-हीराखंड एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस ग्रुप ऑफ ट्रेन्स, प्रशांती एक्सप्रेस, धनबाद गरीब रथ एक्सप्रेस, भवानी-पटना लिंक एक्सप्रेस, जन शताब्दी एक्सप्रेस, भुवनेश्वर-तिरुपति एक्सप्रेस, बेंगलुरु कैंट एक्सप्रेस, बालांगीर इंटर सिटी, नई दिल्ली दूरंतो, कृष्णाराजपुरम हंसपुरम एक्सप्रेस, बंगीरीपोसी एक्सप्रेस) के 28 कोचों में भी यह वेंडिंग मशीन लगाई गई है।

फ्रांस से 3000 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने की योजना बना रहा है भारत

दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। इसके लिए सेना ने फ्रांस से करीब 3 हजार मिलान 2T एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि यह डील करीब एक हजार करोड़ रुपये की होगी।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही उच्च स्तरीय वार्ता बैठक में निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि सेना को इस वक्त करीब 70 हजार एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों की जरूरत है।

बता दें कि मिलान-2 फ्रांस की एक सेकंड जेनरेशन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जो कि हिंदुस्तान में ही भारत डायनैमिक्स लिमिटेड द्वारा बनाई जाती है। उल्लेखनीय है कि भारत ने इजरायल से एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल लेने का प्रस्ताव रद कर दिया था, क्योंकि अपने ही देश में इस दिशा में काम चल रहा था।

भारत-मध्य एशिया संवाद: सुषमा ने कहा- 2020 में मेजबानी का मौका मिला तो भारत को काफी खुशी होगी

 भारत-मध्य एशिया संवाद में भाग लेने के लिए शनिवार को उज्बेकिस्तान पहुंची विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि अन्य देशों के साथ विकास साझेदारी में भागीदारी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभरा है। मैं इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए G2G (जी-टू-जी) स्तर पर भारत-केंद्रीय एशिया विकास समूह की स्थापना करने का प्रस्तावित करती हूं।


सुषमा ने कहा कि इस वार्ता में शामिल होकर उन्हें काफी खुशी हो रही है,जिसमें अफगानिस्तान की भागीदारी है। मैं इस वार्ता की मेजबानी के लिए उज्बेकिस्तान सरकार और इसमें हिस्सा लेने के लिए मध्य एशिया व अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों की आभारी हूं। 2020 में होने वाले अगले वार्ता की भारत को मेजबानी का मौका मिलता है तो यह काफी खुशी की बात होगी।

सुषमा ने यह भी कहा कि भारत, ईरान और अफगानिस्तान के संयुक्त प्रयासों से ईरान में चाबहार पोर्ट का विकास हुआ, जो अफगानिस्तान को मध्य एशिया से जोड़ने में संभावित मार्ग के रूप में विकसित हुआ। 26 फरवरी को चाबहार दिवस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में मध्य एशियाई देशों की भागीदारी को देखकर हमें काफी खुशी होगी। भारत ने अपने और मध्य एशियाई देशों के बीच इस विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए, 'भारत-मध्य एशिया विकास समूह' की स्थापना का प्रस्ताव रखा है। सभी देशों को इस G2G समूह में प्रतिनिधी बनाया जाएगा। इस समूह से ठोस प्रस्तावों के साथ आगे आने का अनुरोध किया जाएगा।

इस संवाद से पहले आज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने उज्बेकिस्तान के समकक्ष अब्दुलअजीज कामिलोव के साथ व्यापार,अर्थव्यवस्था,रक्षा और आईटी सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के उपायों को लेकर चर्चा की।

चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद पर उगाना शुरू किया कपास, ऐसे उगाए जा रहे पौधे

 चंद्रमा के अनदेखे हिस्से में उतरने वाले चीन के चांग ई 4 अंतरिक्ष यान ने सफलतापूर्वक वहां पर पौधे उगाने शुरू कर दिए हैं। चीन की अंतरिक्ष एजेंसी (सीएनएसए) द्वारा मंगलवार को जारी की गई तस्वीर में कपास के बीज को अंकुरित होते हुए देखा जा सकता है। यह पहली बार हुआ कि चंद्रमा की सतह पर जैविक सामग्री की खेती की गई है। चांग ई -4 मिशन के अन्य जैविक पदार्थों में कपास, तिलहन, आलू, अरेबिडोप्सिस, खमीर और फल शामिल हैं। चीनी अंतरिक्ष एजेंसी का दावा है कि अगले 100 दिनों में और अधिक पौधे उगने की उम्मीद है। इन पौधों पर अध्ययन यान पर विशेष रूप से डिजायन किए गए बायोस्फीयर में किया जा रहा है।


अंतरिक्ष में नई नहीं खेती
इससे पहले अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) पर पौधों की खेती कर चुके हैं। चीन के तियांगोंग -2 स्पेस लैब पर चावल और अरेबिडोप्सिस भी उगाए गए थे।

इंडिया यूथ गेम्स / उप्र के रफी और प्रतिष्ठा ने टूर्नामेंट का पहला गोल्ड जीता

 खेलो इंडिया यूथ गेम्स का दूसरा संस्करण बुधवार से महाराष्ट्र के पुणे में शुरू हो रहा है। 11 दिन तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में 18 खेलों में 9 हजार से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इनके अलावा लगभग 4 हजार टीम स्टाफ और अधिकारी यहां मौजूद रहेंगे। मेजबान महाराष्ट्र से कुल 900 खिलाड़ियों का दल शामिल हुआ है। हालांकि, इसके आधिकारिक उद्घाटन से पहले ही कुछ खेलों के मुकाबले शुरू हो गए। जिम्नास्ट मोहम्मद रफी और प्रतिष्ठा सामंता इस संस्करण में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए।


जिम्नास्टिक में उत्तर प्रदेश के दो खिलाड़ियों ने पदक जीते
अंडर-17 मेंस कैटेगरी में उत्तर प्रदेश के मोहम्मद रफी ने आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक में 68.25 स्कोर के साथ गोल्ड जीता। उत्तर प्रदेश के ही राज यादव ने 67.50 स्कोर के साथ सिल्वर और दिल्ली के तुषार कल्याण ने 66.90 स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया।

पहले संस्करण में भी पदक जीत चुके हैं तुषार
तुषार ने पिछले खेलो इंडिया गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं, वुमन्स कैटेगरी में बंगाल की प्रतिष्ठा 42.05 स्कोर के साथ नंबर-1 पर रहीं। महाराष्ट्र की सिद्धि हटेकर ने 40.85 स्कोर के साथ सिल्वर और उनकी जुड़वां बहन रिद्धि ने 40.45 स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

पिछले संस्करण में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर रहा था
पहले खेलो इंडिया गेम्स 2018 की मेजबानी दिल्ली ने की थी। तब हरियाणा ने सर्वाधिक 38 गोल्ड, 26 सिल्वर और 38 ब्रॉन्ज हासिल किए थे। महाराष्ट्र को 36 गोल्ड, 32 सिल्वर और 42 ब्रॉन्ज मिले थे। तीसरे नंबर पर मेजबान दिल्ली था। उसे 25 गोल्ड, 29 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज मेडल मिले थे। इस बार यूथ ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट शूटर मनु भाकर और सौरभ चौधरी, वेटलिफ्टर जेरेमी लालरिनुंगा पर सभी की नजरें रहेंगी।

सचिन
डिजिटल बना बालेवाड़ी कॉम्पलेक्स
मुख्य स्टेडियम बालेवाड़ी कॉम्पलेक्स में ज्यादातर खेलों का आयोजन होगा। इस स्टेडियम को डिजिटलाइज्ड किया गया है और शूटिंग रेंज को तकनीकी रूप से अपग्रेड किया गया। इस स्टेडियम में नेशनल गेम्स और कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स भी हो चुके हैं। इसके अलावा आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टिट्यूट में तीरंदाजी, एनडीए हॉकी ग्राउंड में महिला हॉकी, फ्लेम यूनिवर्सिटी और पुलिस ग्राउंड में फुटबॉल के मुकाबले होंगे।

मोदी ने की थी यूथ गेम्स की शुरुआत
पिछले साल दिल्ली में 31 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले खेलो इंडिया गेम्स की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करना था।

रिसर्च / हर 20 हजार साल में हरा-भरा हो जाता है दुनिया का सबसे बड़ा सहारा रेगिस्तान

 एक रिसर्च में दावा किया गया है कि सहारा मरुस्थल हर 20 हजार साल में बदलता है। यह कभी सूखा तो कभी हर-भरा हो जाता है। मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) की रिसर्च में शोधकर्ताओं ने कहा कि मरुस्थल का काफी हिस्सा (3.6 मिलियन स्क्वैयर) उत्तरी अफ्रीका में है जो हमेशा से सूखा नहीं था। यहां की चट्टानों पर बनी पेंटिंग और जीवाश्मों की खुदाई से मिले प्रमाण बताते हैं कि यहां पानी था। इंसान के अलावा पेड़-पौधों और जानवरों की कई प्रजातियां भी मौजूद थीं। यह रिसर्च साइंस एडवांसेस मैगजीन में प्रकाशित हुई है।


2 लाख 40 हजार सालों का इतिहास समझने की कोशिश
एमआईटी के शोधकर्ताओं ने मरुस्थल के पिछले 2 लाख 40 हजार सालों का इतिहास समझने के लिए पश्चिमी अफ्रीका के किनारों पर जमा धूल-मिट्टी का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं का कहना है कि हर 20 हजार साल में सहारा मरुस्थल और उत्तरी अफ्रीका बारी-बारी से पानीदार और सूखे रहे हैं। यह क्रम लगातार जारी रहा है। जलवायु में यह परिवर्तन पृथ्वी की धूरी में बदलाव के कारण होता है।

सूर्य की किरणें हैं जिम्मेदार
रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। अलग-अलग मौसम में सूर्य की किरणों का वितरण प्रभावित होता है। हर 20 हजार साल में पृथ्वी अधिक धूप से कम की ओर घूमती है। उत्तर अफ्रीका में ऐसा होता है।

जब पृथ्वी पर गर्मियों में सबसे ज्यादा सूरज की किरणें आती हैं तो मानसून की स्थिति बनती है और यह पानीदार जगह में तब्दील हो जाता है। जब गर्मियों में पृथ्वी तक पहुंचने वाली सूर्य की किरणों की मात्रा में कमी आती है तो मानसून की गतिविधि धीमी हो जाती है और सूखे की स्थिति बनती है, जैसी आज है।

ऐसे पता लगाया गया
हर साल उत्तर-पूर्व की ओर से चलने वाली हवाओं के कारण लाखों टन रेत अटलांटिक महासागर के पास दक्षिण अफ्रीका के किनारों पर पर्तों के रूप में जमा हो जाती हैं। धूल-मिट्टी की ये मोटी पर्तें उत्तरी अफ्रीका के लिए भौगोलिक प्रमाणों की तरह काम करती हैं।

मोटी पर्तों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि यहां सूखा था और जहां पर धूल कम है वो जगह इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र में कभी पानी मौजूद था। सहारा मरुस्थल से जुड़ी रिसर्च का नेतृत्व करने वाले एमआईटी के पूर्व अनुसंधानकर्ता चार्लोट ने पिछले 2 लाख 40 हजार साल तक जमा हुईं पर्तों का विश्लेषण किया है।

चार्लोट के अनुसार, पर्तों में धूल के अलावा रेडियोएक्टिव पदार्थ थोरियम के दुर्लभ आइसोटोप भी पाए गए हैं। इसकी मदद से यह पता किया गया है कि धूल-मिट्टी ने कितनी तेजी से पर्तों का निर्माण किया है।

हजारों साल पुरानी चट्टानों की आयु का पता लगाने के लिए यूरेनियम-थाेरियम डेटिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता है। रिसर्च के मुताबिक, समुद्र में बेहद कम मात्रा में रेडियोएक्टिव पदार्थ यूरेनियम के घुलने से एक नियत मात्रा में थोरियम का निर्माण होता रहा है, जो इन पर्तों में मौजूद है।

NCR launches mobile app to help people navigate through Prayagraj city during Kumbh Mela

NSD Logo The North Central Railway, NCR has launched a mobile application to help people navigate through Prayagraj city during Kumbh Mela starting from January 15. Public relation officer of NCR Amit Malviya said, the 'Rail Kumbh Seva Mobile App' will also provide information regarding all the 'Mela special' trains that will be run during the period.
Additionally, the app will provide a link to the user to buy both unreserved and reserved train tickets. Mr Malviya said, through this app, the users will not only get to know their current location, but will also be able to reach to all railway stations, the mela zone, major hotels, bus stations and other facilities within Prayagraj. He said, a photo gallery, containing pictures of previous Kumbh Melas can also be accessed through the app.

दूसरे ग्रहों पर जीवन तलाशेगा थर्टी मीटर टेलीस्कोप, धरती पर जीवन के अंत का भी लगेगा पता

 धरती के अलावा दूसरे किस ग्रह पर जीवन है? पांच देशों के वैज्ञानिक मिलकर इसकी खोज करेंगे। इनमें भारत के साथ अमेरिका, जापान, चीन व कनाडा के वैज्ञानिक शामिल होंगे। इसके लिए पांचों देशों की वैज्ञानिक तकनीकों से अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी) तैयार किया जा रहा है।


15 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट के जरिए दूसरे ग्रहों पर जीवन तलाशने के साथ वैज्ञानिक ब्रह्मांड के शुरूआती दौर का आकलन भी कर सकेंगे। भारत की तरफ से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आइआइए), बेंगलूरु टीएमटी का हिस्सा तैयार कर रहा है। इस तकनीक को लवली प्रोफेशनल यूनीवर्सिटी (एलपीयू) में चल रही 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में प्रदर्शित किया गया।

इंडिया टीएमटी की प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डॉ. रम्या सेतुराम ने बताया कि अभी तक अंतरिक्ष में 116 प्लेनेट देखे जा चुके हैं। इनमें धरती को छोड़ बाकी किस ग्रह पर जीवन है, इसका पता नहीं चल पाया है। मंगल ग्रह पर पानी के अंश मिले हैं। जीवन की खोज जारी है, इसलिए पांच देश मिलकर यह तकनीक विकसित कर रहे हैं। इसे अमेरिका के हुवाई प्रांत की पर्वत श्रृंखला मोनाकिया में लगाया जाएगा। जहां ठंडा रेगिस्तान है और वातावरण इतना साफ है कि आसमान बिल्कुल साफ दिखाई देता है। भारत सरकार इसमें 1500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

धरती की तरह छोटा दिखेगा दूसरे ग्रहों का आकार
इस तीस मीटर दूरबीन (टीएमटी) कुल 492 मिरर लगे हुए हैं, जो धरती से सीधे आसमान में ग्रहों की तस्वीर खींचेंगे। बेहतर रेजोल्यूशन की तस्वीर से वैज्ञानिक बारीकी से ग्रहों पर जीवन या उसकी संभावना के बारे में विस्तृत अध्ययन कर सकेंगे। वैज्ञानिक डॉ. रम्या सेतुराम कहती हैं कि अभी तस्वीरों में ग्रह बड़े आकार में दिखते हैं तो उनके अंदर का दृश्य स्पष्ट नहीं हो पाता। यह दूरबीन 30 किलोमीटर रेजोल्यूशन पर ग्रहों की सतह की तस्वीर खींचेगी, जिससे हम उन ग्रहों में जीवन का अंश ढूंढने में कामयाब रहेंगे। भारत के पास 92 मिरर हैं जबकि बाकी चार देशों के पास हैं।

धरती पर जीवन की शुरूआत, अंत का भी अनुमान
वैज्ञानिक डॉ. रम्या सेतुराम कहती हैं कि इस टीएमटी के जरिए ग्रहों का 13 बिलियन प्रकाश वर्ष पीछे की जानकारी ले सकते हैं। इससे अगर किसी ग्रह में जीवन है या शुरूआत हो रही है तो हम यह जान सकेंगे कि वो किन कारणों से शुरू हुआ या फिर हो रहा है। वहीं, अगर किसी ग्रह पर जीवन था और खत्म हो गया तो यह अनुमान लग सकेगा कि वो किन कारणों से खत्म हुआ। इसके आधार पर हम अनुमान लगा पाएंगे कि धरती पर जीवन की शुरूआत कब व कैसे हुई और इसका अंत कब होगा।

पंजाब की धरती पर दुनिया का अभिनव प्रयोग, जमीन में दबाया गया अनोखा टाइम कैप्सूल

 आने वाली पीढ़ी सौ साल बाद भी आज इस्तेमाल होने वाले उपकरण देख पाएगी। वर्तमान की साइंस एवं टेक्नोलॉजी को सहेजने के लिए जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में चल रही नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक तकनीक के प्रतीक 100 उपकरणों से तैयार किए टाइम कैप्सूल को एलपीयू परिसर स्थित में जमीन के अंदर दबाया। इसे 100 साल बाद जमीन से निकाला जाएगा। दुनिया में ये अपने प्रकार का पहला ऐसा अनोखा प्रयोग है।


सौ साल बाद भी देखे जा सकेंगे आज के उपकरण, जमीन दबाए गए इनके मॉडल

106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन वैज्ञानिकों ने इस कैप्सूल काे जमीन में दबाया। 100 साल बाद 3 जनवरी 2119 को जब ये टाइम कैप्सूल जमीन से बाहर निकाला जाएगा, तब उस समय की पीढ़ी को वर्तमान में प्रयोग होने वाली टेक्नोलॉजी का पता चला सकेगा। टाइम कैप्सूल में भारतीय वैज्ञानिकों की ओर से विकसित की गई साइंस व टेक्नोलॉजी के प्रतीक मंगलयान, ब्रह्मोस मिसाइल व तेजस फाइटर जेट विमानों के मॉडल भी रखे गए हैं।

स्मृति पट्टिका का लोकार्पण करते नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक व एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल आदि।

जमीन के अंदर 10 फीट गहराई में दफन उपकरण आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाएंगे वर्तमान साइंस व टेक्नोलॉजी
कैप्सूल को धरती में 10 फीट की गहराई तक दबाया गया है। नोबेल पुरस्कार विजेता बॉयो केमिस्ट अवराम हर्षको, अमेरिकन फिजिसिस्ट डंकन हालडेन व बॉयो केमिस्ट थॉमस सुडोफ के बटन दबाते ही टाइम कैप्सूल धरती में समा गया।

कैप्सूल में मंगलयान, ब्रह्मोस मिसाइल, तेजस फाइटर विमान के मॉडल भी रखे
टाइम कैप्सूल में रोजमर्रा में प्रयोग होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लैंडलाइन टेलीफोन, स्मार्ट फोन, स्टीरियो प्लेयर, स्टॉप वॉच, वेइंग मशीन, वॉटर पंप, हेड फोंस, हैंडी कैम, पेन ड्राइव, कंप्यूटर पाट्र्स जैसे हार्ड डिस्क, माउस, मदर बोर्ड व वैज्ञानिक उपकरण रियोस्टेट, रिफ्रेकट्रोस्कॉप व डबल माइक्रोस्कोप आदि रखे गए हैं। इसमें रखे गए कुछ और उत्पादों में सोलर सेल व एक नवीनतम डॉक्यूमेंट्री व मूवी युक्त हार्ड डिस्क भी शामिल हैं।

No plan to up judge retirement age: Law Ministry

 The Law Ministry on Thursday said there was no proposal as of now to increase the retirement age of Supreme Court judges from 65 to 67 and of High Court judges from 62 to 65.


The Ministry was responding to the recommendation of a Parliamentary Standing Committee that raising the retirement age of judges would help retain the existing judges, which in turn would help in reducing both vacancy and pendency of cases in short run.

In August 2010, then Union Law Minister M. Veerappa Moily introduced the Constitution (114th Amendment) Bill, 2010 in the Lok Sabha.

The Bill, which sought to increase the retirement age of High Court judges to 65, could not be taken up for consideration in Parliament and lapsed with the dissolution of the 15th Lok Sabha.

Panel’s concern
The committee, in its report tabled in Parliament on Thursday, raised concern over the large number of vacancies of judges in High Courts.

The Ministry countered that the appointment of judges in the Supreme Court and High Courts is a continuous and collaborative process of the Judiciary and Executive.

“While every effort is made to fill vacancies expeditiously, vacancies keep on arising on account of retirement, resignation or elevation of judges and increase in judge strength,” the Ministry said.

It further stated that the time line for initiation of the proposals for filling up of vacancies is rarely adhered to by the High Courts.

As of now, out of a total approved strength of 1,079 judges in 24 High Courts across the country, only 695 posts are filled.

The committee headed by BJP lawmaker Bhupender Yadav was of the view that to reduce pendency of cases, the existing vacancy positions of judges need to be filled up immediately.4s

तकनीक / दस्तानों से रखी जा सकेगी ब्लडप्रेशर और धड़कनों पर नजर, एपल ने कराया पेटेंट

 आईफोन कंपनी एपल ने हाल ही में खास तरह की फैब्रिक से बने दस्तानों का पेटेंट कराया है। यह दस्ताने ब्लड प्रेशर, सांस लेने की गति और हार्ट बीट पर नजर रखते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दस्तानों में खास तरह के सर्किट्स को फैब्रिक से जोड़ा गया है। इसे पहनकर काम करने पर शरीर में होने वाले बदलावों को मॉनिटर किया जा सकेगा। इसे लैपटॉप और फोन से जोड़ा गया है, जिसकी मदद से यूजर को सेहत से जुड़ी जानकारियां भेजी जाएंगी।


एपल का फोकस हेल्थ डिवाइस पर
एपल इन दिनों ऐसी तकनीक पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जो सेहत का हाल बताती हैं। कंपनी ने वियरेबल डिवाइस भी लॉन्च की है। इलेक्ट्रॉनिक ग्लव्स इसी सीरीज का हिस्सा हैं। इससे पहले कंपनी ने एपल वॉच सीरीज-4 लॉन्च की थी, जो एक ईसीजी मॉनिटर की तरह काम करती है। यह हार्ट की एक्टिविटी पर नजर रखती है।

कपड़े पर मोबाइल ओएलईडी स्क्रीन
कोरियन एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और कोलोन ग्लोटेक ने ओएलईडी स्क्रीन विकसित की है, जिसका इस्तेमाल कपड़ों में किया जाएगा। इस स्क्रीन को मोबाइल फंक्शंस की तरह यूज किया जा सकता है। आसानी से स्क्रीन फोल्ड हो जाने के कारण यूजर्स को किसी तरह की परेशानी नहीं होती। रात के समय स्क्रीन अधिक चमकदार हो जाती है और अंधेरे में भी डिस्प्ले बेहतर दिखाई देता है।

चीन / दुनिया के सबसे बड़े आइस फेस्टिवल में 12 देशों के कलाकारों ने बनाईं कलाकृतियां

 चीन के हेलोंगयांग प्रांत स्थित हार्बिन शहर में दुनिया का सबसे बड़ा सालाना आइस एंड स्नो फेस्टिवल 5 जनवरी से आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगा। हालांकि, पर्यटकों के लिए यहां रखी बर्फ से बनी कलाकृतियों का प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है। हर बार की तरह इस साल भी फेस्टिवल में कई अजूबे तैयार किए गए हैं। लगभग 6 लाख स्कवायर मीटर में फैले स्नो वर्ल्ड में बर्फ के 100 से ज्यादा मंदिर और कलाकृतियां हैं। इन्हें 2 लाख घन मीटर बर्फ से तैयार किया गया है।


12 देश के 10 हजार कलाकार लेते हैं हिस्सा
इस साल फेस्टिवल में पूरी तरह बर्फ से बने महलों के अलावा भगवान बुद्ध का 4500 क्यूबिक मीटर बर्फ से बना स्टैच्यू भी लोगों के लिए चर्चा का विषय रहेगा। इसके अलावा महलों पर रात में 3डी लाइट शो का भी प्रदर्शन भी किया जाएगा और 340 मीटर लंबी हरे रंग की लाइट्स से रंगी आइस स्लाइड्स दिखाई जाएंगी।

इन अजूबों को चीन और दुनियाभर के 12 देशों से पहुंचे 10 हजार कलाकारों ने बनाया है, वह भी बर्फ में माइनस 10 से माइनस 20 डिग्री तापमान के बीच। हर साल दिसंबर के वक्त तापमान काफी नीचे गिर जाता है।

सर्दियों में बड़ी संख्या में पर्यटक ‘आइस सिटी’ के नाम से लोकप्रिय हार्बिन पहुंचते हैं। 2017 में फेस्टिवल में करीब 1.8 करोड़ लोग पहुंचे थे, जिससे चीन को करीब 31 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। यह फेस्टिवल पहली बार साल 1985 में रखा गया था।

शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शहर के एयरपोर्ट पर 2018 में दो करोड़ से ज्यादा यात्री आए। पर्यटकों के बीच हार्बिन में बना साइबेरियन टाइगर पार्क भी लोकप्रिय है। यहां एक हजार से ज्यादा साइबेरियाई टाइगरों को ठंडे पर्यावरण के बीच सुरक्षित माहौल में रखा गया है।

2007 में बना था विश्व रिकॉर्ड
2007 में कैनेडियन डॉक्टर नॉर्मन बेथुने की स्मृति में बनाई गई कलाकृति दुनिया की सबसे बड़ी बर्फ से बनी कलाकृति के रूप में दर्ज हो गई थी। रोमांटिक फीलिंग नाम की यह कलाकृति 820 फीट ऊंची, 28 फीट चौड़ी है। इसे बनाने में साढ़े चार लाख क्यूबिक मीटर बर्फ इस्तेमाल हुई थी।

प्रयोग / आईआईटी दिल्ली ने ऐसा जेल बनाया जिससे बर्फीले सियाचिन में भी सैनिक नहा सकेंगे

 सियाचिन ग्लेशियर में जल्द ही जवानों के लिए नहाना संभव हो सकता है। आईआईटी दिल्ली ने हाल ही में ऐसे उत्पाद विकसित किए हैं, जो बेहद सर्द मौसम में भी स्वच्छता बनाए रखने में सैनिकों की मदद करेंगे। दरअसल, 13 हजार से 22 हजार फीट की ऊंचाई पर बर्फ के बीच रहने वाले जवानों के लिए नहाना तो दूर पीने का पानी मिलना भी मुश्किल होता है। साथ ही पिघली हुई बर्फ का पानी भी नहाने के लिए हानिकारक माना जाता है। ऐसे में ड्यूटी के तीन महीने के दौरान सैनिकों को नहाने का मौका नहीं मिल पाता।


जेल के रूप में तैयार किए गए हैं स्वच्छता उत्पाद
आईआईटी दिल्ली के रिसर्चर्स ने जो उत्पाद तैयार किए हैं, वे वॉटरलेस (पानी रहित) हैं। इन्हें जेल के रूप में तैयार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की सीमा पर तैनात सैनिकों ने टेस्टिंग में इसे बेहतरीन बताया है। इस फीडबैक के बाद ही देश की पूर्वी कमांड ने ऐसे हजार उत्पादों का ऑर्डर दिया है। जल्द ही इन्हें सियाचिन में मौजूद सैनिकों तक पहुंचाना भी शुरू कर दिया जाएगा।

हफ्ते में दो बार नहा सकेंगे सैनिक
ये जेल माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इससे जवान हफ्ते में दो बार नहा सकेंगे। एक अधिकारी के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली के बनाए इस उत्पाद के सिर्फ 20 मिलीलीटर इस्तेमाल से ही पूरे शरीर को साफ किया जा सकता है।

सियाचिन ग्लेशियर पर देश की सीमा सुरक्षा करते हैं तीन हजार सैनिक
सियाचिन ग्लेशियर पाकिस्तान और चीन दोनों की सीमा से लगा है। ऐसे में भारत को हर स्थिति में वहां तीन हजार सैनिक रखने ही पड़ते हैं। जवानों को आमतौर पर तीन महीने के लिए ग्लेशियर में तैनात किया जाता है।

इस दौरान करीब एक महीना उन्हें 128 किमी के इलाके की ट्रेकिंग करते हुए दुश्मन के कदमों पर नजर रखनी होती है। इनमें से कई इलाके समुद्र से 16 हजार फीट तक की ऊंचाई पर मौजूद हैं।

न्यू होराइजंस खोल रहा गहरे अंतरिक्ष के राज, धरती से 4 अरब मील दूर पिंड की तस्वीर भेजी

 नए साल के मौके पर इतिहास रचने वाले न्यू होराइजंस यान ने अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि के प्रमाण भेजने शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया कि न्यू होराइजंस ने कुइपर बेल्ट स्थित खगोलीय पिंड अल्टिमा थुले की तस्वीरें भेजी हैं। अल्टिमा थुले धरती से सर्वाधिक दूरी पर स्थित खगोलीय पिंड है, जहां तक कोई यान पहुंचा है।


2006 में लांच किया गया न्यू होराइजंस यान मंगलवार को अल्टिमा थुले के पास गुजरा था। कुछ घंटे बाद नासा को इसकी भेजी हुई तस्वीरें मिलीं। नासा के जिम ब्रिडेंस्टाइन ने कहा, ‘नासा की न्यू होराइजंस टीम, जांस हॉपकिंस एप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी और साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट को एक बार फिर इतिहास रचने की बधाई।’ यान से मिले संकेतों से वैज्ञानिकों को पता चला है कि इसके सभी हिस्से सही तरीके से काम कर रहे हैं।

नासा ने न्यू होराइजंस द्वारा भेजी गई दो तस्वीरें साझा की हैं। न्यू होराइजंस ने यह तस्वीरें उस समय लीं जब अल्टिमा थुले से उसकी दूरी 3,500 किलोमीटर थी। तस्वीरों से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि अल्टिमा थुले की आकृति बाउलिंग पिन जैसी है, जिसका एक हिस्सा दूसरे के मुकाबले पतला है। इसका आकार करीब 32 गुणा 16 किलोमीटर है।

एक संभावना यह भी है कि दो छोटे पिंड एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे हों। साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के एलन स्टर्न ने कहा, ‘न्यू होराइजंस ने हमारी उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन किया।’ अल्टिमा थुले के अध्ययन से हमारे सौरमंडल से जुड़े कई राज खुलने की उम्मीद है। यह इस बात को समझने में भी मददगार हो सकता है कि सौरमंडल का निर्माण किस तरह हुआ। न्यू होराइजंस ने जितना डाटा जुटाया है, उस पूरे डाटा को धरती तक पहुंचने में 20 महीने से ज्यादा का वक्त लगेगा।

कमेटी / आरबीआई का रिजर्व फंड तय करने के लिए समिति गठित, 90 दिन में रिपोर्ट देगी

 आरबीआई को अपने रिजर्व फंड में कितना पैसा रखना चाहिए और सरकार को कितनी रकम डिविडेंड के रूप में देनी चाहिए, यह तय करने के लिए समिति बना दी गई है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान इस समिति के अध्यक्ष हैं। पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन इसके उपाध्यक्ष होंगे। इनके अलावा चार और सदस्य होंगे। एक बयान में रिजर्व बैंक ने यह जानकारी दी है।


आरबीआई के पास 9.6 करोड़ रुपए का रिजर्व फंड
समिति अपनी पहली बैठक से 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट देगी। इसे दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों का अध्ययन करने को भी कहा गया है। इसके बाद समिति बताएगी कि आरबीआई के रिजर्व फंड में जरूरत से ज्यादा रकम है या नहीं।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच इस मुद्दे पर पिछले दिनों टकराव की स्थिति बन गई थी। आरबीआई के फंड में 9.6 लाख करोड़ रुपए हैं। यह आरबीआई के कुल एसेट का 28% है। सरकार का कहना है कि दूसरे बड़े देशों के केंद्रीय बैंक अपने एसेट का 14% रिजर्व फंड में रखते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रिजर्व बैंक ने ग्लोबल मानकों के हिसाब से रिजर्व पूंजी घटाई तो उसे सरकार को करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए देने पड़ेंगे।

रिजर्व फंड के विवाद की वजह से उर्जित पटेल ने गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे से पहले 19 नवंबर को आरबीआई की बोर्ड मीटिंग हुई थी। इसमें रिजर्व फंड तय करने के लिए समिति बनाने का फैसला हुआ था। सूत्रों के मुताबिक सरकार और रिजर्व बैंक में इस बात को लेकर विवाद था कि समिति का अध्यक्ष कौन हो।

जालान के साथ समिति में 5 और सदस्य होंगे
राकेश मोहन, पूर्व डिप्टी गवर्नर और पूर्व सचिव, वित्त मंत्रालय
भरत दोशी, डायरेक्टर, सेंट्रल बोर्ड, आरबीआई
सुधीर मांकड़, डायरेक्टर, सेंट्रल बोर्ड, आरबीआई
सुभाष चंद्र गर्ग, आर्थिक मामलों के सचिव
एन.एस. विश्वनाथन, डिप्टी गवर्नर, आरबीआई
फंड तय करने को पहले भी 3 समितियां बनी थीं
आरबीआई का रिजर्व फंड तय करने के लिए पहले भी तीन समितियां बनी थीं- वी सुब्रमण्यम (1997), उषा थोराट (2004) और वाई.एस. मालेगाम (2013) समिति। सुब्रमण्यम समिति ने 12% और थोराट समिति ने 18% रिजर्व की सिफारिश की थी।

गुजरात / दसवीं की छात्रा ने बढ़ते स्ट्रेस पर तैयार किया एप्लीकेशन, बनी गूगल कोडिंग की विनर

 गूगल की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की कोडिंग प्रतियोगिता में उद‌्गम स्कूल की दसवीं की छात्रा फ्रेया शाह को विजेता घोषित किया गया है। गुजरात से फ्रेया शाह एकमात्र विनर हैं जिन्होंने छात्रों में बढ़ते स्ट्रेस पर एप्लीकेशन तैयार किया है। इस एप्लीकेशन की सभी कोडिंग फ्रेया द्वारा ही किया जाता है। पिछले साल फ्रेया इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची थी, इस साल विजेता घोषित की गई हैं।


कोई भी एप्लीकेशन या वेबसाइट कोडिंग किया जाता है। स्कूल की कम्प्यूटर टीचर कृपाली संघवी ने बताया कि कोडिंग छोटे बच्चों के लिए बहुत कठिन है। क्योंकि एप्लीकेशन तैयार करने के लिए उसके प्रत्येक क्रमांक को कोडिंग से तैयार किया जाता है। यदि छात्रों को बचपन से ही कोडिंग सिस्टम सिखाया जाए तो उच्च शिक्षा में बच्चों को इससे काफी फायदा होता है।

छात्रों में बढ़ रहे स्ट्रेस की मात्रा जाने के लिए सवाल पूछा जाएगा : फ्रेया द्वारा तैयार किए गए एप्लीकेशन में स्ट्रेस का अनुभव करने वाले छात्रों से उनकी रोजाना की जिंदगी से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। विद्यार्थियों द्वारा दिए गए जवाब के आधार पर उनमें स्ट्रेस तय की जाती है। इसके बाद छात्रों की काउंसेलिंग की जाती है। यह एप्लीकेशन जल्द ही विभिन्न प्लेटफार्म पर ऑनलाइन उपलब्ध होगा।

यू-ट्यूब पर वीडियाे देखकर कोडिंग सीखा : फ्रेया ने बताया कि मुझे बचपन से ही अप्लीकेशन बनाने में रुचि थी। मैंने यू-ट्यूब पर वीडियाे देखकर एप्लीकेशन के लिए कोडिंग करना सीख गई। स्कूल में शिक्षक ने इस बारे में मुझे बहुत कुछ सिखाया। पिछले साल भी मैं प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची थी। इसमें देशभर के जाने माने स्कूलों के बच्चों को शामिल होने का मौका मिलता है। उनके नई-नई आइडिया सीखने को भी मिलती है।

विद्यार्थियों में बढ़ रहे स्ट्रेस की खबर मैंने कई बार मीडिया में देखी है। खबर देखने के बाद मुझे लगा कि छात्रों की मदद के लिए एप्लीकेशन या ऑनलाइन प्लेटफार्म बनाना चाहिए। मैंने कॉम्पिटीशन में छात्रों के स्ट्रेस पर एप्लीकेशन तैयार किया। प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर के छात्र थे। प्रैक्टिस और रुचि के कारण मुझे विजेता घोषित किया गया है।

आईसीसी / पोंटिंग हॉल हॉफ फेम में शामिल, उनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 71 शतक

 ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने आईसीसी क्रिकेट हॉल हॉफ फेम में शामिल किया गया है। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे टेस्ट के पहले दिन चायकाल के दौरान पोंटिंग को उनके पूर्व साथी खिलाड़ी ग्लेन मैक्ग्रा ने सम्मानित किया। उन्हें आईसीसी हॉल फेम कैप दी गई। पोंटिंग को पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़, इंग्लैंड महिला टीम की विकेटकीपर क्लेयर टेलर के साथ इस साल जुलाई में हॉल हॉफ फेम अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था। पोंटिंग के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुल 71 शतक हैं।


ऑस्ट्रेलिया के 25 क्रिकेटर्स को मिल चुका है यह सम्मान
कैप मिलने के बाद पोंटिंग ने कहा, "'यह एक अद्भुत अहसास है। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर यह सम्मान मिलने से मेरे लिए यह और भी खास बन गया। मुझे आज पता चला कि मैं उन 25 आस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों में शामिल हूं जो इस सम्मान को हासिल कर चुके हैं।"

अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को दो बार वर्ल्ड कप दिलाने वाले पोंटिंग ने कहा, "जब आप ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलते हैं तो आप विशेष खिलाड़ियों की लिस्ट में पहले ही शामिल हो जाते हैं। उसके बाद आईसीसी हॉल ऑफ फेम का हिस्सा बनने से आप और भी ज्यादा एलीट क्रिकेटर्स के समूह में शामिल हो जाते हैं।"

44 साल के पोंटिंग ने 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने 168 टेस्ट में 41 शतकों की मदद से 13,378 रन बनाए। वहीं, 375 वनडे 30 शतक की मदद से 13,704 रन बनाए। 17 टी-20 मुकाबलों में दो अर्धशतक की मदद से 401 रन बनाए।

पोंटिंग को 2006 और 2007 में आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिला था। वहीं, 2006 में उन्हें आईसीसी टेस्ट प्लेयर का भी अवॉर्ड दिया गया था। पोंटिंग 1999, 2003 और 2007 में वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य रहे थे। इसमें से 2003 और 2007 में वे कप्तान थे।

नया एआइ सिस्टम वीडियो से करेगा व्यक्ति के लिंग और उम्र की पहचान

 आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। इसकी मदद से मानव सदृश रोबोट, अत्याधुनिक स्मार्टफोन व अन्य गैजेट्स तैयार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने ऐसा एआइ सिस्टम विकसित कर लिया है, जो किसी वीडियो के जरिये व्यक्ति की उम्र और लिंग का जल्दी और बेहद सटीक पता लगाने में सक्षम है।


रूस के हायर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के शोधकर्ताओं के मुताबिक, एंड्रॉयड मोबाइल के लिए ऐसे कुछ एप्लीकेशंस मौजूद हैं जो ये काम ऑफलाइन करने में सक्षम हैं, लेकिन यह नई प्रणाली उनसे कई ज्यादा सटीक और जल्दी परिणाम देने वाली है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह मॉडर्न न्यूरल नेटवर्क वीडियो के आधार पर लिंग की पहचान करने में 90 फीसद सटीक साबित हुआ है। हालांकि, उम्र का पता लगाने का काम लिंग का पता लगाने से ज्यादा जटिल है।

नई प्रणाली अधिक कारगर
परंपरागत प्रणालियों की कमी को देखते हुए शोधकर्ताओं ने बेहतर सिस्टम तैयार करने की सोची और इसमें एआइ का प्रयोग किया। शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस नवीन सॉफ्टवेयर प्रणाली में कई अलग न्यूरल नेटवर्क को शामिल किया गया। इसमें से एक व्यक्ति की उम्र की पहचान करता है और दूसरा उसके लिंग की। शोधकर्ताओं ने इसकी जांच की, जिसमें यह बेहद प्रभावित साबित हुआ।

अब ध्वनि तरंगों से लगाए जा सकेंगे टांके, वैज्ञानिकों ने तैयार की नई प्रणाली

 वैज्ञानिकों ने पहली बार ध्वनि तरंगों की मदद से टांकों की सिलाई करने में सफलता हासिल कर ली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी मदद से न केवल कपड़े सिले जा सकेंगे, बल्कि ऑपरेशन के बाद घावों को बंद करने के लिए टांके लगाने में भी इसकी मदद ली जा सकेगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ध्वनि तरंगों में भी ताकत होती है। जब इनकी पिच बहुत अधिक होती है तभी इंसानों को सुनाई देती है। अब वैज्ञानिकों ने इन ध्वनि तरंगों का प्रयोग करके एक ध्वनि क्षेत्र तैयार किया है, जो चीजों को हिलाने में सक्षम हैं।


ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल और स्पेन की यूनिवर्सिडड पब्लिका डी नवर्रा के वैज्ञानिकों ने इस नई तकनीक का विकास किया है। इसमें दो मिलीमीटर पॉलीस्टीरीन धागा एक टुकड़े से जुड़ा हुआ है। ध्वनिक चिमटी के जरिये टुकड़े में लगे धागे से किसी कपड़े पर सिलाई कर सकते हैं। इस सिलाई को हवा में थ्रीडी यानी तीन स्थानों से नियंत्रित किया जा सकता है और इसे 25 बार चलाया जा सकता है।

पहली बार सामने आया चीन का घातक ड्रोन विंग लू-1

 चीन लगातार अपनी सैन्य क्षमता में तेजी ला रहा है। इसी वर्ष चीन ने विमानवाहक युद्धपोत, परमाणु पनडुब्बी, लड़ाकू विमान को सेना में शामिल किया है। इसी श्रृंखला में अब चीन ने अपने सबसे घातक ड्रोन बंबर का सफल परिक्षण भी किया है। चीन की तरफ से इसकी एक फूटेज भी रिलीज की गई है। Wing Loong I-D, Wing Loong-I यह मानव रहित विमान कई तरह की खूबियों से लैस है। यह दुश्मन की टोह लेने के अलावा हमलों को बखूबी अंजाम दे सकता है। इतना ही नहीं इस विमान में दस अलग-अलग तरह के हथियार लगाए जा सकते है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह विमान बिना दोबारा तेल भरवाए करीब 35 घंटों तक उड़ान भर सकता है।


भारत की बढ़ सकती है टेंशन
इसमें मौजूद कई खासियतों की वजह से ही यह भारत की टेंशन को बढ़ा भी सकता है। दरअसल इसमें लगे हाई रिजोल्यूशन स्पाईकैम करीब सात हजार फीट की ऊंचाई से उड़ते हुए जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। यह विमान बम से लेकर मिसाइल तक लेकर उड़ान भर सकता है। इसमें BA-7 या Blue Arrow-7 लेजर गाइडेड मिसाइल शामिल है। यह हवा से जमीन पर वार करने वाली एक सेमी ऑटोमेटिक मिसाइल है। यह दुनिया की सबसे घातक एंटी टैंक मिसाइलों में से एक है। यह मिसाइल टैंक की धज्जियां उड़ाने में पूरी तरह से कामयाब है। यह विमान YZ-212 जो कि एक लेजर गाइडेड बम है और YZ-102A एंटी पर्सनल बम, 50 किलोग्राम LS-6 मिनिएचर गाइडेड बम से भी लैस है।

यूएस / वैज्ञानिकों ने पौधे के जीन्स बदले, हवा से कैंसरकारक तत्व हटाने में मदद मिलेगी

 अब पौधे आपके घर में आने वाली गंदी या प्रदूषित हवा को साफ कर सकेंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के वैज्ञानिकों ने पॉटहोस आईवी नाम के एक पौधे की हवा साफ करने की क्षमता को बढ़ाया है। वह भी जीन एडिटिंग प्रक्रिया की मदद से। इसके लिए वैज्ञानिकों ने खरगोश के जीन को पौधे के जीन से मिलाकर बदलाव किए। जेनेटिकली मोडिफाइड पौधा बेनजीन और क्लोरोफॉर्म जैसे कैंसर फैलाने वाले तत्वों को हवा से हटाने में मददगार साबित होगा।


पौधे ने हानिकारक तत्वों को प्रोटीन में बदला
एन्वायरमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी मैगजीन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बदलाव के बाद पौधे ने न सिर्फ हवा से क्लोरोफॉर्म और बेनजीन जैसे हानिकारक तत्व हटाए, बल्कि उन्हें 2ई1 नाम के एक प्रोटीन में भी बदला, जो पौधे के विकास में मदद करता है। रिसर्चर्स का कहना है कि उन्होंने पॉटहोस आईवी को एक्सपेरिमेंट के लिए चुना क्योंकि यह पौधा अलग-अलग अंदरूनी वातावरण में बेहतर तरीके से पनप सकता है।

कैसे की गई टेस्टिंग?
वैज्ञानिकों की टीम ने टेस्टिंग के दौरान मॉडिफाइड पॉटहोस आईवी के साथ बिना बदलाव वाले पौधे को लिया। दोनों को अलग-अलग ग्लास ट्यूब में रखा गया और इनमें कैंसर का कारण माने जाने वाले बेनजीन और क्लोरोफॉर्म को डाला।

मॉडिफाइड पौधे ने जहां क्लोरोफॉर्म की मात्रा को तीन दिन में 82% और बेनजीन की मात्रा को आठ दिन में 75% तक कम कर दिया, वहीं सामान्य पौधे में दोनों गैसों के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ।

वैज्ञानिक स्टुअर्ट स्ट्रैंड के मुताबिक, अभी लोगों को इन खतरनाक ऑर्गेनिक कंपाउंड्स के हानिकारक असर के बारे में पता नहीं है और ऐसा इसलिए क्योंकि हम इसके बारे में कुछ नहीं कर पाए। लेकिन अब हमने ऐसा पौधा तैयार किया है जो प्रदूषकों को हटा सकता है।

रिसर्चर्स आने वाले समय में इमारतों के निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले केमिकल ‘फॉर्मलडिहाइड’ को खत्म करने के लिए पौधे में एक प्रोटीन मिलाना चाहते हैं, ताकि हवा को प्रदूषण मुक्त किया जा सके।

सूर्य से दो सौ गुना विशाल चमकीले तारे की खोज, जानें क्‍या हैं खूबियां

 अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे विशाल तारे की खोज की है, जो सूर्य की तुलना में दो सौ गुना बड़ा है। वह सूर्य तारे से दस गुना अधिक है।


इस तारे की खोज नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने की है। वैज्ञानिकों ने इस विशाल तारे का नाम आएस पूपीस रखा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह विशाल तारा पुष्पांजलि के आकार का है। नासा का कहना है कि यह एक चमकते हुए गुलदस्ते की तरह है। इनका मानना है कि यह केंद्र में एक विशाल तारे द्वारा प्रकाशित धूल का परिणाम हैं, जो लगभग 6,500 प्रकाश वर्ष दूर होने का अनुमान है।

अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि 'यह सूर्य से दस गुना ज्यादा भारी और 200 गुना बड़ा है। इसके चारों तरफ रोशनी वाली धूल की एक चौड़ी वलय बन गई है। आरएस को सेफिड वैरिएबल स्टार के रूप में जाना जाता है। यह तारा छह सप्ताह के चक्र के साथ समय-समय पर चमकता है और मर जाता है।

ग्रह के आकार वाली बैट शैडो डिस्क की छवि को किया कैप्चर

हबल स्पेस टेलीस्कोप ने एक ग्रह के आकार वाली डिस्क की छवि को कैप्चर किया है। वैज्ञानिकों ने इसका नाम बैट शैडो नाम दिया है। यह हमारे सौर मंडल की लंबाई का 200 लंबा है। अंतरिक्ष एजेंसी नासा का दावा है कि वर्ष की शुरुआत में हबल ने ग्रह-आकार की डिस्क द्वारा 1,300 प्रकाश वर्ष दूर विशाल छाया डाली की एक आश्चर्यजनक छवि को कैप्चर किया है। इसे सर्पेन्स नेबुला के नाम से जाना जाता है। हबल के शटडाउन होने के तीन सप्ताह पूर्व इस तस्वीर को कैद किया गया था। इसे हबल के निकट अवरक्त कैमरे का उपयोग करके पकड़ा गया था।

हबल अंतरिक्ष खगोलीय दूरदर्शी क्या है ?
हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी वास्तव में एक खगोलीय दूरदर्शी है, जो अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह के रूप में स्थित है। इसे 25 अप्रैल, 1990 में अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी की मदद से इसकी कक्षा में स्थापित किया गया था। हबल दूरदर्शी को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से तैयार किया था। अमेरिकी खगोल विज्ञानी एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इसे 'हबल' नाम दिया गया। हबल ने 1990 में अपने मिशन के शुरू होने के बाद से 1.3 मिलियन से अधिक अवलोकन किए हैं और 15,000 से अधिक वैज्ञानिक पत्रों को प्रकाशित करने में मदद की है। हबल पृथ्वी की कक्षा में लगभग 17,000 मील प्रति घंटे की गति से पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इसकी ऊंचाई लगभग 340 मील की दूरी पर है।

तैयार है देश का सबसे लंबा पुल, ट्रेनों के साथ दौड़ेंगी गाड़ियां.. आज मिलेगा तो‍हफा

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर यानी कल ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे और एशिया के दूसरे सबसे लंबे रेल-सड़क पुल बोगीबील ब्रिज का उद्घाटन करेंगे। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर तथा दक्षिणी तटों को जोड़ता है। वाजयेपी के जन्मदिवस 25 दिसंबर को मनाये जाने वाले सुशासन दिवस के दिन देशवासियों को इसकी सौगात मिलेगी।


इस पुल की आधारशिला 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने रखी थीं, लेकिन इसका निर्माण अप्रैल 2002 में शुरू हो पाया था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रेलमंत्री नीतीश कुमार के साथ इसका शिलान्यास किया था।

पूर्वोत्तर के राज्य असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस बोगीबील पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है। यह पुल नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित डिब्रूगढ़ जिले को अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगते धेमाजी जिले के सीलापथार को जोड़ता है। पुल के बनने के बाद अरुणाचल प्रदेश से चीन की सीमा तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

5800 करोड़ रुपये आएगी लागत
चीफ इंजीनियर मोहिंदर सिंह ने बताया कि डिब्रूगढ़ शहर से 17 किलोमीटर दूरी पर ब्रह्मपुत्र नदी पर बने बोगीबील पुल की अनुमानित लागत 5800 करोड़ रुपये है। इस पुल का निर्माण अत्याधुनिक तकनीक से किया गया है। इसके बन जाने से ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी और उत्तरी किनारों पर मौजूद रेलवे लाइने आपस में जुड़ जाएंगी। पुल के साथ ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर मौजूद धमाल गांव और तंगनी रेलवे स्टेशन भी तैयार हो चुके हैं।

कई अड़चनों के बाद पूरा हुआ पुल
पिछले 21 वर्षों में इस पुल के निर्माण को पूरा करने के लिये कई बार समय-सीमा तय की गई। लेकिन अपर्याप्त फंड, तकनीकी अड़चनों के कारण कार्य पूरा नहीं हो सका। कई बार विफल होने के बाद आखिरकार इस साल एक दिसंबर को पहली मालगाड़ी के इस पुल से गुजरने के साथ इसका निर्माण कार्य पूर्ण घोषित हुआ। तीन लेन की सड़क और दो रेलवे ट्रैक वाले इस पुल के निर्माण से अरुणाचल प्रदेश में चीन की लगती सीमा तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इससे सैन्य साजो सामान पहुंचाने में भी सहूलियत होगी।

रेल, रोड की दूरी होगी कम
इस पुल के बनने से डिब्रूगढ़ और अरुणाचल प्रदेश के बीच रेल की 500 किलोमीटर की दूरी घटकर 400 किलोमीटर रह जाएगी। जबकि ईटानगर के लिए रोड की दूरी 150 किमी घटेगी। इस पुल के साथ कई संपर्क सड़कों तथा लिंक लाइनों का निर्माण भी किया गया है। इनमें ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर ट्रांस अरुणाचल हाईवे तथा मुख्य नदी और इसकी सहायक नदियों जैसे दिबांग, लोहित, सुबनसिरी और कामेंग पर नई सड़कों तथा रेल लिंक का निर्माण भी शामिल है।

दिल्ली से बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी
तिनसुकिया के मंडल वाणिज्य प्रबंधक शुभम कुमार के अनुसार इस पुल के बनने से दिल्ली से डिब्रूगढ़ की रेल से दूरी तीन घंटे कम हो जाएगी। अब ट्रेन डिब्रूगढ़ से गुवाहाटी होते हुए नाहरलगुन (अरुणाचल) पहुंचाएगी। ज्यादा ट्रेने चल पाएंगी। अभी दिल्ली से नाहरलगुन वीकली ट्रेन चलती है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री तिनसुकिया-नाहरलगुन (15907-15908 ) इंटरसिटी ट्रेन का भी उद्घाटन करेंगे । ये 14 कोच की ट्रैन साढ़े पांच घन्टे लेगी। इससे असम के धीमाजी, लखीमपुर के अलावा अरुणाचल के लोगों को भी फायदा होगा। आगे एक राजधानी बोगीबील से धीमाजी होते हुए दिल्ली के लिए चलाई जा सकती है।

इंसानों की तरह चीजों की पहचान करने वाली एआइ प्रणाली विकसित

 आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) के क्षेत्र में दुनिया में तेजी से विकास हो रहा है। भावी गैजेट्स को तैयार करने के लिए इस प्रणाली का प्रयोग किया जा रहा है। वर्तमान में भी कई गैजेट्स में इसका प्रयोग करके उन्हें बेहतर बनाया जा चुका है, वहीं इसकी मदद से ऐसे रोबोट भी तैयार किए जा रहे हैं जो हमारे काम को बेहद आसान कर देंगे। इसी कड़ी में अब वैज्ञानिकों ने एक एक और बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने एक ऐसी कंप्यूटर प्रणाली विकसित की है, जो असल दुनिया की वस्तुओं की पहचान ठीक उसी तरह कर सकती है, जैसे इंसान करते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें उसी प्रणाली का प्रयोग किया गया है, जिससे इंसान किसी वस्तु के बारे में जानते हैं और उसकी पहचान करते हैं।


अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लास एंजिलिस (यूसीएलए) के शोधकर्ताओं का कहना है कि कंप्यूटर द्वारा तस्वीरों को पढ़ने और उसकी पहचान करने वाली यह प्रणाली बेहद आधुनिक है। इसे कंप्यूटर विजन नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की दिशा में यह एक अहम कदम साबित हो सकता है। इस प्रणाली के जरिये कंप्यूटर के सीखने की क्षमता में इजाफा होगा, जिसका फायदा उसकी निर्णय लेने की क्षमता को मिलेगा। कंप्यूटर के इस विकास की मदद से उसे इंसानों जैसा बनाने में और मदद मिल सकेगी।

फुटबॉल / 20 साल बाद वर्ल्ड चैंपियन टीम नंबर-1 के साथ साल का अंत नहीं करेगी

 दुनिया के नक्शे पर एक शहर है यरुशलम, जिसे इजरायल अपनी अविभाजित राजधानी मानता है। वहीं, फिलिस्तीन पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी मानता है। यह शहर ईसाइयों, मुस्लिमों और यहूदियों के लिए जितना बड़ा आस्था का केंद्र है, उतना ही विश्व की राजनीति और कूटनीति में यह एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुनिया की सियासत में यह शहर इतना संवेदनशील है कि इससे जुड़े एक फैसले से पूरी दुनिया हिल जाती है।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल दिसम्बर में यरुशलम को इजरायल की राजधानी की मान्यता दे दी और वहां पर एक अंतरिम दूतावास खोल दिया। इस फैसले से अरब देश बौखला गए। दुनिया भर में ट्रंप के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन होने लगे। ट्रंप के इस फैसले के बाद 17 दिसंबर 2017 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्यों में से अमेरिका के मित्र देशों ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान और यूक्रेन समेत 14 देशों ने ट्रंप के फैसले को खारिज करने के फैसले का समर्थन किया। इस पर दुनिया में अलग-थलग पड़ते देख अमेरिका ने वीटो कर दिया। फिर 21 दिसंबर 2017 को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में 128 देशों ने अमेरिका के खिलाफ वोट किया और यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानने से इनकार कर दिया।

दरअसल यरुशलम के इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए तो विवाद की असल जड़ समझ में आती है। अग्रेजों की गुलामी से आजाद होने के बाद फिलिस्तीन के एक हिस्से को अलग करके 1948 में इजरायल बना। यरुशलम के पश्चिमी हिस्से में इजरायल की संसद बनी। शहर का पूर्वी हिस्सा फिलिस्तीन के पास था, लेकिन 1967 के युद्ध में इजरायल ने पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया। तब से यह इजरायल के पास है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली। यरुशलम के पूर्वी हिस्से में है प्राचीन शहर, जहां पर ईसाइयों, मुस्लिमों और यहूदियों की आस्था के केंद्र हैं और यहीं से शुरू होता है विवाद। फिलिस्तीन पूर्वी यरुशलम को और इजरायल पूरे यरुशलम को अपनी राजधानी मानता है। इस विवाद को समझने के लिए धार्मिक पहलू को जानना भी जरूरी है।

यरुशलम एक ऐसा शहर है जो सदियों से ईसाइयों, मुस्लिमों और यहूदियों के दिल में बसा हुआ है। ये दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। ये ऐसा शहर है, जिस पर कई बार आक्रमण हुए। इसे जीता गया। ये तबाहहुआ, लेकिन फिर से उठ खड़ा हुआ। पुराने समय में कई शासकों ने इस शहर पर राज किया और इन्हीं में से एक शासक सिकंदर भी थे। सिकंदर ने भी इस शहर को युद्ध से जीता था और यहां अपने राज्य की स्थापना की थी। वहीं इस शहर पर ऑटोमन साम्राज्य का भी शासन रहा है।

इस शहर का हर ज़र्रा इसे इसके अतीत से जोड़ता है। हालांकि, ज़्यादातर कहानियां इसके बंटवारे और अलग-अलग धर्मों के टकराव और संघर्ष से भरी हुई हैं। इसके बावजूद सभी धर्म इस पवित्र शहर का सम्मान करने में एक साथ हैं। दरअसल, यरुशलम की आत्मा पुराने शहर में है। ये चारों ओर पत्थर की दीवारों से घिरा है और यहां कुछ ऐसी जगहें हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों में शुमार किया जाता है।

दिल्ली-एनसीआर के 500 कलाकार सजा रहे कुंभ नगरी प्रयाग, अगले माह शुरू होगा अर्धकुंभ

 अगले माह से कुंभ नगरी प्रयाग में आयोजित होने जा रहे अर्धकुंभ मेले को लेकर तैयारियों अंतिम चरण में हैं। अर्धकुंभ के लिए प्रयाग को कई महीनों से सजाया जा रहा है। पूरे शहर को धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगने के लिए दिल्ली-एनसीआर के 1000 से ज्यादा आर्टिस्ट इलाहाबाद में दिन रात जुटे हुए हैं।


उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा है कि 2019 का अर्धकुंभ वैश्विक पटल पर महापर्व के तौर पर मनाया जाए। इसके लिए पूरे शहर को महीनों से सजाया-संवारा जा रहा है। कुंभ को वैश्विक बनाने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महापर्व में विश्व के 100 से ज्यादा देशों को शामिल होने का निमंत्रण भेजा है।

कुम्भ के इस महायोजन का एक मुख्य भाग है पेंट माई सिटी। इस परियोजना के माध्यम से शहर की विभिन्न दीवारों, पुलों और सार्वजनिक स्थलों को स्ट्रीट आर्ट से सजाया जा रहा है। सरकार द्वारा जारी निविदा में 13 कंपनियों ने आवेदन किया था, इसमें से सरकार ने देश की पांच नामी गिरामी कंपनियों को चुना है। इनमें से चार कंपनी दिल्ली-एनसीआर की हैं। इसके अलावा एक कंपनी बिहार की है।

इलाहाबाद के सभी पांच-छह मुख्य पुलों को भी पेंट किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, स्कूल, डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, अस्पताल, सरकारी ऑफिसों की दीवारें भी पेंट की गई हैं। हैरीटेज बिल्डिंग पेंट नहीं की जा रही हैं। गंगा किनारे के आश्रम, पुलिस चौकियां, थाने व गंगा किनारे की दीवारें भी पेंट की जा रही हैं। शहर में कुल लगभग 50 लाख वर्गफुट एरिया पेंट किया जा रहा है।

बृहस्पति के चांद यूरोपा पर जीवन की संभावना तलाशेगा ‘टनलबॉट’

 अनगिनत रहस्यों से भरे हमारे ब्रह्मांड में ऐसे तमाम ग्रह हैं, जिनके वातावरण का अध्ययन कर अंतरिक्ष विज्ञानी उन पर जीवन की संभावनाएं जता चुके हैं। मंगल ग्रह पर जहां इन दिनों नासा का इनसाइट अध्ययन कर जानकारियां जुटाने में लगा है, वहीं दुनियाभर के वैज्ञानिक अपनी दूरबीनों की मदद से ग्रहों पर लगातार निगाहें टिकाए हुए हैं। आखिर, दूसरे ग्रह पर मानव बस्तियां बसाने का सपना इतना आसान तो है नहीं। इसलिए वैज्ञानिक हर संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में शामिल है बृहस्पति का चांद यूरोपा।



इसकी खासियतों के आधार पर वैज्ञानिक इसमें पानी की मौजूदगी की संभावना जता चुके हैं और अब यह तलाश शुरू करने जा रहे हैं कि इस पर जीवन है या नहीं। इस दिशा में काम करते हुए वैज्ञानिक इन दिनों परमाणु ऊर्जा से चलने वाले ‘टनलबॉट’ का डिजाइन तैयार कर रहे हैं। यह यूरोपा की बर्फीली परत को भेदने में सक्षम होगा और उसके भीतर महासागर में जीवन के संकेत तलाशने के प्रयास करेगा।


इस तरह जगी जीवन की
वर्ष 1995 से 2003 के बीच नासा के गैलीलियो अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति के चांद यूरोपा के समीप से कई जानकारियां एकत्र की थीं। उन जानकारियों का विश्लेषण कर ही वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे का महासागर तरल अवस्था में मौजूद है। शोधकर्ताओं का मानना है कि उस महासागर में माइक्रोबियल जीवन या अब विलुप्त हो चुके माक्रोबियल जीवन के साक्ष्य मिल सकते हैं। यानी वैज्ञानिकों को लगता है कि या तो वहां अब भी जीवन मौजूद है या फिर कभी वहां जीवन रहा हो। दोनों ही स्थितियों में टनलबॉट यूरोपा पर जीवन का पता लगाएगा।

कितनी मोटी है बर्फ की परत
अमेरिका के शिकागो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय में एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रयू डॉम्बार्ड कहते हैं, हमारा अनुमान है कि यूरोपा की बर्फ की परत दो से 30 किलोमीटर तक मोटी हो सकती है। वहां जीवन की संभावना तलाशने में यह परत ही हमारी सबसे बड़ी रुकावट है। हम नहीं जानते कि अगर किसी लैंडर को वहां भेजें तो वह यूरोपा पर उतर भी पाएगा या नहीं। इसलिए हम उस बर्फ की चादर को भेदने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसलिए ‘टनलबॉट’ को डिजाइन कर रहे हैं।

डॉम्बार्ड और उनकी टीम के सदस्य इस टास्क पर काम कर रहे हैं। वे एक ऐसी तकनीक डिजाइन कर रहे हैं, जो इस तरह के अंतरिक्ष अभियानों में मददगार साबित होगी। इसके लिए उन्होंने परमाणु ऊर्जा से संचालित ‘टनलबॉट’ को तैयार करने पर काम शुरू किया है। इसे तैयार कर रहे वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह धरती से ढेरों उपकरण यूरोपा पर ले जाने में सक्षम होगा और वहां पहुंचकर खोदाई करेगा, जिससे बर्फ की परत भेदकर अंदर जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल इस पर काम चल रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही वे इसे तैयार कर लिया जाएगा।

खतरनाक रैंसम मॉलवेयर से स्टॉक मार्केट को बचाएगा आइआइटी कानपुर का सॉफ्टवेयर

 देश के साथ विदेश में भी ई-मेल, सोशल नेटवर्किंग साइट्स, इंटरनेट, कंप्यूटर, ऑनलाइन शॉपिंग के साथ बैंक खाते आए दिन हैकरों का शिकार हो रहे हैं। इसके साथ ही सेना की कंप्यूटरीकृत ऑपरेटिंग मशीनों समेत अन्य सरकारी सिस्टम पर भी साइबर हमलों का खतरा मंडराने लगा है।

इस साइबर क्राइम को रोकने के लिए दुनिया भर में मंथन शुरू हो गया है तो देश की अर्थव्यवस्था को भी हैकरों की नजर से बचाने का खाका तैयार हो रहा है। इसी कड़ी में भारत के स्टॉक मार्केट को 'साइबर अटैक' से बचाने के लिए आइआइटी कानपुर से मदद मांगी गई है। जल्द ही दोनों संस्थानों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
आइटी एक्सपर्ट तलाश चुके संभावनाएं
आइआइटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियङ्क्षरग विभाग के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का निरीक्षण कर चुके हैं। वहां के आइटी विशेषज्ञ भी संस्थान में अत्याधुनिक साइबर सिक्योरिटी लैब का अवलोकन कर चुके हैं।

क्या कर सकते साइबर अपराधी
साइबर अपराधी स्टॉक मार्केट की सारी डिटेल पलक झपकते ही गायब कर सकते हैं। महत्वपूर्ण सूचनाएं विदेशों तक पहुंचा सकते हैं। एक बार में निवेशकों को करारी चोट पहुंचा सकते हैं।
'रैंसम' की करते मांग
कई बार स्टॉक मार्केट से जुड़े लोग लॉगइन करने में चूक कर जाते हैं, जिससे मॉलवेयर सीधे सर्वर तक पहुंच जाता है। सबसे खतरनाक रैंसम मॉलवेयर है, जो सिस्टम को हैक कर लेता है। सिस्टम को छोडऩे के एवज में हैकर मोटी रकम (रैंसम) मांगते हैं।

आइआइटी तैयार कर रहा टेस्टिंग टूल
आइआइटी टेस्टिंग टूल तैयार कर रहा है। इसमें कोई भी कंपनी या संस्थान अपने सॉफ्टवेयर की जांच 10 से 20 मिनट में करा सकेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक कंपनी को टेस्टिंग पोर्टल पर सॉफ्टवेयर अपलोड करना होगा। साइबर एक्सपर्ट टूल की सहायता से सॉफ्टवेयर की जांच कर लेंगे।

GSAT 7A आज शाम होगा लांच, इंटरनेट को मिलेगी 100 गीगाबाइट की रफ्तार, जानें इसकी खूबियां

 भारत के अब तक के सबसे भारी-भरकम उपग्रह ‘जीसैट-11’ को सफलतापूर्वक लॉन्च करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बुधवार (19-दिसंबर-2018) को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। इसरो बुधवार की शाम को देश का 35वां संचार सेटेलाइट जीसैट-7ए लांच करने जा रहा है। जानें क्या है इस संचार सेटेलाइट की खासियत और आपको क्या मिलेगा लाभ।


इसरो के मुताबिक संचार सेटेलाइट जीसैट-7ए को उपग्रह प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ-11 के जरिए श्रीहरिकोटा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे स्टेशन से लॉच करेगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसरो ने पांच दिसंबर को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी एरियानेस्पेस के फ्रेंच गुआना से संचाल सेटेलाइट जीसैट-11 के सफल प्रक्षेपण के बाद ही अपनी 35वीं संचार सेटेलाइट ‘जीसैट-7ए’ के प्रक्षेपण की घोषणा कर दी थी।

आठ साल का होगा ये मिशन
इसरो के अनुसार दिसंबर माह में लॉच हो रहे दोनों संचार सेटेलाइट देश में संचार सुविधाएं बेहतर करेंगे। इसका सबसे ज्यादा लाभ इंटरनेट यूजर्स को मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे इंटरनेट की रफ्तार तेज होगी। जीसैट-7ए भारतीय क्षेत्र में केयू बैंड में उपयोगकर्ताओं को संचार क्षमता प्रदान करेगा। इसरो ने मंगलवार सुबह से जीसैट-7ए के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती (काउंट डाउन) शुरू कर दिया है। इसरो के अनुसार इस सेटेलाइट मिशन की अवधि आठ साल होगी।

Joshna Chinappa, who equalled the 16 titles of Bhuvaneswari Kumari, receives the trophy from N. Ramachandran

When she reached the semifinals of the women’s event at 12, Joshna Chinappa’s target was to win her first national title before she was 16.

Today, the 32-year-old has already 16 national titles from 18 finals. If you thought that she achieved her target as planned, it would be wrong, as she won her maiden title when she was 14.

Over the years, Joshna has improved to world standards to reach a career-best rank of 10 in 2016, as against her current rank of 14.

“I feel on top of my game,” said Joshna, as she savoured yet another title, on Sunday, when she regrouped her game quickly to suffocate Urwashi Joshi after losing the first game in the final.

Having grown up competing in the domestic circuit and dominating the national championship for nearly 20 years — missing only one edition — Joshna feels at home competing in the premier championship.

“It is my personality. I grew up playing the championship, the CCI and other events. That is why I keep coming back. I want to be the highest,” said Joshna, assuring that she would continue to come back for the national championship in her pursuit to be the sole holder of the national record for the number of titles.

Japan to buy more stealth jets, radar to counter China, Russia

 Japan will accelerate spending on advanced stealth fighters, long-range missiles and other equipment over the next five years to support U.S. forces facing China's military in the Western Pacific, two new government defence papers said.


The plans are the clearest indication yet of Japan's ambition to become a regional power as a military build-up by China and a resurgent Russia puts pressure on its U.S. ally.

“The United States remains the world's most powerful nation, but national rivalries are surfacing and we recognise the importance of the strategic competition with both China and Russia as they challenge the regional order,” said a 10-year defence programme outline approved by Prime Minister Shinzo Abe's government on Tuesday.

The United States, followed by China, North Korea and Russia, are the countries that most influenced Japan's latest military thinking, the paper said.

China, the world's second biggest economy, is deploying more ships and aircraft to patrol waters near Japan, while North Korea has yet to fulfil a pledge to dismantle its nuclear and missile programmes.

Russia, which continues to probe Japanese air defences, said on Monday it had built new barracks for troops on a northern island it captured from Japan at the end of World War Two.

1984 anti Sikh riots : पढ़िए- दिल्ली HC ने क्यों किया द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र

 सिख विरोधी दंगा मामले में हाई कोर्ट ने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जांच एजेंसी पर गंभीर सवाल खड़े किए। अदालत ने दंगे को नरसंहार और मानवता के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसके दोषियों के सामने कानून लाचार बना रहा। मामले में एफआइआर दर्ज करने से लेकर जांच में पुलिस पूरी तरह से विफल रही। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ ने तमाम सबूत और गवाह पेश किए, जिसमें वारदात में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार समेत अन्य दोषियों के शामिल होने की न सिर्फ दलील दी गई, बल्कि अभियोजन पक्ष ने उसे साबित भी किया। अापराधिक साजिश रचने में सज्जन की भूमिका से लेकर जांच में पुलिस की नाकामी पर अदालत ने टिप्पणी की।


अदालत ने कहा कि यह एक अप्रत्याशित मामला है, जिसमें भारी दबाव के चलते कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ रिपोर्ट और बयान दर्ज करना नामुमकिन हो गया था। जिस मामले में रिपोर्ट दर्ज भी हुई, उसकी जांच या तो सही ढंग से नहीं की गई या फिर आरोप पत्र में तार्किक नतीजे में नहीं लाया गया।

अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस दंगा शाखा ने मामले से जुड़े गवाहों के न तो बयान दर्ज किए और न ही सही जांच की। दंगाइयों ने दो तरह काम किया। एक ने पुरुष सिखों पर हमला किया और दूसरे ग्रुप ने उनके घरों को जलाया। राज नगर गुरुद्वारे पर किया गया हमला इसी का एक अंग था। पुलिस और दिल्ली पुलिस दंगा शाखा ने घटना में अपने पति व सास-ससुर को खोने वाली गवाह का कभी बयान ही दर्ज नहीं किया।

आपराधिक साजिश रचने में भी सज्जन की भूमिका
अदालत ने कहा कि एक नवंबर, 1984 की घटना आपराधिक साजिश का हिस्सा थी। 31 अक्टूबर को सिखों पर बंदूक, केरोसिन और अन्य हथियारों से हमला हुआ और यह बिना पूर्व योजना के संभव नहीं था। अदालत ने राजनगर निवासी गवाह का हवाला देते हुए कहा कि दंगाई बेखौफ सिखों को निशाना बना रहे थे और जान बचाने के लिए कई सिखों ने केश काट लिए थे। सुनवाई के दौरान सीबीआइ के वकील आरएस चीमा ने कहा था कि रिपोर्ट के अनुसार पुलिस लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रही थी, लेकिन किसी ने थाने जाकर दंगा होने जैसी बात रिपोर्ट नहीं की। सिर्फ इतना जिक्र था कि कोई घटना हुई थी और पुलिस गुरुद्वारे पर गई थी। पीठ ने फैसले में माना कि दंगे की साजिश रची गई थी और यह साबित हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए नरसंहार का दिया हवाला
सिख विरोधी दंगे को लेकर हाई कोर्ट ने कहा कि यह एक अलग तरीके का अप्रत्याशित मामला है और अदालतों को ऐसे मामलों को अलग दृष्टि से देखने की जरूरत है। पीठ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए नरसंहार के मामलों का भी हवाला दिया। अदालत ने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेना प्राधिकरण ने इस तरह के मामलों को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था। रोम इंटरनेशनल क्रिमनल कोर्ट ने भी हत्या एवं दुष्कर्म जैसे मामलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।

देशभर में कई जगहों पर हुआ था नरसंहार
अदालत ने फैसले में दिल्ली व पंजाब में हुए सिख विरोधी दंगों के साथ अन्य नरसंहार का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि इसी तरह का नरसंहार 1993 में मुंबई में, 2002 में गुजरात, 2008 में ओडिशा और 2013 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भी हुआ था, जो अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हुआ संगीन अपराध है। इस तरह के मामलों में राजनीतिक कलाकारों को कानून के रखवालों का ही संरक्षण रहता है। मानवता के खिलाफ अपराध या नरसंहार घरेलू अपराध का हिस्सा है। इसे तुरंत दुरुस्त करने की जरूरत है। हाई कोर्ट ने कहा, सज्जन के खिलाफ या तो रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई और यदि कहीं हुई तो अंजाम तक नहीं पहुंची

भारतीय का दुबई में धमाल, 9 साल की उम्र में बनाया एप; 13 में बना सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक

 बच्चों को अगर सही माहौल और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं। ये बात दुबई में रहने वाले केरल 13 वर्षीय आदित्यन पर सटीक बैठती है। उम्र के उस पड़ाव पर जब, बच्चे खिलौनों से खेलते हैं आदित्यन बिजनेस कर रहे हैं। आदित्यन आज महज 13 साल की उम्र में सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट कंपनी का मालिक है। कंप्यूटर से आदित्यन का लगाव 5 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था।


आदित्यन ने चार साल पहले महज 9 साल की उम्र में अपना पहला मोबाइल ऐप्लिकेशन बना कर सबको चौंका दिया था। वह 13 साल की उम्र तक आते-आते सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट कंपनी का मालिक बन चुका है। हम बात कर रहे हैं दुबई में रहने वाले केरल के छात्र आदित्यन राजेश की जिनकी कंपनी अब लोगों के लिए वेबसाइट बनाती है। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आदित्यन ने महज 5 साल की उम्र में कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू किया था। तकनीक के इस जादूगर ने 13 साल की उम्र में अपनी कंपनी 'ट्रिनेट सॉल्यूशंस' की शुरुआत की है। ट्रिनेट के कुल तीन कर्मचारी हैं जो आदित्यन के स्कूल के दोस्त और खुद स्कूल स्टूडेंट हैं।

आदित्यन बताते हैं, 'मुझे एक स्थापित कंपनी बनाने का मालिक बनने के लिए 18 की उम्र को पार करना होगा। हालांकि हम अभी से एक कंपनी के तौर पर काम करने लगे हैं। हमने अब तक 12 से ज्यादा क्लाइंट्स के साथ काम किया है और उन्हें अपनी डिजाइन और कोडिंग सर्विस पूरी तरह मुफ्त में दी हैं।'

आदित्यन ने दुबई के अंग्रेजी दैनिक को बताया कि उसका जन्म केरल के थिरूविला में हुआ था और जब 5 साल का था तो परिवार यहां आ गया था। पिता ने उन्होंने सबसे पहले जिस वेबसाइट से रूबरू कराया, वो बीबीसी टाइपिंग थी। यह वेबसाइट बच्चों के लिए ही बनाई गई। इसी पर आदित्यन ने टाइपिंग करना सीखा था। उन्होंने बताया, 'मैं जब छह साल का था, तब काफी समय यूट्यूब पर कार्टून और स्पेलिंग गेम्स देखने में बिताता था। तभी से मेरा कंप्यूटर और तकनीक के प्रति झुकाव शुरू हो गया था।'

गूगल को टक्कर देने के लिए बनाया 'आशीर्वाद'
आदित्यन ने बताया कि जब वह सिर्फ 9 साल के थे, तब उन्होंने एक आशीर्वाद नाम का ब्राउजर बनाया था। ये वेब ब्राउजर गूगल क्रॉम की तरह ही काम करता था, जब इसमें फीचर्स काफी कम थे। लेकिन यह एप कभी लाइव नहीं हो सका। इसके पीछे का कारण बताते हुए आदित्यन कहते हैं कि गूगल प्ले स्टोर पर कोई एप अपलोड करने के लिए 25 डॉलर फीस लगती थी, इसलिए हम इसे अपलोड नहीं कर पाए। लेकिन इसके बाद आदित्यन ने खूब मेहनत की और आज एक अलग मुकाम हासिल कर लिया है।

सीएम बनते ही बोले कमलनाथ, यूपी-बिहार नहीं मध्यप्रदेश के युवाओं का नौकरी पर पहला हक

 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक काम पहले दिन से ही विवादों की भेट चढ़ता नजर आ रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने पहले दिन उद्योगों के लिए नई छूट नीति का ऐलान किया है। इस नीति के तहत प्रदेश के उद्योगों में 70 फ़ीसद रोजगार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिए जाएंगे। यानि मध्यप्रदेश में अब ऐसे ही उद्योगों को छूट मिलेगी जो कि 70 फीसद रोजगार स्थानीय लोगों को देंगे।


कमलनाथ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, 'हमारी छूट देने वाली नीति उन उद्योगों के लिए होगी, जहां 70 फ़ीसदी रोज़गार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से लोग मध्य प्रदेश आते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं मिल पाती है। मैंने इसी से संबंधित फाइल को मंज़ूरी दे दी है।'

कमलनाथ ने कहा कि यह कदम उठाने के पीछे वजह है स्थानीय लोगों के लिए नौकरी के मौके को ध्यान में रखना। गौरतलब है कि कमलनाथ का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था।

कर्जमाफी का वादा पूरा, चार गारमेंट पार्क बनाने को मंजूरी
सीएम की कुर्सी संभालने के कुछ ही समय बाद ही कमलनाथ ने किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। चुनाव के दौरान सभा में राहुल गांधी ने यह वादा किया था कि मप्र में कांग्रेस का सीएम बनते ही 10 दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाएगा।

नासा के हब्बल टेलीस्कोप से हुई तेजी से नष्ट हो रहे ग्रह की पहचान

 आकाश में ऐसे अनगिनत तारे और ग्रह मौजूद हैं, जो अपने रहस्यों की वजह से वैज्ञानिकों के कौतूहल का कारण बने हुए हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक एक-एक कर इनके रहस्यों पर से पर्दा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इससे उन्हें धरती व अन्य ग्रहों की उत्पत्ति के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकेगी। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने अंतरिक्ष में एक ऐसे ग्रह की खोज की है, जिसका वायुमंडल तेजी से वाष्पित होकर नष्ट हो रहा है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि वाष्पीकरण से ग्रहों का द्रव्यमान कम हो जाता है। ऐसे में यदि उस ग्रह का वायुमंडल इसी गति से वाष्पित होता रहा तो वह आने वाले कुछ अरब सालों में पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। नेप्च्यून (वरुण) के आकार वाला जीजे 347-बी नामक यह ग्रह पृथ्वी से 96 प्रकाशवर्ष दूर है और कर्क तारा समूह में मौजूद लाल तारे का चक्कर लगा रहा है।

डिजिटल क्रांति ने मीडिया और अखबारों को और विस्तार दिया है : पीएम मोदी

 पीएम मोदी ने कहा कि हमें खुद से सवाल पूछना चाहिए कि आखिर पिछले 67 साल से पिछड़े क्यों थे और 4 साल में ही अभूतपूर्व प्रगति कैसे हो गई। उन्होंने कहा कि आज आंकड़े भी प्रगति की गवाही दे रहे हैं। पीएम ने कहा कि हम आज न्यू इंडिया के संकल्प से सिद्धि की ओर अग्रसर हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने हीरक जयंती पर जागरण परिवार को बधाई दी और कहा कि नए भारत के, नए सपनों को साकार करने में दैनिक जागरण की, पूरे मीडिया जगत की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

बैडमिंटन / दुनिया के शीर्ष आठ खिलाड़ियों का बैडमिंटन टूर्नामेंट कल से चीन में

 दुनिया के शीर्ष आठ बैडमिंटन खिलाड़ियों का टूर्नामेंट वर्ल्ड टूर फाइनल्स बुधवार से होना है। यह बैडमिंटन में सत्र का आखिरी बड़ा टूर्नामेंट है। इसमें भारत की ओर से पीवी सिंधु और समीर वर्मा ने क्वालिफाई किया है। सिंधु दुबई में हुए पिछले सीजन में रनरअप रहीं थीं, जबकि समीर ने पहली बार क्वालिफाई किया है। सिंधु को छठी और समीर को सातवीं वरीयता मिली है। टूर्नामेंट की प्राइज मनी 15 लाख डॉलर (10.87 करोड़ रुपए) है।


सिंधु लगातार तीसरे साल टूर्नामेंट में उतरेंगी
ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट सिंधु को महिला सिंगल्स में कठिन ड्रॉ मिला है। उनके ग्रुप ए में वर्ल्ड नंबर 1 ताइवान की ताई जू यिंग, डिफेंडिंग चैम्पियन जापान की अकाने यामागुची और अमेरिका की झेंग बेईवेन हैं। सिंधु ने लगातार तीसरे साल टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई किया है।

सिंधु का यामागुची के खिलाफ करियर रिकॉर्ड 9-4 है। हालांकि, यामागुची ने इस सीजन में 5 में से 4 बार सिंधु को हराया है। वहीं, ताई जू यिंग ने 23 साल की सिंधु को पिछले लगातार छह मैचों में हराया है, जबकि सिंधु और झेंग का करियर रिकॉर्ड 3-3 है।

सैयद मोदी टूर्नामेंट जीतकर क्वालिफाई करने वाले समीर के ग्रुप में वर्ल्ड नंबर 1 जापान के केंटो मोमोटा, इंडोनेशिया के टॉमी सुगियार्तो और थाईलैंड के केंटापोन वेंगचारोन हैं। हर ग्रुप से टॉप-2 खिलाड़ी सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगे |

अफगान शांति प्रक्रिया में भारत की अहम भूमिका: पाकिस्तान

  संभवत: पहली बार पाकिस्तान ने माना है कि अफगानिस्तान में भारत के भी हित हैं और जंग से जर्जर इस मुल्क में शांति प्रक्रिया में भारत की अहम भूमिका है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को नेशनल असेंबली में कहा, 'पाकिस्तान अकेले अफगानिस्तान में अमन नहीं ला सकता। यह क्षेत्र के देशों की साझा जिम्मेदारी है।'


पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में कुरैशी के हवाले से कहा गया है, 'प्रधानमंत्री इमरान खान कह चुके हैं कि अफगानिस्तान में सेना के जरिये शांति स्थापित नहीं की जा सकती। अमेरिका, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ तालिबान भी वार्ता से इस मसले का हल चाहता है। अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों और भागीदारों से बातचीत जारी है। अफगानिस्तान में भारत के भी अपने हित हैं। इसलिए शांति के लिए भारत का सहयोग भी जरूरी है।'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में अफगान शांति वार्ता में मदद के लिए पाकिस्तान को पत्र लिखा था। अमेरिका का मानना है कि पाकिस्तान तालिबान को बातचीत की टेबल पर लाकर 17 वर्षो से युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने में मदद कर सकता है।

जयंती विशेष: अतीत की दास्तां समेटे खड़ी यह कुटिया, यहां के कण-कण में देशरत्‍न की यादें

 देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म भले ही सिवान के जीरादेई में हुआ, मगर पटना से भी उनका गहरा लगाव रहा। राष्ट्रपति बनने से पहले और बाद में, दोनों ही कालखंड में उनके जीवन का लंबा समय कुर्जी के नजदीक स्थित बिहार विद्यापीठ में गुजरा। इसी में 28 फरवरी 1963 की रात उनका निधन हो गया। अतीत की दास्तां को समेटे खड़ी है इस कुटिया के कण-कण में उनकी स्मृतियां जीवंत हैं।


बिहार विद्यापीठ में राजेंद्र स्मृति संग्रहालय में आज भी उनकी यादें संजो कर रखी हुई हैं। यहां राजेंद्र बाबू का चरखा है, कपड़े हैं, छड़ी हैं, चश्मे हैं और सबसे खास उन्हें मिला 'भारत रत्न' है।

बिहार विद्यापीठ परिसर के एक खपरैल मकान में था आवास
पटना में हाईकोर्ट की स्थापना के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1916 के मार्च में पटना आए। बाद में महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलनों में शिरकत की। वे वर्ष 1921 से 1946 तक बिहार विद्यापीठ परिसर में एक खपरैल मकान में रहा करते थे। यह जमीन मौलाना मजहरूल हक की थी, जिसे उन्होंने स्वाधीनता संग्राम के दौरान कांग्रेस को दे दी थी।

राष्ट्रपति का दूसरा कार्यकाल खत्म होने के बाद जब वे 14 मई 1962 को दिल्ली से पटना आए तो अपने पुराने खपरैल मकान में ही ठहरे, जहां आजादी के पहले रहा करते थे। इस भवन में 28 फरवरी 1963 की रात बाबू राजेंद्र प्रसाद का निधन हो गया।

World Disability Day: शरीर में एक अयोग्यता के साथ अनेक विशेष योग्यताओं का समावेश

  दिव्यांग यानी विभिन्न दिव्यताओं को दर्शाता एक स्वरूप, शरीर में एक अयोग्यता के साथ अनेक विशेष योग्यताओं का समावेश जिनमें अद्भुत क्षमताएं होती हैं जिनके सैकड़ों उदाहरण सहज उल्लेखित हैं। समाज के अन्य वर्गों की तुलना में सरकार और राजनीति से कहीं अधिक अपेक्षाकृत बहुसंख्यक पीड़ित दिव्यांग वर्ग सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी की बाट सदियों से जोह रहा है। आजादी के बाद देश में संविधान सभा द्वारा भारतीय कानून को अधिसूचित करने के बाद जहां सरकार ने अपना कार्य करना प्रारंभ कर दिया वहीं दूसरी ओर देश की एक बड़ी आबादी वाला ‘नि:शक्त जन’ तब भी संसदीय दृष्टि से वंचित रह गया और वही स्थिति कमोबेश आज भी बनी हुई है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब हमें एक नए सम्मानजनक शब्द ‘दिव्यांग’ के संबोधन से अलंकृत कर हमारी मौजूदगी का आभास करा सकते हैं तो हमें कानूनी अधिकारों से भी अभिसिंचित कर हमारे सर्व धर्म एवं जातीय युक्त दिव्यांग वर्ग के प्रति अपना सकारात्मक संदेश देते हुए राजनीतिक भागीदारी क्यों नही दे सकते हैं? जब यह सरकार बहुप्रतिक्षित दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम-2016 को भारतीय सदन से पास करा सकती है तो संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दिव्यांग जनों को राजनीतिक भागीदारी के अंतर्गत सभी सदनों में अन्य आरक्षण प्राप्त करने वाले वर्गों की भांति ‘राजनीतिक भागीदारी’ क्यों नहीं तय करतीं?

समूह-20 बैठक में पीएम मोदी की कूटनीतिक सक्रियता ने लगाए शिखर सम्मेलन में चार चांद

 विदेश दौरे पर समय का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को पहले से ही काफी जाना जाता है, लेकिन समूह-20 (जी-ट्वेंटी) देशों की बैठक के दौरान उन्होंने अर्जेटीना में जो सक्रियता दिखाई है वह एक रिकार्ड से कम नहीं है।


राजधानी ब्यूनस आयर्स पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद एक अंतरराष्ट्रीय योग कार्यक्रम में हिस्सा ले कर मोदी ने जो कूटनीतिक सिलसिला शुरु किया वह उनकी वहां से रवानगी के कुछ मिनट पहले तक चला है। इस दौरान मोदी ने जी-ट्वेंटी देशों की कई बैठकों में हिस्सा लेने के अलावा 11 देशों के राष्ट्राध्यक्षों से आधिकारिक मुलाकातों के अलावा ब्रिक्स देशों, जापान-भारत-अमेरिका (जय) देशों के संगठन और रूस-भारत-चीन (आरआइसी) जैसे संगठनों की शिखर वार्ता में हिस्सा लिया।

दक्षिण अमेरिका से लेकर जापान, यूरोप से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक में भारतीय कूटनीति की समीक्षा
पीएम मोदी ने अपनी यात्रा के अंतिम दिन आठ देशों के सरकारों के प्रमुखों से द्विपक्षीय वार्ता की है। इन सभी देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता का चुनाव विदेश मंत्रालय ने भारत की कूटनीतिक नफा-नुकसान को देखते हुए किया था। हर मुलाकात का अलग से एजेंडा तैयार था जिसमें द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा के साथ ही भविष्य के लक्ष्यों का साफ तौर पर उल्लेख था। पीएम मोदी ने इन मुलाकातों के जरिए दक्षिण अमेरिका से लेकर जापान तक और यूरोप से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक में भारत की कूटनीतिक हितों की एक तरह से समीक्षा की है।

अब सेंसर, रडार और इंफ्रारेड कैमरे की पकड़ में नहीं आएंगे हमारे सैनिक

 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के विशेषज्ञों ने हीट रेडिएशन को रोकन में सक्षम मेटामैटीरियल्स से खास तरह के कपड़े और ऐसी वस्तुएं तैयार की हैं, जिन्हें पहनने के बाद रात में सैनिकों की मौजूदगी किसी भी उपकरण की पकड़ में नहीं आएगी। 1987 में आई सुपरहिट फिल्म 'मिस्टर इंडिया' सभी को याद होगी, जिसमें हीरो के पास घड़ीनुमा एक गैजेट था। इसे पहनकर वह अदृश्य हो देश के दुश्मनों को सबक सिखाता था। इस तकनीक की सिर्फ एक काट थी, इंफ्रारेड कैमरे और लाल रंग की रोशनी। इनके जरिए ही उसे देखा जा सकता था।


आईआईटी द्वारा विकसित विशेष कपड़ों और गैजेट्स की मदद से हमारे सैनिक आरएफ सेंसर, ग्राउंड रडार, एडवांस बैटल फील्ड रडार और इंफ्रारेड कैमरों को चकमा दे सकेंगे। दरअसल अभी अंधेरे में व्यक्ति या वस्तुएं हीट रेडिएशन (वस्तु या शरीर के तापमान) के सहारे पकड़ में आती हैं। इससे एडवांस इंफ्रारेड कैमरे घने अंधेरे में भी किसी व्यक्ति को खोज निकालते हैं।

यह तकनीक सभी देश अपनी-अपनी सीमाओं पर इस्तेमाल करते हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) आईआईटी द्वारा सेना के लिए तैयार कई वस्तुओं की टेस्टिंग कर रहा है। कपड़ों पर लगाए जाने वाली पैचनुमा डिवाइस, जिसे मेटामैटीरियल्स से बनाया गया है, परीक्षण में खरी उतरी है। इसे हरी झंडी दे दी गई है, जिसके बाद संस्थान ने इसे पेटेंट कराने के लिए आवेदन कर दिया है।

फिजिक्स विभाग के प्रो.अनंत रामाकृष्णा और उनकी टीम ने दो साल की मेहनत के बाद यह तकनीक ईजाद की है। एडवांस तकनीक विकसित करने के लिए भी प्रोजेक्ट चल रहा है। मेटामैटेरियल्स से खास तरह का स्टिकर बनाया जा रहा है। इसे सेना के टैंक, लड़ाकू विमान और ड्रोन आदि पर लगाया जा सकेगा। जिसके बाद वे दुश्मन को चकमा दे सकेंगे। इन पर पानी, हवा या गर्मी का असर नहीं होगा और अल्ट्रावॉयलेट और इंफ्रारेड किरणों का असर काफी कम रहेगा।

अंतरिक्ष / दुनियाभर के लोगों को मिल सके फ्री वाई-फाई, इसके लिए चीनी कंपनी अगले साल लॉन्च करेगी सैटेलाइट

 चीनी कंपनी लिंकश्योर ने दुनिया की पहली ऐसी सैटेलाइट पेश की है, जिसकी मदद से दुनियाभर के लोगों को फ्री वाई-फाई की सुविधा मिल सकेगी। कंपनी ने बताया कि इस सैटेलाइट को अगले साल चीन के जिऊक्वॉन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया जाएगा और 2020 तक अंतरिक्ष में इस तरह की 10 सैटेलाइट पहुंचाई जाएंगी। वहीं कंपनी का लक्ष्य 2026 तक ऐसी 272 सैटेलाइट लॉन्च करने का है।


लिंकश्योर की सीईओ वांग जिंग्याइंग ने बताया कि उनकी कंपनी इस प्रोजेक्ट पर 3 बिलियन युआन (करीब 30 अरब रुपए) का इन्वेस्ट करने की तैयारी कर रही है।

जहां नेटवर्क नहीं, वहां भी मिलेगा फ्री वाई-फाई : कंपनी के मुताबिक, कई जगहों पर टेलीकॉम नेटवर्क लगाना नामुमकीन है, जिस वजह से ऐसी जगहों पर लोग इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। लेकिन इस सैटेलाइट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद लोग अपने मोबाइल फोन की मदद से फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल उस जगह भी कर सकते हैं, जहां टेलीकॉम नेटवर्क की पहुंच नहीं है।

फ्री इंटरनेट पर कई कंपनियां कर रहीं तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैटेलाइट की मदद से फ्री इंटरनेट एक्सेस देने के लिए गूगल, स्पेस एक्स, वन वेब और टेलीसैट जैसी कई कंपनियां तैयारी कर रहीं हैं।
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अनुमान लगाया है कि 2045 तक दुनिया की स्पेस इंडस्ट्री का मार्केट 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

वर्ल्ड चेस चैम्पियनशिप / तीन हफ्ते के खेल के बाद भी चैम्पियन नहीं मिला, पहली बार लगातार 12 मैच ड्रॉ रहे

 वर्ल्ड चेस चैम्पियनशिप तीन बार के डिफेंडिंग चैम्पियन नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन और अमेरिका के फैबियानो कारुआना के बीच खेली जा रही है। 12 मैच की चैम्पियनशिप के सभी मैच ड्रॉ रहे। टूर्नामेंट में ऐसा पहली बार हुआ, जब लगातार 12 मैच ड्रॉ रहे। तीन हफ्ते में 50 से ज्यादा घंटे तक खेलने के बाद भी चैम्पियन नहीं मिला। अब रिजल्ट के लिए टाईब्रेकर खेला जाएगा।


टाईब्रेकर मैच कांच के साउंडप्रूफ स्टेज पर होंगे। इसमें रैपिड गेम्स होंगे। अगर इससे भी विजेता नहीं मिला, तो सडन-डेथ से फैसला होगा। विनर को 4.38 करोड़ रुपए और रनरअप को 3.58 करोड़ रुपए की प्राइज मनी मिलेगी।

कारुआना के जीतने पर अमेरिका को 26 साल बाद मिलेगा चैम्पियन
26 साल के कारुआना अगर जीते तो वे बॉबी फिशर के बाद चैम्पियन बनने वाले पहले अमेरिकी बन जाएंगे। फिशर 1972 में चैम्पियन बने थे। वहीं, 27 साल के कार्लसन 19 साल की उम्र से दुनिया के टॉप खिलाड़ियों में शामिल हैं। वे चेस के छोटे फॉर्मेट में ज्यादा आक्रामक होते हैं। हालांकि, कार्लसन ने 12वीं बाजी में कारुआना के सामने ड्रॉ का प्रस्ताव रखकर कई कमेंटेटरों को चौंका दिया था, क्योंकि एक्सपर्ट्स और कंप्यूटर प्रोग्राम का मानना था कि वे कारुआना से बेहतर स्थिति में थे।

ड्रॉ रहने पर काले मोहरों वाला खिलाड़ी चैम्पियन माना जाएगा
अब दोनों खिलाड़ियों के बीच चार रैपिड मुकाबले खेले जाएंगे। यह 25-25 मिनट के होंगे और हर चाल में 10 सेकंड बढ़ेंगे। अगर चारों रैपिड मुकाबलों के बाद भी नतीजा नहीं आया, तो फिर 5-5 मिनट के दो ब्लिट्ज मुकाबले खेले जाएंगे। अगर, फिर भी नतीजा नहीं निकला तो आखिरी मुकाबला होगा, जिसमें काले मोहरों से खेल रहे खिलाड़ी को चार मिनट जबकि सफेद मोहरों से खेल रहे खिलाड़ी को पांच मिनट दिए जाएंगे। ड्रॉ होने की स्थिति में काले मोहरों से खेल रहे खिलाड़ी को विजेता घोषित कर दिया जाएगा। रैपिड और ब्लिट्ज में कार्लसन दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी हैं। जबकि कारुआना रैपिड में वर्ल्ड नंबर 8 और ब्लिट्ज में वर्ल्ड नंबर 13 हैं।

शतरंज / मैग्नस कार्लसन लगातार चौथी बार शतरंज के वर्ल्ड चैम्पियन बने

 नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन लगातार चौथी बार शतरंज के वर्ल्ड चैम्पियन बन गए हैं। 27 साल के कार्लसन ने 26 साल के अमेरिकी चैलेंजर फाबियो कारुआना को टाइब्रेकर में 3-0 से हराया। दोनों खिलाड़ियों के बीच क्लासिकल फॉर्मेट के सभी 12 मुकाबले ड्रॉ रहे थे। इसके बाद टाइब्रेकर खेला गया। इसमें कार्लसन ने लगातार तीन मुकाबले अपने नाम कर वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीत ली।


कार्लसन इससे पहले 2013, 2014 और 2016 में भी चैम्पियन बने थे। दो बार उन्होंने चैम्पियनशिप मैच में भारत के विश्वनाथन आनंद को हराया था। कारुआना 1972 के बाद पहले अमेरिकन वर्ल्ड चैम्पियन बनने की कोशिश में थे। 1972 में अमेरिका के बॉबी फिशर ने सोवियत संघ के बोरिस स्पास्की को हराकर खिताब जीता था। मैच के बार कारुआना ने कहा, ‘यह मेरे लिए बुरा दिन था। मैं चुनौती भी नहीं दे पाया।’

फुटबॉल / मेसी चैंपियंस लीग में एक क्लब से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी

 बार्सिलोना के लियोनेल मेसी चैम्पियंस लीग फुटबॉल में एक क्लब की ओर से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने बुधवार रात पीएसवी इंडोवेन के खिलाफ एक गोल कर यह रिकॉर्ड बनाया। अब उनके चैम्पियंस लीग में 128 मैचों में 106 गोल हो गए हैं। उन्होंने क्रिस्टियानो रोनाल्डो का 105 गोल का रिकॉर्ड तोड़ा। रोनाल्डो ने रियल मैड्रिड की ओर से इतने गोल किए थे।


चैम्पियंस लीग में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड रोनाल्डो के नाम है। उन्होंने 155 मैचों में 121 गोल किए हैं। मेसी के गोल की मदद से बार्सिलोना ने ग्रुप मैच में नीदरलैंड के क्लब पीएसवी इंडोवेन को 2-1 से हराया। मेसी ने 61वें और गेरार्डपिक ने 70वें मिनट में गोल किए, जबकि इंडोवेन की ओर से एकमात्र गोल डी जोंग ने 82वें मिनट में गोल किया।

गुडन्यूज / दुरुस्त हो रही है ओजोन परत, अंटार्कटिका पर आईआईटी खड़गपुर की रिसर्च ने भी की पुष्टि

 सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (परबैंगनी) रेडिएशन से बचाने वाली ओजोन की परत में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। यह धीरे-धीरे खुद को रिपेयर कर रही है। दुनिया के आधे उत्तरी हिस्से में ओजोन की पर्त 2030 तक खुद को रिपेयर कर लेगी। यह रिपोर्ट अमेरिका ने जारी की है। खास बात है कि अंटार्कटिका पर ओजोन परत सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति में थी यहां पर भी सुधार देखा जा रहा है। आईआईटी खड़गपुर ने भी अपनी हालिया रिसर्च में इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने 1979 से लेकर 2017 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें सामने आया कि अंटार्कटिका पर मौजूद ओजोन परत में 1987 में सबसे ज्यादा नुकसान देखा गया था। 2001 से 2017 तक परत में नुकसान का स्तर कम हुआ है। रिसर्च के मुताबिक परिणामों में अलग-अलग मौसम का डाटा शामिल किया गया है।


नासा वैज्ञानिक पॉल न्यूमैन के मुताबिक, अगर ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व बढ़ते रहे तो इसके खतरनाक नतीजे होंगे। नासा की मुताबिक, धरती से 7-25 मील ऊपर ओजोन परत है। यह पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की नुकसान पहुंचाने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकने का काम करती है। जो स्किन कैंसर, मोतियाबिंद का कारण बनने के साथ शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता और पौधों को नुकसान पहुंचाती हैं। वायुमंडल की ऊपरी सतह कुदरती तौर पर बनी ओजोन की परत को अच्छा माना जाता है।

सफल रहा 196 देशों का मॉन्ट्रियल प्रोटोकाल
वैज्ञानिकों ने 1970 में पहली बार ओजाेन की पतली होती परत की पहचान की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि इसका कारण रेफ्रिजरेटर और स्प्रे में मौजूद क्लोरोफ्लोरो कार्बन है। ओजोन लेयर में लगातार क्षति देखते हुए 1980 में 196 देशों ने मिलकर एक मसौदा तैयार किया। इसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकाल कहा गया। जिसका मकसद दुनियाभर में क्लोरोफ्लोरो कार्बन का स्तर कम करना था। कई कंपनियों ने क्लोरोफ्लोरो कार्बन फ्री प्रोडक्ट बनाए और यह प्रयोग काफी कामयाब रहा।

यूनाइटेड नेशन एन्वायरमेंट प्रोग्राम के प्रमुख एरिक सोल्हिम के अनुसार, करीब 30 साल इस प्रोटोकॉल के कारण ओजोन परत से जुड़े सकारात्मक परिणाम सामने आए। पर्यावरण का तापमान बढ़ाने वाली गैसें जिसे हाइड्रोफ्लोरोकार्बन के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें भी कम करने की पहल की गई थी। ये गैसें रेफ्रिजरेटर, एयरकंडीशनर और कारों में पाई जाती हैं।

जी-20 / योग दुनिया को स्वास्थ्य और शांति के लिए भारत का एक तोहफा: मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को 13वें जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स पहुंचे। यहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सऊदी किंग मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। मोदी ने 'योगा फॉर पीस' कार्यक्रम में कहा कि जब इंसान के दिमाग में शांति होगी तभी परिवार, समाज, देश और दुनिया में शांति होगी। उन्होंने कहा कि योग दुनिया को स्वास्थ्य और शांति के लिए भारत का दिया एक तोहफा है।

मोदी ने कहा कि आज के कार्यक्रम को योग फॉर पीस नाम दिया गया। कार्यक्रम का इससे बेहतर नाम खोजना मुश्किल है। योग बेहतर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद करता है। मोदी ने बताया कि जी-20 सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक भगोड़े जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

ट्रम्प और आबे से भी मुलाकात करेंगे
शुक्रवार को मोदी और सऊदी के किंग मोहम्मद बिन सलमान के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। इस दौरान सऊदी अरब ने भरोसा दिलाया है कि वह भारत की आधारभूत संरचना में निवेश करेगा। मोदी आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से भी मुलाकात करेंगे। सम्मेलन के अलावा मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ त्रिपक्षीय बैठक करेंगे।
ओपनिंग सेरेमनी में हिस्सा नहीं ले पाईं मर्केल
जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल विमान में तकनीकी खराबी के चलते जी-20 शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं ले सकीं। काफी देर तक तक हवा में रहने के बाद उनके विमान की जर्मनी के कोलोन शहर में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।

मैजिशियन और एक्टर रिकी जे का 72 की उम्र में निधन

 अपनी जादुई ट्रिक्स के लिए मशहूर रिकी जे का शनिवार को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। रिकी ने कई फिल्मों और टीवी शो में भी काम किया था। जे के मैनेजर विन्सटन सिमोन ने बताया कि जे की मौत नैचुरल कारणों से हुई है। सिमोन ने जे को याद करते हुए कहा, "वो अपने आप में एक अलग शख्सियत के मालिक थे। हम उनके जैसा व्यक्तित्व अब कभी नहीं देख सकेंगे।"


जे का पूरा नाम रिचर्ड जे पोटाश था। जादू की दुनिया से उनका परिचय कराने का श्रेय उनके दादा को जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जे ने अपना पहला शो 4 साल की उम्र में किया था। मैजिक सीखने के बाद वे न्यूयॉर्क में रॉक बैंड्स की ओपनिंग में परफार्म करने लगे। 'द ऐस्केप आर्टिस्ट' फिल्म से जे ने फिल्मों में काम शुरु किया था।

इसके बाद जे हॉउस ऑफ गेम्स, द स्पेनिश प्रिजनर, थिंग्स चेंज, रेडबेल्ट और स्टेट एंड मैन जैसी कई फिल्मों में नज़र आए थे। 1997 में बनी जेम्स बॉन्ड फिल्म 'टुमॉरो नेवर डाइस' में जे ने सायबर टेरेरिस्ट का किरदार निभाया था। द प्रेस्टीज फिल्म में उन्होंने मिल्टन द मैजिशियन के रूप में नज़र आए थे। इस फिल्म के लिए जे ने ही लीड कैरेक्टर निभा रहे ह्यूग जैकमैन और क्रिश्चियन बेल को मैजिक ट्रिक्स सिखाई थी। पॉल थॉमस एंडरसन की फिल्म 'मैग्नोलिया' में उन्होंने नैरेशन भी दिया था।

जे ने मैजिक सबजेक्ट पर 'कार्ड्स एज वेपन' और 'डाइस: डिसेप्शन, फेट एंड रोटन लक' जैसी लगभग 10 किताबें लिखी है। जे की जिंदगी पर एक डॉक्युमेंट्री भी बन चुकी है। 2012 में रिलीज हुई इस डॉक्युमेंट्री का नाम था "डिसेप्टिव प्रैक्टिस : द मिस्ट्रीज एंड मेंटर्स ऑफ रिकी जे।"

डिसेप्टिव प्रैक्टिसेज कंपनी में जे के पार्टनर माइकल वीबर ने जे के निधन पर अपनी भावनाएं एक ट्वीट के जरिए व्यक्त की। माइकल ने लिखा, "मुझे यह बताते हुए बेहद दुख हो रहा है कि मेरे अद्भुत मित्र, गुरु और सहयोगी हमारे बीच से जा चुके हैं।"

इनोवेशन / एमआईटी ने बिना ईंधन के उड़ने वाला दुनिया का पहला विमान बनाया, इससे न प्रदूषण होगा और न शोर

 अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( एमआईटी) के इंजीनियरों ने पहली बार ऐसा विमान बनाया है जो बिना ईंधन और बैटरी के इस्तेमाल के उडे़गा। इसे उड़ाने के लिए प्रोपेलर, टर्बाइन ब्लेड या पंखों की बजाय आयन (आवेशित कणों) प्रवाह का इस्तेमाल हुआ है। सिर्फ सवा दो किलो वजन का यह विमान सबसे हल्का बताया जा रहा है। इसे बनाने वाली टीम का कहना है कि, ' इस तरह की इनोवेटिव आइडिया से आयनों से हवा को धकेलने वाले सिस्टम (आयन विंड प्रपल्शन)' का इस्तेमाल कर बिना शोर वाले ड्रोन उड़ाने में भी मदद मिलेगी। यह रिसर्च नेचर हॉबी क्राफ्ट जर्नल में प्रकाशित की गई।


तकनीकी रूप से है काफी साधारण
एमआईटी के एसोसिएट प्रो. स्टीवन बैरेट के मुताबिक, यह ऐसा पहला विमान है जिसके प्रपल्शन सिस्टम में किसी भी तरह के घूमने वाले पुर्जे इस्तेमाल नहीं किए गए है। यह सफलता हवाई विमानों के लिए नई संभावनाआें को जन्म देगी। यह तकनीकी रूप से काफी साधारण है और इसमें ईधन का इस्तेमाल न होने के कारण प्रदूषण भी नहीं फैलता। इसके विंड प्रपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके हायब्रिड पैसेंजर प्लेन और बड़े विमानों को तैयार किया जा सकेगा।

सवा दो किलो है वजन
बैरेट ने करीब नौ साल पहले बिना मूविंग पार्ट वाले प्रपल्शन सिस्टम पर काम करना शुरू किया। सालों की मेहनत के बाद इसे तैयार किया जा सका। इसका वजन करीब सवा दो किलो और पंखों की लम्बाई 5 मीटर है। इसमें काफी बारीक और मोटे दोनों तरह के तारों का इस्तेमाल किया गया है। बारीक तार पॉजीटिव और मोटे तार निगेटिव इलेक्ट्रोड की तरह काम करते हैं। लिथियम-पॉलिमर बैट्री लगाई गई है। इसे खासतौर पर ऐसी पावर सप्लाई के लिए तैयार किया गया है जो कन्वर्टर की मदद से 40 हजार वोल्ट पावर सप्लाई कर सके।

टेलीविजन सीरीज ‘स्टार ट्रैक’ से मिला आइडिया
प्रो. स्टीवन के मुताबिक, आयन प्लेन का आइडिया एक फिल्म और मशहूर टीवी सीरीज 'स्टार ट्रैक' से आया जिसे मैं बचपन में बहुत देखता था। इसमें लोग बिना किसी मेहनत के आराम से छोटे प्लेन उड़ाते थे और उसमें किसी तरह के मूविंग पार्ट नहीं थे। इसके कारण प्लेन बिना शोर के उड़ता था। इसकी कहानी ने मुझे प्लेन तैयार करने के लिए प्रेरित किया। फिल्म देखकर ये समझ आया कि भविष्य में ऐसा प्लेन बने जिसमें प्रोपेलर और टरबाइन न हों। बिल्कुल स्टार ट्रेक के शटल की तरह जिसमें एक नीली बत्ती हो और बिना शोर उड़ सके।

बैडमिंटन / समीर लगातार 2 साल सैयद मोदी टूर्नामेंट जीतने वाले पहले खिलाड़ी

 

भारत के समीर वर्मा ने सैयद मोदी बैडमिंटन टूर्नामेंट में पुरुष सिंगल्स का खिताब जीत लिया। वे लगातार दो साल इस टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। वैसे, पिछले चार साल से पुरुष सिंगल्स का खिताब किसी भारतीय खिलाड़ी के नाम ही रहा है। समीर के पहले 2016 में किदांबी श्रीकांत और 2015 में पी कश्यप चैम्पियन बने थे।

तीसरी सीड समीर ने फाइनल में चीन के लू ग्वांगजू को 16-21, 21-19, 21-14 से हराया। यह उनका साल का तीसरा खिताब है। इससे पहले, उन्होंने हैदराबाद ओपन और स्विस ओपन भी जीते थे। समीर ने एक घंटे 10 मिनट में जीत दर्ज की। इस बीच, महिला सिंगल्स में दूसरी सीड साइना नेहवाल को हार का सामना करना पड़ा।

साइना नेहवाल चीनी खिलाड़ी से हारीं
दो बार की पूर्व चैम्पियन साइना को फाइनल में चौथी सीड चीन की हान युई ने 21-18, 21-8 से हराया। पुरुष डबल्स में सात्विकसाईराज रंकीरेड्‌डी-चिराग शेट्‌टी और महिला डबल्स में अश्विनी पोनप्पा-एन सिक्की रेड्‌डी की भारतीय जोड़ियां फाइनल में हार गईं।

भविष्‍य के विमानों में नहीं होंगे इंजन और प्रोपेलर, बदल जाएगी पूरी थ्‍योरी

 

हममें से कई लोगों ने विमान में सफर जरूर किया होगा। लिहाजा विमान के अंदर होने वाले इंजन और उसके प्रोपेलर के शोर से भी वह अंजान नहीं होंगे। कई बार यह आवाज काफी परेशान भी करती है। लेकिन भविष्‍य में इस तरह की आवाजें बीते कल की बात हो सकती हैं। दरअसल, मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीज के विशेषज्ञों की एक टीम ने ऐसी तकनीक का इजाद किया है जिससे आज की कल्पना को साकार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की टीम ने इस तरह के एक विमान का ट्रायल भी किया है। हालांकि यह एक बड़े विमान का एक प्रोटोटाइप था। इस मॉडल को 4.8 सेकंड में 55 मीटर तक उड़ा गया। इससे पहले कभी भी इस तकनीक के जरिए विमान को उड़ाने की कोशिश नहीं की गई।

कल्‍पना की इस उड़ान को साकार बनाने का जिम्‍मा स्‍टीवन बैरेट ने लिया है। इस विमान का डिजाइन भी इन्‍होंने ही बनाया है। उनका कहना है कि भविष्य के विमान में प्रोपेलर और टरबाइन जैसी चीजें नहीं होगी। यह विमान हॉलीवुड की सीरीज स्‍टारट्रेक के विमानों की तरह होंगे, जो आसानी से हवा में उड़ान भर सकेंगे। यही वजह है कि यह विमान आज उड़ान भरने वाले विमानों से बिल्‍कुल अलग होंगे। इतना ही नहीं यह अपनी उड़ान लायक एनर्जी को खुद प्रोड्यूस करेंगे और इसका ही उपयोग अन्‍य चीजों में करेंगे। प्रोटोटाइप की टेस्टिंग में विशेषज्ञों को इसमें काफी हद तक सफलता भी हासिल हो गई है। इतना ही नहीं इस प्रोटोटाइप विमान में कोई भी प्रोपेलर या सोलर पैनल नहीं लगाया गया। इसके अलावा विमान में कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो हिलती है।

इस विमान में इंजन की जगह दो मुख्य भाग हैं। विमान के आगे कई इलेक्‍ट्रॉड लगे हैं जोकि काफी हल्के तारों से बने हैं। यह इलेक्‍ट्रॉड काफी करंट पैदा करते हैं। इसकी मदद से नाइट्रोजन के कण पैदा होते हैं जिन्हें आयन कहते हैं। वहीं विमान के पीछे भी 20 हजार वोल्ट का करंट पैदा करते हैं और दोनों से निकलने वाले करंट की वजह से आयोनिक विंड विमान को उपर उठाने में सफल हो जाती है। 1990 में इस तकनीक का पहली बार इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसे परिणाम तक नहीं पहुंचाया जा सका था।

यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि विमानन तकनीक को लेकर वर्तमान में काफी बदलाव हो रहे हैं। इसका एक जीता जागता उदाहरण सौर-ऊर्जा इंजन से युक्त सोलर इम्पल्स है। इस विमान ने अब तक का सबसे लंबा सफर तय किया है। यह इस विमान के लिये बड़ी उपलब्धि है।

जीएम सरसों एक बार फिर से चर्चा में, जानें क्यों हो रहा है इसका विरोध

 

पंजाब में जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) सरसों एक बार फिर चर्चा में है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में गुपचुप तरीके से जीएम सरसों का परीक्षण किए जाने को लेकर काफी चर्चाएं हैं। हालांकि अभी इसके परीक्षण की पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन सरसों सत्याग्रह समिति के साथ ही जीएम फसलों का विरोध करने वाली संस्था खेती विरासत मिशन ने इस मामले में मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। मिशन के कार्यकारी निदेशक उमेंद्र दत्त ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर इसके परीक्षण की मंजूरी न देने की मांग की है। दूसरी तरफ सरसों सत्याग्रह समिति की ओर से चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में जीएम सरसों पर पीपल डायलॉग करवाने का फैसला किया गया है।

उमेंद्र दत्त का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सुनने को मिल रहा है कि केंद्र की जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (जीईएसी) के प्रस्ताव पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की ओर से जीएम सरसों का परीक्षण किया जा सकता है। वे ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि जीएम बीज गैर कुदरती है और यह सेहत के साथ-साथ धरती और वातावरण का भी बड़ा नुकसान करते हैैं। भारत में जीएम सरसों को लाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि पहले से ही देश में सरसों की बेहतरीन वैरायटी है। जीएम सरसों हमारी परंपरागत सरसों की वैरायटी को खत्म कर देगी। इससे हर्बीसाइड (खर-पतवार नष्ट करने वाली दवा) का प्रयोग बढ़ेगा। अगर सरकार तर्क दे रही है कि देश में खाद्य तेलों की कमी है तो यह सरकार की नीतियों की वजह से है। सरकार किसानों को बढ़ावा दे तो देश में खाद्य तेलों की कमी दूर हो जाएगी।

अब रोबोट को होगा छूने का अहसास

 

दुनिया भर के वैज्ञानिक रोबोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से विकास करने में निरंतर प्रयासरत हैं। वे ऐसे रोबोट तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जो हमारे रोजमर्रा के कई कार्यों में सहयोगी बन सकें, जिससे हमारा जीवन आसान हो सके। इसी के तहत वैज्ञानिक लगातार रोबोट को नई खूबियों से लैस करते जा रहे हैं। हाल ही में ऐसी तकनीक को विकसित करने का दावा किया गया है, जिससे भावी रोबोट्स में सूंघने की शक्ति कुत्तों से भी तेज होगी। अब एक कदम आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिकों ने रोबोट्स में छूने का एहसास विकसित करने का मार्ग भी तलाश लिया है।

दरअसल, स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे इलेक्ट्रॉनिक दस्ताने तैयार कर लिए हैं, जिनमें सेंसर लगे हुए हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि इन दस्तानों की मदद से भविष्य में तैयार होने वाले रोबोट के हाथ तैयार किए जा सकेंगे, जिससे वे इंसानों की तरह छूने का अहसास कर सकेंगे।

साइंस रोबोटिक्स नामक जर्नल में इस शोध को प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि जांच के दौरान सेंसर वाले इन दस्तानों ने प्रयोगशाला में शानदार परिणाम दिए। इसने नाजुक बेरी और पिंगपांग बॉल को अच्छे से संभाला और वो भी बिना कस के दबाए।

अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनान बाओ के मुताबिक, इस तकनीक ने हमें रोशनी की एक किरण दिखाई है। इसकी मदद से एक दिन हम ऐसा रोबोट विकसित कर सकेंगे, जिसमें किसी चीज को छूने, अहसास करने और संभालने की क्षमता इंसानों की तरह होगी।

बनाया जाएगा मानव त्वचा के जैसा
वैज्ञानिक इस दिशा में काम कर रहे हैं कि इस दस्ताने को हूबहू मानव त्वचा की तरह तैयार किया जा सके। इसके लिए वह इसमें चीजों को छूने का अहसास कराने में सक्षम बना रहे हैं। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही वे अपना शोध पूरा कर लेंगे और भविष्य में ऐसे रोबोट तैयार किए जा सकेंगे, जिनके हाथों में इंसानी हाथों की खूबियां होंगी।

भारत के पास है विश्व का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन, PM मोदी भी रह चुके हैं सदस्य

 दुनिया के कई देशों में सभी महिलाओं और पुरुष नागरिकों के लिए कुछ समय की सैन्य सेवा अनिवार्य है। इसमें यूक्रेन, लिथुआनिया, फिनलैंड, नॉर्वे, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इस्राइल, उत्तर कोरिया, ताइवान, ईरान, अल्जीरिया, तुर्की, रूस व चीन आदि शामिल हैं। भारत में भी अनिवार्य सैन्य सेवाओं को लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन है। इन्हें न केवल सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि इसके बदले इन युवाओं को कई तरह के लाभ भी दिए जाते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस वर्दीधारी युवा संगठन के सदस्य रह चुके हैं।


यहां हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की। इसकी स्थापना 16 अप्रैल 1948 को हुई थी। प्रत्येक वर्ष नवंबर माह के चौथे रविवार को एनसीसी का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्यालय दिल्ली में है। एनसीसी एक भारतीय सैन्य कैडेट कोर है, जिसमें स्वैच्छिक आधार पर स्कूल व कॉलेज के छात्रों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है।

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2018 में NCC को और अधिक सशक्त बनाने की बात कही थी। साफ है कि सरकार युवाओं में एनसीसी को और लोकप्रिय बनाना चाहती है। कर्नल गोपाल गुरुनाथ बेवूर को 31 मार्च 1948 को राष्ट्रीय कैडेट कोर का पहला निदेशक बनाया गया। इसके वर्तमान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल बीएस सहरावत हैं। ‘एकता और अनुशासन’ एनसीसी का आदर्श वाक्य है। देश के युवाओं को संवारने में लगे हुए सेना, नौसेना और वायु सेना का एक त्रिकोणीय सेवा संगठन है। इसीलिए NCC के झंडे में तीन रंग होते हैं जो तीनों सेनाओं को प्रदर्शित करते हैं। लाल आर्मी के लिए, गहरा नीला नेवी के लिए और हल्का नीला वायुसेना के लिए। झंडे की तरह ही एनसीसी की वर्दी भी तीन रंग की होती है। खाकी वर्दी थलसेना का प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स पहनते हैं। हल्की नीली वर्दी वायुसेना का प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स पहनते हैं। सफेद वर्दी नौसेना का प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स पहनते हैं।

जानें- देश में डाक टिकट का इतिहास

 देश्ा में डाक टिकट का इतिहास उतना ही पुराना है, जितनी कि देश की आजादी। डाक टिकटों की विकास यात्रा भी बेहद दिलचस्प है। आज हम आपको बताएंगे कि देश का पहला डाक टिकट कब जारी हुआ। इसके साथ डाक टिकट से जुड़े कुछ अनछुए पहलूओं पर भी प्रकाश डालेंगे।


भारतीय ध्वज का चित्र और जय हिंद
भारत का पहला डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी हुआ। इसका उपयोग केवल देश के अंदर डाक भेजने के लिए किया गया। इस पर भारतीय ध्वज का चित्र और जय हिंद लिखा हुआ है। आजाद भारत का पहला डाक टिकट साढ़े तीन आना राशि यानी 14 पैसा था। हालांकि, 15 अगस्त, 1947 को नेहरू जी ने आजादी के बाद लाल किले से अपने पहले भाषण का समापन जय हिंद से किया। उस वक्त डाकघरों को एक सुचना भेजी गई कि नए डाक टिकट आने तक, डाक टिकट चाहे अंग्रेजी सम्राट जॉर्ज की ही मुखाकृति की उपयोग में आए, लेकिन उस पर मुहर 'जय हिन्द' की लगाई जाए।

टिकट का दाम 'आना' से 'रुपये' तक
आजाद भारत का पहले डाक टिकट का उपयोग केवल देश के अंदर डाक भेजने के लिए किया गया। इस पर भारतीय ध्वज का चित्र लगा हुआ था। डाक टिकट की यह राशि 1947 तक 'आना' में ही रही, जबकि रुपए की कीमत 'आना' की जगह बदल कर '100 नए पैसे' में कर दी गई। वैसे 1964 में पैसे के साथ जुड़ा 'नया' शब्द भी हटा दिया गया। 1947 में एक रुपया '100 पैसे' का नहीं बल्कि '64 पैसे' यानि 16 आने का होता था और इकन्नी, चवन्नी और अठन्नी का ही प्रचलन था। देश मे भेजे जाने वाली डाक के लिए पहले डाक टिकट पर अशोक के राष्ट्रीय चिन्ह का चित्र मुद्रित किया गया। इसकी कीमत डेढ़ आना थी। इसी तरह विदेश में भेजे जाने वाले पत्रो के लिए पहले डाक टिकट पर डीसी चार विमान का चित्र बना हुआ था, उसकी राशि बारह आना यानि 48 पैसे की थी।

डाक टिकटों में महात्मा गांधी सबसे आगे
में महात्मा गांधी ऐसे पहले भारतीय थे, जिन पर डाक टिकट जारी किया गया था। देश में अब तक जितनी भी हस्तियों पर डाक टिकट जारी किए गए हैं, उनमें से सबसे ज्यादा टिकट महात्मा गांधी के नाम पर ही जारी हुए थे। भारत में अब तक कई लोगों के नाम पर डाक टिकट जारी हो चुके हैं। इसमें से कुछ डाक टिकट प्रचलन में नहीं आए। उन्हें केवल सम्मान स्वरूप प्रकाशित किया गया है।

तेंदुलकर पहले जीवित जिन पर डाक टिकट जारी
पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट में योगदान को देखते हुए उन पर एक टिकट जारी किया गया। वह देश के पहले ऐसे जीवित व्यक्ति है, जिन पर 14 नवंबर, 2013 को डाक टिकट जारी हुआ। 1947 में महात्मा गांधी के जीवित रहते उन पर डाक टिकट जारी की तैयारी थी, लेकिन किसी ने कहा टिकट आजादी के जश्न पर 15 अगस्त 1948 को जारी हो। गांधी की 30 जनवरी 1948 को मृत्यु हो गई।

थुंबा से हुई थी भारत के अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत, बैलगाड़ी से पहुंचे रॉकेट के कलपुर्जे

 भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।


विक्रम साराभाई ने चुना था थुंबा
विक्रम साराभाई ने जब थुंबा को भारत के पहले राकेट प्रक्षेपण के लिए चुना तो इस चर्च के बिशप ने वहां के ईसाई मछुआरों को साराभाई की मदद के लिए तैयार किया। यही नहीं इस चर्च में राकेट प्रक्षेपण के शुरूआती काम हुए। वहां बैठकें हुआ करती थीं। आज इस चर्च को स्पेस म्यूजियक में बदल दिया गया है। शायद दुनिया का यह अकेला चर्च है जो इस तरह के शैक्षणिक कार्य के लिए समर्पित हो गया है। जब थुम्बा में पहला राकेट लांच किया गया तब उस समय केरल विधानसभा का सत्र चल रहा था। थोड़ी देर के लिए सत्र रोक दिया गया और सबकी नज़र लांच पर टिक गई। उसमें भारत के ग्यारवहें राष्ट्रपति डाक्टर ए पी जे कलाम भी युवा वैज्ञानिक के रूप में शामिल थे।

टॉयलेट को बनाया डाटा रिसीविंग सेंटर
इसके करीब 12 वर्ष बाद भारत ने अपने पहले प्रायोगिक उपग्रह आर्यभट्ट के साथ अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया जिसे 1975 में रूसी रॉकेट पर रवाना किया गया। उस वक्त भी इस तरह के प्रक्षेपण के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी थी और उस वक्त बैंगलोर के एक शौचालय को डाटा प्राप्त करने के केंद्र में तब्दील कर दिया गया था। थुंबा से सफर शुरू करने के बाद भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब काफी आगे निकल चुकी है। भारत ने चंद्रमा संबंधी रिसर्च शुरू करने, उपग्रह बनाने, अन्य देशों के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने और मंगल तक पहुंचने में सफलता अर्जित कर दुनियाभर में अपनी पहचान बना ली है।

पहली भारतीय महिला जिसने 124 साल पहले चुना डॉक्टरी पेशा, आज हुआ था जन्म

 भारत की पहली महिला चिकित्सक रुक्मा बाई राऊत का जन्म 1864 में आज ही के दिन मुंबई में हुआ था। ब्रिटिश उपनिवेश के दौरान भारत में जब महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर भी जागरूक नहीं थीं तब उन्होंने डॉक्टरी के पेशे में प्रवेश कर एक मिसाल कायम की।


1894 में वह भारत की पहली महिला डॉक्टर बनीं। वह एक ऐतिहासिक कानूनी मसले के केंद्र में भी रहीं जिसके परिणामस्वरूप आज ऐज ऑफ कॉन्सेंट एक्ट 1891 कानून यानी दो वयस्कों के बीच शादी करने की वैधानिक उम्र तय की गई।

पिता से मिली प्रेरणा
रुक्मा बाई की मां का नाम जयंती बाई था। 15 साल की उम्र में रुक्मा बाई का जन्म हुआ। 17 साल की उम्र में जयंती बाई विधवा हो गईं, जिसके बाद उन्होंने सखाराम अर्जुन से दूसरी शादी की जो मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर और समाज सुधारक थे। रुक्मा बाई की शिक्षा में उनके पिता का काफी योगदान रहा।

महिलाओं के हक में बना कानून
इसके बाद 19 मार्च 1891 में ब्रिटिश भारत में ऐज ऑफ कॉन्सेंट एक्ट 1891 कानून बनाया गया, जिसमें शारीरिक संबंधों के लिए शादीशुदा और गैर शादीशुदा महिलाओं की सहमति की उम्र 10 से बढ़ाकर 12 साल कर दी गई थी।

बाल विवाह को दी चुनौती
निजी और पेशेवर जीवन में हर चुनौती को स्वीकार करने वाली रुक्मा बाई का विवाह 11 साल की उम्र में ही आठ साल बड़े भीकाजी से हो गया था। शादी के बाद वह अपने माता-पिता के साथ रहती थीं। 1884 में भीकाजी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में पति का पत्नी के ऊपर वैवाहिक अधिकार का हवाला देते हुए याचिका दायर की जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें पति के साथ रहने या जेल जाने का आदेश दिया। रुक्मा बाई ने तर्क दिया कि उन्हें उस विवाह में रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो तब हुआ जब वह इसके लिए सहमति देने में असमर्थ थीं। इस तर्क ने बाल विवाह और महिलाओं के अधिकारों पर लोगों का ध्यान खींचा।

Musical fest off to cheery start in Chennai

 

The 14th edition of The Hindu November Fest launched on Wednesday at the Taj Coromandel hotel in Chennai with a concert by Chandana Bala Kalyan.

This year, the festival will take place in three cities – Chennai, Bengaluru and Hyderabad.

Welcoming the audience, Mukund Padmanabhan, Editor, The Hindu, said that from its birth in 2005, the festival has attempted to introduce new forms of music to people.

“Over the last 14 years, we have privileged the unusual over the familiar, experimentation over repetition and novelty over iron-cast genre,” he said.

In her concert, Chandana Bala Kalyan melded genres such as Carnatic, Sufi, Qawwali and jazz with an ease that reflected her musical versatility. She was accompanied by Naveneet Sundar on the keys and M.T. Aditya Srinivasan on the tabla.

In Chennai, the November Fest will kick off with a concert featuring sitar exponent Ustad Shujaat Khan on Thursday. Three acts will also travel to Bengaluru and Hyderabad. They are a collaborative performance by Bombay Jayashri Ramnath and Abhishek Raghuram, an evening featuring Chennai-based Staccato and IndoSoul, and music from Bollywood by Rekha Bhardwaj from Mumbai.

भारतीय वैज्ञानिक अब रोबोट्स को सिखा रहे हैं काम करना, दल में विदेशी भी हैं शामिल

रोबोटिक्स के क्षेत्र में दुनिया भर के वैज्ञानिक नए प्रयोगों में लगे हुए हैं। वे ऐसे रोबोट विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनसे हमारे कई काम आसान हो सकें। इसके लिए सबसे जरूरी है रोबोट में जल्द सीखने की क्षमता विकसित करना। इस दिशा में वैज्ञानिकों ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है।

दरअसल, वैज्ञानिक वर्तमान में दो ऐसे फ्रेमवक्र्स पर काम कर रहे हैं, जिनसे रोबोट किसी टास्क को इंसानों से जल्द सीख सकेंगे। उदाहरण के तौर पर हम जिस तरह से किसी सामान को अपने हाथों से उठाते हैं, अब रोबोट हमारे जरिये इस टास्क को तेज गति और आसानी से सीख सकेंगे। अहम बात यह है कि इस पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के दल में एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी के छात्र अजय मंडलेकर कहते हैं, हमने एक रोबोटर्क नाम का फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसकी मदद से लोग स्मार्टफोन और ब्राउजर का प्रयोग कर रोबोट को रीयल टाइम में किसी टास्क के बारे में निर्देश दे सकेंगे। वहीं, इसके अलावा एक और फ्रेमवर्क तैयार किया गाय है, जिसका नाम सुररीयल है। इसे तैयार करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि यह फ्रेमवर्क रोबोट के सीखने की गति को बढ़ाने में सक्षम है। इतना ही नहीं इस फ्रेमवर्क की मदद से रोबोट को एक बार में कई कार्य बताए जा सकते हैं, जिसे वह आसानी से सीख सकता है।

कलम के इस बाल सिपाही ने 11 साल की उम्र में लिख डाली 60 किताबें

 किताबों से दोस्ती का सबक सीखने की उम्र में 11 वर्षीय मृगेंद्र 60 किताबें लिख चुके हैं। सभी किताबें प्रकाशित भी हुईं। कलम के इस बाल सिपाही ने हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं पर अपनी समृद्ध लेखनी से साहित्य सर्जना की है। चार अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ ही सैकड़ों सम्मान मिल चुके हैं। मौजूदा समय में चार विदेशी विभूतियों की आत्मकथा लिखने में मशगूल हैं। फैजाबाद, उप्र निवासी मृगेंद्र राज का ये सृजनात्मक सफर जिज्ञासा से भरा है।


कक्षा छह के विद्यार्थी मृगेंद्र की मां डॉ. शक्ति पांडेय असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। पिता राजेश पांडेय केन डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। शक्ति ने बताया कि बचपन से ही मृगेंद्र का साहित्य में रुझान रहा। तीन साल की उम्र में स्वरचित कविताएं सुनाना शुरू किया। लिखने का शौक समय के साथ बढ़ता गया। 2014 में पहला काव्य संग्रह ‘उद्भव’ आया। फिर अयोध्या-फैजाबाद में दंगा भड़का। मन की व्यथा को शब्दों में उतार ‘उगती खुशियां’ उपन्यास लिखा। उसके बाद प्रकृति की मर्म गाथा के साथ ही बायोग्राफी लिखने का भी सिलसिला शुरू हो गया, जो अब भी जारी है।

रोड टू ओलिंपिक / गीतिका और अनिता का वापसी का ऐलान, दंगल क्वीन ने अपने नाम किया गोल्ड मेडल

 रोड टू ओलिंपिक के लिए पहली सीढ़ी के रूप में हुई राज्य स्तरीय सीनियर कुश्ती चैंपियनशिप के पहले दिन गीतिका जाखड़ व अनिता ने वापसी का ऐलान किया तो दूसरा दिन दंगल क्वीन गीता फोगाट के नाम रहा। गीता ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। फोगाट ने घोषणा की वह ओलंपिक मेडल जीतने के बाद ही कुश्ती छोड़ेंगी।


देश को कुश्ती में पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाली साक्षी मलिक ने कहा कि बेशक यह साल अभी तक कैसा भी गया हो, लेकिन इसका समापन वह गोल्ड के साथ करना चाहेंगी। पहलवान सरिता मोर ने भी अपना वजन कंफर्म करते हुए बताया कि वह 59 किलाे में चुनाैती पेश करेंगी। वहीं पुरुष वर्ग में बात करें तो विश्व के नंबर एक पहलवान बने बजरंग पुनिया ने सीनियर नेशनल में नहीं खेलने का फैसला किया है। दूसरी तरफ एशियाड में करारी हार से बेरंग हुए लगातार दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार के भविष्य पर अभी भी सवाल बरकरार है।

गीता ने कहा-62 किलो में चुनौती दूंगी: बकौल गीता फोगाट मैं कुश्ती से ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकती। ओलंपिक खेल चुकी हूं, लेकिन मेडल न मिलना एक अधूरापन सा है उसी अधूरेपन को मेडल जीतकर पूरा करने के लिए अपने घुटने एवं कलाई में चोट से फिट होने के बाद उसी राज्य स्तर से वापसी कि जहां से चैंपियन बनकर राष्ट्रमंडल खेलों का गोल्ड मेडल जीने का सफर तय किया था। अब फिट हूं और लय में भी हूं। 62 किलोग्राम वजन वर्ग में ही चुनौती दूंगी, सामने फिर चाहे कोई पहलवान हो।

विश्व महिला मुक्केबाजी / दिल्ली की जहरीली हवा के कारण खिलाड़ियों को सांस लेने में परेशानी हो रही

 राजधानी दिल्ली में 15 दिसंबर से एआईबीए वर्ल्ड चैम्पियनशिप होनी है। इसमें भाग लेने के लिए दुनिया भर की महिला मुक्केबाज यहां आई हुईं हैं। इनमें से कुछ पर यहां की जहरीली हवा का बुरा असर पड़ा है। उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही है। हालांकि, अपने आतिथ्य के लिए मशहूर भारतीयों की मेजबानी से विदेशी खिलाड़ी काफी खुश नजर आ रहे हैं।


मुक्केबाजों ने कहा- ऐसी हवा में अभ्यास करना भी मुश्किल
2014 में 57 किग्रा भार वर्ग में वर्ल्ड चैम्पियन रहीं बुल्गारिया की स्टैनिमिरा पेट्रोवा ने बताया, 'हम अच्छा नहीं महसूस कर रहे हैं। यहां की हवा दूसरी कहीं भी जगह से खराब है। हमे सांस लेने में थोड़ी परेशानी हो रही है। इस तरह की हवा में अभ्यास करना बहुत मुश्किल है।'

यूरोपियन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकीं अल्बानिया की ऐजी निमानी भी पेट्रोवा से सहमत दिखीं। उन्होंने कहा, 'मैं पहली बार भारत आई हूं। ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि यह शहर थोड़ा और साफ किया जा सकता है, लेकिन यहां के लोग बहुत अच्छे हैं।'

ऐजी निमानी ने 2016 रियो ओलिंपिक में 51 किग्रा भार वर्ग के क्वालिफायर में पांच बार की वर्ल्ड चैम्पियन भारत की मैरीकॉम को हरा दिया था। निमानी स्वीकारती हैं कि उन्हें सांस लेने में कठिनाई एक मुद्दा है, लेकिन चैम्पियनशिप के लिए पहले से ही यहां पहुंचने के कारण वे इससे तालमेल बैठा लेंगी।

उन्होंने कहा, 'सांस लेने में थोड़ी परेशानी है। ईमानदारी से कहूं तो इसलिए मैं यहां एक सप्ताह पहले आ गई थी, ताकि अपनी बाउट के लिए यहां के वातावरण से तालमेल बैठा सकूं।'

2016 वर्ल्ड चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वालीं स्टोयका पेट्रोवा ने बताया कि हवा की क्वालिटी का बाउट पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह सभी मुक्केबाज इसी हवा में सांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता इससे (हवा की गुणवत्ता) कोई समस्या होगी।'

बता दें कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाए जाने से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की हवा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली के दिन लोगों के पटाखे चलाने से मना किया था, ताकि स्थिति और बदतर न हो जाए।

INS Virat to be converted into museum, tourism hub

 Decommissioned aircraft carrier INS Virat will be converted into a museum along with allied tourism activities, including a luxury hotel, cafeteria, scuba diving and other adventure sports.

The proposal was passed in the state cabinet on Thursday. INS Virat was decommissioned on March 6, 2017 and the Western Naval Command had asked several coastal states whether they were interested in turning her into a monument.

An officer from the state said, “The activities to be integrated with the ship have not been finalised and the design of the project could change. We have plans to have a luxury hotel and residential accommodation, but this will be done by bidders But the activities on the ship will be allowed with pre-conditioning of maintaining its dignity,” said an official from the ports department.
The state-appointed under chief secretary will fine tune the proposal by deliberating issues with the Naval officials. The preliminary proposal expects the viability gap funding of Rs 250 crore and also an advance to be paid to the bidder in form of debt with a low interest rate.
The state had also planned to convert INS Vikrant into a war museum. After many promises, the state backed out and the Navy scrapped her.

पेरिस मास्टर्स / खाचनोव ने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की, फाइनल में जोकोविच को हराया

 रूस के कारेन खाचनोव ने पेरिस मास्टर्स टेनिस टूर्नामेंट का खिताब जीता। गैरवरीय खाचनोव ने फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त सर्बिया के नोवाक जोकोविच को 7-5, 6-4 से हराया। खाचानोव की यह करियर की सबसे बड़ी जीत है। उन्होंने एक घंटे 37 मिनट में फाइनल मुकाबला जीता। जोकोविच सबसे ज्यादा चार बार यह टूर्नामेंट जीतने वाले खिलाड़ी थे।


खाचनोव ने पहली बार मास्टर्स खिताब जीता
खाचनोव इस साल पहली बार मास्टर्स खिताब जीतने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। इस साल अमेरिका के जॉन इस्नर ने मियामी ओपन और अर्जेंटीना के जुआन मार्टिन डेल पोत्रो ने इंडियन वेल्स के रूप में अपना-अपना पहला मास्टर्स खिताब जीता था।

हालांकि, इस हार के बाद भी जोकोविच स्पेन के राफेल नडाल को पीछे छोड़कर सोमवार को जारी वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप पर पहुंच जाएंगे। वहीं, खाचनोव करियर की बेस्ट 12वीं रैंकिंग पर पहुंच जाएंगे।

इस टूर्नामेंट से पहले खाचनोव ने टॉप-10 खिलाड़ियों के खिलाफ खेले 19 मुकाबलों में से केवल तीन जीते थे। दुनिया के 18वें नंबर के पुरुष टेनिस खिलाड़ी खाचनोव ने पिछले महीने मॉस्को में क्रेमलिन कप भी जीता था।

उपलब्धि / बाइल्स एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप के सभी 6 इवेंट में पदक जीतने वाली पहली जिम्नास्ट

 अमेरिका की सिमोन बाइल्स ने वर्ल्ड जिम्नास्टिक चैम्पियनशिप में इंडिविजुअल फ्लोर एक्सरसाइज में गोल्ड जीता। यह बाइल्स का 14वां वर्ल्ड टाइटल है। 21 साल की बाइल्स का यह मौजूदा चैम्पियनशिप में चौथा गोल्ड और छठा मेडल है। वे 31 साल बाद पहली जिम्नास्ट हैं, जिन्होंने एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप के सभी छह इवेंट में मेडल जीते हैं।


31 साल बाद किसी जिम्नास्ट ने एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप में छह पदक जीते
उनसे पहले, सोवियत यूनियन की एलेना शुसुनोवा ने 1987 में नीदरलैंड में हुई चैम्पियनशिप में 6 मेडल जीते थे। तब एलेना ने वॉल्ट, फ्लोर एक्सरसाइज में गोल्ड, टीम, ऑल-अराउंड, बैलेंस बीम इवेंट में सिल्वर और अनईवन बार्स में सिल्वर जीता था।

बाइल्स एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप में छह मेडल जीतने वाली पहली अमेरिकी जिम्नास्ट हैं। उन्होंने टीम, ऑल-अराउंड, वॉल्ट, फ्लोर इवेंट में गोल्ड जीता, जबकि अनईवन बार्स में सिल्वर और बैलेंस बीम में ब्रॉन्ज हासिल किया।

20 मेडल जीतकर स्वेतलाना की बराबरी की
बाइल्स के वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कुल 20 मेडल हो गए हैं। उन्होंने रूस की स्वेतलाना खोर्किना के रिकॉर्ड की बराबरी की। बाइल्स और खोर्किना सबसे ज्यादा वर्ल्ड टाइटल जीतने वाली महिला जिम्नास्ट हैं।

बाइल्स के नाम 14 स्वर्ण के अलावा तीन रजत और तीन कांस्य पदक हैं। वहीं, स्वेतलाना ने नौ स्वर्ण, आठ रजत और तीन कांस्य पदक जीते थे। बाइल्स पहले ही सबसे ज्यादा 12 वर्ल्ड टाइटल जीतने का बेलारूस के विताली शेरबो का रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं। वैसे, विताली सबसे ज्यादा 23 वर्ल्ड टाइटल जीतने वाले जिम्नास्ट हैं।

बाइल्स किडनी स्टोन के कारण हॉस्पिटल में एडमिट थीं
बाइल्स को चैम्पियनशिप के एक दिन पहले किडनी स्टोन का पता चला था। वे पहले इवेंट के 24 घंटे पहले अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बावजूद, उन्होंने चैम्पियनशिप में कई रिकॉर्ड तोड़े। 2016 ओलिंपिक के बाद यह उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट था। उन्होंने रियो ओलिंपिक में चार स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीते थे।

14 साल में बना सिग्नेचर ब्रिज, देश-दुनिया में इससे कम समय में हो गए बड़े-बड़े निर्माण

 

1997 में इसकी परिकल्पना की गई थी और सात साल बाद यानी 2004 में इस सिग्नेचर ब्रिज का प्रोजेक्ट का तैयार किया गया था। फिर तीन साल बाद सन् 2007 में इस प्रोजेक्ट को तत्कालीन दिल्ली सरकार ने मंजूरी दी। इस प्रोजक्ट को सन् 2010 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के समय पूरा होना था, लेकिन यह पूरा हुआ 8 साल बाद यानी 2018 में। कुलमिलाकर इस प्रोजेक्ट के निर्माण में 14 साल से ज्यादा का समय लग गया।

इस दौरान लंबा समय बीतने से इस पर खर्च भी बढ़ा। इस परियोजना पर शुरू में 464 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई थी, लेकिन कुछ बदलाव के बाद योजना की लागत 2007 में दिल्ली सरकार ने 1100 करोड़ रुपये कर दी थी। अब इस परियोजना की राशि 1518.37 करोड़ रुपये पहुंच गई। ब्रिज करीब 700 मीटर लंबा है, जिसमें दोनों ओर चार-चार लेन हैं। यह 35.2 मीटर चौड़ा है। कुलमिलाकर डेढ़ दशक के दौरान इसका खर्च तकरीबन चार गुना बढ़ गया।

अमेरिका / ईरान से तेल खरीद बंद करने वाले देशों के लिए पर्याप्त सप्लाई मौजूद: ट्रम्प

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि ईरान से क्रूड की खरीद कम करने वाले देशों के लिए पर्याप्त तेल सप्लाई उपलब्ध है। ट्रम्प का कहना है कि ईरान से जो आपूर्ति कम होगी उसकी भरपाई दूसरे सप्लायर देश कर सकते हैं। इसलिए, ईरान से तेल नहीं खरीद जाए। ईरान पर 5 नवंबर से अमेरिकी प्रतिबंध लागू होंगे। इससे पहले अमेरिका चाहता है कि सभी देश ईरान से तेल की खरीद पूरी तरह बंद कर दें।


ट्रम्प ने मई में ईरान पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी
इस साल मई में अमेरिका ने ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था। इस समझौते के तहत ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करने के एवज में आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी।

ट्रम्प ने मई में समझौते से अलग होने के बाद ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की थी। साथ ही कहा था कि सभी देश 5 नवंबर से पहले ईरान से तेल सप्लाई बंद कर दें नहीं तो उन्हें भी प्रतिबंध झेलने पड़ सकते हैं।

भारत अपनी जरूरतों का 80% क्रूड इंपोर्ट करता है
भारत अपनी जरूरतों को देखते हुए ईरान से तेल सप्लाई बंद करने की अमेरिका की मांग के खिलाफ है। लेकिन, उसने ईरान से सप्लाई कम की है। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल आयातक देश है।

ईरान भारत का तीसरा बड़ा क्रूड सप्लायर है। भारत अपनी जरूरत का 10% तेल ईरान से खरीदता है। पहला और दूसरा नंबर ईराक और सऊदी अरब का है।

ईरान से तेल खरीद के मुद्दे पर अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में भारत से बातचीत की थी। हालांकि, बैठक के नतीजे सामने नहीं आ सके।

क्रिकेट / द्रविड़ आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पांचवें भारतीय, गावस्कर ने किया सम्मानित

 पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। वे इस फेहरिस्त में शामिल होने वाले दुनिया के 87वें और भारत के पांचवें क्रिकेटर हैं। इसी साल जुलाई में आईसीसी ने द्रविड़ के हॉल ऑफ फेम शामिल होने की घोषणा की थी। उनसे पहले बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, सुनील गावस्कर और अनिल कुंबले को यह सम्मान दिया जा चुका है।


द्रविड़ ने कहा- इस सूची में शामिल होना बहुत बड़ा सम्मान
भारत-वेस्टइंडीज के बीच तिरुवनंतपुरम में पांचवें वनडे से पहले बीसीसीआई की ओर से सुनील गावस्कर ने द्रविड़ को सम्मानित किया। इस पर उन्होंने कहा, "यह बहुत बड़ा सम्मान है। सर्वकालिक महान क्रिकेटरों की सूची में अपना नाम दर्ज कराना सबका सपना होता है।"

उन्होंने कहा, "मैं अपने परिजनों के साथ-साथ उन खिलाड़ियों का भी आभारी हूं, जिनके साथ मैं खेला। कोच और अधिकारियों ने मुझे समर्थन दिया और एक क्रिकेटर के रूप में विकसित होने में मदद की। मैं केएससीए (कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन) और बीसीसीआई को भी धन्यवाद देना चाहूंगा।"

द्रविड़ ने 164 टेस्ट में 36 शतक की मदद से 13,288 रन बनाए। उन्होंने 2012 में संन्यास लिया था। वे दुनिया में सबसे ज्यादा 210 कैच लेने वाले खिलाड़ी हैं। उन्हें 2004 में आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर और आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया था।

वर्ल्ड चैम्पियनशिप / अमेरिका की बाइल्स ने स्वर्ण जीता, ऑल-अराउंड इवेंट में 4 गोल्ड जीतने वाली पहली जिम्नास्ट

 अमेरिका की सिमोन बाइल्स ने वर्ल्ड आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वे वर्ल्ड चैम्पियनशिप में ऑल-अराउंड इवेंट में चार बार गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली जिम्नास्ट हैं। बाइल्स ने कतर की राजधानी स्थित एस्पायर डोम में ऑल राउंड फाइनल्स में कुल 57.491 अंक बनाए। बाइल्स इससे पहले 2013 (एंटवर्प), 2014 (नाननिंग), और 2015 (ग्लासगो) में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप के ऑल-अराउंड इवेंट में भी गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।


मुराकामी रजत जीतने वालीं जापान की पहली जिम्नास्ट
जापान की मेई मुराकामी ने ऑल-अराउंड फाइनल्स में रजत पदक जीता। वे ऑल राउंड फाइनल्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली जापान की पहली जिम्नास्ट हैं। गत चैम्पियन अमेरिका की 17 साल की हर्ड मोर्गन कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं।

स्वर्ण जीतने के बाद बाइल्स ने कहा, ‘यह शायद मेरी सभी विश्व चैम्पियनशिप और ओलिंपिक में पदक के मुकाबले सबसे कठिन जीत है। अमेरिका के लिए फिर से एक बार स्वर्ण पदक जीतना वाकई बहुत रोमांचक है।’

मोर्गन की ओर इशारा करते हुए बाइल्स ने कहा, ‘एक दूसरे को प्रोत्साहित करना अहम है। हम इस प्रतियोगिता के लिए बहुत दिनों से तैयारी कर रहे थे। उनके (मोर्गन) साथ यहां तक पहुंचना रोमांचक है। हम खुश हैं कि हमारी कड़ी मेहनत रंग लाई।’

2016 रियो ओलिंपिक में भाग लेने के बाद बाइल्स दोहा में पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही थीं। रियो में बाइल्स ने चार स्वर्ण पदक जीते थे। तब पहली बार किसी अमेरिकी जिम्नास्ट ने एक ही ओलिंपिक में चार स्वर्ण पदक जीते थे।

रियो ओलिंपिक के बाद से वे अस्वस्थ थीं। अमेरिकी जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन ने बताया था कि अस्पताल के इमरजेंसी रूम में जब बाइल्स की मेडिकल जांच हो रही थी, तो डॉक्टरों को उनके किडनी में स्टोन मिला था।

रोचक / खेल मंत्री राज्यवर्धन ने मैरीकॉम के साथ बॉक्सिंग की, कहा- महिला खिलाड़ी मिसाल बनीं

 मैरीकॉम ने गुरुवार को केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने दो-दो पंच किए। इस दौरान मैरीकॉम एथेंस ओलिंपिक में रजत पदक जीतने वाले निशानेबाज राज्यवर्धन को बीच-बीच में बॉक्सिंग के टिप्स भी दिए। मौका था 15 नवंबर से राजधानी में होने वाली महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के लोगो और एंथम के लांच होने का। इस मौके पर पांच बार की वर्ल्ड चैम्पियन मैरीकॉम को प्रतियोगिता का ब्रांड एम्बेस्डर भी बनाया गया। भारत दूसरी बार इस चैम्पियनशिप की मेजबानी कर रहा है।


केंद्रीय खेल मंत्री ने एथलीट्स को शुभकामनाएं दीं
बाद में राज्यवर्धन सिंह ने चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, "बॉक्सिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप भारत आ रही है। यह जानकर मुझे अपार हर्ष हो रहा है। हमारे एथलीट, खासतौर पर हमारी महिला एथलीट ने हर मुश्किल और चुनौती का सामना करते हुए खुद को साबित किया है। आज कई महिला मुक्केबाज इसकी मिसाल हैं। इन खिलाड़ियों ने न सिर्फ आने वाले खिलाड़ियों को प्रेरित किया है बल्कि महिलाओं के बीच प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।"

खिलाड़ियों को पहले भी दे चुके हैं फिटनेस चैलेंज
बता दें कि खेल मंत्री फिजिकल एक्टिविटी में अक्सर हिस्सा लेते रहते हैं। इस साल मई में उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो पर पोस्ट कर शटलर साइना नेहवाल, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और अभिनेता ऋतिक रोशन को फिटनेस चैलेंज दिया था।
मैरीकॉम की देशवासियों के सामने फिर से चैम्पियन बनने की इच्छा

मैरीकॉम ने कहा, "घर में दोबारा खेलने को लेकर रोमांचित हूं। विश्व चैम्पियनशिप कई मायनों मे खास है। मैं अपने देशवासियो के सामने सोना जीतने के लिए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी। मैं देशवासियों के सामने चैम्पियन बनना चाहती हूं।" महिला विश्व चैम्पियनशिप की शुरुआत 2001 में हुई थी। भारत ने 2006 में इसकी मेजबानी की थी। इस चैम्पियनशिप में भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2006 में रहा था। तब भारतीय मुक्केबाजों ने चार स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य सहित कुल आठ पदक जीते थे।

चैम्पियनशिप के लिए भारतीय टीम
मैरीकॉम (48 किग्रा), पिंकी जांगड़ा (51 किग्रा), मनीषा माउन (54 किग्रा), सोनिया (57 किग्रा), एल. सरिता देवी (60 किग्रा), सिमरनजीत कौर (64 किग्रा), लवलिना बोगोहेन (69 किग्रा), सावेटी बूरा (75 किग्रा), भाग्यवति काचारी (81 किग्रा) और सीमा पूनिया (81प्लस किग्रा)। कोच : रफाएल बेर्गामास्को (विदेशी कोच), शिव सिंह (मुख्य कोच), संध्या गुरुंग, मोहम्मद अली कमर, छोटे लाल यादव, सतवीर कौर।

टेनिस / स्वितोलिना अक्टूबर में सबसे ज्यादा प्राइज मनी जीतने वाली खिलाड़ी

 

यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना अक्टूबर में सबसे ज्यादा प्राइज मनी जीतने वाली खिलाड़ी हैं। उन्हें इस महीने साढ़े 17 करोड़ रुपए प्राइज मनी के रूप में मिले। स्वितोलिना ने रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच को पीछे छोड़ा। दुनिया की चौथे नंबर की महिला टेनिस खिलाड़ी स्वितोलिना ने डब्ल्यूटीए फाइनल्स का खिताब जीता था। यह उनके करियर का सबसे बड़ा खिताब था। इस जीत से उन्हें 17 करोड़ रुपए की प्राइज मनी मिली थी।

हॉन्गकॉन्ग ओपन में क्वार्टर फाइनल खेलने पर भी मिली थी राशि
स्वितोलिना को अक्टूबर में साढ़े 17 करोड़ रुपए प्राइज मनी के रूप में मिले। यह अक्टूबर महीने में किसी खिलाड़ी को मिलने वाली सबसे ज्यादा प्राइज मनी है। उन्होंने हॉन्गकॉन्ग ओपन का क्वार्टर फाइनल खेला, जबकि चाइना ओपन में पहले राउंड में हार गईं। इन दोनों टूर्नामेंट से भी उनको राशि मिली।

अक्टूबर में सबसे ज्यादा प्राइज मनी जीतने वाले टॉप-5 खिलाड़ियों में तीन महिलाएं हैं। डेनमार्क की कैरोलिन वोजनियाकी 13 करोड़ रुपए के साथ दूसरे नंबर पर हैं। वोजनियाकी ने अक्टूबर में बीजिंग ओपन का खिताब जीता था।

शंघाई ओपन जीतने वाले नोवाक जोकोविच 9.95 करोड़ रुपए की प्राइज मनी के साथ तीसरे नंबर पर हैं। यह सर्बिया के जोकोविच का सीजन का चौथा खिताब था। डब्ल्यूटीए फाइनल्स की रनरअप स्लोन स्टीफंस चौथे और बासेल ओपन चैम्पियन फेडरर पांचवें नंबर पर हैं।

सितंबर की मनी लिस्ट में जापान की नाओमी ओसाका टॉप पर थीं। तब उन्होंने यूएस ओपन के रूप में अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम जीता था, जबकि टोक्यो ओपन के फाइनल में पहुंची थीं। उन्हें 28 करोड़ प्राइज मनी के रूप में मिले थे। लेकिन अक्टूबर में ओसाका सिर्फ बीजिंग ओपन के सेमीफाइनल में पहुंची थीं।

भारतीय वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा

 होमी जहांगीर भाभा की आज जयंती है। वह भारत के प्रमुख वैज्ञानिक और स्वप्नदृष्टा थे, जिन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने काम और अपने स्वभाव को लेकर खासा मशहूर थे। 24 नवंबर 1966 को फ्रांस के माउंट ब्लैंक के आसमान में एक विमान क्रैश हुआ और इसमें मौजूद सभी यात्री मारे गए। इसमें से एक थे डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा।


भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना
भाभा ने ही भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। उन्होने मुट्ठी भर वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में न्यूक्लियर एनर्जी पर रिसर्च प्रोग्राम शुरू किया था। उन्होंने न्यूक्लियर साइंस पर तब काम करना शुरू किया था दुनिया को इसकी चैन रिएक्शन के बारे में काफी कम जानकारी थी। इतना ही नहीं उस वक्त नाभिकीय उर्जा से विद्युत उत्पादन की कल्पना को कोई मानने को तैयार नहीं था। उन्हें 'आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम' भी कहा जाता है।

दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान का मलबा
वर्ष 1966 में फ्रांस के ऐल्प्स पहाडि़यों में दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान का मलबा और कुछ मानवीय अवशेषों के मिलने के बाद एक बार फिर से इस हादसे की चर्चा हो रही थी। यहां पर मिले मानवीय अवशेषों की जांच अब बेहद जरूरी हो गई है। इस इलाके में दो विमान हादसे हुए थे। इनमें से पहला हादसा 1950 और दूसरा 1966 को हुआ था। भारत के लिए यह विमान हादसा इसलिए बेहद खास था क्योंकि जो विमान यहां पर 24 जनवरी 1966 को दुर्घटनाग्रस्त हुआ था उसमें भारत के महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा सवार थे। वह इस विमान में वियना एक कांफ्रेंस में हिस्सा लेने जा रहे थे। इस विमान में उस वक्त 117 यात्री सवार थे। भारत को इस विमान दुर्घटना से गहरा धक्का लगा था।

डब्ल्यूटीओ में क्या हैं एम्बर बॉक्स व ग्रीन बॉक्स?

 विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की शब्दावली में सब्सिडी को रोड ट्रैफिक लाइट के रंगों की तर्ज पर तीन बॉक्स - ग्रीन, एम्बर और रेड के रूप में पहचाना गया है। लाइट जब ग्रीन होती है तो आपको ट्रैफिक सिग्नल पार करने की अनुमति होती है। ठीक इसी तरह डब्ल्यूटीओ में भी सब्सिडी का एक ‘ग्रीन बॉक्स’ है। इसका मतलब यह हुआ ‘ग्रीन बॉक्स’ में शामिल सब्सिडी को जारी रखा जा सकता है। डब्ल्यूटीओ का मानना है कि ऐसी सब्सिडी जारी रहने से व्यापार में बाधा उत्पन्न नहीं होगी, इसलिए इसे जारी रखा जा सकता है। घरेलू खाद्य मदद, शोध, अनुसंधान व प्रशिक्षण के लिए अनुदान और पर्यावरण संरक्षण के लिए सहायता इसी श्रेणी में आते हैं। सरकारों पर ऐसी सब्सिडी देने पर कोई रोक नहीं है।


ट्रैफिक की दूसरी लाइट एम्बर कलर (पीलेपन के साथ नारंगी रंग) की होती है। एम्बर लाइट का मतलब होता है गति धीमी करना। इसी तर्ज पर डब्ल्यूटीओ में सब्सिडी का एम्बर बॉक्स रखा गया है जिसका मतलब है कि इस बॉक्स में आने वाली सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करना है। मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी) और उत्पादन की मात्र बढ़ाने से संबंधित सब्सिडी एम्बर बॉक्स में आती हैं। एम्बर बॉक्स में शामिल मदों में सब्सिडी के लिए एक सीमा तय की गयी है जिसे ‘डी मिनिमिस’ कहते हैं। इसका मतलब यह है कि ‘डी मिनिमिस’ से ऊपर की सब्सिडी को घटाना है। विकसित देशों को एम्बर बॉक्स के तहत आने वाले मदों की सब्सिडी घटाकर वर्ष 1986-88 के दौरान उनके कृषि उत्पादन स्तर के पांच प्रतिशत तथा विकासशील देशों में 10 प्रतिशत तक लानी हैं। अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया और ब्राजील सहित डब्ल्यूटीओ के 32 सदस्य देश हैं, जिन्हें एम्बर बॉक्स की सब्सिडी कम करनी है।

ट्रैफिक की तीसरी लाइट रेड होती है। जहां रेड सिग्नल होता है वहां से आगे जाने की इजाजत नहीं होती। ठीक इसी तरह डब्ल्यूटीओ के ‘रेड बॉक्स’ में शामिल सब्सिडी को जारी रखने की अनुमति नहीं होती। हालांकि कृषि पर डब्ल्यूटीओ का जो समझौता है उसमें ‘रेड बॉक्स’ का प्रावधान नहीं है।

डब्ल्यूटीओ में सब्सिडी की एक और श्रेणी है जिसे ब्लू बॉक्स कहते हैं। ये ऐसी सब्सिडी हैं जो उत्पादन से संबंधित होती हैं। एम्बर बॉक्स की तरह । फर्क बस इतना है कि इसके तहत कुछ शर्ते लगा दी जाती हैं ताकि व्यापार में बाधा को कम किया जा सके। उदाहरण के लिए सब्सिडी पाने वाले किसानों को यदि उत्पादन सीमित करना है तो उसके तहत आने वाली सब्सिडी ब्लू बॉक्स में आएगी।

विश्व रिकॉर्ड बनाएगा शिव विहार-त्रिलोकपुरी मेट्रो का कॉरिडोर, कई मामलों में है अनोखा

 पिंक लाइन के शिव विहार-त्रिलोकपुरी कॉरिडोर पर 31 अक्टूबर से मेट्रो का परिचालन शुरू हो जाएगा। इसी के साथ 314 किलोमीटर के नेटवर्क के साथ दिल्ली मेट्रो दुनिया के 10 बड़े मेट्रो नेटवर्क में शामिल हो जाएगी। यही नहीं मेट्रो का यह सबसे ज्यादा घुमावदार कॉरिडोर भी है।


मेट्रो के 17.86 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 10 तीक्ष्ण मोड़ हैं। खास बात यह कि इस कॉरिडोर पर तीन लूप में मेट्रो का परिचालन किया जाएगा। जाहिर है कि शिव विहार से त्रिलोकपुरी के लिए सीधी मेट्रो नहीं मिलेगी, मौजपुर में मेट्रो बदलनी पड़ेगी।

दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) का दावा है कि 35-38 मिनट में यह सफर पूरा हो सकेगा। इस कॉरिडोर पर 15 स्टेशन हैं। इस पर कुल 13 ट्रेनों का परिचालन होगा। पहला लूप शिव विहार-मौजपुर शिव विहार से त्रिलोकपुरी के बीच आवागमन के लिए यात्रियों को मौजपुर में मेट्रो बदलनी पड़ेगी। शिव विहार से मौजपुर के बीच चार स्टेशन हैं।

इस सेक्शन पर तीन मेट्रो ट्रेनें 5:12 मिनट के अंतर से चलेंगी। शिव विहार से चलने वाली मेट्रो मौजपुर से वापस हो जाएगी। यहां से आइपी एक्सटेंशन व त्रिलोकपुरी के लिए सीधी मेट्रो मिलेगी। दूसरा लूप- मौजपुर से आइपी एक्सटेंशन मौजपुर से आइपी एक्सटेंशन के बीच 10 ट्रेने चलेंगी। यहां भी 5:12 मिनट के अंतराल पर म्रेटो का परिचालन किया जाएगा।

जापान में मोदी के हर कदम पर क्‍यों है ड्रैगन की नजर, जानें- क्‍या है चीन की चिंताएं

 जापान और भारत की निकटता ने एशिया प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण एशियाई राजनीति को काफी प्रभावित किया है। इस क्षेत्र में चीन की लगातार बढ़ती दिलचस्पी और दखलअंदाजी के चलते जापान और भारत की दोस्ती एक नया समीकरण पैदा कर सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया के लिए भारत निश्चित रूप से जापान की ओर देखता रहा है। आइए जानते हैं कि भारत-जापान की निकटता से आखिर क्यों चिंतित हो रहा है ड्रैगन। इसके साथ यह देखेंगे कि चीन और जापान की मीडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को किस रूप में देखती हैं।


अौर करीब आ रहे जापान और भारत
एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व और उसकी उत्तर कोरिया से निकटता ने जापान की चिंता बढ़ाई है। उधर, दक्षिण एशिया क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और पाकिस्तान के साथ चीनी प्रेम ने भारत को भी चिंतित किया है। पाकिस्तान के जरिए दक्षिण एशिया में चीनी पहुंच ने इस क्षेत्र के परंपरागत शक्ति संतुलन को ध्वस्त किया है। इससे भारत की सामरिक चिंता बढ़ी है। यह भारत के लिए खतरे की घंटी है। इसके अलावा चीन की नजर नेपाल और भुटान पर भी है। जिस तरह से चीन दक्षिण एशिया के इन मुल्कों पर डोरे डाल रहा है, उससे दक्षिण एशिया का परंपरागत शक्ति संतुलन खतरे में पड़ गया है।

जापान दौरा / मैं पीएम बना तब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की रैंकिंग 140 थी, आज 100 पर: मोदी

 नरेंद्र मोदी भारत-जापान के बीच होने वाली 13वीं वार्षिक बैठक में शामिल हुए

दौरे के पहले दिन रविवार को शिंजो आबे के साथ ट्रेन में सफर किया, अाबे ने हॉलिडे होम में डिनर दिया
मुलाकात के दौरान आबे ने मोदी को अपना सबसे भरोसेमंद दोस्त बताया

टोक्यो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान दौरे के दूसरे दिन सोमवार को राजधानी टोक्यो में 'मेक इन इंडिया, अफ्रीका में भारत-जापान साझेदारी और डिजिटल साझेदारी' सेमिनार में शामिल हुए। मोदी ने कहा, जब मैंने 2014 में भारत की जिम्मेदारी संभाली थी, उस वक्त वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार करने में सुलभता) में भारत की रैंकिंग 140 थी। लेकिन अब यह 100 पर पहुंच गई। हम इसे और बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

इससे पहले मोदी भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दिवाली में दीपक जहां रहता है, वहां उजाला फैलता है उसी तरह आप भी जापान और दुनिया के हर कोने में अपना और देश का नाम रोशन करें। गुजरात में सरदार पटेल की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इस साल पटेल की जयंती की चर्चा दुनियाभर में होगी। सरदार साहब की प्रतिभा जितनी ऊंची थी, प्रतिमा भी उतनी ही ऊंची बनेगी। मोदी 31 अक्टूबर को इस प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''आज भारत बदलाव के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। मानवता के लिए काम करने पर भारत की कोशिशों को दुनिया ने सराहा है। देश में जनकल्याण की योजनाएं बनाई जा रही हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में प्रगति हुई है। आज ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी गांवों तक पहुंच चुकी है। भारत में 100 करोड़ मोबाइल एक्टिव हैं। एक जीबी डेटा कोल्ड ड्रिंक की छोटी बोतल से भी सस्ता है। इस डेटा से लोगों को सेवाओं का लाभ मिल रहा है।''

फुटबॉल / थाईलैंड को हराने के बावजूद एएफसी अंडर-19 महिला चैम्पियनशिप के दूसरे दौर में नहीं पहुंच पाया भारत

 थाईलैंड और नेपाल दूसरे दौर में जगह बनाने में कामयाब रहे

भारत के लिए इकलौता गोल लालरेम्परी ने 36वें मिनट में किया

चोनबुरी (थाईलैंड). भारत ने थाईलैंड को एएफसी अंडर-19 महिला फुटबॉल चैम्पियनशिप क्वालिफायर्स में 1-0 से हरा दिया। हालांकि इस जीत के बावजूद भारतीय टीम अगले राउंड में नहीं पहुंच सकी। भारत की जीत में एकमात्र मैच विजयी गोल ग्रेस लालरेम्परी ने 36वें मिनट में किया। इस जीत के बाद भारत थाईलैंड और नेपाल के अंकों की बराबरी पर पहुंच गया। लेकिन नेपाल के खिलाफ नतीजे के कारण भारतीय टीम क्वालिफायर्स के दूसरे राउंड में पहुंचने में असफल रही।

नेपाल से हारने के कारण अगले दौर में नहीं पहुंच पाया भारत
भारत, थाईलैंड और नेपाल के 3-3 अंक रहे। हालांकि गोल औसत में थाईलैंड की टीम टॉप पर रही। भारत और नेपाल का गोल औसत बराबर था, लेकिन भारत को नेपाल के खिलाफ हार झेलनी पड़ी थी। इस कारण वह अंकतालिका में पिछड़ गया।

इस मुकाबले में भारत-थाईलैंड के बीच कड़ी टक्कर हुई। दोनों को शुरुआती 20 मिनट में गोल करने के कई मौके मिले, लेकिन कोई भी बढ़त बनाने में कामयाब नहीं हो पाया।

36वें मिनट में भारत ने शानदार मूव बनाया और ग्रेस लालरेम्परी ने गोल करके 1-0 से बढ़त दिलाई। मेजबान टीम ने दूसरे हॉफ में वापसी की कोशिश की। हालांकि, वह बराबरी का गोल करने में कामयाब नहीं हो पाई।

टेनिस / स्वितोलिना ने जीता डब्ल्यूटीए फाइनल्स का खिताब, यूक्रेन की पहली खिलाड़ी बनीं

 मार्टिना नवरातिलोवा सबसे ज्यादा आठ बार इस टूर्नामेंट की चैम्पियन बनीं

उन्होंने 3 बार चेकोस्लोवाकिया और 5 बार अमेरिका की ओर से खेलते हुए खिताब जीता

सिंगापुर. एलिना स्वितोलिना डब्ल्यूटीए फाइनल्स का खिताब जीतने वाली यूक्रेन की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने फाइनल में अमेरिकी की स्लोन स्टीफंस को तीन सेट में 3-6, 6-2, 6-2 से हराया। 48 डबल्यूटीए फाइनल्स में से सबसे ज्यादा 17 खिताब अमेरिका के खिलाड़ियों ने जीते हैं। हालांकि पिछले चार साल से कोई भी अमेरिकी खिलाड़ी यह खिताब नहीं जीत पाई है। स्वितोलिना की वर्ल्ड वुमंस टेनिस में मौजूदा रैंकिंग चार, जबकि स्टीफंस की छह है।

पहला सेट जीतने के बाद हारीं स्लोन स्टीफंस
इस मुकाबले की शुरुआत में स्टीफंस ने अच्छा खेल दिखाया। पहले सेट में उन्होंने स्वितोलिना की सर्विस ब्रेक की और सेट 6-3 से जीत लिया। दूसरे सेट में स्वितोलिना ने स्टीफंस पर दबाव बनाए रखा। दो बार सर्विस ब्रेक की और सेट 6-2 से जीतकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।

एलिना स्वितोलिना।
टूर्नामेंट में महिला डबल्स का खिताब फ्रांस की क्रिस्टीना म्लाडेनोविक और हंगरी की टिमिया बबोस ने जीता। उन्होंने फाइनल में चेक गणराज्य की बारबोरा क्रेजीकोवा और कैटरीना सिनिकोवा को 6-4, 7-5 से हराया।

किसी एक खिलाड़ी के सबसे ज्यादा खिताब जीतने की बात करें तो मार्टिना नवरातिलोवा शीर्ष पर हैं। उन्होंने आठ बार यह खिताब अपने नाम किया। वे 1978, 1979 और 1981 में चेकस्लोवाकिया और 1983, 1984, 1985, मार्च 1986 और नवंबर 1986 में अमेरिका की ओर से खेलते हुए चैम्पियन बनीं।

जलमार्ग पर आजाद भारत की पहली कंटेनर ढुलाई की शुरुआत करेगी पेप्सिको

  देश में अंतर्देशीय जलमार्गो पर मंगलवार से शुरू हो रही आजाद भारत की पहली कंटेनर ढुलाई पेप्सिको की खेप के साथ होगी। इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आइडब्ल्यूएआइ) के अधिकारियों ने कहा कि पेप्सिको कोलकाता से वारणसी तक एनडब्ल्यू-1 जहाज पर 16 कंटेनर भेजेगी। इनमें 16 ट्रक लोड के बराबर फूड और स्नैक्स होंगे। इसे लेकर एमवी आरएन टैगोर जहाज करीब 9-10 दिनों में वाराणसी पहुंचेगी।


मौके पर जहाजरानी मंत्रालय और आइडब्ल्यूएआइ के वरिष्ठ अधिकारियों के मौजूद रहने की उम्मीद है। जहाज इफको के उर्वरक के साथ वापस लौटेगी, जिसकी खरीदारी प्रयागराज के निकट उसके फूलपुर संयंत्र से होगी।

सरकार जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के तहत हल्दिया से वाराणसी तक राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) का विकास कर रही है। यह मार्ग 1390 किलोमीटर का होगा। इस पर 5,369 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। विश्व बैंक इस परियोजना के लिए तकनीकी तथा वित्तीय सहयोग कर रहा है।

कारोबारी विकास के लिए पेप्सिको अपना रही डिजिटाइजेशन
मुंबई। पेप्सिको डिजिटाइजेशन को विकास के लिए एक बड़ा अवसर मान रही है और वह तकनीक का उपयोग बैकवार्ड व फॉरवार्ड दोनों तरह के कारोबारी एकीकरण के लिए करना चाहती है। लेज, कुरकुरे और पेप्सी बनाने वाली कंपनी ऐसी कंपनियों के साथ बैठकें कर रही है, जो एक करोड़ रिटेलरों और 60 करोड़ उपभोक्ताओं को आपूर्तिकर्ताओं के साथ जोड़ने के लिए काम कर रही हैं।

समय आ गया है भारत अपनी इन-हाउस आयुध निर्माण क्षमताओं को बढ़ाए: बिपिन रावत

  थलसेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि भारत हथियारों और उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक रहा है। लेकिन अब समय आ गया है कि हमें देश की आयुध निर्माण क्षमताओं को बढ़ाया चाहिए। हमें डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा करने पर गर्व है जो जल्द ही आकार लेना शुरू कर देगा। मौजूद समय में हम पश्चिमी छोर पर वियतनाम और पश्चिमी छोर पर ब्राजील और चिली जैसे देशों के साथ व्यापक सहयोग में लगे हुए हैं। इन देशों ने हमारे साथ प्रौद्योगिकी साझा करने में रुचि दिखाई है।


इधर हाल ही में अमेरिका की ओर से बयान आया कि वे एफ-16 या किसी अन्य रक्षा प्रणाली को खरीदने के लिए भारत पर कोई दबाव नहीं डाल रहा है। इस बारे में चल रही अटकलें सही नहीं हैं। यह बात मुंबई स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूत एडगार्ड कागन ने कही। हालांकि उन्होंने रूस से रक्षा सौदे पर अमेरिकी कार्रवाई के अंदेशे पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

बता दें कि हाल ही में भारत ने रूस से पांच बिलियन डालर (करीब 36 हजार करोड़ रुपये) में एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने को मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि अमेरिका 'काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थू्र सेंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए)' के तहत प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि, अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति को इस संबंध में छूट दे रखी है।

PM Modi leaves for Japan for annual summit

Prime Minister Narendra Modi on Saturday left for Japan to attend the annual summit with his counterpart Shinzo Abe.

The summit will be held on October 28 and 29.

In a statement on Friday Mr. Modi described India and Japan as a “winning combination” and said the island nation was New Delhi’s most trusted partner in its economic and technological modernisation.

He said India’s partnership with Japan was of great substance and purpose. “We have a special strategic and global partnership. Our ties with Japan, both economic and strategic, stand completely transformed in recent years. It is today a partnership of great substance and purpose. It rests on the strong pillars of India’s Act East Policy, and our shared vision and commitment to a free, open and inclusive Indo-Pacific,” he said.

12th meeting with Shinzo Abe
Mr. Modi said it will be his 12th meeting with Mr. Abe since he first visited Japan as prime minister in September 2014.

Watch: New leaf-warbler bird species discovered in Indonesia

 Rote, a tiny, dry Indonesian island, has given a new songbird species to science. Measuring just about 10 cm in length and weighing about 8 grams, the yellow-orange colored bird was sighted by a joint research team from the National University of Singapore and the Indonesian Institute of Science.


Using DNA studies and morphological analysis, they confirmed it was a new species and named it Phylloscopus rotiensis after the Rote island, the only locality where it can be found.

The bird is unique among the Asian warblers because it has an unusually long bill. “We think it is an adaptation to the relatively arid conditions on Rote island. Most other Southeast Asian leaf-warblers live in more humid cloud forests….[but] this bird would have to have additional adaptations that equip it to search for food in, perhaps, the tree bark or other places where typical leaf-warbler bills don’t reach,” explains Dr Frank Rheindt of the Department of Biological Sciences at National University of Singapore, in an email to The Hindu. He is the corresponding author of the paper published in Scientific Reports.

Sanjay Kumar Mishra appointed interim director of Enforcement Directorate

 The Central Government has appointed Indian Revenue Service (IRS) officer Sanjay Kumar Mishra as interim director of the Enforcement Directorate (ED) for three months.


The Appointments Committee of the Cabinet (ACC), headed by Prime Minister Narendra Modi, cleared his name as interim chief of the agency on the last day of Karnal Singh’s tenure.

A 1986 batch IRS Officer of the Income Tax cadre, Mr. Mishra has been appointed as Principal Chief Director of ED and given charge of the Director of ED for three months.

Mr. Mishra has handled many high-profile cases including the case related to National Herald and also the disproportionate assets of BSP chief Mayawati

स्वास्थ्य पर प्रदूषण के दुष्प्रभाव का अध्ययन करा रहा केंद्र, इन 20 शहरों में होगा सर्वे

 वायु प्रदूषण के कारणों और समाधान को लेकर तमाम अध्ययन किए गए, लेकिन अब तक सब विफल रहे। लिहाजा केंद्र सरकार अब इसका स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का अध्ययन करा रही है। इसे लेकर पूरी शोध रिपोर्ट तैयार की जा रही है।


इस रिपोर्ट में विस्तृत रूप से बताया जाएगा कि कौन से प्रदूषक तत्व शरीर के किन-किन हिस्सों को किस तरह से प्रभावित कर रहे हैं। साथ ही यह तथ्य भी स्पष्ट किया जाएगा कि यह प्रदूषण किस हद तक जानलेवा है। दरअसल, प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर अब तक जितनी भी रिपोर्ट बनी हैं, सभी विदेशों में तैयार हुई हैं।

यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा भारत में प्रदूषण से होने वाली मौतों का जारी आंकड़ा भी इन्हीं रिपोर्ट पर आधारित होता है। इसीलिए इनकी प्रामाणिकता पर भी सवालिया निशान लगते रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय अब इस दिशा में अपने स्तर पर विस्तृत शोध रिपोर्ट तैयार कराने जा रहा है। इसके लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, लखनऊ, हैदराबाद एवं आगरा सहित देश के 20 प्रमुख शहरों का चयन किया गया है। हर शहर में एक-एक प्रधान निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे। उनके नेतृत्व में अन्य सहायकों की पूरी टीम होगी।

केंद्रीय प्रदूषण मंत्रालय के सलाहकार डॉ टीके जोशी के अनुसार 20 शहरों में स्वास्थ्य पर प्रदूषण के दुष्प्रभाव की रिपोर्ट तैयार करने को लेकर सारी रूपरेखा तैयार हो चुकी है। 31 अक्टूबर को फाइनल दौर की बैठक होने वाली है। इसके बाद बहुत ही जल्द इस पर काम शुरू हो जाएगा।

इस तरह से होगा अध्ययन
20 शहरों में बनाई गई टीम उस शहर के तमाम बड़े अस्पतालों सहित तमाम प्रमुख स्रोतों से यह आंकडे़ जुटाएगी कि पिछले कुछ सालों में वहां किस तरह की बीमारियां और मरीज बढ़े हैं। कौन से प्रदूषक तत्व मानव स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। किस स्थिति में प्रदूषण असमय मौत की वजह बन रहा है। इन आंकड़ों और जानकारी के आधार पर ही विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण किया जाएगा कि विदेशी एजेंसियों सहित डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट और आंकड़े कितने सही अथवा गलत हैं।

अपने वजन से 40 गुना अधिक भार उठाकर उड़ सकेगा रोबोट

 इस सूक्ष्म हवाई वाहन को वैज्ञानिकों ने फ्लाईक्रोटग्स नाम दिया है। वैज्ञानिकों ने छिपकली और अन्य कीड़ों से प्रेरित होकर इस रोबोट को डिजाइन किया है। इसके जरिये यह न केवल कई तरह की सतहों पर चल सकते हैं, बल्कि दीवार पर चिपकने में भी सक्षम हैं। वैज्ञानिकों द्वारा इसमें प्रयोग किए गए इस मेकैनिजम की वजह से यह रोबोट अपनी वजह से 40 गुना अधिक वजन उठा सकता है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रोबोट दरवाजों का हैंडल खोलने, कैमरा और पानी की बोतले उठाने में सक्षम है। इसकी इन खूबियों के कारण किसी आपदा की स्थिति में इसका प्रयोग बचाव कार्यों में किया जा सकता है।

वर्तमान में मौजूद रोबोट से बेहतर
शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तक इस तरह के जो रोबोट विकसित किए गए हैं, वे केवल अपने वजन से दो गुना भार ही उठा सकते हैं। अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के छात्र मैथ्यु एसट्रा कहते हैं, हमने हवाई वाहन में एयरोडायनमिक बलों को जोड़ कर परिणाम देखा तो सामने आया कि छोटा आकार और कम वजन होने के बावजूद इससे बहुत अधिक वजन उठाया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रोबोट को छोटा बनाने का उद्देश्य ही यह है कि यह किसी ऐसी जगह पर पहुंचकर लोगों को राहत सामग्री दे सके, जहां इंसानों का आसानी से पहुंचाना संभव न हो।

तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था में शामिल हो रहा बांग्‍लादेश

 भौगोलिक सरहदें संस्कृति-सभ्यता को नष्ट नहीं कर सकतीं। जो राष्ट्र अपनी जड़ों को भूलने का प्रयास करते हैं वे पाकिस्तान जैसे नाकाम देशों में शामिल हो जाते हैं और जो अपने अतीत को सहेजते हैं वे भारत और बांग्लादेश जैसे सफल बनने की राह पर होते हैं। बांग्लादेश दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। बीते दशक में बांग्लादेश ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर आर्थिक प्रगति की है, वहीं धार्मिक नीति को समावेशी विकास व सामाजिक न्याय से संबद्ध कर अल्पसंख्यकों को आगे बढ़ने के व्यापक अवसर दिए हैं। दरअसल इस साल दुर्गा पूजा के अवसर पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ढाका में स्थित प्रसिद्ध ढाकेश्वरी मंदिर को करीब 50 करोड़ टका की कीमत की जमीन देने की घोषणा कर यह संदेश दिया कि तरक्की और स्थायित्व के लिए सभी का सर्वागीण विकास होना चाहिए। प्रधानमंत्री शेख हसीना के अनुसार समानता, सौहार्दता और परस्पर धार्मिक सद्भाव से ही देश मजबूत हो रहा है और सफलता की ओर बढ़ रहा है।


भरोसा जीतने का प्रयास
इस्लामिक राष्ट्र होने के बावजूद बांग्लादेश में हिंदुओं का भरोसा जीतने का सरकार का प्रयास जारी है और मौजूदा सरकार ने इस बार देशभर में 30 हजार से ज्यादा दुर्गा पूजा पंडालों में पूजा उत्सव के शांति प्रिय आयोजन सुनिश्चित कर यह संदेश देने की कोशिश भी की है कि धर्म किसी का भी व्यक्तिगत अधिकार है, लेकिन त्योहार का संबंध सबसे होता है। भारतीय उपमहाद्वीप में बहुसंस्कृतिवाद आचरण और व्यवहार में रहा है और बांग्लादेश ने इसे अपनी नीतियों में लागू करने का प्रयास किया है। बांग्लादेश की मौजूदा अवामी लीग सरकार धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बढ़ावा देती रही है और उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कुछ सालों पहले तक दुनिया के पिछड़े देशों की सूची में शामिल बांग्लादेश की जीडीपी इस समय बढ़कर 7.86 प्रतिशत तक पहुंच गई है। आने वाले साल में यह आठ प्रतिशत तक होने की उम्मीद है।

समाज की बंदिशों को तोड़कर जिसने ठुमरी को दिया नया मुकाम वह थीं गिरिजा देवी

 ठुमरी की रानी के नाम से मशहूर गिरिजा देवी संगीत की दुनिया का जाना-माना चेहरा थीं। बीते वर्ष आज ही के दिन वह हम सभी को अलविदा कह गई थीं। 1929 में बनारस में जन्म लेने वाली गिरिजा ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। वह ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां पर गाना और बजाना सही नहीं माना जाता था। इसके बाद भी उन्होंने समाज की इन दायरों को लांघकर अपने लिए अलग मुकाम तैयार किया। गिरिजा को उनके चाहने वाले प्यार से अप्पा जी कहकर बुलाते थे गिरिजा देवी बनारस घराने से गाती थीं और पूरबी आंग ठुमरी शैली परंपरा का प्रदर्शन करती थीं। गिरिजा ने अर्द्ध शास्त्रीय शैलियों जैसे कजरी, होली, चैती को अलग मुकाम दिया। वह ख्याल, भारतीय लोक संगीत और टप्पा भी बहुत ही शानदार तरीके से गाती थीं।


एक परिचय
प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मविभूषण गिरिजा देवी का जन्म आठ मई, 1929 को कला और संस्कृति की प्राचीन नगरी वाराणसी (तत्कालीन बनारस) में हुआ था। उनके पिता रामदेव राय जमींदार थे। उन्होंने पांच वर्ष की आयु में ही गिरिजा देवी के लिए संगीत की शिक्षा की व्यवस्था कर दी थी। गिरिजा देवी के प्रारंभिक संगीत गुरु पंडित सरयू प्रसाद मिश्र थे। नौ वर्ष की आयु में पंडित श्रीचंद्र मिश्र से उन्होंने संगीत की विभिन्न शैलियों की शिक्षा प्राप्त की। इस अल्प आयु में ही एक हिंदू फिल्म 'याद रहे' में उन्होंने अभिनय भी किया था।

इमरान खान की सऊदी यात्रा पर आखिर क्‍यों है भारत की पैनी नजर, जानें पूरा मामला

 

पाकिस्‍तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान की सऊदी अरब की यात्रा पर भारत की पैनी नजर है। इमरान की ये यात्रा ऐसे वक्‍त पर हो रही है, जब सऊदी के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्‍या को लेकर पूरी दुनिया में सऊदी अरब की किरकिरी हो रही है। एेसे में एक सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर ऐसे माहौल में इमरान सऊदी की यात्रा पर क्‍यों गए। आखिर, इमरान की रियाद यात्रा को लेकर क्‍या है राजनयिक निहितार्थ। इमरान की सऊदी यात्रा से भारत का क्‍या है लिंक। इसके अलावा यह भी जानने कि कोशिश करेंगे कि आखिर पाकिस्‍तान किस आधार पर सऊदी से बेहतर संबंध होने का दावा करता रहा है। किन मौके पर पाक ने सऊदी का साथ दिया। आदि-आदि।

सऊदी-भारत की निकटता से आकुल हुआ पाक 
शीतयुद्ध के बाद भारत और सऊदी अरब के साथ संबंध गहरे हुए हैं। दोनों देश एक दूसरे के निकट आए है। सऊदी के साथ भारत की निकटता पाकिस्‍तान के लिए चिंता का विषय है। दरअसल, शीतयुद्ध के दौरान भारत-पाकिस्‍तान के बीच उत्‍पन्‍न हुए विवादों में सऊदी अरब ने हमेशा पाक का ही साथ दिया। इस दौरान उसके पाकिस्‍तान के साथ दोस्‍ताना संबंध रहे हैं। लेकिन शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भारत-सऊदी अरब के रिश्‍तों में सुधार आया।

राजधानी, शताब्‍दी को भी मात देगी भारत की हाईस्‍पीड ट्रेन-18

 भारत की पहली पूर्ण स्वदेशी और स्वचालित ट्रेन अगले हफ्ते से ट्रैक पर दौड़ने के लिए तैयार है। ट्रेन-18 नामक यह ट्रेन बिना इंजन (लोकोमोटिव) के चलेगी। इसका ट्रायल अगले हफ्ते शुरू होने की संभावना है। बुलेट ट्रेन की तरह दिखने वाली यह ट्रेन राजधानी और शताब्दी से तेज रफ्तार में चलेगी और यात्रा में 10 से 15 फीसद समय कम लगेगा। इसके हर कोच में एयर कंडीशनर और कैमरे लगे होंगे। डिजाइन से लेकर ब्रेक सिस्टम तक इसके निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। 100 करोड़ रुपये की लागत वाली ट्रेन-18 दुनियाभर की आधुनिक और लक्जरी ट्रेनों को मात देगी।


1.70 अरब रुपये की बचत

ट्रेन-18 का निर्माण मेक इन इंडिया मुहिम का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था। विदेशी तकनीक का सहारा लिए बिना भारत में निर्माण की वजह से तकरीबन 1.70 अरब रुपये की बचत हुई है। ट्रेन के लिए सिर्फ ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रांसफॉर्मर्स और सीटें विदेश से आयात की गईं।

घटेगी लागत
इंडियन रेलवे के लिए ट्रेन-18 का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने किया है। इसके जनरल मैनेजर सुधांशु मणि के मुताबिक अगली आधुनिक ट्रेन मार्च, 2019 तक तैयार होगी। इस तरह की कई ट्रेनों का निर्माण होने पर लागत घट जाएगी।

शताब्दी रूट पर चलेगी
इस ट्रेन का परीक्षण 160 किमी प्रति घंटा रफ्तार पर मुरादाबाद-बरेली और कोटा- सवाई माधोपुर में अगले महीने किया जाएगा। फिलहाल ये शताब्दी व राजधानी रूट के लिए तैयार की गई है और दिल्ली-भोपाल, चेन्नई-बेंगलुरु व मुंबई-अहमदाबाद रूट पर चलेगी। जनवरी, 2019 तक इसके लांच होने की उम्मीद है।

दोगुनी क्षमता
तेज रफ्तार होने की वजह से ट्रेन-18 में शताब्दी और राजधानी की तुलना में समान रूट की यात्रा में भी 10 से 15 फीसद कम समय लगेगा। सामान्य ट्रेन के मुकाबले इसकी एक्सेलेरेशन (गति वृद्धि) क्षमता 50 फीसद अधिक होगी। रफ्तार पर नियंत्रण के लिए स्मार्ट ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है।

जानें, देश की शक्तिशाली सेना के लिए कितना अहम है इजराइल, मजबूत हुई दोस्‍ती

 शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भारत और इजरायल एक दूसरे के निकट आए हैं। खासकर 1990 के मध्य से दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध मजबूत हुए हैं। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण से लेकर सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में इजराइल की विशेष योगदान रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत सालाना करीब सौ अरब रुपये के सैन्य साजो-सामान इजराइल से आयात करता है। ऐसे में यह कहना लाजमी है कि भारत और इसराइल के बीच सैन्य कारोबार का भविष्य काफी सुनहरा है। आइए जानते हैं भारत-इजराइल संबंधों का क्या रहा है इतिहास। इसके साथ यह भी जानेंगे कि इजराइल की मदद से कैसे मजबूत हुई हमारी सेना।


मजबूत हुई देश की सेना
1999 में कारगिल युद्ध के दौरान दोनों देशों और निकट आए। इस संकट की घड़ी में उसने भारत की मांग पर भरोसेमंद हथियारों की आपूर्ति की थी। युद्ध के दौरान इजराइल ने भारत को लेजर गाइडेड बम और मानव रहित वाहन दिए थे। इससे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ा है। भारत अभी सरहदों पर निगरानी के लिए इजराइल निर्मित 176 ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें 108 इजराइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री (आईएआई) सर्चर हैं, जबकि 68 बिना शस्त्र वाले हेरान एक एयरक्राफ़्ट हैं। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पास आईएआई निर्मित हार्पी ड्रोन्स भी हैं।

दुर्लभ पक्षी

 उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शोर-शराबे से बिल्कुल दूर रहने वाले दुलर्भ पक्षी अपने छह माह के प्रवास के लिए मध्य हिमालय की गोद में पहुंचने लगे हैं। इन पक्षियों के सबसे पसंदीदा स्थल खलिया टॉप का कलरव पर्यटकों को मुग्ध करने लगा है। इस क्षेत्र में मोनाल के बाद अब ट्रैगोपान बर्ड वॉचिंग के लिए सबसे आकर्षण का केन्द्र बना है। हिमरेखा के पास रहने वाले ये पक्षी शीतऋतु में शिखर से उतर कर इतने करीब आ जाते हैं लोग सहजता से इनका दीदार कर सकें।


मुनस्यारी में यहां बना ट्रैगोपान का बसेरा
ट्रैगोपान मुनस्यारी के कालामुनि, बिटलीधार, पातलथौड़ को अपना बसेरा बनाने लगे हैं। उच्च हिमालय में हिमरेखा के निकट रहने वाले और शीतकाल में अधिकतम 22 सौ मीटर की ऊंचाई तक बसेरा बनाने वाले इन पक्षियों के चलते मध्य हिमालय की इस उंचाई पर पक्षियों का संसार बदल जाता है।

वोटिंग के संदेश को लेकर यहां 30 हजार लोगों ने लगाई दौड़

  28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जहां पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हैं। वहीं निर्वाचन आयोग भी अपनी तैयारी कर रहा है। कोशिश लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में लोगों की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इसी के तहत आज शहर में इंदौर वोट मैराथन का आयोजन किया गया। मैराथन के जरिए लोगों को मतदान के प्रति जागरुक करने की कोशिश की गई। सुबह 6 बजे से ही लोग नेहरु स्टेडियम में मैराथन के लिए जुटने लगे थे।


पलासिया से शुरू हुई ये दौड़ नेहरू स्टेडियम पर आकर खत्म हुई। इस मैराथन में तीस हजार से ज्यादा नागरिकों ने उत्साह और उमंग के साथ दौड़ लगाई। मेरा वोट, मेरी आवाज के साथ मतदान का संदेश दिया गया। वहीं लोगों ने भी अपने वोट का अधिकार इस्तेमाल करने की शपथ ली। मैराथन के मार्ग में गीत-संगीत के जरिए प्रतिभागियों में जोश जगाने के लिए एफ.एम. रेडियों के स्टॉल भी लगाए गए थे। वहीं नेहरू स्टेडियम में जुंबा के साथ ही प्रतिभागियों ने जुंबा भी किया।

इस मैराथन दौड़ में सबसे आगे दिव्यांग थे। उनके लिए अलग से छोटा रूट बनाया गया था। दिव्यांगों के लिए दौड़ आरंभ होने के पश्चात 5 किलोमीटर तक दौड़ने वाले समूह को फ्लैग ऑफ दिखाया गया। यह दौड़ 500 -500 के जत्थों में शुरू हुई। इसके बाद 12000 प्रतिभागियों ने दो किमी की दौड़ लगाई।

असीमित संभावनाओं का पिटारा है क्वांटम कंप्यूटिंग, बदल कर रख देगा दुनिया

 टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से विस्तार हो रहा है। कुछ समय पहले तक असंभव लगने वाली चीजें आज प्रौद्योगिकी की मदद से सरलता से हो सकती हैं। एक समय कंप्यूटर के विकास ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया था। अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने चिकित्सा से लेकर हथियार तक हर क्षेत्र में कंप्यूटर और रोबोट के इस्तेमाल को नया आयाम दिया है।


पारंपरिक कंप्यूटर की दुनिया में इस प्रगति के समानांतर एक और शोध चल रहा है, जिसका नाम है क्वांटम कंप्यूटिंग। भौतिकी के क्वांटम सिद्धांत पर काम करने वाली इस कंप्यूटिंग में अपार संभावनाएं देखी जा रही हैं। शोध के लिहाज से किसी के भी लिए यह शानदार विकल्प हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक पूर्ण विकसित क्वांटम कंप्यूटर की क्षमता सुपर कंप्यूटर से भी ज्यादा होगी।

क्या है क्वांटम कंप्यूटिंग?
क्वांटम कंप्यूटिंग को कंप्यूटर का भविष्य माना जा रहा है। पारंपरिक कंप्यूटर 'बिट' पर काम करते हैं, वहीं क्वांटम कंप्यूटर में प्राथमिक इकाई 'क्यूबिट' होती है। पारंपरिक कंप्यूटर में हर बिट की वैल्यू 0 (जीरो) या 1 (वन) होती है। कंप्यूटर इस जीरो और वन की भाषा में ही हर कमांड को समझता है और उसके अनुरूप कार्य करता है।

क्या है इसकी खासियत
वहीं क्यूबिट यानी क्वांटम बिट एक साथ जीरो और वन दोनों को स्टोर कर सकता है। इसका मतलब यह है कि दो क्यूबिट में एक साथ चार वैल्यू रह सकती है। यही खूबी इसे खास बनाती है। एक साथ चार वैल्यू रखने के कारण इसकी क्षमता और स्पीड पारंपरिक कंप्यूटर से ज्यादा होगी। क्वांटम कंप्यूटर अभी अवधारणा के स्तर पर ही है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह पारंपरिक कंप्यूटिंग से बने उन सभी एनक्रिप्शन को तोड़ने में सक्षम होगा, जिनमें डाटा सुरक्षित रखे जाते हैं।

चंद्रयान-2 में ऑरबाइटर और लैंडर के अलावा एक रोवर भी होगा

 चंद्रयान-2 के लिए अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) ने तीन पेलोड विकसित किए हैं। चंद्रयान-1 के विपरीत इसमें एक ऑरबाइटर, एक लैंडर और एक रोवर होगा। बता दें कि भारत का चांद के लिए पहला अभियान अक्टूबर 2008 में गया था। चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण अगले साल जनवरी और मार्च में होने की उम्मीद है।


पीआरएल के निदेशक डॉ. अनिल भारद्वाज ने बताया, ‘पीआरएल ने चंद्रयान-2 के लिए तीन पेलोड विकसित किए हैं। ऑरबाइटर में पीआरएल द्वारा विकसित एक सोलर एक्स-रे मानीर्टंरग लगा हुआ है। यह सूर्य से आने वाली एक्स-रे और चंद्रमा की सतह पर पैदा होने वाली एक्सरे की निगरानी करेगा। वह पीआरएल के मुख्य कैंपस में इक्वेटोरियल एरोनोमी पर आयोजित 15वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी से इतर मीडिया से बात कर रहे थे। पीआरएल अंतरिक्ष विभाग की ही एक इकाई है, जिसकी स्थापना 1947 में की गई थी।

उन्होंने बताया, ‘लैंडर पर ‘चंद्राज सरफेस थरमोफिजिकल एक्सपेरिमेंट’ (चैस्ट) होगा। यह ऐसा उपकरण है जो चांद की सतह के नीचे जाकर तापमान मापेगा। यह चांद पर लैंडर के उतरने के बाद काम करेगा।’ चंद्रयान-2 अभियान के दौरान चांद की सतह पर किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों में से एक चैस्ट है।

इस तरह करेगा काम
भारद्वाज ने बताया कि चांद की सतह पर लैंडर के उतरने के बाद रोवर उससे निकलेगा और यह सतह पर इधर-उधर घूमेगा। पीआरएल ने उसके लिए एक विशेष उपकरण विकसित किया है जिसका नाम ‘अल्फा पार्टिकल एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर’ है। इसका डिजाइन चांद की सतह पर मौजूद विभिन्न तत्वों और रासायनिक यौगिकों की पहचान के लिए किया गया है।

जानिए कौन हैं सीबीआइ के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव, 10 खास बातें

 सीबीआइ के चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मचे घमासान के बीच ज्वाइंट डायरेक्टर एम नागेश्वर राव को सीबीआइ का अंतरिम निदेशक बनाया गया है। अग्रिम आदेशों तक अब सीबीआइ का कामकाज नागेश्वर राव ही देखेंगे। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि दोनों अफसरों के बीच अभी खींचतान लंबी चलेगी।



1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी नागेश्वर राव की पहचान एक तेज-तर्रार अफसर की है। वह तेलंगाना के वारंगल जिले के रहने वाले हैं। आइए आपको बताते हैं नागेश्वर राव से जुड़ी 10 बड़ी बातें...!

1. नागेश्वर राव ओडिशा कैडर से 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं।

2. नागेश्वर राव की पहली पोस्टिंग 1989-90 में ओडिशा के तलचर में उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में हुई थी, जहां उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर बेहतरीन प्रदर्शन किया। ओडिशा में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान ही उन्होंने अवैध खनन के लिए बदनाम तलचर में अपराध पर लगाम लगाकर पहचान बनाई।

3. ओडिशा के चार जिलों- मयूरभंज, नबरंगपुर, बरगढ़ और जगत्सिंहपुर में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में सेवा करने के अलावा, रेलवे राउरकेला तथा कटक में एसपी और क्राइम ब्रांच में एसपी के पद भी तैनात रहे।

4. कहा जाता है कि नरेश्वर राव ने मयूरभंज जिले में 'अपराध-पुलिस-अदालत-जेल-अपराध' के दुष्चक्र से लोढा (एक अधिसूचित आपराधिक जनजाति) को आजादी दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

5. वह 1996 में जगत्सिंहपुर जिले में दुष्कर्म के मामले की जांच करते समय डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग करनेवाले ओडिशा के पहले अधिकारी थे।

6. नागेश्वर राव तब क्राइम ब्रांच में एसपी थे, जब 1991 की हूच त्रासदी में बेलु दास ने कटक में 200 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी।

7. नागेश्वर राव ने ओडिशा अग्नि सेवा के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया। राव को चक्रवात फैलिन (2013) और हुदहुद (2014) के दौरान बेहतरीन काम के लिए मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

8. पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चिटफंड घोटाले की जांच करने वाले नागेश्वर राव को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। राव को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक, असाधारण सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और ओडिशा के गवर्नर पदक दिया जा चुका है।

9. नागेश्वर राव तेलंगाना के वारंगल जिले के मंगपेट गांव से हैं। वह उस्मानिया विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में परास्नातक हैं। 1986 में आइपीएस में शामिल होने से पहले उन्होंने आईआईटी-मद्रास में अनुसंधान कार्य किया। IIT से शोध करने के दौरान वह सिविल की तैयारी भी कर रहे थे।

10. नागेश्वर राव को मणिपुर में विद्रोही गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भी जाना जाता है। यहां सीआरपीएफ के डीआइजी (ऑपरेशंस) के रूप में उन्होंने विद्रोहियों की कमर तोड़ दी।

यूथ ओलिंपिक / किसान के बेटे आकाश ने रजत जीता, ओलिंपिक खेलों में पहली बार भारत को चांदी दिलाई

 आकाश मलिक ने यूथ ओलिंपिक गेम्स की तीरंदाजी स्पर्धा में रजत पदक जीता। ओलिंपिक खेलों में भारत ने पहली बार तीरंदाजी में रजत पदक जीता है। इससे पहले सीनियर या जूनियर किसी भी ओलिंपिक में भारत ने तीरंदाजी में रजत पदक नहीं जीता था। ओलिंपिक में तीरंदाजी में भारत का यह दूसरा पदक है। 2014 नानजिंग यूथ ओलिंपिक में अतुल वर्मा ने तीरंदाजी में कांस्य पदक जीता था। किसान के बेटे आकाश फाइनल में अमेरिका के ट्रेनटॉन कोल्स से 6-0 से हार गए। भारत के अब इस टूर्नामेंट में तीन स्वर्ण, नौ रजत और एक कांस्य पदक हो गए हैं।


क्वालिफिकेशन में पांचवें स्थान पर रहे थे आकाश
15 साल के आकाश क्वालिफिकेशन में पांचवें, जबकि कोल्स 15वें स्थान पर रहे थे। हालांकि, हरियाणा के रहने वाले आकाश फाइनल में अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। तीनों सेट में उनका स्कोर कोल्स से कम रहा।

आकाश ने पहले सेट में 26, दूसरे में 27 और तीसरे में 26 अंक बनाए। वहीं, कोल्स ने पहले सेट में 28, दूसरे में 29 और 28 अंक बनाए। इससे पहले सेमीफाइनल में आकाश ने बेल्जियम के सेना रोस को 6-0 से हराया था।

आकाश इससे पहले तुर्की की सेलिन साटिर की जोड़ी मिक्स्ड इंटरनेशनल टीम इवेंट में आठवें स्थान पर रहे थे। भारत और तुर्की खिलाड़ियों की जोड़ी क्वार्टर फाइनल में थाईलैंड के एथ्थीवट सोइथोंग और अर्जेंटीना की अगस्टानिया सोफिया गियाननासियो की जोड़ी से हार गए।

मुकाबले के बाद आकाश ने कहा, 'मैंने तेज हवा के लिए तैयारी की थी, लेकिन यहां वह उससे भी तेज थी।' उन्होंने कहा, 'रजत पदक जीतकर मुझे अच्छा लग रहा है, लेकिन सच यह है कि मैं स्वर्ण पदक जीतने से चूक गया।'

छह साल पहले तीरंदाजी सीखना शुरू किया था
आकाश ने छह साल पहले ही तीरंदाजी सीखनी शुरू की थी। मंजीत मलिक ने एक ट्रायल के दौरान उनका चयन किया था। फिजिकल ट्रेनर से कोच बने मंजीत ने उसके बाद आकाश की प्रतिभा निखारना शुरू की।

मंजीत ने बताया, 'वह बहुत शांत और स्थिर है। मैं सोचता हूं कि वह बहुत तेजी से तीर शूट कर सकता है। वह बहुत आत्मविश्वास के साथ तीर चलाता है। जब फाइनल शुरू हुआ तब बारिश हो रही थी।'

आकाश 2014 में विजयवाड़ा में हुई नेशनल अंडर-14 आर्चरी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली ब्वायज टीम का हिस्सा थे। उन्होंने 2017 में यूथ ओलिंपिक क्वालिफाइंग में स्वर्ण पदक जीता था।

ब्रह्मोस के मुकाबले चीन ने सुपरसोनिक मिसाइल का किया सफल परीक्षण

 एक तरफ भारत में परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम राफेल विमान पर विवाद जारी है, वहीं पड़ोसी देश चीन की एक खनन कंपनी ने एक सुपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण करने का दावा किया है। बताया जाता है कि भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम से बनी ब्रह्मोस मिसाइल के मुकाबले में इसे तैयार किया गया है। चीनी मीडिया का दावा है कि पाकिस्तान अब यही एचडी-1 सुपरसोनिक मिसाइल चीन से खरीदने जा रहा है।


चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार विगत सोमवार को उत्तरी चीन के एक गुप्त स्थान पर इस मिसाइल का शक्ति परीक्षण किया गया। दक्षिण चीन स्थित ग्वांगदोंग होंडा ब्लास्टिंग कंपनी के जारी बयान के अनुसार परीक्षण के दौरान सभी पैमानों पर एचडी-1 सुपरसोनिक मिसाइल खरी उतरी है। बीजिंग के सैन्य विशेषज्ञ वी डोंजू ने बताया कि खनन कंपनी ने स्वतंत्र रूप से एचडी-1 मिसाइल में निवेश कर उसे विकसित किया है। इस मिसाइल को युद्धक विमानों और युद्धपोतों में तैनात किया जा सकता है। इस मिसाइल में चीनी कंपनी ने 18.8 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।

गोल्बल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तान अब चीन की इस नई मिसाइल को खरीद सकता है, जिसे भारत के ब्रह्मोस से बेहतर बताया जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञ वी ने बताया कि सुपरसोनिक गति से एंटी मिसाइल प्रणाली को तोड़ने में सक्षम इस मिसाइल में पाकिस्तान और मध्यपूर्व के देश रुचि दिखा सकते हैं। इस मिसाइल में लांच, कमांड, कंट्रोल, लक्ष्य को भेदने के संकेत और समग्र सपोर्ट सिस्टम भी है।

वी ने बताया कि मिसाइल के सालिड फ्यूल रेमजेट की अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले कम खपत होगी। यह हल्की मिसाइल अधिक तेजी से अधिक दूर तक जा सकती है। चीन सरकार की मंजूरी के बाद यह खनन कंपनी एचडी-1 मिसाइलों का बड़े पैमाने पर निर्यात करने के लिए समझौते पर दस्तखत करेगी। वी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में सुपरसोनिक मिसाइलों के अधिक विकल्प मौजूद नहीं हैं।

पीएचडी के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों को मिलाकर बनेगी पात्रता सूची

 पीएचडी और एमफिल में प्रवेश से जुड़े नियमों में सरकार अब एक और बदलाव की तैयारी में है। इसके तहत इनमें प्रवेश के लिए अकेले इंटरव्यू ही चयन का आधार नहीं बनेगा, बल्कि इसके साथ लिखित परीक्षा के भी अंकों को जोड़कर योग्यता सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार होगी। जिसके आधार पर प्रवेश देने की योजना है।


खासबात यह है कि अभी भी इसमें प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा व इंटरव्यू दोनों ही आयोजित की जाती है, लेकिन लिखित परीक्षा को पास करने के बाद सिर्फ इंटरव्यू तक ही पहुंच सकते है, जबकि प्रवेश के लिए इंटरव्यू में अच्छे नंबर पाना जरूरी है। इस व्यवस्था को लेकर छात्रों के एक बड़े वर्ग में असंतोष है। जिसकी शिकायत भी उन्होंने दर्ज कराई थी। इसके बाद ही सरकार की ओर से इसे लेकर मंथन शुरु किया गया।

छात्रों की शिकायत थी, कि मौजूदा व्यवस्था में लिखित परीक्षा में अच्छे अंक मिलने के बाद भी उन्हें प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। छात्रों ने इंटरव्यू टीम पर भी भेदभाव करने के आरोप लगाए थे।

सूत्रों की मानें तो सरकार ने छात्रों की इन्हीं शिकायतों को देखते हुए इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया है। इसके तहत लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों को जोड़कर मेरिट लिस्ट के आधार पर प्रवेश देने की योजना बनाई है।

नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा के लिए 70 फीसद अंक नियत रहेंगे, जबकि इंटरव्यू के लिए 30 फीसद अंक रहेंगे। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस पूरी योजना को लेकर मंत्रालय और यूजीसी के बीच चर्चा हो चुकी है। दोनों ने ही इस बदलाव को लेकर अपनी सहमति दे दी है। ऐसे में इसे लेकर जल्द ही नया नोटीफिकेशन जारी होने की उम्मीद है।

कैंसर जैसी बीमारियों का छोटे शहरों में सस्ता इलाज, नीति आयोग ने जारी किया दिशानिर्देश

 नीति आयोग ने जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में कैंसर जैसी 'नॉन कम्युनिकेबल' बीमारियों का इलाज उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। आयोग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिशा-निर्देश और मॉडल कंसेसन एग्रीमेंट (एमसीए) जारी किए हैं। राज्यों ने अगर इन पर अमल किया तो कैंसर, डाइबिटीज, स्ट्रॉक और दिल की बीमारी जैसी कर्ज मजरें का इलाज छोटे कस्बों के जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में हो सकेगा।


नीति आयोग में स्वास्थ्य संबंधी मामलों के प्रभारी सदस्य डा. वी के पॉल ने ये दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि पीपीपी मॉडल में इलाज की लागत आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाली लागत के बराबर ही होगी।

आयोग ने 'नॉन कम्युनिकेबल डिजीज' के इलाज में पीपीपी संबंधी जो दिशानिर्देश जारी किए हैं उसमें चार पीपीपी मॉडल सुझाए गए हैं। पहला मॉडल 'मैनेजमेंट कान्ट्रैक्ट' का है जिसके तहत जिला स्तरीय सरकारी अस्पताल के बने हुए भवन निजी पार्टी को दिया जा सकेगा और निजी साझीदार वहां उपकरण और डाक्टरों की तैनाती कर देगा। यह 10 से 15 वर्ष की अवधि के लिए होगा और इसके तहत जो भी लाभार्थी इलाज कराएंगे उस पर आने वाले खर्च का एक निश्चित हिस्सा सरकार निजी कंपनी को भुगतान करेगी।

दूसरा मॉडल 'परचेजिंग ऑफ सर्विसेज' का है जो एक से तीन वर्ष की अवधि के लिए होगा और यह स्वास्थ्य बीमा की तर्ज पर काम करेगा। इसका मतलब यह है कि लोग नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज का इलाज प्राइवेट से करा सकेंगे और इसके ऐवज में सरकार उन्हें निश्चित भुगतान करेगी।

तीसरा मॉडल 'बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर' यानी बीओटी मॉडल है जिसके तहत सरकार प्राइवेट पार्टी को जमीन देगी। निजी कंपनी इस पर अस्पताल बनाएगी और सरकार इसे व्यवसायिक रूप से लाभप्रद बनाने के लिए वाइविलिटी गैप फंडिंग देगी। इसके तहत समझौता 30 साल के लिए होगा

प्रगाढ़ होते जा रहे हैं रूस-पाक सैन्य संबंध, 21 अक्बूटर से 4 नवंबर तक करेंगे सैन्य अभ्यास

 अमेरिका के साथ बेहद करीबी रणनीतिक रिश्ते बनाने की तरफ तेजी से बढ़ रहा भारत शायद यह स्वीकार कर चुका है कि उसके सबसे पुराने मित्र देश रूस को भी अपने नए दोस्त बनाने का उतना ही अधिकार है। यही वजह है कि पिछले दिनों जब पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच बीच सालाना बैठक हुई तो उसमें रूस व पाकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग पर खास चर्चा नहीं हुई। इस बैठक के तकरीबन एक पखवाड़े के बाद यानी 21 अक्टूबर 2018 से रूस और पाकिस्तान के बीच अभी तक का सबसे आधुनिक सैन्य अभ्यास होने जा रहा है। दोनो देशों के बीच वर्ष 2016 के बाद से लगातार हर वर्ष सैन्य अभ्यास हो रहा है और इस साल के अभ्यास को अभी तक का सबसे आधुनिक माना जा रहा है।


रूस व पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों पर भारत आधिकारिक तौर पर यह कहता रहा है कि दोनों संप्रभू देश है और इन्हें किसके साथ दोस्ती रखनी है इसमें भारत कुछ नहीं बोलेगा। लेकिन रूस भारत की संवेदनाओं का ख्याल रखेगा। इस मुद्दे को पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में सेंट पीट्सबर्ग में हुई शिखर बैठक में उठाया था। इस बारे मे सोची (रूस) में मोदी-पुतिन शिखर वार्ता में भी बात हुई थी। सूत्रों के मुताबिक तब राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को आश्वस्त किया था कि पाकिस्तान के साथ उसके सैन्य रिश्ते बेहद शुरुआती दौर में है। भारत को इसको लेकर परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है। इसके बावजूद रूस की तरफ से बार बार यह संकेत दिया जाता है कि वह पाकिस्तान के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत बनाने को लेकर तैयार है। अगस्त में दोनो देशों के बीच नौ सेना के बीच सहयोग स्थापित करने को लेकर समझौता हुआ है।

भारत में बनेगी विश्व की सबसे ऊंची रेल लाइन, दिल्ली से लेह का सफर सिर्फ 20 घंटे में

 आने वाले वर्षों में दिल्ली से लेह (जम्मू-कश्मीर) का सफर ट्रेन से संभव हो सकेगा। इसके लिए उत्तर रेलवे ने काम भी शुरू कर दिया है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से लेह तक रेल लाइन बिछाने का सर्वे किया जा रहा है। तीन चरणों में होने वाले सर्वे का पहला चरण पूरा हो चुका है। सर्वे के बाद रेल लाइन बिछाने का काम शुरू होगा।


करीब 465 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चल सकेगी। इसके बाद दिल्ली से महज 20 घंटे में लेह का सफर संभव हो सकेगा। अभी सड़क मार्ग से जाने में कम से कम 40 घंटे लग जाते हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 83 हजार 360 करोड़ रुपये है। इस रेल लाइन पर यात्री 244 किलोमीटर का सफर सुरंग के अंदर करेंगे। इस पर 74 सुरंग बनेंगी, जिसमें सबसे लंबी 27 किलोमीटर की होगी।

दिल्‍ली में बैले फॉर्म की संपूर्ण रामलीला, देश-विदेश से देखने आते हैं लोग

 रामचरित मानस की चौपाइयों का भावपूर्ण गायन, पृष्ठभूमि में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन, अंग्रेजी में चल रहे उपशीर्षक, अद्भुत लाइटिंग, बैकग्राउंड म्यूजिक, रामकथा के घटनाक्रमों को साक्षात करते परिधान और आभूषण। डांस-ड्रामा के साथ होने वाली दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र की संपूर्ण रामलीला में शास्त्रीय व लोकनृत्यों की भाव- भंगिमाओं से श्रीराम की यात्रा परवान चढ़ती है। बता दें कि देश-विदेश से लोग बैले फॉर्म की इस संपूर्ण रामलीला को देखने आते हैं। यूं लगता है जैसे कुछ ही घंटों में देख लिया हो इस महाकाव्य के किरदारों का विराट स्वरूप...


अहिल्या की पत्थर बन गई भावनाओं को जिंदा करते हैं श्रीराम। सीता की अग्निपरीक्षा बताती है कि किसी भी स्त्री को अपने जीवन में अग्निपरीक्षा देनी ही होती है चाहे वह सीता ही क्यों न हो। हनुमान का उड़कर सागर पार करना द्योतक है इस बात का कि जिस काम की मन में ठान लें, वह काम होकर रहेगा। आज के संदर्भ में पाठ पढ़ाती रामलीला का क्रेज दशहरा आते ही बढ़ जाता है। श्रीराम भारतीय कला केंद्र की संपूर्ण रामलीला ‘राम’ कई मामलों में अनूठी है और सालों से दर्शकों पर अपना प्रभाव भी छोड़ रही है। विदेश में भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं। करीब 30 दिन 45 नर्तक स्टेज पर श्रीराम की लीला को प्रस्तुत करते हैं। मंचन के करीब 4 माह पहले रिहर्सल शुरू हो जाती हैं। इस साल की रामलीला पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित है।

34 साल से सर्वत्र, सर्वोत्तम सुरक्षा में तैनात NSG कमांडो, देश को है नाज

 देश की नौ स्पेशल फोर्सेज में से एक नेशनल सिक्योरिटी गार्डस का आज स्थापना दिवस है। एनएसजी आज अपना 34वां स्थापना दिवस मना रहा है। एनएसजी भारत की स्पेशल फोर्स में से एक है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है, जिसका मुख्य कार्य आतंकी गतिविधियों से देश के आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखना होता है। विश्व की टॉप पांच स्पेशल फोर्स में एनएसजी का नाम आता है।


क्यों और कब बनाने की ज़रूरत पड़ी
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानि एनएसजी, की स्थापना वर्ष 1984 में हुयी थी।यह वो वक्त था जब भारत के पंजाब राज्य में अलग खालिस्तान राज्य की मांग को लेकर एक आंदोलन चलाया जा रहा था। जिसकी वजह से समूचे पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो गया था। पंजाब में कानून व्यवस्था और आतंकी वारदातों को रोकने के लिए स्पेशल फोर्स की जरुरत महसूस हुई, जिसके बाद एनएसजी की स्थापना की गयी।

एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग
एनएसजी कमांडो काले रंग की ड्रेस पहनते हैं, जिसकी वजह से इन्हें ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है। एनएसजी कमांडो की शुरुआती 90 दिनों की ट्रेनिंग हरियाणा के मानेसर में होती है। इस ट्रेनिंग को पूरी करने वाले सैनिकों को नौ महीने की और ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके तहत उन्हे 26 पैमानों पर खरा उतरना होता है। इस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें ऊंचाई से छलांग लगाने के साथ तनाव के दौरान कार्य करने, निशाना लगाना की ट्रेनिंग दी जाती है। एनएसजी कमांडो को पार्कर और पेक्की-तिरसिया काली की तर्ज पर प्रशिक्षित किया हैं, जो कि फिलीपींस के मार्शल आर्ट का एक रूप है। नौ माह की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन्हें अगले दौर की ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग इनती कठिन होती है कि इसमें करीब 50 से 70 फीसद सैनिक बाहर निकल जाते हैं। एनएजी कमांडो को सीधे सिर पर गोली मारने की ट्रेनिंग दी जाती है।

देश की क्यूएस रैंकिंग से बाहर हुई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

 पहली बार देश के उच्च शिक्षा संस्थानों की जारी की गई क्यूएस रैंकिंग में एएमयू (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) अपना स्थान बनाने में नाकाम रही। इस रैंकिंग में देश के 15 शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है। एएमयू के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। क्योंकि इससे पहले विभिन्न एजेंसियों की रैंकिंग में एएमयू देश की टॉप-5 से टॉप-10 में शामिल रही है।


नाकामयाब रहे इंतजामिया के प्रयास
इंतजामिया का पूरा जोर यूनिवर्सिटी को देश की नंबर एक यूनिवर्सिटी बनाने पर है। पूर्व कुलपति जमीरउद्दीन शाह 2017 तक एएमयू को देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी बनाना चाहते थे लेकिन वह भी नाकाम रहे।

आईआईटी का रहा दबदबा
इस रैकिंग से पता चलता है कि कहां रिसर्च की बेहतर सुविधा और माहौल है? योग्यता वाले शिक्षक कहां हैं? रैंकिंग में आइआइटीज का दबदबा दिख रहा है। लिस्ट में आइआइटी मुंबई लिस्ट में टॉप पर है, तो दूसरे नंबर पर आइआइएस बेंगलुरु है। यूनिवर्सिटी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी सातवें पर, दिल्ली यूनिवर्सिटी आठवें नंबर पर, कोलकाता यूनिवर्सिटी 12 वें, जादवपुर यूनिवर्सिटी में 13 वें, मुंबई यूनिवर्सिटी 14वें और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी 15वें नंबर पर है।

30 की उम्र में हिमालय पर रचा इतिहास, 65 की आयु में लहरों पर रच रहीं दूसरा कीर्तिमान

 22 मई 1984 को एवरेस्ट फतह करने वाली भारत की पहली महिला पर्वतारोही बछेंद्री पाल इन दिनों ‘मिशन गंगे’ पर हैं। 40 सदस्यीय नाविक दल के साथ गंगा यात्रा पर निकलीं 65 वर्षीय बछेंद्री गंगा किनारे बसे गांवों-शहरों के लोगों से गंगा को निर्मल बनाने की अपील कर रही हैं। पांच अक्टूबर को उत्तराखंड के हरिद्वार से शुरू हुआ उनका अभियान कई शहरों व राज्यों से होते हुए 31 अक्टूबर को पटना में खत्म होगा।


यह पहली बार नहीं है कि टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (टीएसएएफ) की प्रमुख बछेंद्री पाल पर्यावरण बचाने के लिए किसी अभियान का नेतृत्व कर रही हैं। बछेंद्री ने 1994 में भी गंगा यात्रा अभियान चलाकर गंगा की स्वच्छता का संदेश दिया था। तब उन्होंने हरिद्वार से कोलकाता तक 2100 किलोमीटर की दूरी तय की थी। इस दौरान नदी में कई शव तैरते मिले, जिसे अभियान दल ने जमीन में दफनाया था। इसके पूर्व वह एवरेस्ट को ‘वेस्ट फ्री जोन’ (कचरामुक्त) बनाने के लिए भी लंबा अभियान चला चुकी हैं। परिणामस्वरूप आज एवरेस्ट अभियान पर जानेवाले हर पर्वतारोही को वापसी के समय रास्ते में पड़े कचरे को इकट्ठा कर लाना अनिवार्य कर दिया गया है।

यूथ ओलिंपिक / सूरज पवार ने रजत जीता, 5000 मीटर वॉक में पहली बार भारत को दिलाया पदक

 भारत 12वें स्थान पर, अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

रूस 47 मेडल्स के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर

ब्यूनस आयर्स. एथलीट सूरज पवार ने यहां यूथ ओलिपिंक गेम्स में 5000 मीटर वॉक (पैदल चाल) में भारत को रजत पदक दिलाया। वे इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीट हैं। भारत के इस टूर्नामेंट में अब 11 पदक हो गए हैं। इसमें तीन स्वर्ण, आठ रजत पदक शामिल हैं। वह पदक तालिका में 12वें स्थान पर है। यह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सूरज की इस जीत पर उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने ट्वीट कर

नवंबर में फिर होगी मोदी-जिनपिंग मुलाकात

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले चार वर्षों में दोनों देशों के बीच घटते-बढ़ते तनाव के बावजूद शीर्ष स्तर पर संवाद का सिलसिला थमने नहीं दिया है। असलियत में तनाव बढ़ने पर बातचीत के सिलसिले ने ज्यादा रफ्तार पकड़ी है।


इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए दोनों नेता अगले महीने अर्जेंटीना में जी-20 बैठक के इतर एक बार फिर द्विपक्षीय वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे। अप्रैल, 2018 में वुहान (चीन) में दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक वार्ता के बाद नवंबर में होने वाली मुलाकात तीसरी मुलाकात होगी। इसमें वुहान बैठक के दौरान किए गए फैसलों की समीक्षा की जाएगी।चीन के भारत में राजदूत लुओ झावहुई ने यहां एक कार्यक्रम में मोदी और जिनपिंग की भावी मुलाकात के बारे में बताया।

झावहुई ने भारत और चीन की मदद से अफगानिस्तान के राजनयिकों को विशेष प्रशिक्षण दिए जाने के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। इस कार्यशाला के बारे में भी वुहान बैठक के दौरान ही सहमति बनी थी कि दोनों देश अफगानिस्तान में संयुक्त तौर पर विकास और शांति को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएंगे।

माना जाता है कि भारत और चीन संयुक्त तौर पर अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए भविष्य में और भी बहुत कुछ करने के बारे में बातचीत कर रहे हैं। इसकी शुरुआत वहां के राजनयिकों को प्रशिक्षण देने के साथ की गई है। आगे संयुक्त तौर पर विकास परियोजनाओं को भी शामिल किया जा सकता है।

अफगानिस्तान राजनायिकों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाएंगे भारत-चीन

 भारत और चीन सोमवार को अफगानिस्तान के राजनायिकों के लिए संयुक्त ट्रेनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया। चीन के राजदूत ने कहा कि अफगानिस्तान युद्ध के बाद से अशांत क्षेत्र बना हुआ है। वहां अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा सकता है।


एशिया के दो बड़े देशों भारत और चीन के बीच पहली बार इस तरह की पहल की गई है। अभी तक दोनों देश नेपाल, श्रीलंका और मालदीव में अपना प्रभाव बढ़ाने को लेकर आमने सामने आते रहे हैं।

इससे पहले भी अफगानिस्तान के मामले में भारत और चीन अलग-अलग रुख अपनाते रहे हैं। चीन अपने मित्र पाकिस्तान का साथ देता रहा है। चीन तालिबानी विद्रोह को खत्म कर अफगानिस्तान को स्थिर करना चाहता है।

वहीं, भारत की ओर से अरबों डॉलर का निवेश अफगानिस्तान में किया गया है। इसके अलावा भारत अफगान सेना को ट्रेनिंग भी देती है ताकि अफगानिस्तान सरकार, तालिबान के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ सके।

मध्‍यप्रदेश के मांडू में मिली 18वीं शताब्दी की कृष्ण की मूर्ति

 मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक नगरी मांडू में दरिया खां महल स्मारक में खोदाई के दौरान भगवान कृृष्ण की 18वीं शताब्दी की मूर्तिं मिली है।


काले पत्थर से निर्मिंत मूर्तिं का धड़ और गर्दन खंडित हैं। हाथ भी खंडित हैं। करीब दो फीट लंबाई की इस मूर्तिं का ऐतिहासिक महत्व पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) परीक्षण कर रहा है। खंडित मूर्तिं में कृृष्ण मुरली वादन कर रहे हैं।

एएसआई के स्थानीय अधिकारी प्रशांत पाटणकर ने बताया कि विशेषज्ञ मूर्ति को लेकर अध्ययन कर रहे हैं। इसके बाद मूर्ति के काल का सही निर्धारण किया जा सकेगा। उधर, राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारी डॉ. आरसी यादव ने बताया कि कृृष्ण की मूर्तिं 18वीं शताब्दी की है।

पाषाण की मूर्तिं ग्रेनाइट या बेसाल्ट की हो सकती है। 18वीं शताब्दी में इस तरह की मूर्तिं का विशेष रूप से चलन रहा है। दरिया महल का निर्माण 15वीं शताब्दी में हुआ था। दो दिन पहले ही इसके पुनर्निर्माण को लेकर यहां खोदाई की गई थी।

सवा सौ साल पुरानी अमेरिकी रिटेल कंपनी सियर्स दिवालिया

 अमेरिका में कई पीढ़ियों को रिटेल शॉपिंग का अनुभव देने वाली प्रमुख कंपनी सियर्स ने दिवालिया प्रक्रिया में जाने का फैसला किया है।


1886 में शुरू हुई यह कंपनी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों के दौर में अस्तित्व बचाने का प्रयास कर रही है। कंपनी ने अपने करीब 150 डिपार्टमेंटल स्टोर बंद करने की घोषणा की है।

शुरुआत में मेल ऑर्डर कैटलॉग कंपनी के रूप में काम करने वाली सियर्स का साम्राज्य 20वीं सदी के मध्य में पूरे उत्तरी अमेरिका में फैल गया था।

लेकिन अमेजन और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के आने के बाद पिछले कई वर्षों से उसकी बिक्री प्रभावित हो रही है। उसने तमाम स्टोर पहले ही बंद कर दिए हैं।

सियर्स होल्डिंग्स कॉरपोरेशन ने एक बयान में कहा कि कंपनी और उसकी कुछ सब्सिडियरी कंपनियों ने बैंक्रप्सी कोड के चैप्टर 11 के तहत राहत के लिए स्वैच्छिक याचिका अमेरिकी बैंक्रप्सी कोर्ट में दायर की है। यह याचिका न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में दायर की गई।

जानिये, क्या है रेमिटेंस? अर्थव्यवस्था के लिए इसका क्या महत्व है?

 सरकार ने चालू खाते के घाटे को नियंत्रित रखने के लिए हाल में कई क़दम उठाए हैं। ग़ैर-ज़रूरी आयात को कम करने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया गया है। वहीं कुछ अन्य चीज़ों पर भी कस्टम ड्यूटी बढ़ायी गई है, लेकिन इन सब उपायों के बीच एक वर्ग ऐसा है जो देश से बाहर रह कर इस समस्या के समाधान में मदद कर रहा है। यह वर्ग है विदेशों में बसे क़रीब 2 करोड़ प्रवासी भारतीय जो हर साल अरबों डालर रेमिटेंस के रूप में स्वदेश भेज रहे हैं। रेमिटेंस क्या हैं? अर्थव्यवस्था के लिए इसका क्या महत्व है? जागरण पाठशाला के इस अंक में हम यही समझने का प्रयास करेंगे।


जब एक प्रवासी अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफि़स या ऑनलाइन ट्रांसफर से धनराशि भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। उदाहरण के लिए खाड़ी के देशों में काम कर रहे भारतीय कामगार या अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में डॉक्टर और इंजीनियर की नौकरी कर रहे प्रवासी भारतीय जब भारत में अपने माता पिता या परिवार को धनराशि भेजते हैं तो उसे रेमिटेंस कहते हैं।

जो देश रेमिटेंस प्राप्त करता है उसके लिए यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का ज़रिया होता है और वहाँ की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। ख़ासकर छोटे और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने में रेमिटेंस ने अहम भूमिका निभाई है।

कई देश ऐसे हैं जिनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रेमिटेंस से प्राप्त राशि का योगदान अन्य क्षेत्रों के मुक़ाबले काफ़ी अधिक है। मसलन, नेपाल, हैती, ताजिकिस्तान और टोंगा जैसे देश अपने जीडीपी के एक चौथाई के बराबर राशि रेमिटेंस के रूप में प्राप्त करते हैं।

दुनिया में सर्वाधिक रेमिटेंस प्राप्त करता है भारत
वैसे राशि के हिसाब से देखें तो दुनिया भर में सर्वाधिक रेमिटेंस भारत प्राप्त करता है। विश्र्व बैंक के अनुसार 2017 में विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों ने 69 अरब डॉलर रेमिटेंस के रूप में स्वदेश भेजे। यह राशि भारत के जीडीपी की 2.7 प्रतिशत है और पिछले साल देश में आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई ) से काफ़ी अधिक है। रेमिटेंस प्राप्त करने के मामले में भारत ने पड़ोसी देश चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

यात्रीगण कृपया ध्यान दें! अब चलती ट्रेन में एप से दर्ज करा सकेंगे एफआइआर

 अब ट्रेन से यात्रा के दौरान आपके साथ कोई दुर्घटना होती है तो रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अगले स्टेशन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रेलवे ने यात्रियों के लिए एक मोबाइल एप योजना शुरू की है। इसके तहत यात्री ट्रेन में छेड़छाड़, चोरी और मारपीट की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत के बाद इसे 'जीरो एफआइआर' में तब्दील कर आरपीएफ तुरंत मामले की जांच शुरू कर देगी।


शिकायत को जीरो एफआइआर में तब्दील कर आरपीएफ तुरंत करेगी जांच
बता दें कि 'जीरो एफआइआर' के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन पर दर्ज करा सकता है। बाद में यह एफआइआर उस पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर दी जाती है जहां पर यह दुर्घटना हुई है।

रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मोबाइल एप से शिकायत दर्ज कराने का पायलट प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश में पहले से चल रहा है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे खास बात यह है कि इस एप से सिर्फ आरपीएफ को ही नहीं जीआरपी, टीटीई और ट्रेन कंडक्टर को भी जोड़ा गया है।

बता दें कि फिलहाल अगर आपके साथ ट्रेन में कोई वारदात हो जाती है तो टीटीई आपको एक शिकायत फार्म देता है। इसे भरकर अगले स्टेशन पर आरपीएफ अथवा जीआरपी को देना होता है। बाद में यह शिकायत स्वत: एफआइआर में बदल जाती है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में जहां मामले की जांच में विलंब होता है वहीं यात्री को तुरंत राहत नहीं मिलती है। इस एप के माध्यम से ऑफलाइन भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं

जयंती विशेष: तेज दिमाग लेकिन भावुक थे भारत के मिसाइल मैन कलाम

 भारत के मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज जयंती है। कलाम को जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था, क्योंकि जनता के लिए उनके दरवाजे हर वक्त खुले रहते थे। उन्हें बच्चों से बेहद लगाव था, वो उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते और देश के लिए सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करते। अब्दुल कलाम कुरान और भगवद् गीता दोनों का अध्ययन करते थे। उन्हें बैलिस्टिक मिसाइल और लांच व्हीकल टेक्नोलॉजी के विकास के लिए भारत के मिसाइल मैन के रूप में जाना जाता है। उनकी सोच और संपूर्ण जीवन देश के लिए प्रेरणास्रोत है।


जानिए कौन थे अब्दुल कलाम
अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था। उनका जन्म 15 अक्टूबर, 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में देश में जाने जाते हैं। बच्चों से बेहद प्यार करने वाले ए पी जे अब्दुल कलाम ने बहुत सारी किताबें भी लिखी थीं। भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे।

तेज दिमाग लेकिन भावुक थे कलाम
तेज दिमाग वाले कलाम स्वभाव से बहुत भावुक थे। इसके अलावा कलाम की लेखनी भी कमाल की थी। उन्होंने अपने शोध को चार उत्कृष्ट पुस्तकों में समाहित किया, इन पुस्तकों के नाम है 'विंग्स ऑफ़ फायर', 'इण्डिया 2020- ए विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम', 'माई जर्नी' तथा 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया'। इन पुस्तकों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। कलाम भारत के ऐसे विशिष्ट वैज्ञानिक थे, जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिल चुकी थी।

1962 में इसरो के हिस्सा बने
कलाम 1962 में 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' का हिस्सा बने थे। डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एसएलवी तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ। 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था, जिसके बाद ही भारत भी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स) को भी डिजाइन किया।

पेट्रालियम पदार्थों के बदलते हालात पर ग्लोबल कंपनियों संग पीएम आज करेंगे बैठक

 महंगे कच्चे तेल और पेट्रोलियम क्षेत्र के मौजूदा हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बैठक करेंगे। तेल एवं गैस क्षेत्र की वैश्विक व भारतीय कंपनियों के प्रमुखों संग बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों व कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से खुदरा कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक तीसरी वार्षिक बैठक में तेल एवं गैस खोज व उत्पादन के क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने पर भी चर्चा होगी। मोदी ने इस तरह की पहली बैठक पांच जनवरी, 2016 को की थी, जिसमें प्राकृतिक गैस कीमतों में सुधार के सुझाव दिए गए थे।

दूसरी वार्षिक बैठक अक्टूबर, 2017 में हुई, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के उत्पादक तेल एवं गैस क्षेत्रों में विदेशी और निजी कंपनियों को हिस्सेदारी देने का सुझाव दिया गया था। हालांकि ओएनजीसी के तीखे विरोध के बाद इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

सूत्रों ने बताया कि सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद ए अल फलीह, ब्रिटिश पेट्रोलियम फर्म बीपी के सीईओ बॉब डुडले, फ्रांसीसी फर्म टोटल के प्रमुख पैट्रिक फॉयेन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल बैठक में उपस्थित रह सकते हैं।

एशियन एससीओ बैठकः सुषमा बोलीं- आतंकवाद विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा

 आतंकवाद को विकास और समृद्धि की राह का सबसे बड़ा खतरा बताते हुए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से वैश्विक समस्याओं पर एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन से निपटने के साथ ही क्षेत्रीय शांति के लिए आपसी सहयोग की अपील की।


ताजिकिस्तान की राजधानी में हो रही एससीओ की काउंसिल ऑफ हेड ऑफ गर्वनमेंट (सीएचजी) बैठक में सुषमा ने देशों को उनकी जिम्मेदारी समझने और एक-दूसरे का सहयोग करने को भी कहा। इस दो दिवसीय बैठक में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी भाग ले रहे हैं।

बैठक में चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का मुद्दा उठाते हुए सुषमा ने कहा, 'देशों को जोड़ने का प्रयास करते हुए सभी की संप्रभुता का आदर करना जरूरी है।' यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरना है। इस वजह से भारत चीन की इस परियोजना का विरोध कर रहा है।

अफगानिस्तान के मसले पर सुषमा ने कहा, 'भारत, अफगानिस्तान के नेतृत्व और उसके संरक्षण में होने वाले शांति प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध है। इससे अफगानिस्तान सुरक्षित और स्थिर देश की तरह उभरेगा।' सुषमा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी साथ काम करने की बात की। भारत दूसरी बार इस बैठक में हिस्सा ले रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का दबदबा बढ़ा, मानव अधिकार परिषद में भारी बहुमत से सीट जीती

 भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद का चुनाव जीत लिया है। एशिया-प्रशांत श्रेणी में भारत को 188 देशों का समर्थन मिला। भारत जनवरी, 2019 से तीन साल के लिए इस परिषद का सदस्य रहेगा।193 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र असेंबली में मानवाधिकार परिषद के 18 नए सदस्यों के लिए मतदान हुआ।


इस 47 सदस्यीय परिषद में गुप्त मतदान के जरिये पूर्ण बहुमत से चयन होता है। परिषद का सदस्य बनने के लिए किसी देश को कम से कम 97 देशों का समर्थन हासिल करना होता है। भारत ने एशिया-प्रशांत श्रेणी से सदस्यता के लिए दावा किया था।

इस श्रेणी में भारत के साथ बहरीन, बांग्लादेश, फिजी और फिलीपींस ने भी चुनाव जीता है। इस श्रेणी से पांच देशों का चुनाव होना था और पांच देशों ने ही दावा भी किया था। इसलिए भारत का चुनाव पहले से ही तय माना जा रहा था। भारत इस परिषद का पहले भी सदस्य रह चुका है। वह साल 2011 से 2014 और फिर 2014 से 2017 तक सदस्य रहा। भारत का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर, 2017 को खत्म हुआ था।

बुलेट ट्रेन से तिगुनी रफ्तार पर दौड़ेगी चीन की ये ट्रेन, ये है खासियत

 नई तकनीक और अविष्कारों से पूरी दुनिया को हैरान करने वाला चीन अब बुलेट ट्रेन से तीन गुना तेज गति से चलने वाली ट्रेन पर काम कर रहा है। नई बुलेट ट्रेन का मॉडल सिचुआन प्रांत के चेंगडू में 2018 नेशनल मास इनोवेशन एंड आंत्रप्रन्योरशिप वीक के दौरान पेश किया गया। चीन का दावा है कि अगली पीढ़ी की मैग्नेटिक लेविटेशन बुलेट ट्रेन एक हजार किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज गति से चलने वाली बुलेट ट्रेन चीन के पास है जिसकी स्पीड 350 किमी प्रति घंटा है।


दौड़ में अमेरिका भी शामिल
हाईपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीज और हाईपरलूप वन जैसी कुछ अमेरिकी कंपनियां एक घंटे में एक हजार किमी से भी अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों पर काम कर रही हैं।

ट्रेन की खासियत
- एयरोस्पेस तकनीक की तरह नई बुलेट ट्रेन में भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रपल्शन का इस्तेमाल किया गया है।
- 29.2 मीटर लंबे और तीन मीटर चौड़े और हीट-लाइट प्रूफ केबिन
- क्लोज-टू-वैक्यूम रेलवे एंवायरमेंट और मैग्नेटिक लेविटेशन तकनीक के जरिए ये ट्रेन जमीन से 100 मिमी ऊपर चलेगी।
- 1000 किमी की दूरी एक घंटे में तय होगी।

पहली बार जीन एडिटिंग की मदद से पैदा हुई दो चुहिया की एक संतान

 चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार जीन एडिटिंग और एंब्रायोनिक स्टेम कोशिकाओं की मदद से दो चुहिया की स्वस्थ संतान पैदा करने में सफलता पाने का दावा किया है। सेल स्टेम सेल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, इस तकनीक के जरिये 210 भ्रूण से 29 संतानों को जन्म दिया गया। यह सभी पूरी तरह स्वस्थ थे, अपनी पूरी आयु तक जीवित रहे और इनकी संतानें भी पैदा हुईं। चाइनीज अकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने बताया कि दो चूहों से एक संतान पैदा करने का प्रयोग भी पहले किया जा चुका है। हालांकि वह संतान कुछ दिन ही जीवित रह सकी थी।


चुनौतियों का पता लगाने के लिए किया अध्ययन
शोध में इस पर अध्ययन किया गया कि एक ही लिंग के जीवों से संतान की उत्पत्ति में क्या चुनौतियां हैं। साथ ही स्टेम कोशिकाओं और जीन एडिटिंग की मदद से इन चुनौतियों से कैसे पार पाया जा सकता है। चाइनीज अकेडमी ऑफ साइंसेज के क्वी झोऊ ने कहा, ‘हम इस सवाल पर उत्सुक थे कि स्तनपायी जीवों में यौन संबंधों से ही संतान की उत्पत्ति क्यों होती है। विभिन्न अध्ययनों के जरिये हमने यह जानने का प्रयास किया कि जीन एडिटिंग की मदद से दो नर या दो मादा चूहों के संतान की उत्पत्ति संभव है या नहीं।’

पहले थीं कुछ खामियां
जीन डिलीट करने की कुछ तकनीकों की मदद से पहले भी दो चळ्हिया की एक संतान पैदा की जा चुकी है, लेकिन उसमें भी कुछ खामियां थीं। अब वैज्ञानिकों ने हैप्लॉयड एंब्रायोनिक स्टेम कोशिकाओं की मदद से इस काम को अंजाम दिया है। हालांकि सभी जीवों की अलग-अलग खूबियों को देखते हुए अब भी वैज्ञानिक इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि यह तकनीक का चूहे के अतिरिक्त अन्य स्तनपायी जीवों पर कितनी कारगर रह सकती है।

पहले किए जा चुके हैं ये प्रयोग
कुछ सरीसृप व उभयचर जीवों और मछलियों में केवल माता या केवल पिता से संतान पैदा करने के प्रयोग किए जा चुके हैं। स्तनपायी जीवों में यह मुश्किल होता है। स्तनपायी जीवों में संतान को माता और पिता दोनों से जीन के जरिये कुछ गुण मिलते हैं। किसी एक की अनुपस्थिति से पैदा होने वाली संतान स्वस्थ नहीं होती है।

Youth Olympics: Saurabh hits the bullseye

 Saurabh Chaudhary claimed the gold medal in the 10m air pistol event here on Wednesday, to continue the Indian shooting team’s best-ever outing in the mega event.


The 16-year-old Chaudhary shot 244.2 to finish ahead of South Korea’s Sung Yunho (236.7) and Switzerland’s Solari Jason (215.6).

The Indian, who had 18 scores of 10 and above in the eight-man finals, was just short of his own World junior record score of 245.5.

Chaudhary, an Asian Games and Junior ISSF World Championship gold medallist, had topped the qualifying rounds with 580 along with Iran’s Erfan Salavati.

Despite four scores of under 10 to start with, Chaudhary managed to stay ahead and then extended his domination with scores of 10.7 10.4 10.4 and 10.0. He continued to lead the pack as the finals entered the elimination stage.

lunar meteorite up for auction

 Anyone who can’t make it to the moon to gather a few lunar rocks now has the opportunity to buy one right here on Earth.

A 12-pound (5.5 kilogram) lunar meteorite discovered in Northwest Africa last year is up for auction by Boston-based RR Auction and could sell for $500,000 or more during online bidding that runs from Thursday until Oct. 18. It is “one of the most important meteorites available for acquisition anywhere in the world today,” and one of the biggest pieces of the moon ever put up for sale, RR said.
The rock classified as NWA 11789, also known as “Buagaba,” was found last year in a remote area of Mauritania but probably plunged to Earth thousands of years ago. The meteorite is actually composed of six fragments that fit together like a puzzle. The largest of those pieces weighs about 6 pounds.

Bali IMF meeting

 International Monetary Fund Managing Director Christine Lagarde says the U.S. and China should de-escalate their trade dispute and work to fix trade rules instead of breaking them.


Ms. Lagarde said on Thursday at the annual meeting of the IMF and World Bank in Bali, Indonesia, that so far there had been no “contagion” of major damage from penalty tariffs imposed by the two countries on each other's exports, but that they do risk hurting “innocent bystanders”.

Ms. Lagarde said her advice was in three parts: “De-escalate. Fix the system. Don't break it.”

She said the rules-making World Trade Organisation had ways of addressing U.S. complaints that China's policies unfairly extract advanced technologies and put foreign companies at a disadvantage.

Nirmala Sitharaman begins France visit today

 Defence Minister Nirmala Sitharaman begins a three-day visit to France on Thursday during which both sides are expected to deliberate on further boosting their already close defence and security ties.


Ms. Sitharaman’s visit comes in the backdrop of a huge controversy over the procurement of 36 Rafale jets from French aerospace major Dassault Aviation.

Officials sources said Ms. Sitharaman will hold wide-ranging talks with her French counterpart Florence Parly on ways to deepen strategic cooperation between the two countries and also deliberate on major regional and global issues of mutual interests. MS. Sitharaman will also take stock of progress in the supply of 36 Rafale jets by Dassault to the Indian Air Force under a ₹58,000 crore deal. There was indication that she may even visit the facility where the jets are being manufactured, the sources said

नॉर्वे /समुद्र के अंदर दुनिया का सबसे बड़ा रेस्तरां बनेगा, एकसाथ 100 लोग बैठ सकेंगे

 रेस्तरां की दीवारें तूफानी लहरों का सामना करने में सक्षम होंगी

रेस्तरां बनाने वाली कंपनी ले रही लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी

ओस्लो. नॉर्वे के लिंडेसनेस इलाके में उत्तर सागर के तट पर दुनिया का सबसे बड़ा अंडरवॉटर रेस्तरां बनाया जा रहा है। 110 फीट लंबा यह रेस्तरां समुद्र से निकल रहे बड़े दूरबीन की तरह दिखाई देता है। इसमें 100 लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। रेस्तरां के 2019 तक शुरू होने की संभावना है। रेस्तरां को अंडर नाम दिया गया है। इसे नॉर्वे की कंपनी स्नोहेता ने बनाया है।

5 हजार वर्गफीट में फैला रेस्तरां
रेस्तरां 500 वर्गमीटर (5300 वर्गफीट) क्षेत्र में फैला है। इसमें तीन मंजिलें हैं। समुद्री पर्यावरण दिखाने के लिए 36 फीट लंबा शीशा लगाया गया है। रेस्तरां समुद्र के अंदर पांच मीटर गहराई में है।

स्नोहेता की सीनियर आर्किटेक्ट रून ग्रासडेल के मुताबिक- रेस्तरां को काफी सोच-समझकर तैयार किया गया है। इसका आधे से ज्यादा स्ट्रक्चर पानी में डूबा है। लोगों को अंदर जाने के लिए एक कांच के ग्लासवे (ब्रिज) से गुजरना होगा।

ग्रासडेल कहती हैं- क्लाइंट्स जब हमारे पास रेस्तरां बनाने का प्रस्ताव लेकर आए तो वे कुछ स्केच लेकर आए थे। वे इसे तट के नजदीक बनाना चाहते थे, लेकिन हमने कुछ दूर बनाने का सुझाव दिया क्योंकि वहां से असली समुद्र दिखाई देता है।

यह रेस्तरां नॉर्वे के लिंडेसनेस इलाके में बनाया जा रहा है। यहां काफी पर्यटक आते हैं। हालांकि, यहां पहुंचना आसान नहीं है। रेस्तरां आने के लिए लोगों को राजधानी ओस्लो से प्लेन से क्रिस्टियनसेंड आना होना। यहां से सड़क से एक घंटे का रास्ता है। बोट सर्विस भी शुरू की जा रही है।

वर्ल्ड बैंक / भ्रष्टाचार के आरोप में भारत की ओलिव हेल्थकेयर पर बैन, दुनियाभर की 78 कंपनियों पर कार्रवाई

 ओलिव हेल्थकेयर के जय मोदी पर 7 साल 6 महीने का प्रतिबंध

ओलिव हेल्थकेयर और जय मोदी बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे
भारत की एंजलिक इंटरनेशनल पर 4 साल 6 महीने का बैन
वर्ल्ड बैंक ने भ्रष्टाचार के आरोप में इस साल दुनियाभर की 78 कंपनियों को बैन कर दिया। इनमें ओलिव हेल्थ केयर समेत कई भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। कई इंडिविजुअल पर भी प्रतिबंध लगा है। इनमें ओलिव हेल्थकेयर के जय मोदी का नाम भी है। वर्ल्ड बैंक ने दुनिया भर की अपनी परियोजनाओं से इन्हें प्रतिबंधित कर दिया है। वर्ल्ड बैंक की सालाना ग्रुप सैंक्शंस सिस्टम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

ओलिव हेल्थकेयर पर 10 साल 6 महीने का बैन
ओलिव हेल्थकेयर और जय मोदी बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। ओलिव हेल्थ केयर को 10 साल 6 महीने के लिए और जय मोदी को 7 साल 6 महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

भारत की एंजलिक इंटरनेशनल पर 4 साल 6 महीने का प्रतिबंध लगा है। यह कंपनी इथियोपिया और नेपाल में वर्ल्ड बैंक की परियोजना पर काम कर रही थी।

मधुकॉन प्रोजेक्ट्स पर दो साल और आरकेडी कंस्ट्रक्शंस पर डेढ़ साल का बैन लगा। दोनों कंपनियां देश में ही वर्ल्ड बैंक की परियोजना पर काम कर रही थीं।

अर्जेंटीना और बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक की परियोजना पर काम कर रही फैमिली केयर को चार साल के लिए प्रतिबंधित किया गया। ग्लोबल एनवायरमेंट, एसएमईसी (इंडिया) और मैकलॉड्स फार्मास्यूटिकल्स को एक साल से कम समय के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
इस तरह की अपनी पहली रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, धोखाधड़ी रोकने और दानदाता संस्थाओं की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।

आरबीआई रेपो रेट 6.50% पर स्थिर, त्योहारी सीजन में लोन महंगा नहीं होगा

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) शुक्रवार को ब्याज दरों का ऐलान किया। रेपो रेट 6.50% पर स्थिर रखा। ऐसे में त्योहारी सीजन में लोन महंगा नहीं होगा। रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है। इसमें इजाफा होने पर बैंक सभी तरह के लोन पर ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। आरबीआई ने पिछली दो समीक्षा बैठकों के दौरान जून और अगस्त में रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की थी।


महंगाई दर फिलहाल आरबीआई के लक्ष्य से भी कम
आरबीआई ने पॉलिसी आउटलुक न्यूट्रल की बजाय कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। यानी अगली बार ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।

आरबीआई के ऐलान से पहले विश्लेषकों ने रेपो रेट में 0.25% बढ़ोतरी का अनुमान जताया था। क्रूड महंगा होने और रुपए में गिरावट को देखते हुए ब्याज दरों में इजाफे के आसार थे।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष (2018-19) के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 7.4% पर बरकरार रखा है। रिजर्व बैंक ने कहा कि 10 महीने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा मौजूद है।

ईरान से आयात जारी रखेगा भारत, नवंबर के लिए 12.5 लाख टन का कॉन्ट्रैक्ट

 अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी भारत ईरान के साथ कारोबार जारी रखना चाहता है। पहली बार इसके स्पष्ट संकेत शुक्रवार को मिले। सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने ईरान से 12.5 लाख टन कच्चा तेल खरीदने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया है। इतना ही नहीं, भारत डॉलर की जगह रुपए में भुगतान करने की तैयारी कर रहा है।


भारत इस साल ईरान से 10.62% ज्यादा क्रूड खरीदेगा
भारत ने इस साल ईरान से 250 लाख टन तेल आयात करने की योजना बनाई थी। यह पिछले साल के 226 लाख टन से 10.62% ज्यादा है। आयात इससे कम भी हो सकता है क्योंकि, रिलायंस जैसी कंपनियों ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने नवंबर में ईरान से 12.5 लाख टन तेल आयात करने का कॉन्ट्रैक्ट किया है।

ईरान के तेल सेक्टर के खिलाफ 4 नवंबर से अमेरिकी प्रतिबंध लागू होंगे। ऐसे में रूस से एस-400 मिसाइल डील के बाद यह भारत द्वारा अमेरिका को दिया गया दूसरा झटका होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मई में ईरान के परमाणु समझौते से बाहर निकलने और ईरान पर फिर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। पिछले माह अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि वॉशिंगटन प्रतिबंध पर छूट को लेकर विचार करेगा।

व्यापारियों को साधने मंडी टैक्स घटाकर डेढ़ फीसदी किया जाएगा

 पुजारियों का मानदेय तीन गुना करने के बाद सरकार ने व्यापारियों काे भी साधने का प्रयास किया है। इसके तहत मंडी टैक्स 2.2 प्रतिशत से घटाकर डेढ़ प्रतिशत किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने व्यापारी सम्मेलन में यह घोषणा की। चौहान ने प्रदेश में व्यापार सम्मान निधि बनाने की बात भी कही।


उन्होंने कहा कि व्यापारी देशभक्त और समाजसेवी हैं। उन्होंने कहा प्रत्येक जिले में 500 युवा कर विशेषज्ञों को जीएसटी मित्र बनाया जाएगा, जो व्यापारियों को जीएसटी रिटर्न भरने में सहयोग करेंगे। चौहान ने कहा कि विश्व व्यापार में मध्यप्रदेश के व्यापारियों का हिस्सा बढ़ाने के लिए बोर्ड बनाया जाएगा।

प्रत्येक जिले में जिला व्यापार और व्यापारी कल्याण समितियां बनाई जाएंगी। ई-ट्रेडिंग के लिए पोर्टल और एप बनेगा। प्रदेश के व्यापारियों के लिए व्यापार सुरक्षा योजना भी बनाई जाएगी।

Chinese bunkers at Lhasa airport, just 1,350 km from Delhi

 China’s construction of underground bomb-proof shelters to house fighters at Lhasa’s Gonggar airport in the Tibet Autonomous Region (TAR) has New Delhi concerned, said three officials familiar with the development who asked not to be identified.


Gonggar airport is just 1,350 km away from New Delhi. The three officials, all in the security establishment, claimed the airfield earlier meant to boost “regional connectivity” is being turned into a military airbase.

One of the officials said a “taxi track” from the airstrip leads to blast- or bomb-proof hangers dug deep inside the mountains nearby. The facility, according to the three officials, can hold around three squadrons of fighters or about 36 aircraft.

Relations between India and China have warmed in recent months. PM Narendra Modi visited Wuhan for an informal summit with Chinese president Xi Jinping where the two leaders committed to bettering ties.

The rapprochement came after the Doklam crisis last year, where troops of both countries were engaged in an extended stand-off. Despite this, though, the security establishments have kept a close eye o n each other’s capabilities.

उन्‍नत भारत अभियान से जुड़े 840 नए संस्‍थान, अब छात्र करेंगे किसानों की समस्‍या का समाधान

 गांवों की समस्याओं को जानने और उन्हें सुलझाने के लिए देश भर के 840 नए विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान आगे आए हैं। इन संस्थानों ने यह रुचि सरकार की ओर से चलाए जा रहे उन्नत भारत अभियान के दूसरे चरण से जुड़कर दिखाई है। इसके तहत प्रत्येक संस्थान को अपने आसपास के गांवों को गोद लेना है और समस्याओं से निपटने में उनकी मदद करना है।


देश भर के 688 संस्थान जुड़े
इन संस्थानों में 521 तकनीकी और 319 गैर-तकनीकी संस्थान हैं। गांवों की समस्याओं को जानने और उन्हें सुलझाने के लिए सरकार के इस उन्नत भारत अभियान से जुड़कर अभी देश के करीब 688 संस्थान काम कर रहे हैं।

इस योजना की शुरुआत सरकार ने 2014 में की थी, लेकिन इसे शुरू होते-होते काफी समय लग गया। बाद में 2016 में इसके पहले चरण को शुरू किया जा सका। इसके तहत प्रत्येक संस्थान को अपने आस-पास के कम से कम पांच गांवों को गोद लेना है। संस्थान अपनी क्षमता के मुताबिक गांवों की संख्या बढ़ा भी सकते हैं।

अब हर वैक्सीन में होगी सभी तरह के वायरस की जांच

 पोलियो वैक्सीन में पी-2 वायरस पाये जाने के बाद सरकार ने वैक्सीन जांच के नियम कड़े कर दिये हैं। पहले जिस वायरस की वैक्सीन होती थी, केवल उस वायरस की मौजूदगी की जांच की जाती थी। लेकिन अब सरकार ने वैक्सीन में संबंधित वायरस के अलावा भी सभी वायरस की जांच को अनिवार्य कर दिया है।


स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वैक्सीन में दूसरे सभी वायरस की जांच होती तो, पोलियो के वैक्सीन में पी-दो की उपस्थिति की जानकारी मिल जाती है और उसे बच्चों को देने के रोका जा सकता था।

दरअसल पोलियो वैक्सीन में पी-2 वायरस का इस्तेमाल अप्रैल 2016 में ही बंद कर दिया गया था। अब केवल उसमें पी-1 और पी-3 वायरस का ही इस्तेमाल किया जाता है। वैक्सीन बनने के बाद कड़ाई से उसके सैंपल की जांच की जाती है, तभी उसे बच्चों तक देने के लिए भेजा जाता था। अभी तक नियम के मुताबिक पोलियो वैक्सीन के सैंपल में सिर्फ पी-1 और पी-3 वायरस की उपस्थिति की जांच की जाती थी और मिलने पर उसे हरी झंडी दे जाती थी। चूंकि पी-2 वायरस की जांच की नहीं गई थी, इसीलिए वह वैक्सीन में जांच के बाद भी चला गया।

चीन ने किया तीन हाइपरसोनिक मिसाइल का एक साथ परीक्षण

 चीन ने तीन तरह की हाइपरसोनिक एयरक्राफ्ट मिसाइलों का एक साथ परीक्षण कर नई कामयाबी हासिल की है। यह परीक्षण गत 21 सितंबर को उत्तर पश्चिमी चीन के जिकुआन सेटेलाइट लांच सेंटर से किया गया था।

इन मिसाइलों में ध्वनि की गति से पांच गुना तेज चलने वाली मिसाइल भी शामिल थी। तीनों मिसाइलों के आकार और डिजाइन अलग हैं। इनके कोड नेम डी18-1एस, डी18-2एस और डी18-3एस हैं।

चीन ने पहली बार इस तरह के परीक्षण को अंजाम दिया है। चीनी वैज्ञानिकों का मकसद अब इनकी मारक क्षमता को अचूक बनाना है। इस पर उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। पिछले महीने चीन ने एक हाइपरसोनिक ग्लाइडर स्टारी स्काई-2 का पहली बार परीक्षण किया था।

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति बोले, भारत दुनिया में कर रहा अपनी साख मजबूत

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव से हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। इससे पहले राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी उनके साथ मौजूद थे। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव पत्‌नी जिरोत मिर्जियोयेव और परिवार सहित 100 सदस्यीय दल के साथ भारत की दो दिन की यात्रा पर आए हैं।


सोमवार को सुबह राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव की राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां उनका स्वागत किया। इस मौके पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने कहा कि उज्बेकिस्तान के लोगों के दिलों में भारत की विशेष जगह है। भारत तेजी से विकास कर रहा है और आत्मविश्वास के साथ दुनिया में अपनी साख मजबूत कर रहा है

Govt. unveils centre for data analytics

 It will also enable self-service analytics

With a view to fast-tracking the adoption of data analytics in the government to improve delivery of services to citizens, Electronics and IT Minister Ravi Shankar Prasad on Friday unveiled a Centre of Excellence for Data Analytics (CEDA).

The centre would help build analytic solutions that are specific to a particular problem which may relate to a single or a combination of departments, an official statement said.

It added that the centre would also provide data profiling tools and techniques along with necessary expertise to analyse the data for quality issues.

Improve data collection
“While data cleaning shall be done for making the data ready for analytical use, recommendations shall also be given in order to help the department take necessary actions to further improve their data collection process,” it said.

Besides creating the analytics solutions for the government departments, CEDA would also focus on training and enabling the departments to do self-service analytics

Rajasthan Human Rights Commission poses questions on drug rehabilitation centres

 The Rajasthan State Human Rights Commission has posed some serious questions to the State government about the authority and permission to run drug rehabilitation centres after the death of a young man during treatment for de-addiction at a centre in Jodhpur. The Commission has specifically asked about qualifications of persons running such centres.


The Commission's enquiry came on a complaint filed at its camp hearing in Jodhpur earlier this week. Complainant Imran Khan stated that his brother Sajid had died during treatment at a rehabilitation centre in the city and the police had launched investigation after registering a case under Section 304-A (causing death by negligence) of Indian Penal Code.

Mr. Khan sought the directions for probe into his brother's death as a murder case, while alleging that the rehabilitation centres, which charged thousands of rupees for treatment, did not even have the basic facilities. No qualified persons were available there for consultation and treatment and the Centre's guidelines were being “violated with impunity”, he said.

“When a person addicted to alcohol or drugs dies at such centres, his family members often try to hide it for protecting his honour. This tendency also enables the centres to conceal the real cause of the victim's death, which is nothing short of murder,” the complaint said

खेलो इंडिया के तहत 55 हजार गांवों में बनेंगे नए खेल मैदान, सरकार ने शुरू किया काम

 केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना का लाभ गांवों तक पहुंचाने में प्रदेश सरकार ने धरातल पर काम शुरू कर दिया है। योजना के तहत प्रदेश के करीब 55 हजार गांवों में ब्लाक स्तर पर खेल के मैदान तैयार किए जाएंगे।


इस योजना से युवा कल्याण विभाग में फिर से जान फूंकी गई है। इन्हें ब्लॉक स्तर पर खेल मैदान व मंगल दल गठित करने की अहम जिम्मेदारी दी गई है। इन मैदानों में कबड्डी, रेसलिंग, वेट लिफ्टिंग समेत अन्य खेलों के मैदान शामिल हैं। इससे खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने में मदद मिलेगी। ये बातें बृहस्पतिवार को खेल एवं युवा कल्याण मंत्री चेतन चौहान ने ग्रेटर नोएडा के क्राउन प्लाजा होटल में कहीं।

चेतन चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण स्तर पर खेल सुविधा मुहैया कराने का प्रयास कर रही है। इसमें केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना की विशेष मदद ली जा रही है। इस योजना के मदद से 55 हजार गांवों को चिह्नित कर ब्लाक स्तर पर खेल के मैदान विकसित किए जाएंगे। इससे खिलाड़ियों की भावी पीढ़ी सुदृढ़ व सुशिक्षित होगी। खिलाड़ी पदक जीतने की दक्षता से लबरेज होंगे।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्टः जापान ने मंजूर किया 5500 करोड़ कर्ज

 रेल मंत्रालय ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जापान के साथ साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये के कर्ज की किश्त के बारे में समझौता कर आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं। शुक्रवार को कोलकाता मेट्रो के लिए 1600 करोड़ रुपये के कर्ज के एक अन्य समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए।


दोनो समझौते जापान की इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी जिका के साथ किए गए। अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन के कार्यान्वयन के लिए कर्ज की एक किस्त के तौर पर जापान 89547 मिलियन जापानी जापानी येन (लगभग 5500 करोड़ रुपये) देगा। जबकि कोलकाता मेट्रो के लिए 25,903 मिलियन जापानी येन (लगभग 1600 करोड़ रुपये) के लिए समझौता हुआ है। इसके तहत कोलकाता में हावड़ा मैदान से साल्ट लेक के बीच मेट्रो रेल प्रणाली बिछाई जाएगी। इसमें नदी के भीतर का हिस्सा शामिल है। यह कोलकाता ईस्ट-वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

पिछले दिनो इस प्रकार की चर्चाएं छिड़ी थीं कि जापान ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के जिए कर्ज रोक दिया है। रेल मंत्रालय ने इसका खंडन किया था।

उज्‍बेकिस्‍तान हो सकता है भारत का अहम व्यापारिक साझीदार : सुरेश प्रभु

 केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि वैश्विक व्यापार की मौजूदा परिस्थितियों में उज्बेकिस्तान भारत का अहम साझीदार साबित हो सकता है। वाणिज्य मंत्री ने उज्बेकिस्तान के साथ व्यापार, पर्यटन और निवेश के संबंध में बेहतर साझीदारी की संभावना जतायी है।


भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की आगामी भारत यात्रा इस मायने में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। इस यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय शुरु होने की संभावना है। प्रभु ने कहा कि अतीत में उज्बेकिस्